-दस हत्याओं में सजाए-मौत -
सज़ा का दोषी को कोई अफ़सोस नहीं
सीबीआई के डीएसपी एनआर मीना ने अपनी
रिपोर्ट में लिखा था कि खुशविंदर सिंह तांत्रिक
बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था.
फिर उन्हें नहर पर ले जाता था और उसके
बाद उनकी आंखो पर पट्टी बांध कर किनारे
खड़े होकर नमस्कार करने के लिए कहता था.
इसके बाद एक-एक कर सभी को धक्का देदेता
था. इस प्रकार अब तक उसने दस हत्याएं की
थी जिन में बच्चे भी शामिल थे. ऐसे दरिन्दे
के साथ रहम करना ठीक नहीं.
मोहाली स्थित सीबीआई के माननीय जज एन एस गिल की विशेष अदालत में उस दिन
कुछ अधिक ही गहमागहमी थी. आज एक 14 वर्ष पूर्व हुए हत्याकांड का फैसला होना था.
न्याय पाने के लिए पीड़ित परिवार ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी थी और इस लड़ाई को लड़ने के
लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था तब कहीं जाकर उन्हें आजका दिन देखना नसीब हुआ
था. दो परिवारों के 10 लोगों की हत्या करने
के बाद कातिल ने जब इतनी हत्याएं करने का अपना मकसद बताया तो अदालत में मौजूद
लोगों के होश ही उड़ गए. 14 साल पहले जून 2004 में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या
करने वाले सुहावी गांव निवासी खुशविंदर सिंह उर्फ खुशो को सीबीआई की विशेष अदालत
ने दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है. अदालत दोषी को पहले भी एक ही परिवार के
छह लोगों की हत्या करने में मौत की सजा हो चुकी है. इसमें आरोपी ने दया की अपनी
अपील सुप्रीम कोर्ट में डाली हुई है. जज एनएस गिल ने अपने फैसले में लिखा है कि यह
अपराध अति घिनौने से भी घिनौना है दोषी ने एक साथ परिवार के चार सदस्यों को मौत के
घाट उतारा है, जिसमें में दो बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने अभी दुनिया देखनी थी. ऐसे में दोषी पर किसी भी कीमत पर रहम नहीं
किया जा सकता है.
दस हत्याओं का पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार था. बसी पठाना क्षेत्र में
कुलवंत सिंह का परिवार रहता था. उनके परिवार में 40 वर्षीय पत्नी हरजीत कौर, 17
वर्षीय पुत्री रमनदीप कौर और 14 वर्षीय पुत्र अरविंदर सिंह थे. कुलवंत सिंह मेहनती
दयालु और सज्जन पुरुष थे. वैसे ही नेकदिल उनका परिवार भी था. उसनी अपने गाँव में
काफी इज्जत थी. सुहावी निवासी खुशविंदर सिंह उर्फ़ ख़ुशी का भाई कुलविंदर सिंह बसी
पठाना, फतेहगढ़ साहिब निवासी कुलवन्त सिंह के पास मुंशी का काम करता था. वह अपने
काम के प्रति ईमानदार था और कुलवंत सिंह को भी उससे कोई शिकायत नहीं थी. वे उससे
खुश थे. वे उसे अपना परिवारिक सदस्य ही मानने लगे थे. धीरे-धीरे मुंशी कुलविंदर सिंह और कुलवंत सिंह के
परिवारों में आना जाना बन गया था. इसी दौरान कुलवंत सिंह की मुलाकात मुंशी के भाई
ख़ुशी से हुई थी. मुंशी और ख़ुशी का परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर था.ख़ुशी के पास
मात्र 4 एकड़ जमीन थी जिसमें घर खर्च चलाना असम्भव था. मुंशी होने के नाते कुलवंत
सिंह उसकी यदाकदा मदद कर दिया करते थे. ऐसे में एक दिन ख़ुशी ने उनसे फतेहगढ़ साहब
कोर्ट के बाहर फोटोस्टेट की मशीन लगाने के लिए सहायता मांगी तो वह झटसे तैयार हो
गए और ख़ुशी की मदद कर उन्होंने फोटोस्टेट मशीन लगवा दी थी.इस बीच ख़ुशी काफी हद तक
कुलवंत सिंह और उनके परिवार से घुलमिल गया था. यह सभी बातें सन 2004 की है.
मई 2004 में कुलवंत सिंह ने अपनी कुछ
ज़मीन बेचीं थी जिसके बदले उन्हें 12 लाख रुपये मिले थे और यह बात ख़ुशी जब पता चली
तो उन रुपयों को हथियाने के लिए उसने एक जबरदस्त साजिश रच डाली. अपनी बातो के जाल
में फंसाकर एक दिन उसने कुलवंत सिंह को भरोसा दिलाया कि वह ख्वाजा पीर का भक्त है
और उसके पास और भी कई प्रकार की सिद्ध शक्तियाँ है. आप ने मेरी इतनी मदद की है, मुझे फोटोस्टेट
मशीन लगवा दी तो मेरा भी फर्ज बन जाता है कि मैं भी आपकी कुछ सेवा कर अपना कर्ज
उतार दूँ. आपके पास जितनी भी रकम है वह मैं दुगनी कर सकता हूँ.
सजाए-मौत पाने वाला खुशविंदर सिंह उर्फ़ ख़ुशी
क्योकि पंजाब में अधिकांश लोग ख्वाजा पीर और उनकी शक्तियों को मानते हैं.
हालाँकि कुलवंत सिंह ने इंकार करते हुए कहा कि जो है वह वाहेगुरु जी का शुक्र है
पर ख़ुशी ने अपनी दलीलों से उन्हें तैयार कर लिया था. उन्हें यह भरोसा दिलाया कि
पूजा के बाद रकम दोगुनी हो जाएगी. पूजा अलसुबह नहर किनारे पूरे परिवार सहित होनी
थी. ख़ुशी ने इस बात की भी सख्त हिदायत दी थी कि इस बात का जिक्र किसी से भी नहीं
करने है अन्यथा अनिष्ट हो जायेगा. यह बात 2 जून 2004 की है. अगली सुबह दिनांक 3
तरीक को सुबह लगभग 2-30 बजे कुलवंत सिंह अपनी पत्नी हरजीत कौर, बेटी रमनदीप कौर और
बेटे अरविंदर सिंह के साथ 12 लाख रूपये सहित फतेहगढ़ नहर किनारे पहुँच गए थे. ख़ुशी
वहां पहले से ही मौजूद था. उसने परिवार के चारों सदस्यों की आँखों पर पट्टी बांधकर
नहर किनारे खड़ा कर दिया और पूजा आरम्भ कर दी और फिर कुछ देर बाद एक-एक को नहर में
धक्का देकर पूजा समाप्त कर दी और 12 लाख रूपये लेकर अपने घर चला गया. नहर में पानी
का बहाव बहुत तेज़ था. कुलवंत सिंह के परिवार के किसी सदस्य का पता ही नहीं चला था
की वे चारों कहाँ गये. यह चारों हत्याएं तीन जून 2004 में हुई थीं. इसके बाद मृतक के साले कुलतार सिंह के बयानों पर थाना बस्सी
पठाना में पांच जून को केस दर्ज हुआ था. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत
फैल गई थी. इसके बाद शवों की तलाश शुरू हुई थी. 7 जून 2004 को
रमनदीप कौर और 9 जून को कुलवंत सिंह का शव नहर से निकाला
गया. जबकि हरजीत कौर व उसके बेटे अरविंदर सिंह का शव आज तक बरामद नहीं हुआ है.
कुलवंत सिंह के परिवार का अध्याय यहीं समाप्त हो गया था .
इस मामले में फतेहगढ़ पुलिस ने काफी मेहनत की थी पर ख़ुशी ने यह काम इतनी सफाई से किया था कि काफी कोशिओं के बाद भी पुलिस ऐसे में आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी. इसके बाद 2005 में फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने इस मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी. यह केस अनसुलझा ही रह गया था. इसके बाद कुलतार सिंह के भाई की प्रार्थना पर यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को शिफ्ट हो गया था, काफी मत्था पच्ची के बाद भी क्राईम ब्रांच के हाथ कुछ नहीं लगा था और 3 अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम बांच ने भी इस मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी. इसके बाद कुलतार सिंह ने 2007 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी. 16 मार्च 2007 में अदालतके आदेश पर यह केस सीबीआई को दे दिया गया था. सीबीआई भी आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी. इसके बाद 2009 में सीबीआई ने भी इस मामले में अपने हाथ खड़े करते हुए अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी थी. और मामला बन्द कर दिया गया था. कुलवंत के परिवार की हत्याओं का रहस्य एक रहस्य ही बन कर रह गया था.पर वह कहावत है ना कि पाप का घड़ा एक ना एक दिन जरूर फटता है. इस चार हत्याओं के 8 साल बाद जून 2012 में खुशविंदर ने अपनी पत्नी की मामा के परिवार को निशाना बनाया और उस परिवार के छह लोगों की नहर में फेंक कर हत्या कर दी थी. इसमें गुरमैल सिंह रिटायर्ड पंजाब पुलिस कांस्टेबल, उसकी पत्नी परमजीत कौर, बेटा गुरिंदर सिंह, निवासी मुकंदपुर लुधियाना, रुपिंदर सिंह, व प्रभसिमरन कौर शामिल थे. गुरमैल सिंह पुत्री जैसमीन कौर नहर में फंस गई थी, जिससे उसकी मौत होने से रह गई थी, जैसमीन कौर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने उस से 36 लाख रुपये की बरामदगी भी की थी. फिर ऐसे खुला कुलवंत के परिवार के 4 लोगों की हत्या का राज.
इस मामले में फतेहगढ़ पुलिस ने काफी मेहनत की थी पर ख़ुशी ने यह काम इतनी सफाई से किया था कि काफी कोशिओं के बाद भी पुलिस ऐसे में आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी. इसके बाद 2005 में फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने इस मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी. यह केस अनसुलझा ही रह गया था. इसके बाद कुलतार सिंह के भाई की प्रार्थना पर यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को शिफ्ट हो गया था, काफी मत्था पच्ची के बाद भी क्राईम ब्रांच के हाथ कुछ नहीं लगा था और 3 अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम बांच ने भी इस मामले में अपनी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी. इसके बाद कुलतार सिंह ने 2007 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी. 16 मार्च 2007 में अदालतके आदेश पर यह केस सीबीआई को दे दिया गया था. सीबीआई भी आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी. इसके बाद 2009 में सीबीआई ने भी इस मामले में अपने हाथ खड़े करते हुए अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी थी. और मामला बन्द कर दिया गया था. कुलवंत के परिवार की हत्याओं का रहस्य एक रहस्य ही बन कर रह गया था.पर वह कहावत है ना कि पाप का घड़ा एक ना एक दिन जरूर फटता है. इस चार हत्याओं के 8 साल बाद जून 2012 में खुशविंदर ने अपनी पत्नी की मामा के परिवार को निशाना बनाया और उस परिवार के छह लोगों की नहर में फेंक कर हत्या कर दी थी. इसमें गुरमैल सिंह रिटायर्ड पंजाब पुलिस कांस्टेबल, उसकी पत्नी परमजीत कौर, बेटा गुरिंदर सिंह, निवासी मुकंदपुर लुधियाना, रुपिंदर सिंह, व प्रभसिमरन कौर शामिल थे. गुरमैल सिंह पुत्री जैसमीन कौर नहर में फंस गई थी, जिससे उसकी मौत होने से रह गई थी, जैसमीन कौर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने उस से 36 लाख रुपये की बरामदगी भी की थी. फिर ऐसे खुला कुलवंत के परिवार के 4 लोगों की हत्या का राज.

सीबीआई के प्रॅासिक्यूटर कुमार रजत कुमार
छह लोगों की हत्या में पकड़े गए आरोपी खुशविंदर ने पुलिस के सामने कबूल
किया कि फतेहगढ़ साहिब में 2004 में एक ही
परिवार के चार लोगों की हत्या भी उसी ने की थी. उसने पुलिस को बताया था कि मृतक
कुलवंत सिंह के परिवार ने 12 लाख की जमीन बेची थी. उसे इस
बात का पता था. पैसे के लालच में उसने हत्याकांड को अंजाम दिया. इसके बाद फतेहगढ़
साहिब वाला यह केस भी दोबारा खोला गया. शिकायतकर्ता कुलतार सिंह इस मामले की तह तक
जाकर आरोपी को सजा करवाना चाहता था तो उसने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां हाईकोर्ट ने केस सीबीआई मोहाली ब्रांच को सौंप दिया. सीबीआई के
डीएसपी एनआर मीना ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि खुशविंदर सिंह तांत्रिक बनकर लोगों को अपने जाल
में फंसाता था. फिर उन्हें नहर पर ले जाता था और उसके बाद उनकी आंखो पर पट्टी बांध
कर किनारे खड़े होकर नमस्कार करने के लिए कहता था. इसके बाद एक-एक कर सभी को धक्का दे
देता था.
जब आरोपी को फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने पकड़ा था तो उसने पुलिस के आगे खुलासा किया था कि उसका अगला निशाना उसकी अपनी पत्नी थी. वह दो बार अपनी पत्नी को नहर पर ले जा चुका था
दोषी खुशो ने बताया था कि वह अपनी पत्नी को मारने की तैयारी में जुट गया था. वह उसे भी उस जगह पर लेकर गया था. जहां भाखड़ा नहर में फेंक कर उसने दो लोगों को मारा था. हालांकि इस बात का अभी तक कोई पता नहीं चला कि वह दो आदमी कौन थे. बाद में उसने अपनी पत्नी को मारने का इरादा त्याग दिया था और पत्नी की मामी के परिवार को मारने का प्लान बनाया था. इसके बाद आगे की कार्रवाई की थी. दोषी से पूछताछ के दौरान एसएसपी सिद्धू ने बताया कि इस दौरान दोषी ने कभी भी हत्याओं के लिए दुख नहीं जताया था. वह मजे से एक नार्मल जिन्दगी जी रहा था. कभी-कभी वह उन्हें मनोरोगी जैसा लगता था. दोषी अपनी पत्नी को मारकर अपनी छोटी साली से शादी करने की योजना भी बना रहा था. साथ ही अपने ससुराल डल्ला गांव की सारी जमीन को हड़पना चाहता था. उसे लगता था कि इसके बाद उसका अच्छा रसूख इलाके में हो जाएगा.
जब आरोपी को फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने पकड़ा था तो उसने पुलिस के आगे खुलासा किया था कि उसका अगला निशाना उसकी अपनी पत्नी थी. वह दो बार अपनी पत्नी को नहर पर ले जा चुका था
दोषी खुशो ने बताया था कि वह अपनी पत्नी को मारने की तैयारी में जुट गया था. वह उसे भी उस जगह पर लेकर गया था. जहां भाखड़ा नहर में फेंक कर उसने दो लोगों को मारा था. हालांकि इस बात का अभी तक कोई पता नहीं चला कि वह दो आदमी कौन थे. बाद में उसने अपनी पत्नी को मारने का इरादा त्याग दिया था और पत्नी की मामी के परिवार को मारने का प्लान बनाया था. इसके बाद आगे की कार्रवाई की थी. दोषी से पूछताछ के दौरान एसएसपी सिद्धू ने बताया कि इस दौरान दोषी ने कभी भी हत्याओं के लिए दुख नहीं जताया था. वह मजे से एक नार्मल जिन्दगी जी रहा था. कभी-कभी वह उन्हें मनोरोगी जैसा लगता था. दोषी अपनी पत्नी को मारकर अपनी छोटी साली से शादी करने की योजना भी बना रहा था. साथ ही अपने ससुराल डल्ला गांव की सारी जमीन को हड़पना चाहता था. उसे लगता था कि इसके बाद उसका अच्छा रसूख इलाके में हो जाएगा.
बहरहाल 28 अगस्त 2018 की सुबह 10 बजे
भारी सुरक्षा के बीच दोषी को सीबीआई की विशेष अदालत में लाया गया था. इसके पहले
अदालत की सारी प्रकिर्याए पूरी हो चुकी थी और माननीय जज एन एस गिल ने पिछली तारीख
पर ही उसे दोषी करार दे दिया था. आज केवल फैसला सुनाना था. सुनवाई के दौरान दोषी
खुशविंदर ने सभी हत्याएं कबूली थी. सीबीआई के प्रॅासिक्यूटर कुमार रजत इस पूरे प्रकरण को सबूतों सहित अदालत के सामने रख चुके थे और यह भी बता चुके थे कि 6 लोगों
की हत्याओं के मामले में अदालत पहले भी दोषी को फांसी की सजा सुना चुकी है जिस के
लिए दोषी की ओर से दया याचिका पर सुनवाई चलनी है. माननीय जज एन एस गिल की अदालत ने
इस मामले में दोपहर बाद अपना फैसला सुनाया था. अदालत ने उसे भारतीय दण्ड सविधान की
धारा 302 हत्या करने
के लिए सजाए मौत और 10 हजार रूपये जुरमाना, धारा 364 हत्या की नीयत से किडनैपिंग में
उम्रकैद और 5 हज़ार रूपये जुर्माना तथा धारा 201 सबूतों को नष्ट करने के तहत 5 साल
की सजा और 5 हज़ार रूपये की सुनाई है.
जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोषी को एक साल और जेल में काटना होगा. अपने
फैसले में जज साहब ने यह भी कहा यह अपराध अति घिनौने से भी घिनौना है दोषी ने एक
साथ परिवार के चार सदस्यों को मौत के घाट उतारा है, जिसमें
में दो बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने अभी दुनिया देखनी थी.
ऐसे में दोषी पर किसी भी कीमत पर रहम नहीं किया जा सकता है.
सीबीआई की अदालत पटियाला से मोहाली शिफ्ट होने के बाद यह पहला मामला है, जिसमें किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है.
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर
खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद उन्हें न्याय मिला है. जज ने अपना यह
फैसला एक मिनट में सुना दिया. जज साहब द्वारा फैसला सुनाये जाने के दौरान दोषी के
चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी.
इसके बाद दोषी को पुलिस पीछे लेकर चली गई हालांकि इस दौरान उसके चेहरे पर किसी भी तरह का कोई दुख नहीं दिखाई देता था वह पहले की तरह खामोश ही था. इस दौरान उसका कोई पारिवारिक सदस्य तक नहीं आया हुआ था. दोषी की पत्नी मनजीत कौर सुहावी गांव में अपनी बेटी और बेटे के साथ रहती है. मनजीत कौर के भाई की 2006 में उनकी शादी के एक महीने के बाद नहर में गिरने से मौत हो गई थी तब वह नयनादेवी में माथा टेककर आ रहा था. मनजीत कौर की माता की मौत उनकी शादी से पहले ही हो गई थी और उसकी साली की शादी दोषी के जेल जाने के बाद हुई थी.
इसके बाद दोषी को पुलिस पीछे लेकर चली गई हालांकि इस दौरान उसके चेहरे पर किसी भी तरह का कोई दुख नहीं दिखाई देता था वह पहले की तरह खामोश ही था. इस दौरान उसका कोई पारिवारिक सदस्य तक नहीं आया हुआ था. दोषी की पत्नी मनजीत कौर सुहावी गांव में अपनी बेटी और बेटे के साथ रहती है. मनजीत कौर के भाई की 2006 में उनकी शादी के एक महीने के बाद नहर में गिरने से मौत हो गई थी तब वह नयनादेवी में माथा टेककर आ रहा था. मनजीत कौर की माता की मौत उनकी शादी से पहले ही हो गई थी और उसकी साली की शादी दोषी के जेल जाने के बाद हुई थी.
-हरमिंदर
कपूर



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