मेरा क्या दोष है...?
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| थाना सिटी के इंचार्ज अशोक शर्मा जशनजोत कौर को उसकी दादी सुरजीत के हवाले करते हुए |
तलाक के बाद पति-पत्नी नें कभी सोचा है कि बाद में उनके बच्चों पर क्या गुजरे गी.? ये ईगो का सवाल है, लापरवाही या निजी स्वार्थ
पिछले महीने मई के दूसरे सप्ताह मैं ट्रेन द्वारा दिल्ली से
लुधियाना आ रहा था, तो जैसे ही ट्रेन अम्बाला स्टेशन पर रुकी में शीघ्रता से नीचे
उतर गया था. क्योंकि मुझे इस ट्रेन से बस यहीं थक ही सफर करना था , दरअसल मुझे
अम्बाला में कुछ काम था सो मै अपना काम निपटा कर बाद में बस से जाने वाला था
बहरहाल मैं जैसे ही प्लेटफार्म पर स्थित रेलवे पुलिस की चौकी के पास पहुंच वह काफी
भीड़ जमा
थी
''क्या माजरा है ?’’ मेरे मन से पत्रकार ने जाग कर पूछा , आगे बढ़ कर मैने देखा तो पता चला की कुछ पुलिसकर्मी एक बच्ची को घेर कर खड़े थे वहां इंस्पेक्टर अशोक भी खड़े थे वे मेरे काफी अच्छे परिचित थे, मुझे देख कर मुस्करा उठे और बोले ,
''क्यों भई खबर लेने यहाँ भी चले आये ? मैने भी हंसते हुए उतर दिया और बताया कि मै यहाँ किस कारण से मौजूद हूँ ! यह क्या मामला है ? उन्हों ने जो बताया सुन कर मै हैरान नही हुआ था क्योकि आज के इस आधुनिक समाज में यही तो है हमारा वास्तविक चेहरा और संस्कार ! बहरहाल उन्होंने जो बताया वह कुछ इस प्रकार था !
''क्या माजरा है ?’’ मेरे मन से पत्रकार ने जाग कर पूछा , आगे बढ़ कर मैने देखा तो पता चला की कुछ पुलिसकर्मी एक बच्ची को घेर कर खड़े थे वहां इंस्पेक्टर अशोक भी खड़े थे वे मेरे काफी अच्छे परिचित थे, मुझे देख कर मुस्करा उठे और बोले ,
''क्यों भई खबर लेने यहाँ भी चले आये ? मैने भी हंसते हुए उतर दिया और बताया कि मै यहाँ किस कारण से मौजूद हूँ ! यह क्या मामला है ? उन्हों ने जो बताया सुन कर मै हैरान नही हुआ था क्योकि आज के इस आधुनिक समाज में यही तो है हमारा वास्तविक चेहरा और संस्कार ! बहरहाल उन्होंने जो बताया वह कुछ इस प्रकार था !
एक छोटी बच्ची को पहले तो जन्म देने वाली सगी मां छोड़कर चली गई। फिर
उसकी सौतेली मां द्वारा उस पर 3 वर्ष तक दर्दनाक अत्याचार किए गए व मारपीट की जाती
रही, घर के सारे काम इस बिन माँ की बच्ची से मारपीट करके करवाए जाते रहे। जिन दिनों
बच्ची ने अपने बचपन का आन्नद लेना था उससे बर्तन साफ करवाए गए,पोछे
लगवाए गए,फिर उसकी सौतेली माँ ने उसको घर से निकाल दिया। घर से निकालने
के बाद यह बच्ची पंचकूला के आशियाना आश्रम में रही।
हरियाणा पुलिस को बच्ची बस इतना ही बता रही थी कि मैं पंजाब के बरनाला शहर की रहने वाली हूं। एक गुरुद्वारे के पास हमारा घर है। यह कहानी है जशनजोत कौर की, जिसे प्यार से खुशी नाम से पुकारा जाता है।
छोटी बच्ची जशनजोत के पिता गुरदीप सिंह काकू व उसकी माता सिमरन कौर का आपस में तलाक हो गया था। तलाक होने के बाद उसकी माता जशनजोत को उसके पिता के पास छोड़ गई। इस उपरांत उसके पिता ने 3 बच्चों की मां से विवाह रचा लिया। जिस समय उसके पिता ने विवाह किया था उस समय उसकी आयु 5 वर्ष की थी व वह नर्सरी में पढ़ती थी। विवाह के बाद वह बरनाला को छोड़कर हरियाणा के किसी शहर में रहने लग पड़े थे उस का पिता उसको हरियाणा अपने साथ ही ले गया। यहीं से छोटी बच्ची के जुल्मों की कहानी शुरू हो गई। पहले तो उसको पढऩे के लिए स्कूल नहीं भेजा गया। उसकी सौतेली माता द्वारा उसकी मारपीट करके उससे घर के काम करवाए जाने लगे। पिता इस बात को मूकदर्शक बनकर देखता रहा। फिर आखिरकार उसकी सौतेली बहन ने उसको पीटकर घर से बाहर निकाल दिया।
जब सौतेली बहन ने जशनजोत को घर से निकाल दिया तो वह भटकती हुई अंबाला के रेलवे स्टेशन पर आ गई। रेलवे पुलिस ने 18 मई 2017 को जब उस बच्ची को अकेले घूमते देखा तो उसको अपने कब्जे में लेकर पंचकूला के आशियाना आश्रम में भेज दिया,जहां छोटे बच्चों की देखभाल की जाती है।
पंचकूला की रेलवे पुलिस ने जब इस छोटी बच्ची से पूछताछ की तो उसने अपना शहर बरनाला बताया। पंचकूला पुलिस के ए.एस.आई. राजेश कुमार ने छोटी बच्ची की तस्वीर बरनाला पुलिस के पास भेज दी है । बरनाला पुलिस 27 दिन तक इस बच्ची के ठिकाने का कोई पता नहीं लगा सकी थी । पुलिस के पास कोई गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज नहीं थी।
जब बच्ची के ठिकाने का हरियाणा पुलिस को 27 दिन तक कुछ पता न लगा तो ए.एस.आई. राजेश कुमार,ए.एस.आई. मुकेश रानी इस बच्ची को गत दिवस बरनाला लेकर आए व समाज सेवी संस्था बाबा आला सिंह वैल्फेयर क्लब के अध्यक्ष रणजीत सिंह बेदी,भूपेन्द्र सिंह व बाल भलाई अफसर अभिषेक सिंगला को मिले। इनके द्वारा जगह-जगह पर बच्ची की पहचान करवाई गई। व्हाट्सअप पर मैसेज करवाए गए तब कहीं जाकर आज उक्त बच्ची अपनी दादी सुरजीत कौर को मिली। बच्ची अपनी दादी को देखते ही उनसे लिपट गई। दादी ने भी अपनी पोती को भरे मन से गले लगा लिया।
बरनाला पुलिस ने हरियाणा पुलिस व बाल भलाई अफसर समाज सेवी संस्था के सामने छोटी बच्ची को उसकी दादी के हवाले कर दिया। थाना सिटी के इंचार्ज अशोक शर्मा ने कहा कि बच्ची पर अत्याचार करने वाले माता व पिता खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बच्ची को साथ ले जाकर जगह की निशानदेही करके उसके पिता को ढूंढा जाएगा। इसके बाद मामले की जांच की जाएगी।
हरियाणा पुलिस को बच्ची बस इतना ही बता रही थी कि मैं पंजाब के बरनाला शहर की रहने वाली हूं। एक गुरुद्वारे के पास हमारा घर है। यह कहानी है जशनजोत कौर की, जिसे प्यार से खुशी नाम से पुकारा जाता है।
छोटी बच्ची जशनजोत के पिता गुरदीप सिंह काकू व उसकी माता सिमरन कौर का आपस में तलाक हो गया था। तलाक होने के बाद उसकी माता जशनजोत को उसके पिता के पास छोड़ गई। इस उपरांत उसके पिता ने 3 बच्चों की मां से विवाह रचा लिया। जिस समय उसके पिता ने विवाह किया था उस समय उसकी आयु 5 वर्ष की थी व वह नर्सरी में पढ़ती थी। विवाह के बाद वह बरनाला को छोड़कर हरियाणा के किसी शहर में रहने लग पड़े थे उस का पिता उसको हरियाणा अपने साथ ही ले गया। यहीं से छोटी बच्ची के जुल्मों की कहानी शुरू हो गई। पहले तो उसको पढऩे के लिए स्कूल नहीं भेजा गया। उसकी सौतेली माता द्वारा उसकी मारपीट करके उससे घर के काम करवाए जाने लगे। पिता इस बात को मूकदर्शक बनकर देखता रहा। फिर आखिरकार उसकी सौतेली बहन ने उसको पीटकर घर से बाहर निकाल दिया।
जब सौतेली बहन ने जशनजोत को घर से निकाल दिया तो वह भटकती हुई अंबाला के रेलवे स्टेशन पर आ गई। रेलवे पुलिस ने 18 मई 2017 को जब उस बच्ची को अकेले घूमते देखा तो उसको अपने कब्जे में लेकर पंचकूला के आशियाना आश्रम में भेज दिया,जहां छोटे बच्चों की देखभाल की जाती है।
पंचकूला की रेलवे पुलिस ने जब इस छोटी बच्ची से पूछताछ की तो उसने अपना शहर बरनाला बताया। पंचकूला पुलिस के ए.एस.आई. राजेश कुमार ने छोटी बच्ची की तस्वीर बरनाला पुलिस के पास भेज दी है । बरनाला पुलिस 27 दिन तक इस बच्ची के ठिकाने का कोई पता नहीं लगा सकी थी । पुलिस के पास कोई गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज नहीं थी।
जब बच्ची के ठिकाने का हरियाणा पुलिस को 27 दिन तक कुछ पता न लगा तो ए.एस.आई. राजेश कुमार,ए.एस.आई. मुकेश रानी इस बच्ची को गत दिवस बरनाला लेकर आए व समाज सेवी संस्था बाबा आला सिंह वैल्फेयर क्लब के अध्यक्ष रणजीत सिंह बेदी,भूपेन्द्र सिंह व बाल भलाई अफसर अभिषेक सिंगला को मिले। इनके द्वारा जगह-जगह पर बच्ची की पहचान करवाई गई। व्हाट्सअप पर मैसेज करवाए गए तब कहीं जाकर आज उक्त बच्ची अपनी दादी सुरजीत कौर को मिली। बच्ची अपनी दादी को देखते ही उनसे लिपट गई। दादी ने भी अपनी पोती को भरे मन से गले लगा लिया।
बरनाला पुलिस ने हरियाणा पुलिस व बाल भलाई अफसर समाज सेवी संस्था के सामने छोटी बच्ची को उसकी दादी के हवाले कर दिया। थाना सिटी के इंचार्ज अशोक शर्मा ने कहा कि बच्ची पर अत्याचार करने वाले माता व पिता खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बच्ची को साथ ले जाकर जगह की निशानदेही करके उसके पिता को ढूंढा जाएगा। इसके बाद मामले की जांच की जाएगी।
बरनाला(विवेक
सिंधवानी,गोयल):

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