एक
हत्यारा 7
लाशें
हर
पोलिस स्टेशन में एक जगह बनी होती है जहाँ अनसुलझे केसेज़ की अधूरी दस्ताने फाईल की
जाती है. हत्या, चोरी, बलात्कार, अपहरण और कई ऐसे अनसोल्ड केसेज़ इन फाईलों में बंद
पड़े रहते है. कभी दिनों तक, कभी महीनों तक तो कभी सालों तक. बंद मुठी की लकीरों की
तरह होते हैं ये अनसोल्ड केस. लेकिन ये फाईलों वाली जगह कब्रिस्तान कतई नहीं है.
यह महज़ एक वोटिंग रूम है, जहाँ न्याय इंतज़ार करता है कि कब कोई सबूतों-सुरागों
वाली ट्रेन आये और कब कोई केस उस पर सवार होकर अपनी मंजिल तक पहुंचे, जो न्यायालय
की दहलीज़ है. हम तकदीर पर भरोसा करने की हिमाकत तो नहीं करते पर कभी- कभी ऐसा होता
है कि बंद मुठियों को खुलने में सारी कायनात साजिश करती है और सालों साल लग जाते
है जब कई केसेज़ अनसुलझे रह जाते है. लम्बे अर्से तक गुमनामी के अंधेरों में खोये
रहते है. फिर सुराग की एक किरण सालों बाद किसी फाईल पर पड़ती है और बन्द मुठी झट से
खुल जाती है और समय की धूल से उठकर इंसाफ मांगती है. जैसा कि इस केस में हुआ.
सीरियल
किलर जगरूप ने केवल अपनी अय्याशी के लिए 7 कत्ल किए. मजे
की बात यह कि 23 सालों तक पुलिस उसे पकड़ना तो दूर उस के
बारे में कोई जानकारी तक नहीं जुटा पाई थी. इन हत्याओं ने पूरे पंजाब में दहशत पैदा कर दी थी. सन 1995 से लेकर अब तक इसी तरह पुलिस ने पंजाब के अलग अलग शहरों से करीब 8 लाशें बरामद की थीं और ये सभी अनसुलझे मामले फाइलों में बंद हो चुके थे. भले
ही देर से ही सही, पर आखिर उन्हें भी अपनी मंजिल मिली.
पुलिस
ने मुकदमा दर्ज कर के लाश की शिनाख्त करवाई तो पता चला कि अटैची में मिली लाश अनिल
कुमार नामक युवक की थी. इस हत्या ने पूरे शहर में दहशत पैदा कर दी थी.
दहशत
का एक कारण यह भी था कि पुलिस को इस तरह लाश कोई पहली बार नहीं मिली थी. सन 1995 से ले कर अब
तक इसी तरह पुलिस ने पंजाब के अलगअलग शहरों से करीब 8 लाशें
बरामद की थीं और ये सभी अनसुलझे मामले फाइलों में बंद हो चुके थे. यह ताजा मामला
भी पहले मिली लाशों की फेहरिस्त में शामिल कर लिया गया था, क्योंकि
अब से पहले मिली लाशें और अब मिली लाश को देख कर ऐसा लगता था जैसे इन सब का कातिल
एक ही रहा हो.
इन
सभी हत्याओं की कार्यप्रणाली एक जैसी ही थी. अब तक मिली सभी लाशें टुकड़ों में
मिली थीं और उन सब के चेहरे पर ईंटें मार कर चेहरा बिगाड़ा गया था. इस तरह की
हत्याओं का पहला मामला सन 1995 में लुधियाना में सामने आया था. मृतक
का नाम नंदलाल था और उस की लाश भी पुलिस को अटैची में बंद टुकड़ों के रूप में मिली
थी.
अनिल
की तरह नंदलाल के चेहरे को भी ईंटें मार कर बिगाड़ा गया था. बाद में पुलिस की काफी
मशक्कत के बाद मृतक की पहचान नंदलाल के रूप में हुई थी, पर पुलिस की
दिनरात की मेहनत के बाद भी वह कातिल तक नहीं पहुंच पाई थी. अंतत: इस केस को
अनसुलझा करार देने के बाद इस की फाइल बंद कर दी गई थी.
इस
के बाद साल,
6 महीने में लुधियाना और पटियाला में इसी तरह लाशें मिलती रहीं और
उन हत्याओं की जांच भी होती रही, पर कातिल को पकड़ना तो दूर
की बात पुलिस उस का पता तक नहीं लगा पाई. समय के साथसाथ हत्याओं के ये सारे केस
फाइलों में बंद हो कर रह गए थे.
लेकिन अनिल की इस ताजा हत्या ने
एसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और उन्होंने इस
तरह हुई हत्याओं की सभी फाइलें मंगवा कर उन का बारीकी से अध्ययन करने के बाद
हत्यारे को पकड़ने का काम डीएसपी सौरभ जिंदल को सौंप दिया.
डीएसपी
सौरभ जिंदल ने अपने विश्वसनीय पुलिसकर्मियों की टीम बना कर इस मामले की जांच शुरू
कर दी. सब से पहले उन्होंने पटियाला के टैगोर सिनेमा के पीछे मिली राजिंदर कुमार
नामक युवक की लाश से अपनी जांच शुरू की. राजिंदर की लाश भी 2015 में मिली थी
और अब तक मिली अन्य लाशों की तरह उस की लाश के भी टुकड़े कर अटैची में बंद कर के
टैगोर सिनेमा के पिछवाड़े फेंके गए थे. उस का चेहरा भी ईंट मार कर बिगाड़ा गया था.
डीएसपी
सौरभ जिंदल ने जब राजिंदर की फाइल का बारीकी से निरीक्षण किया तो पता चला कि
राजिंदर की लाश के टुकड़ों के साथ उस के कपड़े भी मिले थे और उन कपड़ों में एक
विजिटिंग कार्ड भी था,
जो किसी सुरजीत नामक कौंटैक्टर का था.
डीएसपी
सौरभ जिंदल ने सुरजीत को बुलवाया और मृतक राजिंदर की फोटो दिखा कर उस के बारे में
पूछा. फोटो देख कर उस ने झट से बता दिया कि राजिंदर उसी मकान मेंअपनी पत्नी के साथ
किराए पर रहता था,
जिस में वह खुद रह रहा था. आगे की पूछताछ में पता चल कि वह मकान
किसी रीना नाम की औरत का था.
यह
जानकारी भी मिली कि रीना का चालचलन ठीक नहीं था. रीना के अवैध संबंध एक आदमी से थे
और वह अकसर रीना के घर आया करता था. पड़ोसियों के अनुसार, रीना उस आदमी
की रखैल थी और वह उस के इशारों पर नाचती थी.
रीना
के पास आने वाला आदमी कौन था, उस का नाम क्या था और वह कहां का रहने
वाला था, रीना के अलावा यह बात और कोई नहीं जानता था. बहरहाल,
डीएसपी सौरभ जिंदल ने सब से पहले राजिंदर के बारे में उस की पत्नी
से पूछताछ की.
उस
की पत्नी का कहना था कि उस का पति सिंचाई विभाग में कार्यरत था और कई दिनों से घर
से लापता था. आश्चर्यजनक बात यह थी कि राजिंदर की पत्नी ने उस के गायब होने की
कहीं रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करवाई थी. जांच में यह भी पता चला कि राजिंदर कुमार भी
रीना पर गलत नजर रखता था.
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| सात हत्याओं का हत्यारा जगरूप सिंह पुलिस हिरासत में. |
डीएसपी सौरभ जिंदल ने मामले की
गहनता से जांचपड़ताल की तो कई बातें बड़ी विचित्र और रहस्यमयी दिखाई दीं. इसलिए
जिंदल ने रीना से ही पूछताछ करना उचित समझा. रीना को अपने औफिस बुला कर जब उस से
उस के प्रेमी के बारे में पूछा गया तो रीना ने अपने प्रेमी के बारे में कई रहस्य
उजागर किए.
उस
ने बताया कि उस के प्रेमी का नाम जगरूप सिंह था और वह पिछले काफी समय से अपनी
मजबूरी के कारण उस के साथ रह रही थी, क्योंकि जगरूप उसे ब्लैकमेल कर रहा था और
वह उसे धमकी दे कर कई बार कह चुका था कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी या उस के
बारे में किसी से कुछ कहा तो अन्य लोगों की तरह वह उस की भी हत्या कर देगा और उस
की लाश के टुकड़ेटुकड़े कर चीलकौवों को खिला देगा.
इन
सब बातों के अलावा रीना से यह भी पता चला कि 45 वर्षीय जगरूप
सिंह बदोवाल, लुधियाना का रहने वाला है. बदोवाल में जगरूप
कहां रहता था, इस बात का रीना को पता नहीं था. डीएसपी सौरभ
जिंदल के आदेश पर उन की पुलिस टीम ने बड़ी मेहनत करने के बाद लुधियाना के बदोवाल
में जगरूप का घर ढूंढ निकाला, पर इतनी मेहनत के बाद यहां भी
पुलिस के हाथ निराशा ही लगी.
दरअसल, जगरूप को किसी
तरह से यह सूचना मिल गई थी कि पुलिस ने अब तक हुए ब्लाइंड मर्डर्स की फाइलों को
खोल कर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है और जल्द ही पुलिस उस तक पहुंचने वाली है.
इसीलिए वह अपने घर बदोवाल से फरार हो गया था.
जगरूप की गिरफ्तारी को ले कर
पुलिस ने रेड अलर्ट घोषित कर जगहजगह उस की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी. इस बीच
पुलिस को पता चला कि जगरूप लुधियाना के जालंधर बाईपास इलाके में कहीं रह रहा है.
दिनरात मेहनत कर के पुलिस ने उस का ठिकाना ढूंढ तो लिया, लेकिन पुलिस के
वहां पहुंचने से पहले ही वह वहां से भी फरार हो गया. पुलिस खाली हाथ पटियाला लौट
आई.
अगली
बार पुलिस ने रीना से पुन: पूछताछ कर जगरूप के उन सभी ठिकानों को घेर लिया, जहां उस के
छिपने की संभावना हो सकती थी. अंत में अपने आप को चारों ओर से घिरा देख कर 4
जनवरी, 2018 को जगरूप सिंह ने एक व्यक्ति के
जरिए सिविललाइंस थाने में आ कर सरेंडर कर दिया. इसी के साथ पिछले कई महीनों से
जगरूप और पुलिस के बीच चल रहे चूहेबिल्ली के खेल का अंत हो गया.
जगरूप
सिंह के पिता की मृत्यु उस के बचपन में ही हो गई थी. जगरूप बचपन से ही अय्याश
प्रवृत्ति का था और ऐशोआराम की जिंदगी जीना चाहता था. बचपन से ही वह स्कूल में
हमउम्र और अपनी उम्र से बड़ी लड़कियों से छेड़छाड़ करता रहता था. इसी के चलते उसे
स्कूल से निकाल दिया गया था. उम्र के साथसाथ उस का अय्याशी वाला शौक भी बढ़ता गया.
लेकिन
अय्याशी के लिए ढेर सारे पैसों की जरूरत थी, जो उस के पास नहीं थे. अंतत: अपनी
जरूरतों को पूरा करने के लिए उस ने एक रास्ता खोज निकाला. अपने आप को शरीफ और पैसे
वाला दिखा कर वह लड़कियों से पहले दोस्ती करता था और बाद में उन की अश्लील फोटो
खींच कर उन्हें ब्लैकमेल करते हुए देहव्यापार के धंधे में धकेल देता था. उन की
कमाई से वह खुद ऐश करने लगा. इस तरह जगरूप ने अनेकों लड़कियों की जिंदगी बरबाद की
थी. उस के चंगुल में फंसने वाली लड़की का उस से बच निकलना असंभव था.
सन 1994 में जगरूप
का बड़ा भाई आस्ट्रेलिया चला गया. वह वहां टैक्सी चलाने का काम करने लगा. इस काम
में उसे अच्छी कमाई होने लगी. जब धंधा जम गया तो उस ने अपनी मां को भी हमेशा के
लिए अपने पास आस्ट्रेलिया बुला लिया.
आस्ट्रेलिया
जाने से पहले जगरूप की मां ने एक लड़की देख कर उस की शादी यह सोच कर करवा दी थी कि
एक तो उन के आस्ट्रेलिया चले जाने के बाद जगरूप का खयाल कौन रखेगा और दूसरे उन का
सोचना था कि शादी के बाद शायद जगरूप की जिंदगी में कोई ठहराव आ जाए, पर यह उन का
मात्र भ्रम था.
जगरूप
को न सुधरना था और न ही वह सुधरा. बल्कि दिनप्रतिदिन उस की अय्याशियां बढ़ती गईं.
नईनवेली पत्नी के सामने जब जगरूप का घिनौना चेहरा आया तो समझदारी दिखाते हुए वह
चुपचाप घर छोड़ कर अपने मायके चली गई और उस ने दोबारा मुड़ कर पति की तरफ नहीं
देखा.
जगरूप
के बताए अनुसार,
उस ने अपनी जिंदगी का पहला कत्ल 22 साल की
उम्र में मई 1995 में लुधियाना निवासी नंदलाल का किया था.
नंदलाल की पत्नी जगरूप की प्रेमिका थी. नंदलाल को जब जगरूप के साथ अपनी पत्नी के
संबंध होने का पता चला तो वह अपनी पत्नी को उस से संबंध तोड़ने के लिए कहने लगा.
इसी बात को ले कर घर में क्लेश होने लगा था.
अपनी
प्रेमिका के माध्यम से जगरूप को जब नंदलाल के क्लेश करने का पता चला तो उस ने बड़ी
बेरहमी से उस की हत्या करने के बाद उस की लाश के कई टुकड़े कर दिए और चेहरे पर
ईंटें मारमार कर उस का चेहरा बिगाड़ दिया. जगरूप के आत्मसमर्पण करने से पहले बीते 23 सालों में भी
लुधियाना पुलिस नंदलाल की हत्या की गुत्थी को नहीं सुलझा पाई थी.
इस बीच नंदलाल की हत्या के बाद
पुलिस को या किसी अन्य व्यक्ति को उस के कार्यकलापों पर संदेह न हो, इस के लिए
दिखावे के तौर पर जगरूप ने औटोरिक्शा चलाना शुरू कर दिया था. पर उस का असली धंधा
वही रहा.
नाजायज
संबंधों के चलते साल 1995
से अब तक 7 कत्ल करने वाला सीरियल किलर ऐश और
आराम की जिंदगी जीने के लिए लड़कियों से गलत काम करवाता रहा. जगरूप के पकड़े जाने
से कई ब्लाइंड मर्डर केस जो पुलिस की फाइलों में बंद हो चुके थे, खुल गए.
जगरूप
ने अब तक लुधियाना और पटियाला में 7 हत्याएं करने का अपराध स्वीकार कर लिया.
एसपी (डी) हरविंदर सिंह विर्क के सामने जगरूप ने यह भी स्वीकार किया कि वह 2
कत्ल के केसों में 4-5 साल तक जेल में भी रहा
है. पुलिस जगरूप के इस बयान की जांच करेगी कि वह किनकिन केसों में जेल गया था,
गया भी था या नहीं.
इस
के अलावा पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि इन 7 हत्याओं के
अतिरिक्त उस ने और कितनी हत्याएं की हैं. इन केसों के बारे में फिलहाल जानकारी
जुटाई जा रही है. पुलिस के मुताबिक जगरूप सिंह महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए
उतावला रहता था.
उस
का शिकार अधिकतर खूबसूरत विधवा या तलाकशुदा महिलाएं ही बनती थीं. अपने शिकार को
जाल में फांसने के बाद वह धीरेधीरे उसे हलाल कर के अय्याशी के लिए रकम जुटाता था.
अब
तक जगरूप ने कितनी महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बना कर उन्हें देहव्यापार के धंधे
में झोंका,
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है. हालांकि जगरूप को अदालत में पेश
कर के जेल भेज दिया गया है, फिर भी समयसमय पर पुलिस पूछताछ
के लिए उस का रिमांड ले कर वास्तविकता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.
अब
तक की गई पूछताछ से यह बात सामने आई कि आरोपी पहले महिलाओं को अपने प्रेमजाल में
फंसाता था और फिर जबरदस्ती उन से धंधा करवा कर पैसे बनाता था. अगर कोई उस के बीच
में आता था,
तो वह उसे बड़ी बेरहमी के साथ मार देता था. अब तक उस ने जितने भी
लोगों को मौत के घाट उतारा था, सभी हत्याएं उस ने बड़ी
निर्ममता के साथ की थीं.
(पुलिस सूत्रों पर आधारित
कथा का नाट्य रुपान्तरण)
-साहिल कपूर


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