परपुरष की बाहो में सुख की तलाश

             
    परपुरष की बाहो में सुख की तलाश
                                         मृतक कुलदीप सिंह की फाईल फोटो    सुखमिन्दर कौर जब हर जगह से अपने भाई कुलदीप सिंह को तलाश कर थक गई तो उसने अपने पति देविन्दर सिंह से सलाह-मशविरा करने के बाद तय किया कि कुलदीप सिंह कि लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवा देनी चाहिए.दिनांक 22 -5 -2017 को पुलिस थाना दोराहा -जिला लुधियाना जाकर अपने भाई कुलदीप की गुमशुदगी लिखवाते हुए बताया की दिनांक 7 -5 -2017 को उसका भाई कुलदीप यह कह कर अपने घर से गया था कि वह अपने दोस्त कि साथ नौकरी के लिए नॉएडा (यू .पी) जा रहा है. वो जिस के   साथ गया था वह भी वापिस लौट आया है .उसका नाम हरप्रीत सिंह है ! हरप्रीत के कहना है नौकरी की बात करने कि बाद कुलदीप उसे छोड़कर  कही चला गया था लेकिन हमने अपने भाई की हर उस जगह तलाश कर ली  है जहा उसके मिलने की सम्भावना थी इधर हरप्रीत पहले कहता था वह फोन पर कुलदीप से बात करवा देगा पर अब हरप्रीत भी कही गायब होगया है       मेरे भाई का  मोबाईल भी नहीं मिल रहा है मेरे भाई ने 7 तारीख की रात को इस  9855355053 नम्बर से बात की थी  यह नम्बर हरप्रीत का है जोकि कई दिनों से बंद है !
 सुखमिन्दर कौर कि इस बयान पर कुलदीप सिंह की गुमशुदगी डी डी नंबर - 38 पर दर्ज कर पुलिस ने अपनी करवाई शुरू करदी थी     
एस  पी -खन्ना नवजोत सिंह माहल -व थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अशवनी  कुमार 
जिला लुधियाना की तहसील दोराहा कि गांव बिलासपुर में सज्जन सिंह कौम जटसिख के परिवार रहता है ,अपने नाम की तरह वे सवभाव  कि भी सज्जन आदमी थे उनकी rhu संताने थी बेटी सुखमिन्दर और बेटा कुलदीप ! इस  के अलावा एक बेटा रामसिंह था जिसकी 30 नवम्बर 2016 को म्रत्यु हो गई थी अब केवल दोनों भाई-बहन  ही बचे  थी ! धार्मिक विचारो और साधारण होने कि कारण वह बच्चो को अधिक पढ़ा नहीं पाए थे समय कि साथ उन्हों ने पहले बड़ी बेटी सुखमिन्दर की शादी जिला संगरूर कि थाना अहमंदगढ़ अंतर्गत गांव बादशाहपुर मंडियाला कि देविंदर सिंह से कर दिया था वह अपने पति कि साथ परिवार में खुश थी उसके बाद अपनी म्रत्यु से पहले उन्होंने कुलदीप की शादी भी दिनांक 30 - 9 - 2007  को मलहोद कि लिहल गांव कि दर्शन सिंह की पुत्री कमलजीत कौर के  साथ कर उसका घर बसा दिया था . शादी कि कुछ वर्षो बाद तक तो कुलदीप और कमलजीत कौर ठीकठाक प्यार  से रहे थे उनकी दो संताने भी हुई , 9  वर्षया बेटा गुरचरण सिंह और 7  वर्षया बेटा हर्षवीर सिंह ' पर शादी कि कुछ समय बाद दोनों कि बीच कहा- सुनी होने लगी थी इस की कुछ वजह कुलदीप कि पास कोई स्थाई काम के न होना थी कुलदीप कि पिता कि पास जो थोड़ी जमीन थी वह उन्होंने बच्चो के पालन - पोषण और उनकी शादी-ब्याह में खर्च कर दी थी इसीलिए कुलदीप को घर चलने के  लिए  नौकरी कर घर खर्च चलना पड़ता था !   
  इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार ने ऐ .एस. आई जसविंदर सिंह - तेजा सिंह -हवलदार लखवीर सिंह-सुरजीत सिंह और सिपाही  गुरप्रीत सिंह - नवजीत सिंह को लेकर एक टीम बनाई  और उन्हें लापता हुए कुलदीप सिंह और फरार हुए हरप्रीत की तलाश में लगा दिया था कुछ खास मुखबिरों को उन्होंने गांव में कमलजीत कौर के चालचलन के बड़े में पता लगाने का काम सॉंप दिया था क्योंकी  सुखमिंदर कौर नए अपनी बयानों  में यह भी लिखवाया था कि उसकी भाभी कमलजीत कौर का चालचलन ठीक नहीं है , उसका कहना था कि उसके भाई कुलदीप ने उसे एक बार बताया था कि कमलजीत उसके साथ बेवफाई कर रही है उसका गांव के ही किसी युवक  के साथ चक्कर चल रहा है इसी लिए इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार ने कमलजीत कौर का चरित्र जानना  जरूरी  समझा था ! पुलिस की तहकीकात और मुखबिरों दुवारा छानबीन करने पर कमलजीत कौर के बारे में काफी चौकादेने  वाली जानकारिया मिली थी ! इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार ने अपना समय वयर्थ करना उचित न समझा और कमलजीत कौर को पूछताछ के लिए थाने बुलवाने के लिए ऐ एस आई जसविंदर सिंह को भेज दिया था , जसविंदर सिंह जिस समय कमलजीत कौर के घर पर पहुंचे उस समय वह अपनी कपड़े  बांधकर भाग जाने के तैयारी में थी ! जसविंदर सिंह उसे पकड़कर थाने लेआए  थे इत्तेफ़ाक़ से उस समय  एस पी नवजोत सिंह माहल राउंड लगाते हुए थाना दोराहा आ पहुंचे थे इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार ने उन उन्हीके सामने ही कमलजीत कौर से पूछताछ की थी!
                               कुलदीप की लाश  
 र अपराधी की शुरू में कमलजीत कौर भी अपनी हर बात से इंकार करती रही थी पर लेडी हवलदार सतजित कौर ने जब सख्ती दिखाई तो उसने स्वीकार किया था कि हरप्रीत के साथ उसके नाजायज़ समम्बन्ध है , कुलदीप सिंह के बारे में पूछने पर उसने बताया कि दिनांक 7  तारीख को रात करीब 10  बजे हरप्रीत उसे यह कहकर अपनी साथ ले गया था कि वह उसकी  नोयडा में नौकरी लगवा दे गा उसके बाद वे दोनों कहा गए यह उसे नहीं पता !
        ''तुम झूठ बोल रही हो '', इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार ने उसे डांटते  हए कहा था - ''भला ऐसा हो सकता है कि 7  तारीख से तुम्हारा पति घर से लापता है और तुमने अभी तक ना तो पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज करवाई , नाही किसी को कुछ बताया और नाही उसे कही ढूंढने की कोशिश की थी ! सच-सच बताओ मामला किया है ?''
 एक बार पुनः कमलजीत कौर पर सख्ती की गई तो उसने अपनी पति कुलदीप के बारे में तो कुछ नहीं बताया पर इतना जरूर बता दिया था कि उसका प्रेमी हरप्रीत कहा मिलें गा i  पुलिस टीम तुरंत वहा पहुँच गई थी जिस जगह पर हरप्रीत  छुपा बैठा था वह दूसरे गांव में अपनी एक दोस्त के घर पर छुपा बैठा था , पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाना दोराहा ले आई थी थाने में पहले से ही कमलजीत कौर को बैठे देख कर उसकी सिटी - पिटी गम हो गई थी इसी लिए उसने बिना कोई हिलहुज्जत  किये अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया था कि कमलजीत कौर के साथ मिल कर योजनाबद्ध तरीके  से उसने अपने एक दोस्त रोशन के साथ मिल कर कुलदीप की हत्या 7 तारीख की रात को ही कर दे थी !
हरप्रीत के बयान लेने के बाद पुलिस  ने दोनों को उसी दिन लुधियाना की सक्ष्म अदालत में पेश कर आगामी पूछताछ के लिए दो दिन के पुलिस रिमांड पर लाए लिया था , रिमांड में पूछताछ के बाद हरप्रीत सिंह के लापता होने से उसकी हत्या होने तक की जो कहानी प्रकाश में आई वह एक वासना की मरी युवती के परपुरष की बाहो में सुख तलाशने की कहानी थी !    
                        पुलिस  हिरासत में दोषी कमलदीप कौर  
दो बच्चो की माँ बन जाने के बाद कमलजीत कौर के रंगरूप और अधिक निखार आया था उसे देख लागत नहीं था की वह शादीशुदा दो बच्चो की माँ है ! कमलजीत कौर हंसमुख सवभाव  की ऐसी खूबसरत युवती थी जिसकी सूरत और शरीर से कामुकता झलकती थी . शादीशुदा और दो बच्चो की माँ होने के बावजूद गांव कि मनचले उसकी एक झलक पाने के लिए गाव की गलियों कि चक्कर  लगाया करते थे ! ऐसे में गांव के एक समारोह में कमलजीत के नैना गांव के ही नौजवान गबरू हरप्रीत सिंह से लड़ गए थे हरप्रीत कमलजीत की सहेली का भाई था कमल को एक झलक देखते ही हरप्रीत उस का दीवाना हो गया था  खासकर कमल का गुदाज शरीर और उभरा वक्षस्थल देख कर वह रातभर सो नहीं सका था ! उसे ऐसा लग रहा था जैसे रात भर कमल का शरीर अपनी बहो में लेकर मसलता रहा हो , अगले दिन वह मिठाई देने के बहाने से कमलजीत के घर जा पहुंचा था  कमल भी जैसे अपनी अखिया बिछाए उसका इंतजार कर रही थी , खुले दिल से अपनी बाहे फैलाकर उसने हरप्रीत का स्वागत किया था ,उस समय घर पर कोई नहीं था कुलदीप अपनी काम पर गया था और दोनों बच्चे स्कूल गए हुए थे ,घर पर अकेली कमलजीत कौर ही थी,     दोनों बच्चे स्कूल गए हुए थे ,घर पर अकेली कमलजीत कौर ही थी,
दुनियाभर के जितने भी नाजायज़काम हो या अपराध ,यह सब एकांत में ही फलते-फूलते है एक तरह से एकांत मिलने पर यह अंगड़ाइयाँ लेने लगते है !कमल और हरप्रीत के साथ भी उस दिन ऐसा ही हुआ था , चाहत और आग तो दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी जो एकांत मिलते ही भरक उठी थी ! मौका  भी था - दस्तूर भी था और कामनाए दोनों की जागृत थी , दोनों अपनी जगह से आगे बड़े और दुनिया जहाँ से बेखबर होकर  एक-दूजे  की बाहो में समां गए थे ! जब अलग हुए तो दोनों अपनी- अपनी मर्यादा लांघकर एक नाजायज़ रिश्ता बना चुके थे जिसे हमारा सभ्य  समाज कभी स्वीकार नहीं करता है ! कमलजीत कौर को तो हरप्रीत से आज वो सुख मिला था जिसकी कल्पना उसने अपने पूरे जीवन में भी न की थी ऐसा नहीं था की कमलजीत के पति कुलदीप  सिंह में कोई कमी थी पर कुछ आदते बचपन से ही ऐसी पड़ी होती है जो बुड़ापे  तक पीछा नहीं छोड़ती है  कुलदीप एक सीधा - सदा मेहनती इंसान था , बेरोज़गारी और घर खर्च की जिमेवारी ने उसे वक़्त से पहले ही बूढ़ा बना दिया था बहरहाल समय अपनी गति से चलता रहा था , कमलजीत कौर और हरप्रीत के नाजायज़ सम्बन्ध धीरे-धीरे इतने  परवान चढ़ गए थी की दोनों ने एक साथ जीने-मरने  की कस्मे खा ली थी , दूसरी ओर कुलदीप को इस बड़े में कोई जानकारी नहीं थी की उसकी पीठ पीछे वे दोनों क्या गुल खिला रहे है , जिस समय कुलदीप को इस बात की खबर लगी तब तक पानी सर के ऊपर से गुजर चुका था  अपनी पत्नी की बेवफाई का सुन कर उसका दिल टूट गया था , वह समझ नहीं पा रहा था की आखिर उसके प्यार में ऐसी किया कमी रह गई थी जो दो-दो बच्चे होने के बावजूद भी कमलजीत को यह कदम उठाना पड़ा था   
 दरअसल कमलजीत कौर और हरप्रीत को एक-दूजे  के शरीर का ऐसा चस्का लगा था कि वह एक-दूजे  को छोडने के लिए किसी कीमत पर भी तैयार ना थे जबकि हरप्रीत भी यह बात अच्छी तरह जनता था की कमलजीत एक शादीशुदा औरत है  उधर कमलजीत भी लाख कोशिशों के बावजूद अपने आप को हरप्रीत से दूर  होने की कल्पना मात्र से ही कांप उठती थी हलाकि हरप्रीत छोटी जाति का था और कमलजीत जाट परिवार से थी  पर ऐसे लोग ऊंच-नीच  , जाति-पाती के भेदभाव  कहा समनझते है , फिर भी दोनों यह बात अच्छी तरह जानते थी कि कुलदीप के रहते हुए उन के मन की  मुराद कभी पूरी नहीं हो सकती है ! एक दिन जब कमलजीत कौर ने रुआँसी होकर हरप्रीत को कहा '' दो किश्तियॉ पर सवारी करने से मै मर जाना बेहतर समझती हूँ  '' तो हरप्रीत का माथा ठनका था फिर भी उस ने कमलजीत को प्यार से समझते हुए  कहा था . '' तुम चिंता ना को जल्दी ही कोई रास्ता निकल आए गा ,''
  '' नहीं तुम हमेशा ही ऐसा कहते रहते हो , आज मुझे स्पष्ष्ट  बता दो की तुम मुझे अपनाओ गए की मेँ अपना कोई और रास्ता देखू ''?
   '' तो ठीक है फिर कुलदीप को अपनी रास्ते से हटाना पड़ेगा ''
   '' जो करना है जल्दी करो ''! फिर उसी दिन कुलदीप  की हत्या की योजना तैयार की गई थी , योजनानुसार  दिनांक 7 -5 -2017 की शाम को जब कुलदीप बाहर से अपनी घर लौटा तो कमलजीत कौर ने उसे कहा था '' हरप्रीत आप को दिल्ली के पास नोएडा में 15 हज़ार रुपए महीने पर नौकरी दिलवा रहा है ,वो कहता  है कि  लगभग 10 हज़ार रुपया महीना ऊपर से भी बन जाया करे गे !''
  ''अरे ऊपर के रुपए को मारो गोली हमें तनख्वाह  ही बहुत है '' हर बात से अनजान कुलदीप पत्नी कि बातो में आगया था . फिर कुछ देर बाढ़ ही वह हरप्रीत आगया था और वो कुलदीप को अपने साथ लेगया था !
  कुलदीप के घर से निलने के बाद  हरप्रीत  उसे पहले अपनी घर लेगया वहा से उस ने अपनी काळा रंग कि पल्सर बाइक नम्बर- पी बी-10 जी इ -6790  उठाई और उस पर दोनों बैठ कर हरप्रीत के एक दोस्त रोशन के घर पहुंचे , वहा से रोशन को साथ लेकर तीनो दोराहा अड्डे पर शराब पीते रहे थे योजना अनुसार उन्होंने  कुलदीप को अधिक शराब पिला दी थी उसी दौरान शराब पीते समय  कुलदीप ने हरप्रीत के मोबाईल फोन से अपनी बहिन सुखमिंदर कौर को फोन कर बताया था कि वह हरप्रीत  के साथ नौकरी के लिए नोएडा जा रहा है , यह सुन कर सुखमिंदर कौर ने उसे हरप्रीत सिंह के साथ कही जाने से मना भी किया था पर तब तक शराब अपना कमाल दिखा चुकी थी उसने अपनी बहिन कि बातो पर ज्यादा  ध्यान ही नहीं दिया  था !
  शराब पीने के दौरान जब कुलदीप नशे में हो गया तो रोशन और हरप्रीत उसे बाइक के बीच में बिठा कर सरहिंद नहर के ऊपर बने फिलोटिंग रेस्टोरेंट के किनारे से नहर के साथ-साथ काफी आगे तक ले गए थे वैसे भी रात के समय वहा हर ओर सन्नाटा पसरा था , एक जगह बाइक रोक कर दोनों नीचे उतरे और उन्हों ने नशे में टुन कुलदीप को भी नीचे उतार कर उसके गले में अपने साथ लाइ हुई रस्सी  डाल कर उसके  गले में कसकर उस की हत्या कर उसकी लाश को सरहिंद नहर मे बहा दिया था इस के बाद रोशन अपने  घर चला गया था और हरप्रीत  ने इंतजार कर रही कमलजीत कौर को यह खबर सुनाने के बाद उस के प्यासे शरीर की प्यास बुझाई थी   
पटियाला की थाना पसियाना पुलिस ने  13 मई को कुलदीप की लाश नहर से बरामद  कर ले थी रिमांड अवधि के दौरान हरप्रीत की निशानदेही पर इस हत्याकांड के तीसरे दोषी रोशन को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था तीनो अभियक्तो की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक व् दो मोबाईल  फोन  और वो रस्सी जिससे कुलदीप की हत्या की गई थी , बरामद कर ली गई थी !
डी डी नम्बर-38 पर दर्ज कुलदीप सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट को अपराध संख्या -91 /17 पर भा.वि . द सहिंता  की धारा - 302 -201 /34  पर दर्ज कर लिया गया था - रिमांड की अवधि समाप्त होने पर दिनांक २४ मई को तीनो दोषियों को पुनः अदालत मेँ पेश कर न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया था !
 
-          [ पुलिस सूत्रों पर आधरित कथा का नाट्य रूपांतरण ]
-          साहिल कपूर 
-          M (95697-61498)
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Milan Tomic

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