आत्महत्या की बंद फाईल के हत्यारे पकड़े.

                


सीआईऐ स्टाफ-1 इंस्पैक्टर प्रेम सिंह की सुझबुझ
आत्महत्या की बंद फाईल के हत्यारे पकड़े.
सुनीता अपने दोनों बच्चो को स्कूल के लिए तैयार कर अपने घर का काम निपटाने में लगी हुई थी कि किसी पड़ोसी ने आकर उसे बताया की तुम्हारे 25 वर्षीय भाई दीपक की लाश धुरी रेलवे लाइनों पर बुरी तरह कटी पड़ी है. यह खबर सुनते ही सुनीता अपने होशों हवास खोकर बेहोश हो गई थी. यह बात अलग है कि काम के सिलसले में दीपक अक्सर लेट रात घर आता था पर सुबह 7 बजे तक वह घर पहुंच कर अपनी दीदी के घरके कामों में हाथ बंटवाता था  और बच्चो को भी स्कूल छोड़ने जाता था. बहरहाल पड़ोसियों की सहायता सेव्ह धुरी रेलवे लाइनों पर गई और अपने चहेते भाई की लाश देख गश खा गई थी. इतनी देर में थाना जी.आर पुलिस भी मौका पर पहुंच गई और उन्होंने लाश अपने कब्जे में लेकर सीआरपीसी की धरा-174 के तहत करवाई कर लाश पोस्टमार्टम के बाद सुनीता को सौंप दी थी जिसका अर्थ था कि दीपक ने आत्महत्या की है. और इसी के साथ फाईल बंद कर दी  थी. दीपक का  उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया गया था. यह घटना दिनांक 5 जून 2017 की है.


क्राईम ब्रांच सी आई ऐ स्टाफ-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर प्रेम सिंह और उनकी टीम दोषियों को अदालत ले जाते हुए

लोग कुछ भी कहें पर सुनीता का दिल यह बात मानने को तैयार नहीं था कि चंगा भला उसका 25 वर्षीय भाई बिना किसी बात के, बिना किसी झगड़े के आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर सकता है.
 सुनीता शादीशुदा दो बच्चों की माँ थी और किन्ही कारणवश वह अपने पति से अलग रहती थी दीपक भी उसी के साथ ही रहता था. दीपक सीधा-सदा शरीफ युवक था पर ऐसा भी नहीं कि उसकी किसी के साथ ऐसी दुश्मनी हो कि कोई उसकी हत्या कर सके. एक बहन के मन में जब इन प्रश्नों ने जन्म लिया तो उसने अपने तौर पर अस मामले की जाँच पड़ताल करनी शुरू कर डी थी और इस सम्बन्ध में अपने भाई दीपक के हत्यारों को पकड़वाने के लिए लुधियाना पुलिस कमिश्नर साहब को एक पत्र लिख कर गुहार लगाई.
गस्त 2017 में पुलिस कमिश्नर लुधियाना ने दीपक की फाईल क्राईम ब्रांच सी आई ऐ स्टाफ-1 के इंचार्ज इंस्पेक्टर प्रेम सिंह को सौंप डी थी और इस मामले से जल्द पर्दा उठाने के आदेश दे दिए थे. इंस्पेक्टर प्रेम सिंह को भी पहले पहल यह आत्महत्या का ही मामला नज़र आया था पर एक दिन जब वह मृतक दीपक की बहन सुनीता के बयान लेने उनके घर पहुंचे तो सुनीता की अपने भाई के प्रति साफगोई बाते और दर्द देख कर उन्होंने तय कर लिया था कि दीपक ने आत्महत्या नहीं की बल्कि किसी साजिश के तहत उसकी हत्या कर लाश रेलवे लईनो पर फेंक दी  गई थी. उन्होंने सुनीता को सांत्वना देने के साथ भरोसा भी दिया कि वह जल्द असली कातिलों को पकड़ लेंगे.
केस की शुरुआत में इंस्पेक्टर प्रेम सिंह दीपक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट चेक की तो पता चला कि  इंस्पैक्टर प्रेम के अनुसार जब केस फाइल उनके पास आई तो एम.एल.आर. देखने पर पता चला कि दीपक के शरीर पर 8 से ज्यादा चोटों के निशान थे, जिनमें कई चोटें तेजधार हथियारों से मारी गई थीं। पुलिस के अनुसार आरोपी इतने शातिर हैं कि पुलिस को गुमराह करने के लिए रेलवे लाइनों पर शव फैंककर गए थे, ताकि मामला आत्महत्या का लगे। 
इस बीच इंस्पैक्टर प्रेम सिंह को पता चला कि हत्यारे और दीपक एक-दूसरे को जानते थे, हत्यारों की तरफ से एक चोरी की गई थी, जिसमें पुलिस ने थाना शिमलापुरी में केस दर्ज किया था और दीपक ने ही उस चोरी के बारे में पुलिस को जानकारी मुहैया करवाई थी। पकड़े जाने के बाद वे जेल चले गए और जमानत पर आकर दीपक से रंजिश रखने लग पड़े और उसकी हत्या करने का प्लान बनाया। 5 जून 2017 को शाम 7.30 बजे गुरबख्श ने फोन कर दीपक को शराब पीने के और बातें करने के बहाने से शिमलापुरी  दाना मंडी बुलाया, जहां पर सभी ने पहले शराब पी, जिसके बाद गैंग ने तेजधार हथियार से दीपक के सिर पर कई वार किए और लहूलुहान अवस्था में उसकी हत्या कर उसे रेलवे लाइनों पर बेहोशी की हालत में फैंक आए।
इंस्पैक्टर प्रेम सिंह अपनी सूझ बुझ से दीपक की हत्या करने वाले गगू गैंग के 3 मैंबरों को गिरफ्तार कर थाना शिमलापुरी में अपराध संख्या-36 पर धारा 302, 364, 201, 148, 149 के तहत दिनांक 19-1 2018 को  केस दर्ज किया है। जबकि सरगना अपने एक साथी के साथ जेल में बंद है जिन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाएगा और 1 मैंबर फरार है। उपरोक्त खुलासा डी.सी.पी. क्राइम गगन अजीत सिंह और ए.डी.सी.पी. क्राइम रतन सिंह बराड़ ने पत्रकार सम्मेलन दौरान किया। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान रछपाल सिंह निवासी डाबा, गुरबख्श सिंह निवासी गिल रोड, अंकुश कुमार निवासी दशमेश नगर, जेल में बंद सरगना गगनदीप सिंह और काली व फरार की पहचान रोहित के रूप में हुई है। सभी की आयु 30 से 32 वर्ष के मध्य है और सभी नशा करने के आदी हैं, सभी के खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में 1 दर्जन के करीब लूटपाट, हत्या, हत्या के प्रयास, चोरी, नशा तस्करी के केस दर्ज हैं। पुलिस ने उनसे वारदात में प्रयोग किए गए 3 दातर, लोहे की तार और एक स्कूटर बरामद कर लिया है, जबकि 2 बाइक अभी मिलने बाकी हैं। पुलिस आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर गहनता से पूछताछ करेगी। अंत में सी.आई.ए.-1 के इंस्पैक्टर प्रेम सिंह ने सूझबूझ दिखाते हुए एम.एल.आर. के आधार पर 7 महीने बाद ब्लाइंड मर्डर सॉल्व कर दिया। 
{पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का रूपान्तरण }
हरमिंदर खोजी - 
  6 जून 2017 को धूरी रेलवे लाइनों पर मृत मिले .डब्ल्यू.एस. कालोनी के रहने वाले दीपक कुमार (30) ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या कर गगू गैंग के 6 मैंबरों ने शव फैंका था। जी.आर.पी. ने बहन सुनीता के बयान पर एक्सीडैंट मानकर धारा 174 की कार्रवाई कर फाइल बंद कर दी थी, जबकि
शराब पीने के बहाने दाना मंडी बुलाया 
एम.एल.आर. से हुआ चोटों का खुलासा


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Milan Tomic

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