मैं हूँ खुश रंग हिना


मैं हूँ खुश रंग हिना -

मैं तो पाकिस्तानी हूं और ही हिन्दुस्तानी, मैं एक इंसान हूं और जीने का हक रखती हूं.जेल की चारदिवारी से पहली बार बाहर की दुनिया देखने निकली मासूम भावुक हो गई-


 एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा और हिना 

जेल में अपनी मां के साथ रहने वाली हिना की उम्र जब 5 साल की हुई तो जेल प्रशासन ने उसको चाइल्ड केयर सैंटर में भेजने की तैयारी कर ली. ऐसे में एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा ने इस मामले में केस लड़ा और हिना को अपनी मां के साथ रहने के लिए अदालत से आदेश हासिल किया. नवतेज चब्बा ने दलील दी कि एक मां को उसकी बेटी से जुदा नहीं किया जाना चाहिए. भारत के अन्य कैदियों की तुलना में इस मामले को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए.  

                                                                                                       

 हिना के जीवन में 2 नवम्बर का दिन उसके लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था. उसका जन्म भले ही आज से 11 वर्ष पूर्व हुआ था पर उसकी आत्मा ने आज अवतरित होना था. हिना का जन्म पंजाब में गुरु नगरी अमृतसर की सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे 6 नवम्बर 2016 को हुआ था इसी लिए जेल में जन्म लेने के कारण जेल के सभी कैदी उसे कान्हा और राधा आदि नामों से संबोधित करते थे हिना की अम्मी फातिमा का कहना था 'हिना तो 'जेल की बेटी' है, मुझे तो यह गम है कि मेरे अनचाहे गुनाह की सजा मेरी बेटी को भुगतनी पड़ रही है, लेकिन दूसरी ओर खुशी इस बात की है कि हिना को सभी कैदी बहुत प्यार करते हैंहिना का जन्म दिन मुझे भी याद नहीं लेकिन हिना का जेल में जन्म हुआ है इसलिए सभी कैदियों सहित पूरा जेल स्टाफ भी जन्माष्टमी के ही दिन उसका जन्मदिन मनाते हैं. भले ही मैं मुसलमान हूं, पाकिस्तान से हूं लेकिन जिस तरह से हिना को कोई 'कान्हा' तो कोई 'राधा' कहकर प्यार करता है, दुलार देता है और जन्माष्टमी के दिन उसका जन्म दिन मनाते हैं, यह देख मेरी आंखें बरस पड़ती हैं!’’

पाकिस्तान के गुजरांवाला निवासी सैफ्युद्दीन की पत्नी फातिमा और उसकी बहन मुमताज नानी रशीदा बेगम 8 मई 2006 को समझौता एक्सप्रेस से दोपहर दो बजकर बीस मिनट पर भारत-पाक बार्डर के अटारी रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी. साढ़े पांच बजे फातिमा, मुमताज रशीदा बेगम के पासपोर्ट की चेकिंग की गई, सारे दस्तावेज दुरुस्त पाए गए थे. शाम छह बजे काउंटर नंबर 14 में सीमा शुल्क विभाग (कस्टम विभाग) के अधिकारियों ने उसके सामान की चेकिंग की तो करीब छह हजार रुपये की जाली करंसी बरामद हुई थी. इस लिए अटारी रेलवे स्टेशन पर कस्टम विभाग ने फातिमा की पुन अच्छी तरह से तलाशी ली तो उसके पर्स और सामान से एक किलो हेरोइन बरामद हुई जिस के विषय में फातिमा ने अधिकारीयों को बताया था कि यह हीरोइन उसकी नहीं है, यह सब ना जाने उसके सामान में कैसे और कहाँ से गया है, उनका इस सामान से कोई वास्ता नहीं है. दोनों महिलाओं का कहना था कि उन्हें किसी ने यह सामान भारत पहुंचाने के लिए दिया था, उन्हें पता नहीं था कि सामान में हेरोइन छिपाकर रखी हुई थी.

 स्टम विभाग ने फातिमा, उसकी बहन मुमताज और माँ रशीदा बेगम को तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. फातिमा और उसकी बहन- माँ को गिरफ्तार कर उनके के खिलाफ अदालत में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर शाम 7.30 बजे सीमा शुल्क विभाग ने तीनों महिलाओं के खिलाफ जीआरपी पालिक को मीमो जारी कर दिया. जीआरपी ने शाम 7.30 बजे सीमा शुल्क विभाग ने तीनों महिलाओं के खिलाफ जीआरपी को मीमो जारी कर दिया. जीआरपी पुलिस ने जाली करंसी के मामले में तीनों को नामजद करते हुए गिरफ्तार कर एक और मामला दर्ज कर अदालत में पेश करने के बाद अमृतसर सेंट्रल जेल भेज दिया था. और कुछ माह पश्चात कस्टम विभाग और जीआरपी पुलिस ने इस मामले में अपनी करवाई पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया था. तत्कालीन न्यायाधीश .पी बत्रा ने 8 दिसंबर 2009 को दस-दस साल कैद और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा की थी. जिस समय फातिमा को गिरफ्तार किया गया था उस समय वह गर्भवती थी. इन मामलों में सन 2017 जनवरी में सजा खत्म हो गई थी, इन वर्षों के बीच जेल में रहते हुए रशीदा बेगम की मौत हो गई और फातिमा ने बच्ची हिना को जन्म दिया था. फरवरी 2017 में अदालत ने जुर्माने की रकम जमा करवाने के बाद रिहाई के आदेश जारी किये थे. मई 2017 में एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा नवतेज सिंह ने चार लाख रुपये जुर्माने के जमा करवा दिए. जून 2017 में नवजोत कौर चब्बा ने प्रधानमंत्री 2017 जनवरी में सजा खत्म हो गई,

          अपनी माँ और मौसी के साथ जेल से रिहाई के समय हिना  
ऍन डी पी एक्ट में  सजा होने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर फातिमा और मुमताज का अपने परिवार से कोई ताल्लुक नहीं रहा. परिवार उनकी पैरवी के लिए तो भारत आया और जुर्माने की राशि चुकाई गई थी एक तरह से भारत आते समय पकड़े जाने के बाद फातिमा के पाकिस्तान में रहने वाले उसके परिजनों और रिश्तेदारों ने गरीबी के चलते उससे नाता तोड़ लिया था. ऐसे हालात में वकील नवजोत कौर चब्बा ने उनकी रिहाई का बीड़ा उठाया था. बटाला के सबका भला ह्यूमिनिटी क्लब के संचालक नवजोत सिंह के जरिए उन्होंने जुर्माने की राशि बैंक में जमा करवाई. जुर्माने की राशि अप्रैल 2017 महीने में जमा करवा दी गई थी. लेकिन काफी भागदौड़ के बाद एडवोकेट चब्बा ने अब गृह मंत्रालय से उनकी रिहाई के आदेश जारी करवाए थे. इस बीच पाक अंबेसी की काउंसलर फौजिया मंजूर ने खतो-खिताबत कर हिना, उसकी मां फातिमा और मौसी मुमताज के पकिस्तान पहुँचाने का रास्ता साफ कर दिया था. हिंदुस्तान में जन्मी हिना को पाकिस्तानी नागरिकता भी मिल जाएगी. इसे किस्मत का ही खेल कहेंगे कि बिना कोई अपराध किये हिना को कई सालों तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था. उनकी रिहाई में बड़ी भूमिका निभाने वाली वकील चब्बा को खुशी है कि निरअपराध हिना अब खुली हवा में सांस ले सकेगी. एडवोकेट नवजोत कौर ने इसी विषय में विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखी थी.
              पाकिस्तान अपने घर पहुंचने के बाद अपने भाई-बहनों के साथ हिना 
डवोकेट नवजोत चब्बा ने जुलाई 2017  में हिना के बारे में पाक स्थित भारतीय दूतावास अधिकारी ने पाक सरकार से संपर्क साधा और अगस्त 2017 में पाकिस्तान ने हिना को पाकिस्तान आने की इजाजत देने की बात स्वीकार की वकील नवजोत चब्बा ने बताया कि कानून के मुताबिक सात साल के बच्चे को बाल सुधार गृह में रखा जाता है. इस बीच एक दिन जेल में लेक्चर के लिए गई थी. वहां उनकी मुलाकात उक्त परिवार से हुई. जब उन्हें पता चला कि हिना अपनी मां के बिना नहीं रह सकती थी और उसे कानून के मुताबिक बाल सुधार गृह में भेजा जा रहा है तो उन्होंने इस बाबत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर की थी. हाईकोर्ट के आदेश पर हिना को उसकी मां और मौसी के पास ही रहने की इजाजत मिली थी. जिस वक्त फातिमा भारत आई थीं उस वक्त वो गर्भवती थीं उसने सजा के दौरान जेल में ही अपनी बेटी को जन्म दिया था जिसका नाम हिना रखा गया 3 साल की उम्र में सरकार- जेल प्रशासन की तरफ से उसे जेल के स्कूल में पढ़ाई के लिए दाखिल करवाया गया था.हिना सिर्फ स्कूल जाने के लिए ही जेल से बाहर आती थीं. बाकी समय वो जेल में ही अपनी माँ के पास रहती थीं. जेल की सलाखों में मां फातिमा की कोख से जन्मी हिना को कई कैदी 'कान्हा' तो कई 'राधा' कहकर बुलाते हैं. हिना भी 'कान्हा' के नाम से खुश है, लेकिन उसे इस शब्द के मायने नहीं पता जेल की 'कोठरी' में जन्म लेने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को उफनती 'यमुना' तो वासुदेव ने पार करवाई थी, लेकिन इस 'कान्हा' का वासुदेव तो पाकिस्तान में है और वहां जाने की राह में 'यमुना' नहीं, बल्कि बार्डर बाधा है क्योकि भारत में जन्म लेने के कारण कानूनन हिना भारतीय नागरिक है और बिना पासपोर्ट वीजा के एक भारतीय नागरिक को पाक सरकार स्वीकार नहीं कर रही थी. इसी लिए इन कानूनी अड़चनों को देखते हुए हिना का अटारी बार्डर को पार करना भी मुमकिन होता नहीं दिख रहा था. ऐसे में एक फ़रिश्ता या यूँ कहें तारणहार बनके जीती जगती मिसाल पेश की थी एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा ने !

एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा समाज सेवक संस्था से पिछले छह महीने से हिना की रिहाई को लेकर भारत-पाक के बीच वार्तालाप हो रही थी. मामला तब अटक गया जब हिना के परिजनों ने पाक से पैगाम भिजवाया कि हिना अन्यों की रिहाई के लिए उनके पास पैसे (चार लाख की रकम) नहीं हैं. यह पैगाम मिलने के बाद हिना को पाक पहुंचाने की बीड़ा उठाने वालों ने जुर्माने की रकम भरकर हिना की रिहाई का रास्ता साफ किया.  हिना के अब्बू असगर अली छोटा-मोटा काम करते हैं. गरीबी के कारण वह हिना बाकी परिजनों को जेल से रिहा करवाने के लिए चार लाख की रकम नहीं जमा करवा सके तो अमृतसर की गैरसरकारी संस्था सब दा भलाने चार लाख रुपये जमा कराने के साथ ही रिहाई की प्रक्रिया भी पूरी कराईसारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने पर भी रिहाई नहीं हो पाने पर वकील चब्बा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मामले के हालात को लेकर पत्र लिखा था. पीएमओ से 17 अक्टूबर 2017 को जारी एक पत्र में वकील चब्बा को जवाब दिया गया कि तीनों लोगों हिना फातिमा और मुमताज की रहाई 2 नवंबर को की जाएगी.

हिना और उसके परिजनों ने जेल में जो काम किया था, उसके बदले मेहनताने के तौर पर उन्हें एक लाख रुपये दिए गए.  दोनों देशों में अमन-शांति का संदेश देने के लिए संस्था ने हिना को 1 लाख रुपए की लागत से तैयार किए भारत के राष्ट्रीय झंडे तथा पाकिस्तान के झंडे वाला सोने का लॉकेट देकर वापस उसके वतन भेजा. अपनी रिहाई के समय  पत्रकारों से बातचीत करते हुए फातिमा तथा मुमताज ने कहा कि उन्हें उस जुर्म की सजा काटनी पड़ी थी जो दरअसल उन्होंने  किया ही नहीं  था उन्होंने एक बार फिर कहा कि वे पूरी तरह से अनभिज्ञ थीं कि किन लोगों ने उनके सामान में कब और कैसे यह हैरोइन छिपा कर रख दी थी.  उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को उन कैदियों को रिहा कर देना चाहिए जो अपनी सजाएं पूरी कर चुके हैं.          


पाकिस्तान रवाना होते समय हिना  के हाथों में भारत पाकिस्तान के फ्लैग थे, जो दर्शा रहे थे कि 

उसके दिल में भारत पाक दोनों के लिए एक जैसा सम्मान है. इसी लिए हिना कहती है कि जेल के 

सभी अंकल मुझे प्यार करते हैं. हिना को पढ़ाने वाले टीचर राजबीर कौर एवं सुखजिंदर सिंह हेर कहते 

हैं कि हिना बहुत मीठी और प्यारी बातें करती है. जेल में जन्म होने के चलते जेल प्रबंधन भी उसे बहुत 

प्यार करता था.

मृतसर जेल से रिहाई के बाद हिना और उसकी मां फातिमा अटारी बॉर्डर की तरफ बढ़ रहीथी कि बच्ची  ने पूछा- अम्मी, क्या हमें अब्बू लेने के लिए आएंगे? सवाल सुनकर एक बार फातिमा चुप हो गई, फिर बोली...बेटा कौन आता है हमें लेने के लिए.  हिना भी अपनी माँ का यह उत्तर सुनकर चुप हो गई और उसके कदम बॉर्डर के तरफ बढ़ गए. यह सवाल जवाब सुनकर एडवोकेट नवतेज कौर चब्बा और उनके आसपास चल रहे लोगों की भावुकतावश आँखे छलक आई थी.

वहीं दूसरी ओर जिस हिना को भारत के लोगों ने पलकों पर बिठाया, उसी हिना ने जब वाघा बार्डर (अटारी बार्डर के उस पार पाक एरिया) पर पाक के जीओ टीवी पर भारत को अच्छा कहा तो पाकिस्तान को इतना बुरा लगा कि चैनल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई. जीओ न्यूज टीवी चैनल ने हिना का स्पेशल इंटरव्यू वाघा बॉर्डर पर लिया तो पाक हुकूमत ने भारत को अच्छा बताने पर यह कार्रवाई की. खास बात थी कि अमृतसर सेंट्रल जेल में 2006 में पैदा हुई हिना जब पाकिस्तान लौटी तो पाक की खुफिया एजेंसी पूरे परिवार को मीडिया से दूर रखकर रात दस बजे तक पूछताछ करती रही थी.

हिना पाक मीडिया से कहती रही-भारत के लोग बहुत अच्छे हैंरात करीब बारह बजे हिना अपने घर पहुंची तो वहां सैकड़ों की गिनती में देश-विदेश का मीडिया मौजूद था अधिकांश मीडिया हिना से सवाल पूछ रहा था कि भारत ने उसे क्यों कैद में रखा, उसका कसूर क्या था. लेकिन हिना पाक मीडिया से कहती रही कि भारत के लोग बहुत अच्छे हैं, उसे जेल में सभी लोग बहुत प्यार करते थे, जेल स्टाफ उसे बिटिया हिना कहा करता था. जेल से रिहा होने के बाद हिना काफी खुश नजर आई. वहीं उसकी मां फातिमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि मोदी साहब ने मामले को खासतौर पर लिया, इसके लिए उनकी शुक्रगुजार हूं और भारत देश को नमन करती हूँ!

हरमिंदर खोजी

 नशा तस्करी के मामले में 11 साल की सजा पूरी करने वाली पाकिस्तान की महिला फातिमा की बेटी हिना अपनी मां तथा मौसी के साथ पाक रवाना हो गई.हिना की मां फातिमा व मौसी मुमताज करीब 11 साल पहले भारत आई थीं और इस दौरान हिना की नानी राशिदा बीबी भी इनके साथ थीं लेकिन इन तीनों को नशा तस्करी के मामले में अटारी सीमा पर गिरफ्तार कर लिया गया था। जिस समय इन तीनों की गिरफ्तारी हुई उस समय फातिमा गर्भवती थी और लुधियाना की जेल में ही फातिमा ने हिना को जन्म दिया. पापा इंतजार कर रहे हैं, जीजू ने फोन, घड़ी व फ्रॉक खरीद रखी है 

प्रश्र: पाकिस्तान में कौन इंतजार कर रहा है?
हिना: मेरे पापा, मेरी बहनें, मेरे भाई, मेरे मामू और मेरे जीजू मेरा लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. वे मुझे जाने-जिगर और दिल का टुकड़ा कहकर याद करते हैं.
प्रश्र: आपको पाकिस्तान में कौन-से तोहफे मिलेंगे?
हिना: मेरे जीजू ने मेरे लिए फोन और घड़ी लेकर रखी है और मेरी बहनों ने मेरे लिए फ्राकें खरीदी हुई हैं. वे मेरा इंतजार कर रहे हैं और मुझे जाते ही ये सारे तोहफे दिए जाएंगे.
प्रश्र: कभी पापा या अन्य रिश्तेदारों से बात की है?
हिना: नहीं, मैंने उन्हें सिर्फ तस्वीरों में देखा है. मेरी मां जेल से मेरी तस्वीरें चिट्ठी के साथ पापा को भेजती रही है और वहां से मेरे पापा मेरी बहनों, भाइयों, जीजू व बाकी रिश्तेदारों की तस्वीरें मुझे भेजते रहे हैं। इन तस्वीरों के जरिए ही मुझे अपने अब्बू व अन्य रिश्तेदारों की पहचान हुई है.
प्रश्र: बड़ी होकर क्या बनोगी?
हिना: मैं डाक्टर बनूंगी, पुलिस नहीं बनूंगी. पुलिस बनी तो लोगों को जेल में डालना पड़ेगा, उन्हें परिवार से अलग करना पड़ेगा, लोग बददुआएं देंगे. डाक्टर बनी तो लोगों का इलाज करूंगी, उनकी दुआ लगेगी.
प्रश्र: भारत में क्या-क्या सीखा?
हिना: मैंने यहां पंजाब की संस्कृति सीखी. मुझे बोलियां आती हैं, गिद्दा आता है.
प्रश्र: कोई बोली सुनाओ?
हिना: हरे-हरे घा उत्ते सप फूकां मारदा, भज्जो वीरो वे बापू कल्ला मज्जां चारदा.
प्रश्र: दोबारा भारत आना चाहोगी?
हिना: नहीं, मेरा परिवार पाकिस्तान में है, मैं भारत नहीं आऊंगी. मेरे यहां पर बहुत सारे दोस्त हैं. मैं चाहूंगी कि वे मुझे मिलने पाकिस्तान आएं.
फातिमा जब भारत आई तो गर्भवती होने के साथ-साथ पाकिस्तान में उसके 2 बेटे व 4 बेटियां थीं. बेटियों की उम्र 2 साल, 8 साल, 9 साल व 10 साल थी जबकि बेटों की उम्र 3 5 साल थी. फातिमा के जेल में रहते हुए इनमें से 2 बेटियों की शादी हो गई है. फातिमा की बड़ी बेटी ने 2 व छोटी बेटी ने एक बेटी को जन्म भी दे दिया है परन्तु फातिमा ने अपनी पोतियों का मुंह भी नहीं देखा. फातिमा आज पहली बार पाकिस्तान में जाकर अपनी पोतियों का मुंह देखेगी. लिहाजा वह भी रिहाई से पहले भावुक हो गई.
फातिमा के जेल में रहते ही भारत में उसकी मां राशिदा बीबी की मौत हुई और जब इशिता की लाश पाकिस्तान पहुंची तो हार्ट अटैक से फातिमा के पिता की भी मौत हो गई. फातिमा कहती है कि भारत की जेल में उसके साथ बहुत अच्छा सलूक हुआ लेकिन उसकी जिंदगी का एक हिस्सा भारत की जेल में कट गया और इस दौरान उसने अपने मां-बाप को भी गंवा दिया. लिहाजा मैं दोबारा भारत नहीं आना चाहूंगी. फातिमा ने अपनी बेटी हिना को जेल में साथ रखने के लिए सहयोग देने वाली एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा और सजा के साथ हुए जुर्माने की रकम अदा करने वाले नवतेज सिंह गग्गू का भी धन्यवाद किया और कहा कि इन लोगों की मदद के बिना उनकी जेल से रिहाई बहुत मुश्किल थी.
फातिमा और हिना के साथ जेल काटने वाली उसकी मौसी मुमताज ने कहा कि यहां सीमा पर एक कंटीली बाड़ तो लगी है लेकिन खून दोनों तरफ एक जैसा है, लिहाजा दोनों देशों के रिश्ते सुधरने चाहिएं. दोनों देशों की जेलों में बंद ऐसे कैदी रिहा किए जाने चाहिएं जिनकी सजा पूरी हो चुकी है ताकि वे अपने परिवारों से मिल सकें. 

(सभार-पंजाबकेसरी) 

SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

1 टिप्पणियाँ:

  1. इस बात में कोई दो राय नहीं कि देश के बंटवारे को लेकर सीमा पर कंटीली बाड़ तो लगी है लेकिन खून दोनों तरफ एक जैसा ही है, लिहाजा दोनों देशों के रिश्ते सुधरने चाहिएं. दोनों देशों की जेलों में बंद ऐसे कैदी रिहा किए जाने चाहिएं जिनकी सजा पूरी हो चुकी है ताकि वे अपने परिवारों से मिल सकें.
    इस ब्लाग के विषय में आपकी राय-सुझाव सर्वप्रिय है.धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

crimestopindia ब्लॉग में हम अपराध से जुड़ी सच्ची कहानियाँ प्रकाशित करते हैं.आशा है यह ब्लॉग आपको पसन्द आया होगा.आप ब्लॉग को लाईक और शेयर जरुर करे. काहानियों से सम्बन्धित अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें ताकि हम अपने ब्लॉग को आपके रूचिकर बना सकें.