विधाता
का यह कैसा मज़ाक...?
रजनी को सुबह-सुबह अपना सिर
खुजाने की भी फुर्सत नहीं मिलती थी.सुबह उठते ही सबसे पहले 10 वर्षीय मानव और 6
वर्षीय शिवम् को तैयार कर स्कूल भेजना, उसके बाद अपने पति का टिफिन तैयार कर
उन्हें काम पर भेजना, बाद में दोपहर का खाना बना कर घर की साफ सफाई करते हुए उसे
12 बज जाते थे तभी बच्चों के स्कूल से लौटने का समय हो जाता था,फिर वह बच्चों को
खाना आदि देने में व्यस्त हो जाती थी. कुल मिला कर रजनी को दिनभर घर के कामों से
फुर्सत ही नही मिलती थी कि वह घड़ी दो घड़ी आराम कर सके!
रजनी-नियति को यही मंजूर था.
दिनांक-25 सितम्बर 2017 की सुबह 7-30 बजे अपने समय
अनुसार रजनी ने अपने दोनों बच्चों मानव और शिवम को रोजाना की तरह तैयार कर स्कूल
भेजा था. दोनों बच्चे सनातन धर्म कन्या पाठशाला रूप नगर चले गए थे और रजनी अपने घर
के कामों में व्यस्त हो गई थी. मानव और शिवम् सुबह स्कूल जाने के बाद दोपहर करीब 1
बजे तक स्कूल से लौट आते थे पर उस दिन जब वह दोपहर 2 बजे तक भी दोनों भी स्कूल से
नहीं लौटे तो रजनी का चिंतित होना स्वभाविक था. वह गली में बच्चों को तलाश करने
लगी. अपनी बड़ी बेटी जिया और पड़ोसी औरतों को साथ ले कर वह बच्चों के स्कूल में भी
गई. पर टीचर्स की बात सुनकर तो जैसे उसके पैरों तले से जमीन ही खिसक गई थी. घबराहट
के मारे उसका कलेजा मुंह को आ गया था. उस की समझ में नही आ रहा था ऐसे में वह अपने
जिगर के टुकड़ों को कहां ढूंढ़े ? स्कूल टीचर्स ने बताया था कि दोनों भाई आज स्कूल
आये ही नहीं थे. जब कि उसने स्वंय सुबह दोनों बच्चों को अपने हाथों तैयार कर स्कूल
जाने के लिए गली के नुक्कड़ तक छोड़ा था. यदि वह स्कूल नही आये तो फिर गए कहाँ ? शाम
तक बच्चों का जब कहीं कोई पता ठिकाना नहीं चला तो गली मोहल्ले के लोगों के साथ
थाना रूप नगर जा कर अपने दोनों बच्चों मानव और शिवम के लापता होने की सूचना दी.
रजनी की इत्लाह को थाना पुलिस ने डीडी नम्बर-041 पर दर्ज कर दोनों बच्चों की तलाश
शुरू कर दी थी साथ ही इस केस के तफ्तीशी अफसर एएसआई मंजीत सिंह ने रजनी से दोनों
लापता बच्चों की फोटो भी मंगवा ली थी और बच्चों के लापता होने की सूचना थाना
प्रभारी इंस्पेक्टर राज पाल सिंह को देने के बाद आल इंडिया लेवल पर वायरलेस मैसेज
करवा दिया था.
एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों के लापता हो जाने के कारण शहर में तनाव
था. लगातार दो दिनों तक पुलिस और बच्चों के घर वालों के तलाश करने पर भी जब बच्चों
का को सुराग नहीं मिला तो बच्चों के परिजनों के साथ मिलकर मोहल्ले वालों ने ठाणे
का घेराव कर वहां हंगामा खड़ा कर दिया था. लोगों का कहना था कि दोनों बच्चों को
लापता हुए आज तीसरा दिन है पर पुलिस इस मामले को गम्भीरता से नहीं ले रही है. 8 और 10 वर्ष के बच्चे अपने घर से दूर इतनी देर
नही रह सकते है किसी ने बच्चों का अपहरण किया है.
मानव और शिवम् –किस जुर्म की मिली सजा...?
पुलिस इस मामले में अपनी विभिन्न थयूरियों पर काम शुरू कर दिया था. डीएसपी मनवीर सिंह बाजवा ने ऊंचा खेड़ा में दलीची गली में बच्चों के घर का दौरा भी किया तथा पड़ोस में पूछताछ की थी क्योकि रजनी उस मोहल्ले ऊँचा खेडा में मात्र 2 महीने
पहले ही रहने आई थी सो उसके बारे में मोहल्ले वालों को कोई अधिक जानकारी नहीं थी
इसके पहले रजनी मीरा चौक के पास किराए पर रहती थी. पुलिस ने सनातन धर्म कन्या पाठशाला स्कूल का भी दौरा किया जहां दोनों बच्चे पढ़ते थे और वहाँ के
स्टाफ से पूछताछ की. आगे की करवाई में पुलिस ने बच्चों के घर से लेकर स्कूल तक के इलाके में सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर चेक की थी. दोनों भाई सोमवार सुबह 8 बजे के बाद स्कूल के लिए निकले थे। परिवार के मुताबिक दोनों स्कूल के लिए देरी से निकले। गली में लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों भाइयों मानव तथा शिवम के स्कूल जाने की फुटेज रिकार्ड मिली है।
पुलिस दोनों भाई सोमवार सुबह 8 बजे के बाद स्कूल के लिए निकले थे। परिवार के मुताबिक दोनों स्कूल के लिए देरी से निकले। गली में लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों भाइयों मानव तथा शिवम के स्कूल जाने की फुटेज रिकार्ड मिली है। पुलिस को स्कूल तक जाने के रास्ते में कहीं भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाई है, क्योंकि मोहल्ला होने के कारण किसी ने भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए हैं। जो एक सीसीटीवी कैमरा निरंजन दूध वालों के घर वाली लाइन में लगा था, उसे घर के मालिक ने किसी कारण से उतरवा दिया सो स्कूल तक जाने के रास्ते में कहीं भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाई थी , क्योंकि मोहल्ला होने के कारण किसी ने भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए हैं।
अब तक की छानबीन
में पुलिस को एक बात समझ नहीं आ रही थी कि आखिर बच्चों के अपहरण का कारण किया है.
क्योंकि बच्चे गरीब घर के थे और ना ही अभी तक कहीं से फिरौती के लिए ही कोई फोन या
सन्देश आया था. बच्चों की माँ रजनी के बयान पुन दर्ज किये गए साथ ही उससे यह भी
पूछा गया कि इस मामले में उस को किसी पर सन्देह है तो वह उसका नाम बताये. रजनी ने
बताया कि वह पहले मीरा बाई चौक के पास एक मकान में किराए पर रहती थी तो तभी उसकी
मुलाकात गाँव फुल खुर्द निवासी रमेश नामक व्यक्ति से हुई थी रमेश ने उसे काम पर
लगवाया था. कुश दिनों बाद एक ही जगह कम करने के कारण दोनों में दोस्ती हो गई थी और
रमेश ने उसके सामने शादी करने का प्रस्ताव रखा था. इस शादी के लिए रजनी शायद तैयार
भी हो जाती पर उसे यह बात पता चल गई थी कि रमेश पहले से ही शादी शुदा है तो रजनी
ने इस शादी से साफ इंकार कर दिया था यह तक कि उसने वहां से काम भी छोड़ दिया था और
अपना किराये का मकान मीरा चौक से खली कर के यह मोहल्ला ऊँचा खेडा के मकान नंबर
-1004 में कमरा किराये पर ले लिया था. रजनी के अनुसार शादी से इंकार करने के कारण
रमेश बहुत चिढ़ गया था और उसने धमकी दी थी कि वह उसे छोड़े गा नहीं उसे हर हाल में
हासिल कर के रहेगा इस के लिए उसे चाहे उसे कुछ भी करना पड़े वह करेगा.

रजनी के इस नये बयान
के आधार पर एएसआई मंजीत सिंह की टीम ने गाँव फुल खुर्द के रमेश को हिरासत में लेकर
पूछताछ की पर वह इस मामले में बेकसूर निकला था उसका बच्चों के अपहरण से दूर तक भी
कोई वास्ता नहीं था. रमेश ने यह मन था कि वह रजनी से शादी करना चाहता था और जब
रजनी ने शादी करने से इंकार किया तो उसे बहुत गुस्सा आया था और क्रोधवश ही उसने
धमकी दी थी. इस कारण पूछताछ कर सच्चाई जानने के बाद रमेश को शहर ना छोड़ने की
चेतावनी देकर भेज दिया गया था.
पुलिस से इस काम पर
अपने मुखबिर भी लगा रखे थे. दिनांक 28 तारीख को थानेदार मंजीत सिंह को खबर मिली कि
बच्चों के लापता होने वाले दिन 25 तारीख दोनों बच्चों को अशोक कुमार उर्फ़ पिंटू के
साथ जाते देखा गया था. पिंटू महिला के साथ लिव इन में रहता था. यह खबर मिटे ही
थानेदार मंजीत सिंह ने तुरंत पिंटू को अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी.
पूछताछ के दौरान बार-बार वह झूठ बोल कर कहता रहा था कि उसने पिछले एक महीने से
बच्चों को नहीं देखा है. जब मंजीत सिंह ने थोडा सख्ती से काम लिया तो वह जल्दी टूट
गया और उसने मानव और शिवम दोनों बच्चों के अपहरण करने की बात स्वीकारते हुए बताया
कि बच्चों का अपहरण करने के बाद उसने दोनों बच्चों को दरिया में बहा कर उनकी हत्या
कर दी थी. दो मासूम बच्चों की हत्या की खबर से शहर में तनाव फैल गया लोग पिंटू को
उनके हवाले करने की मांग करने लगे थे. बहरहा लोगों की भीड़ को शांत करने के बाद
पिंटू को अदालत में पेश कर दो दिनों के दिनांक 30 सितम्बर तक रिमांड पर ले लिया
गया था.रिमांड के दौरान पिंटू की निशानदेही पर थानेदार मंजीत सिंह ने पुलिसपार्टी
के साथ रूपनगर-लोदीमाजरा मार्ग पर सतलुज के दरिया की तरफ वाले जंगल को घेर लिया था.
गोताखोरों ने 6 घंटे की कड़ी मशक्त के बाद दोनों बच्चों की लाशों को खोज निकला
था.दोनों लाशे काफी हद तक गल चुकी थी. अपने जिगर के टुकड़ों की लाशें देखकर रजनी
पछाड़ खा गिर पड़ी थी जिसे लोगों ने तुरंत सम्भाल कर डाक्टर के पास पहुंचाया
था.दोनों लाशों का पंचनामा बना कर पोस्मार्टम के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया
था. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार दोनों बच्चों की मौत पानी में डूबने के ही
कारण हुई थी. फेफड़ों में अधिक पानी भर जाने के कारण दोनों बच्चों के फेफड़े डेमिज
हो गए थे.
बच्चों की लाशें बरामदकरते गोताखोर
रिमांड के दौरान
अशोक उर्फ़ पिंटू से हुई पूछताछ में मानव और शिवम दोनों भाइयों की हत्या की जो
कहानी प्रकाश में आई वह इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली हकीकत थी. रजनी हरियाणा
के पेहवा की रहने वाली थी. सन 2000 में उसकी शादी हरियाणा करनाल निवासी बब्ब्लू
उर्फ़ बल्लू के साथ हुई थी. शादी के 2 वर्ष बाद उसके यहाँ एक बेटी ने जन्म लिया
जिसका न जिया रखा गया था. जिया के जन्म के कुछ समय बाद ही अचानक किसी दुर्घटना में
बल्लू की मौत हो गई थी. भरी जवानी में रजनी विधवा हो गई थी, पति का सहारा छिन्न
गया ऊपर से नवजात जिया के पालन पोषण की जिमेदारी सामने अपना मुंह बाहे आन खड़ी हुई
थी ऐसे में बल्लू के परिजनों ने ही रजनी की दूसरी शादी अपने एक रिश्तेदार युवक
सतीश के साथ करवा दी थी. सतीश दिल्ली में रहता था और रजनी की बेटी जिया की पूरी
जिमेदारी उठने को तैयार था. बहरहाल सतीश के साथ ब्याह कर रजनी दिल्ली चली आई थी.
दोनों पति पत्नी बहुत खुश थे और एक दुसरे का बहुत ख्याल रखते थे. शादी के एक वर्ष
बाद सतीश और रजनी को एक पुत्र हुआ जिसका नाम उन्होंने मानव रखा था. यह आज से 10
वर्ष पहले की बात है.
सतीश और रजनी की
शादी को अभी मात्र 3 वर्ष ही बीते थे. मानव अभी मात्र 2 वर्ष का था और जिया 5 वर्ष
की थी की सतीश भी रजनी को इस निर्मोही संसार में अकेला छोड़ इस दुनिया से अलविदा कह
गया था. सतीश की मौत के बाद तो रजनी जैसे टूट कर बिखर गई थी. उसकी समझ में नहीं आ
रहा था कि उसके साथ विधाता का यह कैसा मजाक है.रजनी एक बार फिर से बेसहारा थी.
सतीश की मौत के लगभग 1 वर्ष बाद किसी दूर के रिश्तेदार के कहने पर रजनी ने ना
चाहते हुए भी तीसरी बार शादी की थी. वैसे उसका कहना था की उसके कर्मों में पति का
सुख है ही नहीं, यदि सुख होता तो पहले पति से ही मिल सकता था.जब पहली शादी से सुख
नहीं मिला-दूसरी शादी से भी सुख नसीब नहीं हुआ तो अब तीसरी शादी के बाद किया
गारेंटी हे की वह सुखी रह पाएगी.और हुआ भी यही था.
सतीश की मौत के बाद रजनी की तीसरी शादी बलदेव सिंह वासी गाँव रहीमाबाद, थाना माछीवाड़ा- फतेहगढ़ साहब के साथ हुई थी। उससे बेटा शिवम पैदा हुआ. पहले दो पतियों
की तरह रजनी और बलदेव के बीच सामजस्य नही बैठा था. बलदेव नशा वगैरा भी करता था
दोनों के बीच लड़ाई झगड़ा रोजमर्रा का काम था सो रोज की झिकझिक से परेशान होकर रजनी
ने बलदेव का घर छोड़ दिया और अपने तीनों बच्चों के साथ किराए का कमरा लेकर अलग रहने
लगी थी. अपने बच्चों के परवरिश के लिए उसने मेहनत मजदूरी करना शुरू कर दिया था. इस
बीच जिया की शदी भी उसने बाल्मीक मुहल्ला रूप नगर निवासी सचिन के साथ कर दी थी.
जिया अपने पति के साथ अपने घर में खुश थी.
अशोक कुमार उर्फ पिंटू पुत्र बृजमोहन गांव खरोदा जिला मेरठ (उप्र) हाल
निवास गांव बमेटा जिला बमेटा जिला गाजियाबाद (उप्र) का रहने वाला है। जबकि रजनी
पिंटू को अपना पति बताकर अपने साथ रखे हुए थी. वो रजनी के साथ पिछले एक साल से लिव इन रिलेशन में रजनी
के घर पर ही रहता है.
पिंटू सनसिटी में राजमिस्त्री का काम करता है और सन 2015 के अंत में उसकी मुलाकात
रजनी के साथ हुई थी जो जल्द ही दोस्ती में बदल गई थी.वैसे भी औरत कुछ चाहे या ना
चाहे, या किसी को अपनी चाहत दिखाना भले उसकी कोई मजबूरी रही हो पर हमारा पुरुष
समाज अकेली और को देख कर हर समय उस पर झपटने को तैयार रहता है, यदि वह किसी
दुखी-अबला की कोई सहायता भी करता है तो उसके पीछे भी उसका निहित स्वार्थ ही होता
है. बहरहाल रजनी और पिंटू के आपस में सम्बन्ध बन गए और वे दोनों लिव-इन में एक साथ
रहने लगे थे. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था पर पिछले दो महीनों से दोनों के बीच शादी
करने को लेकर जबरदस्त झगड़ा चल रहा था.
दरअसल पिंटू रजनी के साथ शादी करके गाजियाबाद जाकर
बसना चाहता था. यह बात तो ठीक थी और रजनी भी इस बात के लिए तैयार थी पर पिंटू का
यह भी कहना था कि दो बच्चे मानव और शिवम् तो हैं ही पर उसे भी अपना एक बच्चा
चाहिए. रजनी इस बात के लिए तैयार नहीं थी, वह और बच्चा पैदा नहीं चाहती थी. उसका
कहना था अपने जिस-जिस पति से उसने बच्चा पैदा किया है वोही उसे छोड़ कर इस संसार से
विदा हो गया था और बच्चों के पालन पोषण की जिमेदारी उसके कन्धों पर डाल जाता था.
इसी बात को लेकर दोनों में दिन रात क्लेश होने लगा था. रजनी किसी भी सूरत में
पिंटू हो या कोई और वह किसी के भी बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती थी.
रजनी से अपनी बात मनवाने के लिए पिंटू के दिमाग में एक शैतानी योजना ने
जन्म लिया और उसने तुरंत बिना कुछ सोचे समझे उस पर अमल कर डाला था. पिंटू ने सोचा
रजनी के और बच्चा न पैदा करने का कारण उसके अपने दो बच्चे मानव और शिवम है, यदि यह
दोनों बच्चे ही रस्ते से हटा दिए जाएँ तो रजनी ऐसी सूरत में उसकी बात मान कर बच्चा
पैदा जरूर करे गी. दिमा ग में यह शैतानी खिचड़ी पकने के बाद अगले दिन ही दिनांक-25
सितम्बर की सुबह बच्चों को उस समय अपने साथ ले गया था जिस समय रजनी मानव और शिवम
को स्कूल जाने के लिए अपनी गली के नुक्कड़ पर छोड़ कर आई थी. पिंटू उस समय वहीं छुपा
हुआ था. जैसे ही रजनी ने बच्चे तैयार करके स्कूल भेजे तो पिंटू भी बच्चों के पीछे
घर से चला गया. पिंटू ने अपने दोस्त का मोटरसाइकिल मांगकर बच्चों को साथ लेकर
सतलुज दरिया किनारे सदाव्रत जंगल में ले जाकर पानी में डुबोकर मार दिया. और चुपचाप
वहां से अपने काम पर चला गया था. पिंटू रजनी के चरित्र पर शक करता था और अपना
गुस्सा बच्चों पर मारपीट करके निकलता था.
तमाम पुलिस करवाई पूरी होने के बाद और रिमांड अवधि समाप्त होने पर थानेदार
मंजीत सिंह ने दिनांक- 30-9-2017 को दोनो भाइयों की हत्या के अपराध में आशिक कुमार
उर्फ़ पिंटू को पुन अदालत में पेश किया जहाँ अदालत के आदेश पर उसे जिला कारागार भेज
दिया गया था.
(पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा
का रुपान्तरण)
--साहिल कपूर






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