*गुमशुदा-एक सत्यकथा
सतीश
जाते समय अपनी पत्नी को बता कर गया था कि वह बुआ के घर एक रात रुककर अगली सुबह घर
लौट आएगा, पर वह नहीं लौटा था. बल्कि नहर किनारे उसकी बाईक लावारिस हालत में पड़ी मिली
थी और सतीश का कहीं कोई अता-पता नहीं था. तो क्या यह महज़ एक गुमशुदगी का मामला था
या फिर इसके पीछे की कहानी कुछ और थी. आइये देखते हैं इस कहानी में.
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वैसे तो सतीश कुमार मूलतः थाना जोधा
अंतर्गत गाँव धूलकोट का निवासी था, पर अपनी शादी के बाद उसने धूलकोट छोड़कर
लुधियाना की तहसील खन्ना के गाँव रामगढ सरदारों में रहना शुरू कर दिया था. अर्सा
करीब 14-15 वर्ष पहले उसकी शादी रामगढ सरदारों निवासी कालू राम की पुत्री सुखविंदर
कौर के साथ हुई थी. सतीश के पिता बलवंत सिंह के पास बहुत मामूली सी ज़मीन थी जिसपर
वह और उनका छोटा बेटा खेती कर बड़ी मुश्किल से अपना गुजर बसर करता था. सतीश शादी के
पहले से ही किसी फैक्ट्री में पलम्बर का काम करता था और शादी के बाद भी करता रहा
था. शादी के बाद सतीश और सुखविंदर 3 बच्चों के माता-पिता बने थे. बच्चों को सतीश
ने प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कूल में दाखिल करवा दिया था. वह इतना कमा लेता था कि
जिससे उसके घर का गुज़ारा ठीक ठाक चल रहा था. किसी चीज़ की कोई कमी ना थी और दोनों
पति-पत्नी अपने बच्चों के साथ खुश थे. इसी बीच सतीश की नौकरी हिमाचल के बिजौरा की
गैबन कंपनी में लग गई थी. गैबन कंपनी से हर माह सतीश को एक लगी- बंधी मोटी तनख्वाह
मिलती थी. जिससे घर के हालातों में काफी सुधार आने लगा था.सतीश पिछले 10 वर्षों से
गैबन कंपनी हिमाचल में नौकरी कर रहा था और हर चार-छह माह बाद कुछ दिनों के लिए
अपने गाँव छुटी पर आया करता था. इस बार वह 30 अगस्त को छुट्टी पर अपने गाँव आया था. अपने घर पर बीवी
बच्चों के साथ एक दिन रुककर अगले दिन दिनांक 31 अगस्त को वह अपनी बुआ कौशल्या से
मिलने उसके गाँव थाना जोधा घुंगराणा पहुंचा था.
पुलिस हिरासत में दोषी प्रेमी प्रेमिका
सतीश
जाते समय अपनी पत्नी को बता कर गया था कि वह बुआ के घर एक रात रुककर अगली सुबह
यानि 1 सितम्बर को घर लौट आएगा. पर वह नहीं लौटा था. सतीश की पत्नी सुखविंदर को
उसकी चिंता हुई. उसने ने जल्दबाजी में सतीश को उसके यारों दोस्तों और कुछ सम्भावित
ठिकानों पर ढूंढ़ा. जब सतीश कहीं नहीं मिला तो उसने दिनांक 2 सितम्बर को थाना मलौद,
खन्ना में सतीश की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी. पोलिस ने सतीश का फोटो और
बाईक नम्बर लेकर उसकी तलाश शुरू कर दी थी. सतीश बुआ के घर अपनी बाईक पर गया था.
पुलिस बड़ी तत्परता से सतीश की तलाश में जुट गई थी. सतीश को ढूंढ़ने के लिए पुलिस ने
हर सम्भव प्रयास किये पर सतीश का कोई सुराग नहीं मिला था. इस घटना के एक सप्ताह
बाद पुलिस को चमिंडा नहर के किनारे सतीश की बाईक लावारिस हालत में पड़ी मिल गई थी.
सतीश की बाईक मिलने से पुलिस के सामने कई सवाल खड़े हो गये थे. क्या सतीश ने नहर
में कूदकर आत्महत्या तो नहीं कर ली थी या फिर किसी ने उसकी हत्या कर लाश नहर में
फेंक दी थी. सम्भावनाएं कई थी पर फिलहाल पुलिस के सामने अपने ही किसी प्रश्न का
उत्तर नहीं था. अबतक सतीश के गायब होने और नहर किनारे उसकी बाईक मिलने की बात
आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी. नहर किनारे बाईक मिलने से मामला गंभीर हो गया
था. अब यह मामला केवल सतीश की गुमशुदगी का नहीं रह गया था. यह एक ब्लाइंड हत्या का केस था. इस लिए
मामले की गम्भीरता को देखते हुए अब इस केस की कमान खुद थाना मलौद एसएचओ थानेदार
नछत्तर सिंह ने अपने हाथ में लेकर नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी थी. उन्होंने दो
टीमें बना कर इस काम पर लगा दी थी. खुद भी उन्होंने सतीश की पत्नी सुखविंदर कौर
तथा गाँव के कई लोगों से सतीश के विषय में पूछताछ की थी. सतीश का चरित्र एकदम
बेदाग मिला था. वह अपने बीवी बच्चों के अलावा किसी ओर ध्यान नहीं देता था. नछत्तर
सिंह ने दुश्मनी वाला एंगल भी टटोलकर देखा था. पर सतीश जैसे भले आदमी की किसी से
दुश्मनी तो किया कभी तू तू – मैं मै भी नहीं हुई थी. पुलिस के मुखबिर भी कहीं से
कोई खबर निकाल क्र नहीं लाये थे. इस बीच सतीश की गुमशुदगी को और उसकी बाईक को मिले
लगभग दो महीने होने वाले थे. अब इस केस पर थाना मलौद के एस.एच.ओ. थानेदार नछत्तर
सिंह के अलावा डी.एस.पी. (आई) खन्ना जगविन्द्र सिंह चीमा के नेतृत्त्व में डी.एस.पी. पायल रछपाल सिंह ढींडसा, सी.आई.ए. स्टाफ खन्ना के इंचार्ज इंस्पैक्टर बलजिन्द्र सिंह भी काम
कर रहे थे. फिर एक दिन पुलिस के हाथ इस मामले को लेकर एक ठोस सुराग हाथ लगा था.
यूं समझो कि सुराग खुद सामने से चलकर आया था.
प्रेसवार्ता के दौरान पुलिस अधिकारी
सतीश
की बुआ जो कि पिछले दो महीनों से अपनी किसी रिश्तेदारी में दूसरे शहर गई हुई थी,
जब अपने गाँव वापिस लौटी तो उसे अपने भतीजे सतीश के लापता होने और उसकी बाईक नहर
किनारे मिलने की बात पता चली थी. लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे थे.
कौशल्या को यह भी पता चला था कि उसकी पत्नी सुखविंदर कौर ने पुलिस थाना में यह
ब्यान देकर रिपोर्ट भी दर्ज करवा रखी थी कि सतीश अपनी बुआ और परिजनों से मिलने
गाँव रामगढ सरदारों गया था फिर लौट कर नहीं आया था. जबकि बुआ कौशल्या यह बात अच्छी
तरह से जानती थी कि सतीश उसे और अपने पिता को मिलने के बाद ही अगले दिन घर लौट गया
था. और घर पहुंचकर उसने उन्हें फोन भी किया था. इसका मतलब सुखविंदर ने पुलिस के
सामने झूठ बोला था. और यह झूठ उसने क्यों बोला था यह बात भी कौशल्या अच्छी तरह से
जानती थी. उसे पक्का विश्वास हो गया था कि शायद अब उसका भतीजा इस दुनियां में नहीं
रहा है. फिर भी सच्चाई का पता लगाने के लिए उसने थाने जाना उचित समझा था. थाने
जाकर कौशल्या ने एसएचओ नछत्तर सिंह के सामने यह रहस्य प्रकट किया था कि सुखविंदर
के किसी बलजिंदर नामक युवक के साथ अवैध सम्बन्ध है, और सतीश भी यह बात अच्छी तरह
से जनता था. इस बार छुट्टियों में जब वह उससे मिलने आया था तब भी बता रहा था.
‘’बुआ
सुखविंदर की आदतों में सुधार नहीं आ रहा है. कहीं उसकी आदतों की वजह से बच्चों का
भविष्य ना खराब हो जाये.’’
तब
मैंने उसे सांत्वना देकर कहा था कि चिंता ना करे, वाहेगुरु सब ठीक कर देंगे. कौशल्या
की बातें सुनने के पश्चात नछत्तर सिंह ने तुरन्त सुखविंदर को पूछताछ के लिए अपनी
हिरासत में ले लिया था. वह इस मामले में अपनी अनभिज्ञयता प्रकट करती रही थी. उलटे
उसका कहना था कि पुलिस जब उसके पति को तलाशने में नाकाम हो गई है तो उल्टे उसी पर
इल्जाम लगा रहे है. पर जब लेडी हवलदार सुरजीत कौर ने थोड़ा सख्ती से काम लिया तो
सुखविंदर कौर ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया था कि उसने अपने प्रेमी के साथ
मिलकर सतीश की हत्या कर दी थी.
पुलिस हिरासत में हत्यारी पत्नी सुखविंदर कौर
सतीश
की बुआ कौशल्या देवी पत्नी राज निवासी घुंगराणा थाना जोधां ने थाना मलौद में पुलिस
को जो बयान दर्ज करवाए थे वह इस प्रकार थे. उसके भतीजे सतीश कुमार पुत्र बलवंत
सिंह निवासी धूलकोट का विवाह सुखविन्द्र कौर पुत्री कालू राम निवासी रामगढ़
सरदारों के साथ हुआ था व उनके 3 बच्चे
थे. उसने पुलिस को बताया कि विवाह के बाद सतीश कुमार अपने परिवार सहित अपने ससुराल
गांव रामगढ़ सरदारां में रहने लगा था. करीब 9-10 सालों
से सतीश कुमार गैबन कंपनी बिजोरा (हिमाचल प्रदेश) में प्लम्बर का काम करता था. 30 अगस्त को सतीश कुमार जब छुट्टी पर आया
तो अपने मोटरसाइकिल पर सवार होकर उसके परिवार को मिलने के लिए गांव घुंगराना में
गया था और रात रहकर दूसरे दिन वापस अपने गांव रामगढ़ सरदारां आ गया था. कौशल्या
देवी ने पुलिस को बताया कि उसको बाद में पता लगा कि सतीश कुमार की पत्नी
सुखविन्द्र कौर ने अपने पति की गुमशुदगी संबंधी थाना मलौद में रिपोर्ट दर्ज करवाई
है और सतीश कुमार का मोटरसाइकिल गांव चमिंडा नहर के समीप से मिल गया था. उसने
बताया कि उसको पक्का यकीन हो गया कि सुखविन्द्र कौर ने अपने प्रेमी बलजीत सिंह से
मिलकर सतीश कुमार का कत्ल करके उसके शव को खुर्द-बुर्द कर दिया है क्योंकि जिस दिन
सतीश कुमार उनके पास रात रहकर आया था, उस
वक्त उसने अपनी पत्नी सुखविन्द्र कौर व बलजीत सिंह के प्रेम संबंधों बारे उसे
बताया था. और वह बड़ा दुखी था. कौशल्या के इन बयानों पर थाना मलौद में दिनांक 20
अक्तूबर 2018 को अपराध संख्या 98/18 पर एक नई एफआईआर आईपीसी की धारा – 302- 201-
182/ 34 पर दर्ज की गई और सुखविंदर की निशानदेही पर उसी दिन थाना जोधा के गाँव
कालिख से सुखविंदर के प्रेमी बलजीत सिंह पुत्र बग्गा सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया
था. और उसी दिन सुखविंदर और बलजीत को अदालत में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर
लिया गया था. रिमांड के दौरान प्राथमिक पूछताछ में बलजीत ने अपना जुर्म कबूल करते
हुए पुलिस को बताया कि सुखविंदर कौर और उसके बीच पिछले 5-6 वर्षों से नाजायज़
सम्बन्ध थे. और वह रोज रात को सुखविंदर के घर पर उसे मिलता था. सुखविंदर, सतीश के
पास नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वह काम के सिलसिले में कई-कई महीने घर के बाहर
रहता था. ऐसे में सुखविंदर कौर की अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं होती थी. इसी
लिए उसने अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बलजीत से सम्बन्ध बनाये थे
और अब सतीश उसके रस्ते का कांटा था जिसे हटाने का वह पिछले काफी समय से प्रयास कर
रहे थे. घटना वाली रात 1 अगस्त को वह जब सुखविन्द्र कौर को मिलने के लिए रात को उसके
घर गया तो इतेफाकन सतीश कुमार घर में ही मौजूद था जिसकी जानकारी उसको नहीं थी.
सतीश कुमार उसे देखते ही भड़क उठा था फिर
सतीश और बलजीत सिंह दोनों में हाथापाई हो गई और सुखविन्द्र कौर ने अपने प्रेमी बलजीत
सिंह का साथ देकर झगड़ा छुडवाने का नाटक करते हुए सतीश कुमार की दोनों बाजुएँ पकड़
ली थी. बलजीत को मौका मिल गया था, उसने सतीश की जमकर पिटाई की और फिर उसे ज़मीन पर
पटक दिया था इस बीच सुखविंदर ने सतीश की टांगें पकड़ लीं थी और बलजीत सिंह ने सतीश
कुमार के मुंह पर कपड़ा रखकर उसका गला घोंट कर उसको मौत के घाट उतार दिया था. सतीश
की हत्या करने के पश्चात थकान उतारने के लिए पहले दोनों ने अपनी वासना की प्यास को
शान्त किया और उसके बाद सतीश की लाश को उसी के मोटरसाइकिल पर रखकर गांव चमिंडा की
नहर के पास खुर्द-बुर्द करने की नीयत से नहर में फैंक दी तथा मोटरसाइकिल को वहीं छोड़ दिया था. सतीश की लाश
बरामद करने के लिए पुलिस ने दूर-दूर तक जाल डलवाया और गोताखोरों की भी मदद ली पर
सतीश की लाश अबतक बरामद नहीं हुई थी. पोलिस अब भी लाश की तलाश जरी रखे हुए है.
तमाम पुलिस करवाई पूरी करने के बाद और रिमांड की अवधि समाप्त होने पर सुखविंदर कौर
और बलजीत सिंह को अदालत में पेश किया गया जहाँ अदालत के आदेश पर दोनों को जिला जेल
भेज दिया गया था. सतीश की लाश की तलाश पुलिस अब भी कर रही थी.
(
पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रूपांतरण )
-साहिल
कपूर




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