मूछ की खातिर बहन की हत्या-आनरकिलिंग



     मूछ की खातिर बहन की हत्या.        

अशोक और उसकी माँ ने किरन की जमकर पिटाई की थी. और धमकी भी दी थी कि वह रोहतास को भूल जाये. अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसे जान से मार दिया जायेगा. लेकिन किरन उनकी किसी बात से भी टस से मस ना हुई थी. वह पहले से ही जानती थी कि शादी वाली बात घर पर पता चलने से यह सब तो होना ही था. इसी लिए उसने अपने आपको इन सब बातों के लिए पहले से ही तैयार कर रखा था.

                                     प्रेम विवाह दौरान किरन की मांग भरते हुए रोहतास    

हिसार ( हरियाणा ) में जिला एवम सत्र न्यायधीश डाक्टर पंकज की विशेष अदालत के बाहर दिनांक 5 दिसम्बर 2018 के दिन लगभग पूरा शहर ही उमड़ा पड़ा था. अदालत की करवाई देखने-सुनने के लिए लोग एक- दूसरे से धक्का मुक्की कर रहे थे. इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडियाकर्मियों का अदालत के अन्दर और बाहर ताँता लगा हुआ था. अदालत के बाहर कई महिला संगठन और सनातन धर्म जैसी धार्मिक संस्थाओं के लोग भी उपस्थित थे. हर कोई इस फैसले को सबसे पहले सुनना चाहता था. आरोपी को पुलिस की गाड़ी जेल से लेकर आ चुकी थी और उसे बड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में ले जाया गया था. वैसे इस केस की तमाम सुनवाई पूरी हो चुकी थी और पिछली तारीख 29 नवम्बर 2018 को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दे दिया था. आज जज साहब ने अपना फैसला सुनाना था. अदालत के बाहर खड़ी लोगों की भीड़ इस फैसले को सुनने के लिए इस लिए अधिक उतावली थी क्योंकि हत्या के इस केस के दोषी अशोक के पिता हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे और उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए वो सब कानूनी हथकंडे अपनाये थे जो दोषी को सज़ा से बचाने के लिए सहायक सिद्ध हो सकते थे.

                                            दोषी अशोक को अदालत ले जाती पुलिस    

ह एक आनर किलिंग का मामला था. आदमपुर हिसार के गाँव सीसवान निवासी रोहतास की शिकायत पर उसकी पत्नी किरन की हत्या का यह मुकदमा किरन के भाई अशोक पर चलाया गया था. इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार से थी. हिसार के गाँव जुगलान में सब इं सुरेश का परिवार रहता था. सुरेश हरियाणा पुलिस में थानेदार थे और जिला रोहतक में तैनात थे. उनके परिवार में पत्नी के अतिरिक्त बेटा अशोक, जो उन दिनों हिसार में कोचिंग कर रहा था और एक बेटी थी किरन. किरन भी उन दिनों आईटीआई की शिक्षा ले रही थी. सुरेश के पास अपनी लगभग 8 एकड़ उपजाऊ भूमि थी जो उसने ठेके पर बुआई के लिए किसी को दे रखी थी. क्योंकि दोनों बच्चे पढ़ाई में लगे थे और वह स्वंय अपनी पुलिस की नौकरी में व्यस्त थे ऐसे में जमीन की देखभाल करने वाला कोई नहीं था. किरन और रोहतास की मुलाकात सन 2012 में हुई थी. किरन आईटीआई के लिए बस द्वारा प्रतिदिन आदमपुर जाया करती थी. आदमपुर सीसवान निवासी रोहतास पेशे से ड्राईवर है और उन दिनों आदमपुर – हिसार मार्ग पर बस चलाया करता था. किरन अक्सर उस बस में ही आया जाया करती थी. इसी दौरान दोनों एक-दूसरे की ओर आकर्षित हुए थे और उन दोनों के दिलों के बीच प्यार के अंकुर फूटे थे. दोनों की आपस में बातें होने लगी थी और आपसी विचार मिलने के कारण उन्हें एक-दूजे से प्यार हो गया था और जल्दी ही दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा था. दोनों एक दूसरे बिना नहीं रह सकते थे और शादी करना चाहते थे पर समस्या यह थी कि दोनों अलग-अलग बिरादरी से थे. रोहतास सैनी था और किरन जाट परिवार से थी. ऐसे में शादी के विषय में सोचना तक उन दोनों के लिए किसी अपराध से कम नहीं था. पर वे शादी करने की ठान चुके थे. फिर काफी सोच विचार के बाद दोनों ने तय किया कि अपने-अपने परिवारों को बताये बिना वह गुपचुप तरीके से शादी कर लेंगे. और दिनांक 8 अगस्त 2015 को रोहतास और किरन ने सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट हिसार की सहायता से शादी करके एक-दूसरे का जीवन भर साथ देने का वचन करके पति- पत्नी बन गए थे. बाद में उन्होंने अपनी शादी को कोर्ट से भी रजिस्टर्ड करवा लिया था.

    सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट हिसार के चेयरमैन संजय चौहान किरन और रोहतास की शादी का रजिस्टर दिखाते हुए 

रोहतास और किरन शादी करने के पश्चात अपने-अपने घर चले गये थे. दरअसल किरन की माँ को कैंसर था. वह कोई सदमा बर्दाश्त करने की हालत में नहीं थी. ऐसे में उन्हें गैर बिरादरी के युवक के साथ शादी करने जैसी बात  बताना तो कतई उचित नहीं था. इसलिए उन दोनों ने मिलकर यह योजना बनाई थी कि इस शादी को तब तक गुप्त रखा जायेगा, जबतक किरन के माता-पिता इस बात को लेकर राजी नहीं हो जाते. योजना यह भी थी कि किरन इस बीच माँ के स्वस्थ होने पर अपने माता-पिता को पूरी बात बता कर इस शादी के लिए तैयार कर लेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका था. पति-पत्नी होते हुए भी लगभग 18 महीने दोनों एक-दूजे से अलग अपने-अपने घरों में रहे थे. उन दोनों के बीच केवल फोन पर ही प्रतिदिन बातें हुआ करती थी. वे दोनों इसी बात से ही खुश और संतुष्ट थे. इस बीच किरन आदमपुर से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आगामी पढ़ाई के लिए जयपुर चली गई थी और रोहतास ने भी वह बस छोड़कर गुरुग्राम में कैब चलाना शुरू कर दिया था.सब कुछ ठीक ठाक ही चल रहा था, पर एक दिन किरन की माँ को उसपर शक हो गया था. किरन घन्टों-घन्टों फोन पर रोहतास से बातें किया करती थी. यह बात उसने अपने बेटे अशोक को बताते हुए कहा था कि ना जाने किरन घन्टों फोन पर किससे बातें करती है. किरन के भाई अशोक ने चोरी से जब किरन का फोन चेक किया तो रोहतास का नाम सामने आया था. रोहतास को सिर्फ फोन ही नहीं सैकड़ों मैसेज भी किये गये थे. अशोक ने किरन से रोहतास के विषय में जब पूछा तो किरन ने साफ-साफ बता दिया था कि रोहतास उसका पति है. क्योंकि अब उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी थी और बात को छुपाने से कोई फायदा नहीं था. फिर अवसर देखकर वह खुद भी तो यह बात बताना चाहती थी और अवसर स्वंय चलकर सामने आ गया था.
तत्कालीन एस पी हिसार राजिंदर मीणा 

किरन के इस रहस्योघाटन से जैसे घर में भूँचाल आ गया था. अशोक और उसकी माँ ने किरन की जमकर पिटाई की थी. और धमकी भी दी कि वह रोहतास को भूल जाये. अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसे जान से मार दिया जायेगा. लेकिन किरन किसी बात से टस से मस ना हुई. वह पहले से ही जानती थी कि शादी वाली बात घर पर पता चलने से यह सब तो होना ही था. इसी लिए उसने अपने आपको इन सब बातों के लिए पहले से ही तैयार कर रखा था. किरन को घर में कैद कर लिया गया था. दिनांक 22 जनवरी 2017 को अशोक ने फोन द्वारा रोहतास को जान से मारने की धमकी देते हुए किरन से अपने सम्बन्ध तोड़ने और इस शादी को भूल जाने के लिए कहा था. इसके बाद 9 फरवरी को किरन ने फोन द्वारा रोहतास को बताया था कि उनकी शादी के बारे में घरवालों को पता चल गया है और अब उस पर ज़ुल्म ढाए जा रहे है. जल्दी कुछ करो. यहाँ तक कि अपने परिवार वालों की आदत देखते हुए किरन ने शादी के समय ही सनातन धर्म मंदिर के शादी वाले रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर करते समय यह भी यह लिख दिया था.
‘’शादी के बाद मैं अपने माता-पिता के घर जा रही हूँ. अगर लगातार 5-7 दिनों तक मेरा मेरे पति के साथ सम्पर्क ना हो पाए तो यह समझा जाये कि मेरी जान को खतरा है. मुझे वहां से निकाल लिया जाये. इसमें मेरे पति का कोई दोष नहीं होगा.’’
किरन को शायद इस बात का पहले से ही अंदेशा था कि इस मामले में उसके माता-पिता और भाई उसकी हत्या तक भी कर सकते है. दिनांक 9/10 फरवरी 2017 की रात को अशोक ने अपनी माँ के सामने ही किरन को प्यार से समझाने की कोशिश की थी. किरन को बताया गया था कि रोहतास जात का सैनी है और हम जाट है. ऊपर से रोहतास गरीब है और उसकी हैसियत हमारी हैसियत से छोटी है. किरन को ऊंच-नीच, जात-पात और मर्यादा का पाठ पढ़ाते हुए रोहतास से रिश्ता तोड़ने के लिए कहा था. किरन पर अपनी माँ और भाई की बातो का कोई असर नहीं हुआ था. उसने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा था.
‘’चाहे दुनियां इधर की उधर हो जाये, रोहतास मेरा पति है, पति था और पति रहेगा. मैनें अग्नि और भगवान को साक्षी मानकर उसे अपने मन से पति स्वीकार किया है.’’
किरन की सत्य परन्तु कड़वी बात सुनकर अशोक के तन बदन में आग लग गई थी. वह उसकी चोटी पकड़कर कमरे में ले गया और किरन से जबरदस्ती एक रजिस्टर पर सुसाईड नोट लिखवाया. जिसमें लिखा गया था कि वह किन्हीं कारणवश अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रही है, इस मामले में उसके परिवार के किसी सदस्य का कोई लेना देना नहीं है. उन्हें दोषी ना ठहराया जाये. इस के बाद अशोक किरन को छत पर ले गया और उसे एक गिलास ज़हर मिला पानी जबरदस्ती पिला दिया. पानी पीते ही किरण को उल्टी हो गई पर तब तक ज़हर अपना असर दिखा चुका था. कुछ देर तड़पने और छटपटाने के बाद किरन की मौका पर ही मौत हो गई थी. किरन की हत्या करने के पश्चात अशोक उसकी लाश को वहीँ छत पर ही रजाई से ढक कर नीचे आकर अपने कमरे में सो गया था. किरन के पिता थानेदार सुरेश उस समय अपनी डयूटी पर थाना रोहतक में थे. उन्हें शायद किरन की हत्या के बाद ही बताया गया था. अपने पुत्र को इस हत्या के केस से और बेटी की बदनामी से बचाने के लिए अगली सुबह यह गाँव में यह प्रचारित किया गया था कि किरन की हार्ट अटैक से मौत हो गई है. और आनन-फानन में बिना पुलिस या किसी अन्य को सूचना दिए किरन का अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
किरन रोज़ाना रोहतास को फोन किया करती थी. जब दो दिन गुज़र जाने पर भी किरन का फोन नहीं आया और ना ही उसका फोन मिला तो रोहतास को चिंता होने के साथ दाल में कुछ काला दिखाई दिया. उसने अपने स्तर पर किरन के गाँव किसी को भेज कर पता लगवाया तो पता चला कि पिछली 10 तरीख को किरन की मौत हो गई थी और उसके परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था. यह खबर सुनकर रोहतास की तो दुनियां ही वीरान हो गई थी. उसे पक्का विश्वास था कि किरन की हत्या कर दी गई है. रोहतास ने यह बात सनातन धर्म चेरीटेबल ट्रस्ट और जय भीम आर्मी ट्रस्ट के चेयरमैन संजय चौहान को बताते हुए कहा किरन की हत्या कर दी गई है. संजय चौहान रोहतास को साथ लेकर तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर भगवान दास से मिले और उन्हें पूरी बात विस्तार से बताते हुए इस मामले में कानूनी करवाई करने की अपील की. मामला आनर किलिंग और दो अलग-अलग जातियों के परिवारों से सम्बन्धित था. ऐसे में जातीय दंगे भड़कने का खतरा था सो रोहतास की शिकायत पर मानले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी भगवान दास साहब ने यह सूचना तत्कालीन एसएसपी हिसार राजिंदर मीणा को देकर दिशा निर्देश माँगा और उनके दिशा निर्देश पर थाना सदर के इंचार्ज इं प्रहलाद सिंह को तुरन्त करवाई करने का आदेश दिया. उसी दिन थाने के पास ही रोह्तास और संजय चौहान ने एक प्रेसवार्ता कर मीडियाकर्मियों को भी इस बात की पूरी जानकारी दे दी थी. किरन की हत्या और रोहतास के साथ हुए अन्याय को मीडियाकर्मियों ने हर चैनल पर दिखाना शुरू कर दिया था. इस खबर को सुनने के बाद क्षेत्र में हंगामा उठ खड़ा था. कई समाजसेवी और महिला संगठन सड़कों पर उतर आये थे. किरन के हत्यारे माता-पिता और भाई की गिरफ्तारी को लेकर आवाज़ उठने लगी थी. हर गली, हर नुक्कड़ पर इस घटना की चर्चा होने लगी थी. कोई इसे उचित ठहरा रहा था तो कोई अन्याय कह रहा था. पुलिस-प्रशासन ने इस मामले से निपटने की पूरी तैयारी कर ली थी.

                                     सनातन धर्म चेरीटेबल ट्रस्ट के वकील जतिंदर कुश   


रोहतास की शिकायत पर करवाई करते हुए उसी दिन दिनांक- 14- 2- 2017 को थाना सदर में किरन के भाई अशोक और अन्य लोगों के खिलाफ किरन की हत्या का मुकदमा आईपीसी की धारा 302- 201- 506/34 पर दर्ज कर उसी रात गाँव जुगलना पहुंचे और आसपास के लोगों से पूछताछ कर किरन के बारे में जानकारी जुटाई. देर रात पुलिस ने रोहतास की सुरक्षा के मद्देनज़र उसे एक गनमैन दे दिया था. क्योंकि अशोक ने रोहतास को जान से मारने की धमकी दी थी, दूसरे ऐसे गंभीर माहौल में रोहतास की सुरक्षा अति आवश्यक बन गई थी. अगली सुबह पुलिस ने जुगलना गाँव जाकर अशोक को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था. अशोक की गिरफ्तारी के बाद थाना सदर और सीन आफ क्राईम की टीम ने मृतका किरन के कमरे का बड़ी बारीकी से मुआयना किया और कुछ चीजों को अपने कब्जे में लिया था. इसके बाद पुलिस परिवार के लोगों और गाँव के प्रमुख लोगों और सरपंच को साथ लेकर श्मशान घाट पहुंची. अशोक की निशानदेही पर उस जगह की पहचान करवाई गई जहाँ किरन का अंतिम संस्कार किया गया था. चिता से पुलिस ने हड्डियों और राख के सेम्पल लिए और उन्हें लैब में भेजने के बाद डीएनए टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी थी. इसी के साथ ही किरन द्वारा लिखा गया बताया जाने वाला सुसाईड नोट भी एक्सपर्टों ने अपने कब्जे में ले लिया था ताकि लिखाई की जांच की जा सके. क्राईम टीम ने छत पर उस जगह की मिट्टी के सेम्पल भी उठाये जिस जगह जहर देने के बाद किरन ने उल्टी की थी. इस काम से फारिग होने के बाद दिनांक 16 फरवरी को अशोक को अदालत में पेश कर तीन दिन का पुलिस रिमांड माँगा गया. पुलिस का कहना था कि अभियुक्त से मृतका का मोबाईल फोन व इस हत्याकांड से जुड़ी अन्य चीजे बरामद करनी है. पर अदालत के अशोक को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा था. रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने अशोक को अदालत में पेशकर जिला जेल भेज दिया था.
हिसार की सदर थाना पुलिस ने समय पर इस केस की चार्जशीट अदालत में फाईल कर दी थी. यह केस जिला एवम सत्र न्यायालय में 1 वर्ष और लगभग 10 माह तक चला था. बचाव पक्ष की ओर से इस केस को ललित गोयल लड़ रहे थे और अभियोजन पक्ष की ओर से इस केस की पैरवी सनातन धर्म चेरीटेबल ट्रस्ट के अधिवक्ता जतिंदर कुश कर रहे थे. अदालत में डीएनए की रिपोर्ट भी पेश की गई थी जो श्मशान घाट से चिता से उठाई गई मृतका की हड्डियों के डीएनए और मृतका के भाई अशोक के डीएनए से मैच कर गई थी. इसके अलावा पुलिस ने चौबारे से उल्टी के सैम्पल भी लिए थे पर कोई भी रिपोर्ट यह बात साबित नहीं कर सकी थी कि मृतका को ज़हर देकर मारा गया था. ज़हर की बात रोहतास ने ही पुलिस व अन्य लोगों को बताई थी. इस केस में नया मोड़ उस समय आया था जब मृतका के पति रोहतास ने अदालत अपनी गवाही देने से मना कर दिया था. जिस प्रेम विवाह की कीमत किरन को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी, वही रोहतास बेवफा निकला था. साथ जीने मरने की कस्मे खाकर शादी के बंधन में बंधने के बाद जब किरन की हत्या कर दी गई तो कानूनी लड़ाई लड़ने के बजाय रोहतास गवाही से ही मुकर गया था. उसने अपने ब्यान में अदालत को बताया था कि उसे पुलिस से कोई शिकायत नहीं है. उसने अपने तौर पर पता लगा लिया है कि किरन की मौत प्रकृतिक तरीके से हुई थी. रोहतास के इस ब्यान के बाद सनातन धर्म चेरीटेबल ट्रस्ट ने किरण हत्याकांड के मुक़दमे की कमान पूरी तरह से अपने हाथ में ले ली थी. ट्रस्ट के वकील जतिंदर कुश ने दिनांक 5 सितम्बर 2018 को अदालत में एक पटीशन दायर कर प्रार्थना की थी कि अभियुक्त अशोक के पिता पुलिस में होने के कारण सदर पुलिस ने सनातन धर्म ट्रस्ट की ना तो गवाही दर्ज की है और ना ही किसी रजिस्टर या दस्तावेज को चेक किया था. जबकि इस केस में ट्रस्ट की गवाही की बड़ी एहमियत है. ट्रस्ट की प्रार्थना स्वीकार कर अदालत ने दिनांक 14 सितम्बर को ट्रस्ट के उस रजिस्टर को चेक किया जिसमें शादी के बाद अपने हस्ताक्षर करते वक्त यह लिखा था कि उसे अपने परिवार से जान का खतरा है. इस के अलावा ट्रस्ट के चेयरमैन संजय चौहान के ब्यान भी अदालत में दर्ज किये गये थे. तमाम गवाहियाँ और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात अतिरिक्त सैशन जज डाक्टर पंकज ने अशोक को किरण की हत्या का दोषी ठहराते हुए फैसले की तारीख 5 दिसम्बर 2018 तय कर दी थी.
न्यायधीश डाक्टर पंकज ने इस केस में अपना फैसला दिनांक 5 दिसम्बर 2018 को दिन के 3 बजकर 58 मिन्ट पर सुनाया था. इस फैसले से ठीक 10 मिन्ट पहले 3-48 बजे दोषी अशोक के थानेदार पिता सुशील उठकर अदालत से बाहर चले गये थे. वे शायद पहले से ही जानते थे कि फैसला उनके पक्ष में नहीं होने वाला है.
दोषी अशोक को सज़ा सुनाने से पहले जज साहब ने इस मामले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा था.
‘’ जो ऐसी साजिश रचते हैं, वह याद रखे कि फांसी का फंदा उनका इन्तजार कर रहा है.’’ अदालत इसे दुर्लभ से भी दुर्लभतम अपराध मानते हुए किरन की हत्या के अपराध में आईपीसी की धारा 302 के अंतर्गत दोषी को अधिक से अधिकतम  फांसी की सज़ा और 1 हज़ार रुपये जुर्माना की सज़ा सुनती है. और धारा 201 के तहत 7 साल की कठोर कारावास की सज़ा का हुक्म सुनाती है.
अपनी सज़ा के विरोध में अशोक ने अदालत से कम सज़ा करने की अपील करते हुए कहा था कि उसकी माँ को कैंसर है और वह अक्सर बीमार रहती है, उसकी बहन की मौत हो चुकी है और पिता को अपनी नौकरी से समय नहीं मिलता है. ऐसे में माँ की देखभाल करने वाला कोई नहीं है. पर अदालत ने उसकी अपील को ख़ारिज करते हुए कहा था कि ऐसे अपराधी के साथ नर्मी नहीं बरती जा सकती है. सज़ा सुनने के बाद अशोक का सिर शर्म और पश्चाताप से नीचे झुक गया था. किरन की मौत से पहले 2017 तक हिसार के गाँव जुगलान में सब इं सुरेश का हँसता खेलता परिवार था. सुरेश हरियाणा पुलिस में थानेदार हैं और जिला रोहतक में तैनात थे. उनके पास 8 एकड़ ज़मीन है जो उन्होंने ठेके पर दे रखी है. किरन को उन्होंने पढ़ाई के लिए जयपुर भेज रखा था जबकि बेटा अशोक भी हिसार में कोचिंग ले रहा था. घटना के समय सुरेश अपनी डयूटी पर था. चार लोगों के इस छोटे और सुखी परिवार में बेटी की मौत हो गई और उस की हत्या के अपराध में बेटा जेल चला गया. पत्नी को कैंसर है और सुरेश स्वंय ड्यूटी पर बाहर रहता है. कैंसर से पीड़ित पत्नी अब बिना किसी सहारे के घर में अकेली रहेगी. आखिर क्या मिला ऐसी मूछ बचाकर. ध्यान से सोचा जाये तो यह बहुत ही घाटे का सौदा रहा था. जिसमे लोक परलोक दोनों ही बिगड़ गये. आज वह समाज और समाज के ठेकेदार कहाँ है, क्यों आगे नहीं आते सुरेश की मदद के लिए जिन की खातिर इस घिनौने काम को अंजाम दिया गया था.
--हरमिन्दर कपूर                           

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Milan Tomic

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