=समायरा की गवाही=
दरअसल नीलम ने अपनी 4 वर्षीय नातिन समायरा से पूछा था कि ममा को क्या हुआ था
तब समायरा ने कुछ भी बताने से इंकार किया था वह इस घटना से बेहद डरी-सहमी हुई थी.
नीलम ने जब उसे सांत्वना और प्यार देकर दोबारा पूछा तब यही बात समायरा ने बताई थी
कि ममा को पापा, दादी और चाचू ने फेन पर लटकाया था
अशोक कुमार अपनी दुकान के लिए जरूरी सामान
लेने मार्कीट जाने वाले थे कि तभी उनके मोबाईल फोन की घन्टी बजी. फोन कपूरथला से
उनके दामाद अनिल मेहरा का था. जल्दी से उन्होंने फोन रिसीव कर पूछा.
‘बोलो बेटा
अनिल कैसे हो ?’
मैं तो ठीक
हूँ पापा जी, पर ऋचा ठीक नहीं है.’
‘क्यों क्या
हुआ ऋचा को,?’ अशोक ने घबराई आवाज़ में पूछा. पास ही
उनकी पत्नी नीलम भी खड़ी थी, बेटी की तबियत का सुन वह भी घबरा गई थी, उन्होंने अपने
पति की ओर देखा तो अशोक ने उन्हें शांत रहने के लिये इशारा किया और फोन पर अपना
प्रश्न दौहराते हुए पूछा.
‘बेटा क्या
हुआ ऋचा को ?’
‘पता नहीं
पापाजी वह साँस नहीं ले पा रही है, अभी डाक्टर को बुलवाया है, देखो क्या कहता है
डाक्टर ?’
‘ठीक है
बेटा जैसे भी हालात हों हमें बताते रहना.’ इसके बाद
अनिल ने फोन काट दिया था. पास खड़ी पत्नी को उन्होंने बता दिया था कि ऋचा की तबियत
ठीक नहीं है.
‘मैं तो
पहले ही कहती थी कि लडकी को वहाँ ब्याह कर हम लोगों ने गलती की है पर आप ही नहीं
मानते थे.’ नीलम ने परेशान होते हुए कहा तो अशोक ने
उन्हें समझाया, ‘तुम तो बेकार ही
चिंता करती हो,ऐसे दुःख संकट परिवारों में चलते रहते हैं.तुम चिंता ना करो, सब ठीक हो जायेगा.’ इसके बाद वह अपने दुकान के कामों में लग गये थे.
अशोक कुमार
मूलतः बटाला- गुरदासपुर के निवासी थे. 53 वर्षीय अशोक की किराने- राशन की दुकान
थी. परिवार में पत्नी नीलम सहित उनकी चार संताने थी. तीन बेटियां और एक बेटा निखिल
मेहरा.अशोक बड़े शांत स्वभाव के इन्सान थे उन्हें संस्कारों में जो कुछ अपने पिता हजारी
लाल से मिला था वही संस्कार उन्होंने अपने बच्चों को भी दिए थे. अपना कर्तव्य
समझते हुए सबको अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा भी दी थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद
उन्होंने बड़ी बेटी ऋचा की शादी कपूरथला निवासी राज कुमार मेहरा के बड़े बेटे अनिल
कुमार मेहरा के साथ तय कर दी और दिनांक-30 जनवरी 2012 को यह शादी बड़ी धूमधाम से संपन
हो गई थी. क्योंकि अशोक मेहरा के परिवार में यह पहली शादी थी सो इस शादी में अशोक
मेहरा ने दिलखोल कर खर्च किया था और बेटी दामाद को अपनी हैसियत से भी अधिक
दान-दहेज भी दिया था.
अनिल मेहरा
उच्च शिक्षा प्राप्त एक खूबसूरत नौजवान था. वह एच.डी.एफ.सी. बैंक कपूरथला की मॉल
रोड ब्रांच में तैनात था. शादी के बाद पति-पत्नी बड़े खुश थे. उनकी जोड़ी देखने में
एक मिसाल लगती थी. शादी के अगले वर्ष ऋचा ने एक खूबसूरत बेटी को जन्म दिया था
जिसका नाम अनिल ने उसका नाम समायरा रखा था.
समायरा के
जन्म के बाद ऋचा जब भी अपने मायके गई थी यह शिकायत हमेशा करती रही थी कि ससुराल
में उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है, सास-ससुर देवर की तो बात और है पर
अनिल भी बात-बात पर झगड़ा करते है. बेटी की बात सुनकर अशोक उसकी बातों को हंसकर ताल
देते थे. वह समझदार इन्सान थे और यह बात भलीभांति जानते थे कि बेटी के घर में अधिक
दखल देने के कैसे-कैसे परिणाम निलते है. हाँ जब भी वह अपने दामाद अनिल से मिलते
उसे अपने परिवार में शंतिपूर्ण माहौल बनाएं रखने की हमेशा सलाह दिया करते थे. ऐसे
ही शिकवा-शिकायतों और छोटी-बड़ी लड़ाई झगड़ों का सिलसिला तीन वर्ष तक चलता रहा था.
ऋचा के माध्यम से अनिल कभी नौकरी छोड़ अपना बिजनेस करने के लिया रुपयों की मांग
करता तो कभी सास बेवजह के कान भर कर पति-पत्नी का आपस में झगड़ा करवा देती. कुल
मिला कर इस परिवार में खुशियाँ नहीं थी, हर समय कोई ना कोई बेवजह का झगड़ा तैयार ही
रहता था. जिस कारण घर का वातावरण दूषित हो रहा था.
आजकल अनिल
के माता-पिता की एक नई मांग शुरू हो गई थी,वह इसाई धर्म अपनाना चाहते थे और ऋचा को
भी उन्होंने इसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला था पर ऋचा अपना मूल हिन्दू धर्म
छोड़ने को तैयार नहीं थी जिस कारण इन दिनों घर में महाभारत चल रहा था. दिनांक 31
अगस्त को ऋचा जब माता-पिता से मिलने अपने मायके गई तो रो-रोकर उसने यह बात बताते
हुए कहा था कि अब उस घर में उसका गुजरा नहीं हो सकता है. इसाई धर्म अपनाने के लिए
यह लोग एक बड़ी गाड़ी मांग रहे है.
अशोक मेहरा ने तब भी बेटी को समझा कर भेज दिया था
और ऋचा जबसे अपने ससुराल गई थी तबसे ही वह चिंतित थे और सुबह आए फोन ने उनकी चिंता
और अधिक बढ़ा दी थी. वह अभी इन ख्यालों की दुनियां में खोये हुए थे कि फोन की घन्टी
बज उठी थी. उन्होंने फोन पर नम्बर देखा, फोन उन्हीं के दामाद अनिल का ही था. धडकते
दिल से उन्होंने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से अनिल ने जो बतया उसे सुनकर फोन
उनके हाथों से नीचे गिर गया था. उसके बाद अशोक मेहरा तुरन्त अपनी पत्नी नीलम पुत्र
निखिल और भतीजे रोकी के साथ बटाला से कपूरथला के लिए रवाना हो गये थे यह बात
दिनांक-7-9-2017 की है.
अनिल बैंक
में अपनी ड्यूटी पर था कि 3-30 बजे ऋचा ने वाट्सअप पर उसे एक मैसेज भेजा था जिस पर
लिखा था ‘ मैं दुनियां से विदा ले रही हूँ – बाय-बाय ‘ ऐसा मैसेज
भेजने का क्या मतलब है? अनिल ने सोचा था शायद ऋचा ने कोई मजाक किया होगा. इस मैसेज
का किया मतलब है, यह बात वह ऋचा को फोन करके पूछने ही वाला था कि तभी उसके पापा
राज कुमार का फोन आगया था. राज कुमार ने अनिल से कहा
‘बेटा ऋचा
ने अपने आप को फंदा लगा लिया है तुम जल्दी घर आओ.’ अनिल सब काम बीच में छोडकर जल्दी अपने घर की ओर भागा. घर पहुंच
कर उसने देखा ऋचा की लाश बेड पर पड़ी थी और उसके गले में दुपट्टे का टुकड़ा लटक रहा
था.यह सब देख वह घबरा गया और ऋचा – ऋचा कहते
हुए उसकी लाश से लिपट गया था. इस के बाद उसने इस घटना की सूचना पहले अपनी ससुराल दी
और उसके बाद पुलिस को सूचित किया था.सूचना मिलते ही थाना सिटी प्रभारी इं परमेश्वर
सिंह,पी.सी.आर इंचार्ज सुरजीत पतड़, एस.आई दर्शन सिंह और डी.एस.पी गुरमीत सिंह माय
स्टाफ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. पुलिस अधिकारीयों ने लाश का मुआयना करने के बाद
अनिल और उसके परिवार के बयान दर्ज किये और लाश का पंचनामा तैयार करने की करवाई
शुरू कर दी थी.
अशोक मेहरा
अपनी बेटी ऋचा के घर जब पहुंचे तो उन्होंने देखा ऋचा की लाश कमरे के बाहर बरामदे
में फर्श पर पड़ी थी और कुछ पुलिस अधिकारी लाश का मुआयना कर रहे थे.
ऋचा को
क्या हुआ है, पूछने पर अनिल ने बताया.
‘पापा जी,
मैं बैंक में अपनी ड्यूटी पर था कि 3-30 बजे ऋचा ने मुझे वाट्सअप पर मैसेज भेजा था
जिस पर लिखा था ‘ मैं दुनियां से
विदा ले रही हूँ – बाय-बाय ‘ ऐसा मैसेज भेजने का क्या मतलब है मैं सोच ही रहा था कि
इसके ठीक पांच मिन्ट बाद ही मारे पापा का फोन आया था. उन्होंने कहा था कि ऋचा ने
अपने आप को फंदा लगा लिया है तुम जल्दी घर आओ. घर आके मैंनें देखा तो ऋचा की लाश
यहाँ पड़ी थी.
वहीं अनिल
के पिता राज कुमार का कहना था कि वह अपनी पोती समायरा को बुलाने ऋचा के कमरे में
गया था तो देख ऋचा बेटी पंखे के साथ लटक रही थी. मैंनें तुरन्त शोर मचाया था.
अनिल की
माँ कमलेश का कहना था अपने पति की आवाजें सुन कर जब वह दौड़ी-दौड़ी ऋचा के कमरे में
पहुंची तो उसने देखा ऋचा पंखे से लटकी तड़प रही थी, मेने फौरन कैंची से उसके गले का
फंदा काटा था वह नीचे गिर गई तब हमने देखा उसकी मौत हो चुकी थी.
अनिल के
परिवार ने अशोक मेहरा और नीलम को जो बताया वह उन्हें पर्याप्त नहीं लगा था. यह एक
कहानी थी जो बना कर उन्होंने मेहरा परिवार को सुनाई थी. ऋचा आत्महत्या क्यों करेगी,
यकीनन उसकी हत्या की गई थी .अशोक मेहरा इस कहानी से संतुष्ट नहीं हुए थे और
उन्होंने थाना सिटी कपूरथला जा कर ऋचा के साथ बीती सारी बाते विस्तार से बताकर हत्या का मुकदमा दर्ज
करने को कहा. इसके पहले पुलिस अनिल और अनिल के परिवार के बयानों पर 174 की करवाई
करने में जुटी थी पर अशोक मेहरा के बयान लेने के बाद यह सूचना अपने आला अधिकारीयों
एस.पी { डी }जगजीत सिंह सरोया- डी.एस.पी गुमित सिंह थाना प्रभारी इं परमेश्वर सिंह
को दी गई और उनसे मन्त्रणा करने के बाद अपराध संख्या- 224 पर धारा 306/120 बी के
तहत मुकदमा दर्ज कर अनिल मेहरा – राज कुमार
और कमलेश को हिरासत में लिया गया था. तीनों दोषिओं को अदालत में पेश कर आगामी
पूछताछ के लिए दो दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया था. इस मामले की विवेचना के
लिए एस.पी के निर्देश पर डी.एस.पी गुमित सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई गई
थी जिस में थाना सिटी प्रभारी इं परमेश्वर सिंह,पी.सी.आर इंचार्ज सुरजीत पतड़,
एस.आई दर्शन सिंह,ए.एस.आई सतनाम सिंह,अवतार सिंह हवलदार कुलविंदर सिंह, मंगत
सिंह,लेडी हवलदार जोनू बाला और लेडी सिपाही जसपिंदर कौर को शामिल किया गया था.
अबतक की तफ्तीश में यह बात सामने आ रही थी कि मेहरा परिवार पिछले कुछ दिनों से
अपना धर्म परिवर्तन करने का प्रयास कर रहा था जिसका ऋचा विरोध कर रही थी.
ऋचा की माँ
नीलम का कहना था कि ऋचा तीन महीने के गर्भ से थी और शायद उसका बच्चा गिरा दिया गया
था. डी.एस.पी गुमित सिंह का कहना था कि पोस्टमार्टम में यह सब बातें सिद्ध हो जाएँगी
कि ऋचा गर्भ से थी या नहीं. ऋचा का पोस्टमार्टम कपूरथला के {एस.ऍम.ओ} सिवल सर्जन
डाक्टर अनूप मेघ की देखरेख में तीन डाक्टरों के पेनल ने किया था जिन्होंने अपनी
रिपोर्ट में ऋचा की हत्या फंदे पर दम घुटने के कारण होना बताई थी.पोस्टमार्टमके
बाद ऋचा की लाश उसके माता-पिता के हवाले कर दी गई . इधर घटना के दूसरे दिन मृतका
ऋचा की बेटी ने अपनी नानी नीलम के पूछने पर बताया था कि ममा को पापा, दादी और चाचू
ने फेन से लटकाया था.
दरअसल नीलम
ने अपनी 4 वर्षीय नातिन समायरा से पूछा था कि ममा को क्या हुआ था तब समायरा ने कुछ
भी बताने से इंकार किया था वह इस घटना से बेहद डरी-सहमी हुई थी. नीलम ने जब उसे
सांत्वना और प्यार देकर दोबारा पूछा तब यही बात समायरा ने बताई थी कि ममा को पापा,
दादी और चाचू ने फेन पर लटकाया था और यह भी बताया कि उन्होंने उसे भी धका मारकर
अपने से दूर कर दिया था जिससे वह गिर पड़ी थी. यही बयान समायरा ने डी.एस.पी गुरमीत
सिंह के सामने भी दिए थे जिन्हें दर्ज कर गुरमीत सिंह ने कहा था कि बच्ची के
बयानों को ध्यान में रख कर और विसरा रिपोर्ट आने के बाद अगर इस केस में और धाराएँ
जोड़नी पड़ी तो जोड़ी जाएंगी. फ़िलहाल धारा 306 और १२०बी के तहत तीनों दोषियों को जिला
जेल भेज दिया गया था.
[ पुलिस
सूत्रों और जनसंपर्क पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण ]
Harminder khoji-








0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
crimestopindia ब्लॉग में हम अपराध से जुड़ी सच्ची कहानियाँ प्रकाशित करते हैं.आशा है यह ब्लॉग आपको पसन्द आया होगा.आप ब्लॉग को लाईक और शेयर जरुर करे. काहानियों से सम्बन्धित अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें ताकि हम अपने ब्लॉग को आपके रूचिकर बना सकें.