दोस्ती निभाने का अंजाम
पंजाबी
फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर कलाकार हरगीत कौर उर्फ़ गीत बराड़ की हत्या उसी के दोस्त और सहकर्मी रहे कैमरामैन मंजीत सिंह ने पैसों के लालच में की थी. गीत का दोष सिर्फ इतना था कि उसने मुसीबत में फंसे अपने
दोस्त मंजीत की मदद की थी.
हरगीत कौर उर्फ़ गीत बराड़
नवगीत कौर उर्फ़ गीत बराड़ मोहाली में हो
रही अपनी नई पंजाबी फिल्म की शूटिंग खत्म करने के बाद चण्डीगढ़ स्थित सेक्टर-40 के
अपने मकान में लौटी तो मंजीत सिंह को उसने अपने कमरे में बेचैनी की हालत में टहलते
पाया था. मंजीत सिंह कैमरामैंन था और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में उसका काफी नाम
था. उसके द्वारा शूट की गई फिल्मों की क्वालटी अन्य कैमरामैनों से अलग हटकर थी,
इसी लिए पंजाबी फिल्म मेकर उसे हाथोहाथ लिया करते थे. मंजीत सिंह भले ही एक अच्छा
कैमरामैन था पर उसकी आमदनी ना के बराबर थी, बामुश्किल वह अपने ही खर्च पूरे कर
पता था. इसके पीछे कारण यह था कि मंजीत सिंह के पास अपना खुद का ना तो कैमरा था और
न ही अपना खुद का कोई बैनर. वह कैमरा महंगे किराये पर लेकर या किसी अन्य कैमरामेन
के साथ मिलकर फिल्म शूट किया करता था जिस कारण मेहनताने की रकम का एक मोटा हिस्सा
दूसरों के पास चला जाता था. मंजीत के पास अपना कैमरा ना होने की वजह से अच्छा नाम
और अच्छा काम होने के बावजूद भी उसकी जेब हमेशा ही खाली रहती थी,जिस कारण वह बड़ा
परेशान रहने लगा था. मंजीत सिंह जिला पटियाला पातड़ा अंतर्गत थाना घग्गा का निवासी
था, वह शादीशुदा-एक बच्चे का बाप था और
मौजूदा समय में राजपुरा में अपनी पत्नी व बच्चे के साथ रहता है. मंजीत और गीत बराड़
पिछले काफी वर्षों से एक साथ काम कर रहे थे और आपस में अच्छे दोस्त थे. इन दोनों
की तीन साल से अधिक समय से दोस्ती थी और इसी नाते वह मोहाली-चण्डीगढ़ आदि में
शूटिंग के बाद इतनी दूर राजपुरा अपने घर न जाकर गीत के कमरे पर ही रुक जाया करता
था.
बबू मान, हरभजन मान, बीनू
ढिल्लों, गिप्पी ग्रेवाल, जपजी खैहरा सहित
अन्य पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों का मेकअप कर चुकी 27 वर्षीय नवगीत कौर
उर्फ गीत बराड़ मूल जिला मोगा के गाँव बैरोकी की रहने वाली थी. उसने सिंगापुर से
होटल मैनेजमेंट की थी, लेकिन उसकी दिलचस्पी बालीवुड की तरफ थी.
उसे होटल मैनेजमेंट के बजाय मेकअप आर्टिस्ट में दिलचस्पी थी इस वजह से उसने दिल्ली
में कास्मेटिक व ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद पंजाबी फिल्मों में मेकअप
आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था. गीत ने हरभजन मान, जपजी खैहरा
सहित अन्य नामी पंजाबी कलाकारों के साथ काम किया था. ऐसे में मंजीत से उसकी
मुलाकात भी काम के दौरान हुई थी. गीत बराड़ ने अपनी रिहायश चंडीगढ़ में कर ली थी और
पैसा व नाम दोनों ही कमाया था.
मौका
पर तफ्तीश करते पुलिस अधिकारी और हरगीत कौर उर्फ़ गीत बराड़ कीलाश
बहरहाल उसदिन जब वह अपनी शूटिंग खत्म कर
घर लौटी तो मंजीत बड़ी परेशानी की हालत में उसे अपने घर पर मिला था. अपने बैग एक ओर
रखते हुए उसने मंजीत से पूछा.
‘’क्या बात है, बहुत परेशान दिखाई दे रहे हो. खैरियत तो है, और
कल तुम अपनी शूटिंग पर भी नहीं गए थे, आखिर तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है.?’’
कुछ नहीं यार ऐसे ही मूड खराब है. दरअसल
मैं यह फिल्म लाइन छोडकर छोले उसने सिंगापुर से होटल मैनेजमेंट की थी, लेकिन
उसकी दिलचस्पी बालीवुड की तरफ थी। बठूरे बेचने का काम करना चाहता हूँ उसी के बारे
में सोच रहा था.’’ मंजीत ने मुस्कराते हुए पर मायूसी भरी आवाज़ में बताया.
‘’हूँ... कहानी का प्लाट अच्छा है. एक नामीग्रामी कामयाब
कैमरामैन जिन्दगी की परेशानियों से घबरा कर सड़कों पर रेहड़ी लगाने लग जाता
है...वाह...वाह .’’
‘’गीत तुम मजाक मत समझों में सीरियस हूँ.’’
अब गीत को भी लगने लगा था कि मंजीत मजाक
नहीं कर रहा है अत: वः भी गम्भीर होकर पूछने लगी थी.
‘’ क्यों ऐसी मायूसी भरी बातें कर रहे हो, आखिर बात किया है.’’
एक लम्बी सांस लेकर मंजीत ने दुखी होते
हुए बताया. ‘’ भला ऐसा काम करने से क्या लाभ कि काम करने के बावजूद भी जेब
खाली रहे. मेरे काम का सारा पैसा तो कैमरे के किराए में चला जाता है. मैं तो बस
बेगार ही कट रहा हूँ, आगे बच्चे बड़े हो रहे हैं, क्या जवाब दूंगा उनको, कि बेटा
मैने काम तो बहुत अच्छा और ईमानदारी के साथ किया था और बहुत पैसा भी कमाया था पर
खुद का कैमरा ना खरीद कर जिन्दगी भर किराया ही चुकाता रहा था.’’
‘’ तो इसमें इतना परेशान होने की क्या बात है, तुम अपना कैमरा
खरीद लो और अपना स्वतन्त्र रूप से काम करो जैसा कि मै करती हूँ.’’
‘’मै भी वही तो करने की कोशिश कर रहा था, न्य कैमरा मार्किट में
24 लाख रूपए का है मैने करीब 14 लाख रूपए तो जमा कर लिए हैं, फिर भी 10 लाख की कमी
है.अब वह कहाँ से लाऊं ?’’
‘’ इस में फ़िक्र करने की कोई बात नहीं, नो टेंशन. 10 लाख रूपए
में तुम्हें कर्ज समझों या उधार दे देती हूँ, तुम मुझे 50 हजार रूपए महीना बिना
किसी ब्याज के लौटाते रहना, ऐसे मेरा कर्ज भी उतर जाये गा और तुम्हारा कैमरा भी बन
जायेगा और फिर खूब पैसा कमाना.’’
मंजीत सिंह को गीत की यह राय अच्छी लगी
थी, वह तैयार हो गया और उसी दिन गीत बराड़ ने मंजीत के साथ चण्डीगढ़ जाकर अपने बैंक
से 10 लाख रूपए निकलवा कर मंजीत को दे दिए थे और उसी दिन मंजीत ने अपना न्य
प्रोफेशनल कैमरा खरीद लिया था. कैमरा खरीदने के बाद मंजीत सिंह का काम बड़ी तेजी से
चल निकला था, उसको कई वीडियो शूट और फिल्मों का काम मिल गया था और इन दिनों वह खूब
पैसा कम रहा था.
गीत इस बात से बहुत खुश थी कि उसकी थोड़ी
से सहायता करने से एक इन्सान और उसके परिवार का भविष्य संवर जायेगा. मंजीत सिंह ने
अपने वादे अनुसार तय रकम 50 हजार रूपए महीना गीत बराड़ को देना शुरू कर दी थी
पर चार-पांच महीने पैसा देने के बाद पिछले
कुछ महीनो से उसने गीत को पैसा देना बंद कर दिया था यहाँ हक कि उसने गीत का फोन
उठाना भी छोड़ दिया था. यहाँ तक कि गीत की जहाँ कहीं शूटिंग होती वहाँ वह खुद न
जाकर अपने किसी असिस्टेंट को भेज देता था या शूटिंग कैंसिल करवा देता था.
मंजीत की इस बातों से गीत के दिल को ठेस
लगी थी. यह अलग बात थी कि उस समय गीत के पास पैसा था और उसने एक दोस्त और सहकर्मी
होने के नाते मंजीत की सहायता कर दी थी पर इस समय उसे पैसों की जरूरत थी और वह तो
सिर्फ अपने तय किये गए 50 हजार रूपए महीना ही तो मांग रही थी. अक्सर गीत सोचती
क्या दोस्ती का फ़र्ज़ अदाकर उसने कोई गलती की थी कि उसे पैसों के साथ अपने दोस्त को
भी खोना पड़ा था.
अदालत से बहर आते हुए दोषी मंजीत सिंह
एक दिन किसी वीडियो की शूटिंग पर गीत की
मंजीत से मुलाकात हो गई तो गीत के कुछ कहने या पूछने से पहले ही मंजीत ने सारी
मांगते हुए अपने परिवार की परेशानी और काम की व्यस्तता बता कर हर महीने पैसे देने
का वादा कर बात खत्म कर दी थी. गीत भी लाजवाब होकर रह गई थी. कहने को तो मंजीत ने
गीत से पैसे देने का वादा कर उसदिन गीत को टाल दिया था जबकि हकीकत बात यह थी कि वह उसे और पैसे देना
भी नहीं चाहता था. पासे लौटने के मामले को लेकर उसकी नीयत खराब हो गई थी. फिर वही
पहले वाली बातें शुरू हो गई थी. मंजीत ने गीत का फोन उठाना और उसे मिलना बंद कर
दिया था. इस तरह कई महीने बीत गए थे. गीत
को भी अब लगने लगा था कि मंजीत उसके पैसे अब कभी नहीं लौटाए गा. ऐसा उसने कुछ
लोगों से सुना भी था. मंजी की इन हरकतों से दुखी होकर गीत ने फिल्म इंडस्ट्री में
पैसों की बात को ले कर मंजीत को बदनाम करना शुरू कर दिया था.
दिनांक-26-10-2017 के दिन मंजीत सिंह ने
गीत बराड़ को फोन किया और नाराज होते हुए कहा कि वः उसे बदनाम करना छोड़ दे. इस पर
गीत ने उसे कहा था कि वह जिसदिन उसके पैसे लौटा देगा वह इस बात का भोग डाल देगी.
इस पर मंजीत ने कुछ सोचते हुए कहा था.
‘’गीत तुम ऐसा करो, मुझे चार दिन बाद मिलो. मै अपनी एफडी तुड़वाकर
तुम्हें तुम्हारे बाकी सारे रूपए लौटा दूंगा.’’
‘’ ठीक है, बोलो कहाँ मिलना है,
‘’ मेरा अकाउंट कैथल-चीका रोड स्थित बैंक में, तो तुम ऐसा करो
मुझे राजपुरा आकर मिलो. वहीं से दोनों साथ बैंक चलेंगे.’’
फोन पर सम्बन्ध विच्छेद हो गया था.
गीत को अपने घर गए हुए दो-तीन महीने हो
गए थे. हालाँकि उसके गाँव मोगा से राजपुरा दूर था पर फिर भी उसे राजपुरा पैसे लेने
तो जाना ही था, इस लिए गीत 30 तारीख को अपने गाँव आ गई थी. उसने सोचा था एक रात घर
रहकर वह अपने माँ-बाप से भी मिल लेगी और
सुबह राजपुरा जाकर मंजीत से पैसे लेने के बाद चण्डीगढ़ लौट आएगी. यह सोचकर घर से
तैयार होकर वः मोगा जाने के लिए चंडीगढ़ से निकल पड़ी थी.
दिनांक 30-10-2017 की रात करीब 2 थाना
सिटी राजपुरा पुलिस को जंगीर सिंह नामक व्यक्ति ने फोन द्वारा सुचना दी थी कि वह
स्टार एंक्लेव के फोकल प्वाइंट क्षेत्र की कोठी नम्बर-127 से बोल रहा है, उसकी गली
में एक 26-27 वर्षीय लड़की खून से लथपथ पड़ी हुई है और शायद वह मर चुकी है. अम्बाला
बाईपास के पास पड़ते फोकल प्वाइंट इलाके से सुचना मिलते ही थाना सिटी राजपुरा
प्रभारी इंस्पेक्टर गुरचरन सिंह अपने दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. मौका
पर जंगीर सिंह नामक व्यक्ती ने बताया कि रात 1 बजे उसके जानने वाले कोठी नम्बर-12 निवासी
परमजीत ने उन्हें बताया था कि हमारी गली में कोई लड़की गिरी पड़ी है, मैने गली के
दो-चार लोगों को साथ ले जाकर देखा तो खून से लथपथ लड़की यहाँ पड़ी थी, सो मैने
तुरन्त आप को सूचना दे दी थी.
इं गुरचरन ने लाश का मौका मुआयना किया
लाश गली के साथ खाली प्लाट की झाड़ियों में पड़ी थी. मृतका की गर्दन, छाती और पेट में
गोलियों के निशान पाए गए और वहीं से काफी मात्र में खून निकल कर नीचे जमीन पर बह
आया था. मृतका ने काले रंग की पैंट व लाल रंग की कमीज पहनी हुई थी लाश का बारीकी
से मुआयना करने के बाद देखा कि मृतका के दायें हाथ पर G शब्द गुदा हुआ था. सूरत शक्ल और पहनावे से लड़की पंजाबी और किसी
अच्छे घर की दिखती थी. इस बीच सूचना मिलते ही एसपी (डी) हरविंद्र सिंह विर्क, डीएसपी
राजपुरा कृष्ण कुमार पांथें, सीआइए स्टाफ पटियाला के इंचार्ज दलजीत
सिंह विर्क, थाना बनूड़ प्रभारी शमिंद्र सिंह व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट, मौके पर पहुंच गए थे. मृतक लड़की को कातिलों ने तीन गोलियां
मारकर बहुत ही बेरहमी से कत्ल किया था. घटनास्थल का मौका मुआयना करने के बाद इं
गुरचरन सिंह के अपराध संख्या-281 पर भा. दंड सहिंता की धारा-302 और 25-54-59
आर्म्स एक्ट के तहत महिला की हत्या का मुकदमा अज्ञात हत्यारों के विरुद्ध दर्ज कर
लाश सिवल अस्पताल की मोर्चरी में 72 घंटों के लिए सुरक्षित रखवा दी और आगे की तफ्तीश शुरू कर दी थी.
प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए पुलिस उच्चाधिकारी
क्योंकि यह एक अंधे क़त्ल का मामला था सो
सबसे पहले लाश की शिनाख्त करवाना जरूरी था.एस पी (डी) हरविंद्र सिंह विर्क ने इस
मामले को सुलझाने के लिए डीएसपी राजपुरा- कृष्ण कुमार पांथें की सुपरविजन में एक
टीम तैयार की जिसमें उन्होंने डी.एस.पी. सुखमिन्दर चौहान एसएचओ थाना सिटी राजपुरा इंस्पेक्टर
गुरचरण सिंह, थाना बनूड़ इंस्पैक्टर शमिन्दर सिंह और सीआइए इंचार्ज को शामिल किया
था. मृतका के फोस्टर छपवाकर शहर के मुख्य स्थानों पर लगाए गए थे. तब लोगों ने
पोस्टर देख पुलिस को बताया कि मृतका का नाम हरगीत कौर उर्फ़ गीत
बराड़ है और वह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर कलाकार है.
गीत बराड़ काफी लोकप्रिय थी, जिस
वजह से मौके पर लाश देख रहे और पोस्टरों को देखकर लोगों ने उसे तुरन्त पहचान लिया
था. पहचान मिलते ही पुलिस टीम तुरंत चंडीगढ़ रवाना हुई, जहां
पर पता चला कि गीत बराड़ 30 तारीख को यह कहकर यहाँ से गई थी कि उसे मंजीत सिंह ने
पैसे देने के लिए राजपुरा बुलाया है.यह बात इंस्पेक्टर गुरचरन को गीत की एक सहेली
ने बताई थी और यह भीबताया था कि कैसे आड़े वक्त में गीत ने 10 लाख रूपए मंजीत को
उधर देकर कैमरा खरीदने में उसकी मदद की थी और अब मंजीत उसके पैसे हड़पने के मूड में
था. गीत बराड़ के अलावा इस बात की तस्दीक पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के अन्य कई कलाकारों
ने भी की थी जिस से यह बात साबित हो रही थी कि रूपए ना लौटाने की नीयत से ही शायद
मंजीत सिंह ने ही गीत की हत्या कर दी थी, इसलिए मंजीत को तुरन्त दूढ़ना जरूरी था सो
पुलिस टीम मंजीत की तलाश में छापा मारने जब उसके राजपुरा स्थित घर पहुंची तो वह
लिस को देख भाग खड़ा हुआ था. पुलिस ने उसका पीछा कर राजपुरा कर थाने लाया गया और
बिना हीलहुजत के उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसीने ही गीत बराड़ की
हत्या की थी. मंजीत सिंह को उसी दिन राजपुरा की अदालत में पेशकर आगामी पूछताछ के
लिए 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था. क्योकि अब मृतका की शिनाख्त हो चुकी थी और सूचना मिलने पर
उसके परिजन भी थाने आ गए थे सो मृतका का पोस्टमार्टम करवाने के बाद लाश उसके
परिजनों के हवाले कर दी गई थी. गीत बराड़ की मौत की खबर सुनकर पंजाबी फिल्म
इंडस्ट्री में शोख की लहर छा गई थी.
रिमांड अवधि में पूछताछ के दौरान नवगीत
कौर उर्फ़ गीत बराड़ की हत्या की जो कहानी मंजीत सिंह ने पुलिस को सुनाई वह एक
स्वार्थी और मित्रद्रोही इन्सान की मिसाल थी कि जिस गीत ने उसकी आड़े वक्त सच्चे
दिल से निस्वार्थ सहायता की मंजीत ने उसी की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी थी.
गुरदास मान,बबू मान, बीनू ढिल्लों, गिप्पी
ग्रेवाल, जपजी खैहरा सहित अन्य पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के
साथ काम कर उनका मेकअप कर चुकी हरगीत कौर उर्फ गीत बराड़ काफी सरल और सीधे स्वभाव
की थी. जाट परिवार में जन्मी गीत को बचपन से ही अपने पिता से यह शिक्षा विरासत में
मिली थी कि हर हाल में दुसरे जरूरतमंदों की सहायता के लिए तैयार रहना है .
गीत बराड़ की उम्र करीब 27 साल थी. उसने सिंगापुर से होटल मैनेजमेंट की थी, लेकिन
उसकी दिलचस्पी बालीवुड की तरफ थी सो इस वजह से उसने दिल्ली में कास्मेटिक व
ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद पंजाबी फिल्मों में मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर
आजसे करीब चार साल पहले पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री चंडीगढ़ में मेकअप आर्टिस्ट के तौर
पर अपना करियर शुरू किया था. सिंगापूर, मलेशिया व
आस्ट्रेलिया में घूम चुकी गीत की मुलाकात कैमरा चलाने वाले मंजीत सिंह के साथ काम
के दौरान हुई थी. घग्गा निवासी शादीशुदा मंजीत
मौजूदा समय में राजपुरा में अपनी पत्नी व बच्चे के साथ रहता है. एक साथ काम करने के कारण दोनों में
दोस्ती हो गई,
क्योंकि मंजीत अक्सर मोहाली में गीत के घर आकर रहता था दोस्ती
की वजह से गीत को मंजीत पर पूरा भरोसा हो गया था. एक दिन मंजीत ने अपना अलग काम
करने का जिक्र करते हुए 24 लाख रुपये का नया कैमरा खरीदने की बात
कही, लेकिन उसके पास पैसे कम थे. ऐसे में गीत ने दस लाख रुपये उसे
उधार दिए, जिसे 50 हजार रुपये हर महीने किस्त के रूप में
लौटाने थे. कुछ महीने पैसे देने के बाद मंजीत ने कोई पैसा नहीं चुकाया तो दोनों के
बीच अनबन हो गई थी.
31
अक्तूबर को आरोपी मनजीत सिंह ने गीत बराड़ को यह कहकर बुला
लिया कि उसका बैंक खाता जो कैथल चीका साइड है, उसमें अपनी एफडी
तुड़वाकर पैसे दे देगा.मनजीत सिंह पैसे देने के बहाने उसे अपनी मोटरसाइकिल पर समाना, पातड़ां और चीका
वाली साइड ले गया,फिर बलवेड़ा पटियाला होता हुआ वापस राजपुरा आ गया पर बैंक नहीं गया था. और गीत
को टालमटोल कर वापस राजपुरा ले आया, जहां इन लोगों को
रात हो गईथी, रात होने पर गीत व मंजीत में दोबारा बहस हुई कि पैसा लौटाने के बजाय
वह गीत को मूर्ख बना रहा है. गीत ने कहा कि वह वापस चंडीगढ़ नहीं जाएगी, बल्कि
मंजीत के घर पर रहेगी और उसकी पत्नी को दोनों के बीच की दोस्ती व उधारी पैसे को
लेकर हर बात बताएगी. मंजीत यह बात पहले से ही जानता था कि गीत को रूपए ना लौटने की
सूरत में वह कहाँ तक जा सकती
है इसलिए वह अपनी पूरी तैयारी के साथ आया
था और इसी लिए उसने पैसे देने के बहाने गीत को बुलवाया था. वः पहले से ही गीत की
हत्या करने की योजना बनाकर आया था सो जब दोनों के बीच की बहस ने उग्र रूप लिया तो
मंजीत ने अपने साथ लाया हुआ अपना 32 बोर का लाइसेंसी रिवाल्वर निकल कर गीत पर तीन
फायर कर दिए थे. गोली लगते ही गीत किसी कटे हुए वृक्ष की भांति जमीन पर गिर गई और
मौका पर ही उसकी मौत हो गई थी. गीत की हत्या करने के बाद मंजीत चुपचाप अपने घर आकर
सो गया था. रिमांड के दौरान पुलिस ने मंजीत की निशानदेही पर गीत की हत्या में प्रयुक्त
रिवाल्वर भी बरामद कर ली थी.
तमाम पुलिस करवाई
और पूछताछ पूरी कर दोषी मंजीत सिंह को दिनांक 4-11-2017 को पुन: अदालत में पेश
किया गया जहाँ से उसे न्यायक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया था.
( पुलिस सूत्रों
पर आधारित कथा का नाट्यरूपांतरण)
साहिल कपूर-






समाज में रहते हुए हमें हमेशांएक-दूसरे पर भरोसा करना पड़ता है और यही दुनियां का चलन भी है, पर यदि किसी किसी पर विश्वास-भरोसा और उसकी मदद करने का ऐसा सिला मिले तो कोई क्या करे...?
जवाब देंहटाएंनोट- कृपया कहानियों के विषय में अपनी पसन्द एंव बहुमूल्य राय अवश्य दे. धन्यवाद
Aaja kl kisi ki mdd karne ka this ntija hota hae jaesa geet Barrat ka hua tha.
जवाब देंहटाएंBhut achchi khani
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