पंजाब में ‘ड्रग्स’ का फैलाव चरम पर
एंटी नार्कोटिक्स सैल तरनतारन की पुलिस ने लाखों की हैरोइन समेत एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ थाना सदर तरनतारन में मुकद्दमा दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार एंटी नार्काेटिक्स सैल के इंचार्ज ए.एस.आई. परमजीत सिंह ने बताया कि वह पुलिस पार्टी समेत गश्त कर रहे थे। उन्होंने गांव संघे,
नौरगाबाद समीप गांव भुल्लर की ओर से एक व्यक्ति को पैदल आते देखा,
जो पुलिस पार्टी को देख कर अपनी जेब में से एक लिफाफे को पीछे फैंक कर भाग गया, जिसे पुलिस कर्मचारियों की सहायता से काबू कर लिया गया।
पूछताछ करने पर उक्त व्यक्ति ने अपना नाम नवदीप सिंह उर्फ लव पुत्र अरसाल सिंह निवासी चीमा खुर्द बताया। पकड़े गए व्यक्ति द्वारा फैंके गए लिफाफे को जब चैक किया गया तो उसमें से 50 ग्राम हैरोइन बरामद हुई। इस संबंधी जांच अधिकारी ने उक्त व्यक्ति के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।(रमन)
मिजोरम में नशीली दवाओं का इस्तेमाल
राजधानी
दिल्ली के दामन में भी है-दाग
देखा जाये तो शराबबंदी वाले राज्य बिहार में सबसे बड़ा संकट तस्करी का हैं जिसके कारण राज्य में नाशखोरी बढ़ रही हैं और युवाओ का भविष्य खराब हो रहा है. सरकार का इस बाबत ध्यान अवश्य होना चाहिए, क्योंकि नशाखोरी सिर्फ शराबबंदी ही नहीं है, बल्कि मामला उससे आगे का है.
केरल में कोकीन का कारोबार
बिहार की तरह केरल ऐसा राज्य हैं जहा शराब बंदी पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन इसके बावजूद भी यहां पर नशाखोरी कम नहीं हुई है. शराबबंदी के कारण यहां अफीम, चरस और कोकीन जैसे मादक पादार्थों का कारोबार बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है. जिसका शिकार केरल के युवा हो रहे हैं. राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के इन आंकड़ों से पता चलता है कि ड्रग्स की लत से जुड़ी सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में होती हैं. तीसरे स्थान पर केरल था. इस दक्षिणी राज्य में 475 लोगों ने आत्महत्या की थी.
)
यूं तो पंजाब को हम हरित क्रांति वाला प्रदेश
मानते आ रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ सालों में वहां से ड्रग्स के
बढ़ते मामलों की ख़बरे आ रही हैं, वह चिंताजनक हैं. खबरों की मानें तो जहां एक तरफ पंजाब के
स्कूल, कॉलेज के बच्चों
में ड्रग्स और शराब पीना आम हो चला है, तो वही दूसरी तरफ ड्रग माफिया के लिए यह मुनाफा
कमाने का आसान रास्ता बन गया है. पिछले चार सालों में पंजाब में करीब 39,064 टन नशीली
दवाईयां बरामद की गई हैं. इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयों का जब्त होना दर्शाता है
कि कितनी बड़ी मात्रा में यहां के लोग इनका प्रयोग नशे के लिए करते होंगे.
पिछले साल पंजाब
के सामाजिक सुरक्षा विभाग ने साल के अंत में जो आंकड़े जारी किए, उनके अनुसार
पंजाब के गांवों में करीब 67 फीसदी घर ऐसे
हैं, जहां कम से कम एक व्यक्ति नशे की चपेट में है.
इसके अलावा हर हफ्ते कम से कम एक व्यक्ति की ड्रग ओवरडोज के कारण मौत होती है.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि नशे की लत जिन लोगों
में सबसे ज्यादा है, उनकी उम्र 16 से 35 साल के बीच है. पंजाब में बढ़ती नशाखोरी को लेकर ‘उड़ता पंजाब’ नाम की फिल्म भी
आई थी, जिसका रिलीज से
पहले विरोध भी हुआ खूब हुआ. पर असल मामला तो नशे के प्रसार का है, जिसके आधार पर वहां
की सरकार तक बदल गयी है. देखना दिलचस्प होगा कि नयी
सरकार इस मामले पर क्या रूख
अख्तियार करती है.
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एक बात यह भी
पंजाब में ‘ड्रग्स’ का फैलाव चरम पर
यूं तो पंजाब को हम हरित क्रांति वाला प्रदेश
मानते आ रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ सालों में वहां से ड्रग्स के बढ़ते
मामलों की ख़बरे आ रही हैं, वह चिंताजनक हैं. खबरों की मानें तो जहां एक तरफ पंजाब के
स्कूल, कॉलेज के बच्चों
में ड्रग्स और शराब पीना आम हो चला है, तो वही दूसरी तरफ ड्रग माफिया के लिए यह मुनाफा
कमाने का आसान रास्ता बन गया है. पिछले चार सालों में पंजाब में करीब 39,064 टन नशीली
दवाईयां बरामद की गई हैं. इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयों का जब्त होना दर्शाता है
कि कितनी बड़ी मात्रा में यहां के लोग इनका प्रयोग नशे के लिए करते होंगे.
पिछले साल पंजाब
के सामाजिक सुरक्षा विभाग ने साल के अंत में जो आंकड़े जारी किए, उनके अनुसार
पंजाब के गांवों में करीब 67 फीसदी घर ऐसे
हैं, जहां कम से कम एक व्यक्ति नशे की चपेट में है.
इसके अलावा हर हफ्ते कम से कम एक व्यक्ति की ड्रग ओवरडोज के कारण मौत होती है.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि नशे की लत जिन लोगों
में सबसे ज्यादा है, उनकी उम्र 16 से 35 साल के बीच है. पंजाब में बढ़ती नशाखोरी को लेकर ‘उड़ता पंजाब’ नाम की फिल्म भी
आई थी, जिसका रिलीज से
पहले विरोध भी हुआ खूब हुआ. पर असल मामला तो नशे के प्रसार का है, जिसके आधार पर
वहां की सरकार तक बदल गयी है. देखना दिलचस्प होगा कि नयी
सरकार इस मामले पर क्या रूख
अख्तियार करती है.
======================================================कहानी-3
अभी भी बहुत है पुलिस अधिकारीयों में जांबाजी का
जज्बा जो नशा खत्म करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं.
पंजाब के आलावा देश में अभी भी ऐसे नौजवान पुलिस अधिकारी
मौजूद हैं, जिनसे नशे की बर्बादी के कारण उनकी माँ-बहनों और बहुओं बेटियों का दुःख
नहीं देखा जाता है. ऐसे जाबाज़ पुलिस अधिकारीयों ने देश से नशे को मुक्त करवाने का
बीड़ा उठा रखा है. ऐसे पुलिस अधिकारियो. का कहना है कि इस मोहिम में भले ही उनकी जान
चली जाए पर वह नशा करने वालों को और नौजवानों को नशे की लत लगाने वाले सौदागरों को
जड़ से खत्म कर के ही रहें गे. अब सोचने वाली बात यह है की सरकारों को भी ऐसे पुलिस
अधिकारीयों की हर सम्भव सहायता करनी चाहिए. इस बात में भी कोई दो रे नहीं है कि हर
प्रकार की मिली भगत से सीमा के उस पर से करोड़ों रुपयों का नशा रोज सीमा के इया पर
अत है और दिखावे के लिए कुछ पकड़ा भी जाता है. सवाल यह है की हमें ऐसे कड़े इंतजाम
किये जाये की सीमा पर से नशा तो किया परिंदा भी इस ओर पर न मार सके. ऐसे जाबाजों को देश वासियों का सलाम है.
युवा पत्रकार अजय सिसोदिया का कहना है की हमारे देश में नशाखोरी की समस्या
कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसको मुद्दा बनाते हुए देश को संबोधित किया था. इसके साथ ही
कई सारी निजी संस्थाएं और सरकारें भी नशामुक्ति के लिए जागरुकता अभियान जैसे कई
सारे कार्यक्रम चला रही हैं. लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से नशाखोरी के मामले देश
के विभिन्न राज्यों में देखे जा रहे हैं, वह गंभीर चिंता के विषय हैं, जिससे निपटने की जिम्मेदारी युवाओं के अभिवावकों के साथ समाज और सरकार की
भी बनती है.
नशे के कारोबारियों की अब ख़ैर नहीं.
युवा पत्रकार अजय सिसोदिया का कहना है की हमारे देश में नशाखोरी की समस्या
कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसको मुद्दा बनाते हुए देश को संबोधित किया था. इसके साथ ही
कई सारी निजी संस्थाएं और सरकारें भी नशामुक्ति के लिए जागरुकता अभियान जैसे कई
सारे कार्यक्रम चला रही हैं. लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से नशाखोरी के मामले देश
के विभिन्न राज्यों में देखे जा रहे हैं, वह गंभीर चिंता के विषय हैं, जिससे निपटने की जिम्मेदारी युवाओं के अभिवावकों के साथ समाज और सरकार की
भी बनती है.
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| एंटी नार्कोटिक्स सैल तरनतारन |
पूछताछ करने पर उक्त व्यक्ति ने अपना नाम नवदीप सिंह उर्फ लव पुत्र अरसाल सिंह निवासी चीमा खुर्द बताया। पकड़े गए व्यक्ति द्वारा फैंके गए लिफाफे को जब चैक किया गया तो उसमें से 50 ग्राम हैरोइन बरामद हुई। इस संबंधी जांच अधिकारी ने उक्त व्यक्ति के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।(रमन)
युवा पत्रकार अजय सिसोदिया का कहना है कि भारत युवाओं का देश है. कहा जा रहा है कि युवाओं के दम पर 2020 तक दुनिया की ‘आर्थिक महाशक्ति’ बना जा सकता है, लेकिन जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत विकास के पथ पर दौड़ने का दंभ भर रहा है, वह दुर्भाग्य से दिन पे दिन नशे की गिरफ्त में आ रही है. युवा तो युवा बच्चे तक इसका शिकार बनते जा रहे हैं. गजब की बात तो यह है कि नशाखोरी किसी एक राज्य की समस्या भर नहीं है, अपितु देश के लगभग सभी राज्य इस समस्या से जूझ रहे हैं. तो आइये बात करते हैं, कुछ ऐसे ही राज्यों के बारे में जहां नशाखोरी ने तेजी से अपने पांव पसारे हैं:
मणिपुर में ड्रग्स की तस्करी का कारोबार
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे मणिपुर में नशे की
प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. आए दिन सीमा सुरक्षा बल द्वारा ड्रग्स की बड़ी खेपों
के पकड़ने की खबरें आती रहती हैं, जो इस ओर इशारा करती हैं कि यहां ड्रग्स तस्करों की जड़ें
कितनी गहरी हैं.
चूंकि म्यांमार, थाईलैंड की
सीमाए इस राज्य से जुड़ी हुई इसलिए कहा जा सकता इस व्यापार में इन देशों से मदद
मिलती है. खैर जो भी हो मणिपुर का युवा तेजी से नशाखोरी का शिकार होता जा रहा है.
ऐसा हम नहीं कहते सरकार के आकड़े कहते हैं.
मणिपुर में लगभग 45,000-50,000 लोग नशे की चपेट में हैं. इनमें से आधे से अधिक
लोग इंजेक्शन के ज़रिए नशे का सेवन करते हैं. यहाँ भी सरकार बदल रही है, तो इरोम शर्मिलाजैसे लोग यहाँ से चुनाव हार चुके हैं.
मिजोरम में नशीली दवाओं का इस्तेमाल
मणिपुर की सीमा से लगे होने के कारण मिजोरम का
भी वही हाल है जो मणिपुर का है. इस राज्य में भी नशे के कारोबार ने अपना कब्जा बना
रखा है. मिजोरम में सबसे ज्यादा लोग अधिक नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं.
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा भारतीय राष्ट्रीय सर्वेक्षण की
2016 की एक रिपोर्ट की मानें तो
मिजोरम में पिछले चार सालों में करीब 48,209 टन नशीली
दवाइयां जब्त की गई हैं.
राजधानी
दिल्ली के दामन में भी है-दाग
देश की राजधानी दिल्ली में नशाखोरी का बड़ा
अड्डा बन चुकी है! दिल्ली में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां गाजा, चरस, कोकीन का धंधा
तेजी से फल फूल रहा है. इन्हीं जगहों से ड्रग माफियाओं द्वारा दूसरी जगह पर
नशे को मुहैया कराया जाता है.
नशाखोरी के
खिलाफ मुहिम चलाने का दावा करने वाली दिल्ली सरकार ने पिछले वर्षो में 58 शराब के ठेको के
लाइसेंस जारी किये थे, जिसे लेकर
विपक्षियों ने खूब होहल्ला मचाया. 2016 में दिल्ली
सरकार के समाज कल्याण विभाग की पहल पर कराये गए सर्वे के मुताबिक राजधानी में 70 हजार बच्चों को
नशे का शिकार पाया गया.
इस रिपोर्ट में बताया गया था कि सड़कों पर रहने वाले
बच्चे खतरनाक से खतरनाक नशे का सेवन करते हैं. रिपोर्ट यह भी कहती है कि राजधानी
मे में 20 हजार ऐसे बच्चे
हैं जो कि तम्बाकू खाते हैं. इसके साथ ही नशे के शिकार बच्चों में शराब पीने वाले 9450, भांग-गांजा पीने
वाले 5600,
होरोइन
का सेवन करने वाले 840 और अन्य प्रकार का नशे का सेवन करने वाले 7910 शामिल हैं.
बिहार में बढ़ा गांजे का कारोबार
देश के अन्य राज्यों की तरह देखा जाये तो बिहार
भी नशाखोरी में पीछे नहीं है. जहरीली शराब के कारण लोगों के मरने की खबरें इस
राज्य से आती रही हैं. हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में
शराबबंदी करके नशाखोरी में लगाम कसने की पहल की, लेकिन इसके बावजूद चरस, गाजा जैसे अन्य
नशे के साधनों में किसी प्रकार की कोई गिरावट नहीं हुई है. वहां के निवासियों की
मानें तो इनमें शराबबंदी के बाद इजाफा जरूर हो गया है.
गांजे के कारोबार से जुड़े लोग अब
ज्यादा सक्रिय हो गए हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2016 में 496.3 किलो गांजा जब्त
हुआ था जबकि साल 2017 (सिर्फ़ फ़रवरी
तक) में 6884.47 किलो गांजा जब्त हो चुका है.
देखा जाये तो शराबबंदी वाले राज्य बिहार में सबसे बड़ा संकट तस्करी का हैं जिसके कारण राज्य में नाशखोरी बढ़ रही हैं और युवाओ का भविष्य खराब हो रहा है. सरकार का इस बाबत ध्यान अवश्य होना चाहिए, क्योंकि नशाखोरी सिर्फ शराबबंदी ही नहीं है, बल्कि मामला उससे आगे का है.
केरल में कोकीन का कारोबार
बिहार की तरह केरल ऐसा राज्य हैं जहा शराब बंदी पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन इसके बावजूद भी यहां पर नशाखोरी कम नहीं हुई है. शराबबंदी के कारण यहां अफीम, चरस और कोकीन जैसे मादक पादार्थों का कारोबार बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है. जिसका शिकार केरल के युवा हो रहे हैं. राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के इन आंकड़ों से पता चलता है कि ड्रग्स की लत से जुड़ी सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में होती हैं. तीसरे स्थान पर केरल था. इस दक्षिणी राज्य में 475 लोगों ने आत्महत्या की थी.
हरियाणा में नशाखोरी के आकड़ों में बढ़ोत्तरी
नशीले पदार्थो के बारे में अगर हम हरियाणा की
बात करें, तो यह भी बाकी
राज्यों की तरह नशाखोरी से ग्रस्त है. इस राज्य में भी युवा तेजी जी से नशे
की चपेट में आ रहे हैं. इसका उदाहरण पिछले साल हुई पुलिस भर्ती में देखने को मिला
था, जहां कई युवा
नशे में लिप्त पाए गए थे. यहां तक की नशे के कारण एक युवा की मौत तक हो गई थी.
अपुष्ट आंकड़े के मुताबिक हरियाणा सरकार द्वारा पीजी आईएमयस रोहतक में चलाए जा रहे
नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में पिछले 6 वर्षो में नशीले
पदार्थों के सेवन करने वाले युवाओं की संख्या में चार गुना बढ़ोत्तरी हुई थी. साफ़
जाहिर है कि मामला बेहद गंभीर है.






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