सन्देह काल
शक की शिकार सिमरनजीत कौर
अमरीक सिंह जब अपने घर पहुंचा था, उस समय सिमरनजीत कौर पड़ोस के घर दही जमाने के लिए खट्टा लेने गई हुई थी.
घर पर दोनों बच्चे १० वर्षीय अर्शदीप सिंह और ६ वर्षीय विक्रमजीत सिंह मौजूद
थे.अमरीक सिंह ने दोनों बच्चों को अपने पास बुलाकर पूछा.
‘’ तुम्हारी माँ कहा गई
है.?
बच्चों को इस विषय में मालूम नहीं था, सिमरनजीत यह बात बच्चों को बताये बिना ही पड़ोस में गई
थी. बच्चे अपने खेल में मस्त थे सो उन्होंने अपने पिता को बता दिया था जिसे सुनकर
अमरीक सिंह आग बबूला हो उठा था. उसे तो जैसे सिमरन से लड़ने का मौका मिल गया था.
इतने में सिमरन भी पड़ोस के घर से वापिस लौट आई थी. सो उसके आते ही अमरीक ने कड़क कर
पूछा था.
‘’कहाँ गई थी.’’
सिमरन ने पति के सवाल का बड़ी शालीनता
से जवाब दिया था.
‘’जी पड़ोस के घर से
दहीं जमाने के लिए खट्टा लेने गई थी.’’
‘’ खट्टा लेने गई थी या
अपने किसी यार से मिलने गई थी. में पिछले काफी दिनों से तुम्हारे रंग ढंग देख रहा
हूँ.’’
‘’ मैने आप से कितनी
बार कहा है यूँ झूठी तोहमतें मुझ पर मत लगाया करो. हाँ अगर मुझे कहीं गलत देखो तो
भले ही मेरे हाथ-पांव तोडकर चारपाई पर डाल देना पर यूँ बेवजह किसी पर सोचे समझे
बिना इल्जाम लगाना पाप है.’’
‘’अब तू मुझे पाप पुन्य
सिखाये गी और तेरे हाथ पैर तोड तेरी सेवा करने के लिए तुझे चारपाई पर डालना है
क्या,? इससे अच्छा में तेरी जान ही क्यों ना लेकर यह किसा ही
खत्म कर दूँ.’’ पति की बात अनसुनी क्र सिमरन अपने घर के
कामों में उलझ गई थी. वः समझ गई थी कि आज उसके पति का लड़ने झगड़ने का मूड़ है,
इसलिए उसने अमरीक सिंह से बहस करना उचित नहीं समझा था.वः अपने घरके
कामों में व्यस्त थी की तभी बहर बरामदे से उठकर उसकी सास गुड्डी भी वह आ पहुंची
थी. उसने देखा कि अमरीक बोले जा रहा है और सिमरन उसकी बातों पर ध्यान दिए बिना
ख़ामोशी से अपने कामों में व्यस्त है, तो जलती आग पर तेल
डालते हुए उसने कुछ ऊँची आवाज़ में अमरीक को कहा,
‘’ क्यों कुत्ते की तरह
भौंक रहा है, यह तो देख ले कि तेरी बात कोई सुन भी रह है कि
नहीं. तेरी बातों की यहाँ किसी को परवाह नहीं है. पता नहीं वह कौन सी मनहूस घड़ी थी
जब बहु बनाकर मैं इसे अपने घर लाई थी. अरे मेरे घर आते ही इसने अपना रंग दिखाना
शुरू कर दिया था. अपना खसम छोड़ इसने पहले देवर सूबे को अपने जाल में फंसाया,
बड़ी मुश्किलों से जब सूबे से इसका पिंड छुडवाया तो इसने अपना मुंह
बाहर मारना शुरू कर दिया.’’
‘’ तुम चुप हो जाओ माँ,
इस बार तो मैं इसका सारा खेल ही खत्म कर दूंगा, यह घी सीधी उंगली से निकलने वाला नहीं है.’’ अमरीक
सिंह ने अपने दांत भींचते हुए कहा था.
‘’ इस कलमूही के पीछे
तुम अपनी जान जोखिम में मत डालना, जो करना सोच समझ कर ही
करना.’’ माँ ने समझाते हुए अमरीक को चेतावनी दी. उस के बाद
खाना खाकर अमरीक बाहर चला गया था.
अमरीक सिंह पंजाब के जिला बठिंडा, मौड़ मंडी के थाना नथाना अंतर्गत आते गाँव बीबीवाला का मूल निवासी था,
उसके पिता की मृत्यु कई वर्ष पहले हो चुकी थी. अब परिवार में उसकी
माँ गुड्डी के अलावा एक छोटा भाई सूबा सिंह था. अमरीक की शादी 29 अक्टूबर 2006 को
स्कूल प्रिंसिपल आत्मा सिंह की पुत्री सिमरनजीत कौर के साथ हुई थी. शादी के बाद वे
दो बच्चों अर्शदीप सिंह और विक्रमजीत सिंह के माता-पिता बने थे. अमरजीत सरकारी
स्कूल नरूआणा में बतौर चपड़ासी के तौर पर तैनात था. सिमरजीत कौर ने भी ई.टी.टी. की
हुई थी लेकिन उसको कोई नौकरी नहीं मिल सकी थी सो वह इन दिनों घर पर ही रहकर कामकाज
किया करती थी.
शादी के लगभग 6 वर्षो तक तो पति पत्नी
का वैवाहिक जीवन हंसी ख़ुशी बीता था. छोटी मोटी कहासुनी को छोड़कर बाकी सब ठीक था, ऐसी कोई गम्भीर बात ना थी. वैसे भी जहाँ दो बर्तन
होते है तो वह आपस में जरूर खटकते है. इस बीच उनके दो पुत्र हुए थे, 10 वर्षीय अर्शदीप सिंह और 6 वर्षीय विक्रमजीत सिंह.
दोनों बच्चों ने स्कूल जाना भी शुरू
कर दिया था. इतना समय गुज़र जाने के बाद अचानक अमरीक सिंह के व्यवहार में जबरदस्त
परिवर्तन आया, उसने घरेलू बातों को
लेकर अक्सर सिमरजीत कौर के साथ झगड़ा करना शुरू कर दिया था. इस झगड़े की सूत्रधार
अमरीक की माँ गुड्डी थी. जिसने सबसे पहले सिमरन पर यह आरोप लगाया था कि उसके अपने
देवर अर्थात अमरीक के छोटे भाई सूबा सिंह के साथ अवैध सम्बन्ध है. काफी समय तक इसी
बात को लेकर घर में क्लेश चलता रहा था. अमरीक बात-बात पर सिमरन को गालीयाँ देता और
मारपीट करता रहा था. और यह सब काम अमरीक की माँ गुड्डी के इशारों पर होता था. काफी
समय बाद सूबे की बात खत्म हुई तो गुड्डी ने एक नई बात उड़ा दी थी कि सिमरन के गाँव
के कई युवकों के साथ अवैध सम्बन्ध है. उसने और अमरीक ने सिमरन पर यह आरोप लगाए थे
कि उसके डयूटी चले जाने के बाद वह अपने यारों से मिलने घर के बहर जाती है. हालाँकि
यह सरे आरोप बेबुनियाद थे और सिमरन यह सब ख़ामोशी से झेलती रही थी, बीच में वह अपने माता-पिता से इस बात की शिकायत करती रहती थी और समय-समय
पर उसके माता-पिता आकर अमरीक को समझाते रहते थे पर उनके समझाने के कुछ दिनों बाद
ही झगड़े पुन शुरू हो जाया करते थे. सिमरन की समझ में नहीं आ रहा था कि रोज़-रोज़ के
इस क्लेश से कैसे छुटकारा पाया जाये. अंत में हारकर उसने इस बात की शिकायत थाना
नथाना पुलिस को की थी, सिमरन की शिकायत पर थाना नथाना के
तत्काल प्रभारी इं रछपाल सिंह ने अमरीक सिंह और उसकी माँ को थाने बुलवाकर समझाया
और उनका फैसला करवा दिया था. इस फैसले के बाद कुछ दिनों तक सब ठीक ठाक रहा बाद में
फिर वही कलेश शुरू हो गया था. थाने वाली बात के बाद भी इसी मुद्दे को लेकर कई बार
पंचायतें बैठी, दर्जनों बार फैसले हुए पर अमरीक सिंह और उसकी
माँ के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हुआ था. अंत में सिमरन ने इं सब बातों को अपना
भाग्य समझ लिया और फैसला वाहेगुरु पर छोड़ दिया था.
बात 22 अप्रैल 2018 दोपहर की है. अमरीक सिंह अपनी डयूटी पर गया हुआ था
और उसकी माँ किसी काम से पड़ोस के गाँव गई हुई थी, घर पर सिमरन और उसके दोनों बच्चे थे. सिमरन उनके लिए
दोपहर का खाना तैयार कर रही थी कि तभी अचानक अमरीक घर पर आ धमका, उसके चहरे पर क्रोध साफ दिखाई दे रहा था और वह साक्षात् मौत का दूसरा रूप
दिखाई देता था. उसके हाथ में एक केन था. घर पहुंचते ही उसने बिना किसी बात के
सिमरन को गालीयाँ देनी शुरू कर दी थी. बीती रात भी उसने सिमरन से झगड़ा किया था.
सिमरन ने अमरीक को बहुत समझाने की कोशिश की पर वह निरंतरता गलियाँ देता रहा और फिर
अचानक वह सिमरन के निकट आया और अपने हाथ में पकड़ी केन, जिस
में पैट्रोल था. सिमरन पर उड़ेलते हुए बोला, ‘’हरामजादी
आज मैं तेरा किस्सा तमाम कर दूंगा. तुझे मारकर खुद जेल चला जाऊंगा.’’
‘’ यह आप कैसी
बातें कर रहे है, ‘’ सिमरन ने उसे समझाना चाहा था.
बच्चे भी अपने बाप का यह रूप देख सहमकर रोने लगे थे. पर अमरीक पर किसी की बात का
कोई असर नहीं हुआ था, उसके चेहरे पर क्रूरता थी और वह
साक्षात् यमराज दिखाई दे रहा था.
सिर से पांव तक पैट्रोल में नहा जाने
के बाद सिमरन को इस बात का अहसास हुआ कि अब अगले पल उसके साथ किया होने वाला है.
अपनी जन बचाने के लिए वह इधर-उधर भागने लगी. बच्चों ने भी बाहर निकलकर अपनी माँ के
बचाव के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया था. पर सब व्यर्थ गया. अमरीक ने बिना किसी की
परवाह किये माचिस की तीली जलाकर सिमरन की ओर उछाल दी थी. आग लगते ही सिमरन का पूरा
शरीर धू-धू कर जलने लगा. आग बुझाने के प्रयास में वह अपने हाथ पांव चलाने लगी थी.
बच्चों ने शोर डाला तो लोग एकत्र हो गए. लोगों ने बड़ी मुश्किल से सिमरजीत कौर को
लगी आग पर काबू पाया था. पर लोगों के वहां पहुंचने से पहले ही सिमरन पूरी तरह जलकर
बेहोश हो चुकी थी और आग लगाने वाला पति अमरीक वहां से भाग गया था.
पड़ोसियों ने मिलकर सिमरन को मौड़ मंडी
के सिविल अस्पताल मए पहुंचाया और इस घटना की सूचना थाना नथाना पुलिस को देने के
साथ सिमरन के माता पिता को भी खबर कर दी थी.
घटना की सूचना मिलते ही थाना नथाना के
थानाध्यक्ष इं भूपिंदर सिंह अपने दलबल के साथ अस्पताल पहुंच गए थे. इसके पहले
उन्होंने घटनास्थल पर जाकर उस जगह को सील कर दिया था जिस कमरे में सिमरन को आग
लगाई गई थी.
डाक्टरों के अनुसार सिमरन 90 % जल गई
थी और उसकी हालत काफी गम्भीर थी. इं भूपिंद्र सिंह ने इस घटना की सूचना अपने आला
अधिकारीयों को देने के साथ-साथ माननीय जज जे.एम.आई.सी. को भी दे दी थी ताकि अपनी
मौजूदगी में वह सिमरन के बयान ले सके. माननीय जज कमलजीत सिंह ने अस्पताल आकर
सिमरजीत कौर के बयान दर्ज किए. अपने बयानों में सिमरन ने वही सब बताया था जो पाठक
कथा के आरम्भ में पढ़ चुके है. जबकि पुलिस द्वारा बच्चों के बयान दर्ज किए गए थे.
अपने बयानों में दोनों बच्चो अर्शदीप और विक्रमजीत ने बताया था कि उनके पिता ने ही
उनकी मां को आग लगा कर जिन्दा जलाने की कोशिश की है.
इं भूपिंदर सिंह ने सिमरन के माता
पिता के अस्पताल पहुंचने पर उनके भी बयान दर्ज किये थे. इस सम्बन्ध में सिमरजीत
कौर के पिता आत्मा सिंह प्रिंसीपल और माँ मलकीत कौर ने बताया कि अमरीक सिंह और
उसकी माता गुड्डी उसकी बेटी पर पहले से जुल्म करते थे, वह बेटी के मना करने पर भी उसे समझाकर ससुराल भेज
देता था परन्तु अगर उसे पता होता कि वह इस तरह उसकी बेटी पर जुल्मकर उसे जिन्दा
जला देंगे तो वह उसको कभी भी ससुराल घर न भेजता. उन्होंने पंजाब सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उसकी बेटी का कत्ल करने
वाले अमरीक सिंह व उसकी माता गुड्डी को फांसी की सजा दी जाए. सिमरन को अपने पति
दुवारा जिन्दा ज्लादेने की घटना को लेकर पूरे कसबे में तनाव फैल गया था अस्पताल
में सिमरन का हाल जानने के लिए लोगो का हजूम गया था. लोगो में काफी आक्रोश था,
लोग अमरीक और उसकी माँ को तुरन्त गिरफ्तार करने की मांग को लेकर
हंगामा खड़ा करने लगे थे. सिमरन दुवारा जज साहब को दिए गए उक्त बयानों के मुताबिक अगली कार्रवाई करते हुए इं भूपिंदर सिंह ने इस अपराध को
उसी दिन दिनांक- 22-4-2018 को अपराध संख्या -89 पर धारा 307-326ए-व 498ए के तहत
अमरीक सिंह और उसकी माँ गुड्डी के खिलाफ साज़िश कर सिमरन को जिन्दा जलाने के अपराध
में मुकदमा दर्ज कर अमरीक सिंह को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया और एक दिन के
रिमांड पर ले लिया था. रिमांड के दौरान पूछताछ मुकमल कर उसे पुन अदालत में पेशकर
जिला जेल भेजा गया था.
इधर सिविल अस्पताल मौड़ में डाक्टरों ने सिमरन का प्राथमिक उपचार कर
उसकी गम्भीर हालत को देखते हुए सिविल अस्पताल बठिंडा रैफर कर दिया था. सिविल
अस्पताल बठिंडा में भी जब सिमरन की हालत दिन पर दिन बिगड़ती गई तो उसे चंडीगढ़ के
पी.जी.आई अस्पताल भेज दिया गया था जहां अपनी जिन्दगी और मौत के बीच जूझते हुए
दिनांक 29 अप्रैल को इस दुनिया से अलविदा कह दिया था. सिमरन की मौत के बाद इं
भूपिंदर सिंह ने इस केस में हत्या की धारा – 302 भी जोड़ दी थी. सिमरन की मौत के बाद और पिता अमरीक सिंह के जेल चले
जाने के बाद उनके दोनों बच्चे अनाथ हो गए थे.
दिनांक 29 को ही सिमरन का शव अंतिम
संस्कार के लिए चंडीगढ़ से मौड़ कलां के श्मशानघाट में लाया गया था श्मशानघाट
में उस वक्त दर्दनाक दृश्य बन गया जब 10 वर्षीय
अर्शदीप सिंह ने अपनी मां को मुखअग्रि दी और 6 वर्षीय
विक्रमजीत बार-बार अपनी मां के पास जाने की जिद
करने लगा था. आखिरकार परमात्मा की मर्जी के आगे कोई जोर न चलता देख दोनों बच्चे
अपने नाना आत्मा सिंह व नानी मलकीत कौर की गोद में चले गए थे. घरेलू कलह किस तरह किसी हंसते-खेलते घर को उजाड़ देती है, सिमरनजीत कौर की दर्दनाक मौत इस बात का जीता जागता उदाहरण है. अपनों पर,
खासकर अपनी पत्नी या अपने परिवार पर बिना किसी सबूत के संदेह करना
कभी-कभी इतना हानिकारक बन जाता है कि आदमी को जीवन भर पश्ताने के आलावा कुछ हाथ
नहीं आता है.
( पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का
नाट्य रूपान्तरण )
--साहिल कपूर



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