तिहरा हत्याकांड-
किशोर नगर लुधियाना का तिहरा हत्याकांड 




सामने का मंजर दिल को दहला देने वाला था. हत्यारे ने अधेड़ायु गुरविंदर कौर के साथ दो मासूम बच्चों की भी बड़ी बेरहमी से हत्या की थी. आखिर इस हत्या के पीछे का मकसद केवल लूटपाट था या तस्वीर का कोई दूसरा पहलु भी था जो मौजूदा हालत में पुलिस को नज़र नहीं आ रहा था.
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गुरविंदर कौर क्यों मारी गई,        

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भाई दविंदर सिंह ने अपना पैजामा पहनने के बाद अपनी 55 वर्षीय पत्नी गुरविंदर कौर को आवाज़ देकर पूछा. ‘’ भाग्यवान मेरा कमीज़  कित्थे है,  मुझे देर हो रही है.’’
‘’ जी अभी आई.’’ गुरविंदर कौर ने कमरे में  आकर अलमारी से पति का कमीज़ निकल कर उनकी और बढ़ा दिया. कमीज़ पहनने के बाद दविंदर सिंह ने पगड़ी बांधी और ‘’ अच्छा में चलता हूँ दोपहर तक लौट आऊंगा.’’ कहकर घर से निकल गए. भाई दविंदर सिंह गुरुद्वारा में पाठी थे. आज उन्होंने किदवई नगर स्थित गुरुद्वारा साहब में पाठ करने जाना था. गुरुद्वारा साहब में श्री गुरु ग्रन्थ साहब का अखण्ड पाठ चल रहा था. पाठ करने के लिए तीन-तीन घन्टे के अन्तराल के बाद हर पाठी अपनी डयूटी दे रहा था.अपनी डयूटी खत्म कर वह घर के लिए रवाना हुए और लगभग 2-30 बजे अपने किशोर नगर स्थित घर पहुंचे थे. भाई दविंदर सिंह ताजपुर रोड लुधियाना के किशोर नगर की गली नम्बर-7 में रहते थे. जब वह अपने घर पहुंचे तो घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ था. उन्होंने सोचा शायद उनकी पत्नी गुरविंदर घर का कोई सामान लेने या अपने दोहता-दोहती को चीज़ आदि दिलवाने दुकान पर गई होगी. यह सोचकर वह घर के बहर बैठकर इंतजार करने लगे थे. काफी देर तक इंतजार करने के बाद वे सोच में पड़ गए कि आखिर इतनी देर से गुरविंदर और बच्चे कहा चले गए है. इस बीच वे बार-बार गुरविंदर को उसके मोबाईल पर फोन भी मिलते रहे थे. पर हर बार स्विच बन्द  ही मिला था. गर्मियों की तपती दोपहर. घर के बाहर गली में इंतजार करते हुए उन्हें एक घन्टे से अधिक समय बीत गया तो अपनी जगह से उठकर उन्होंने पड़ोसियों से गुरविंदर और बच्चों के विषय में पूछा. अचानक किसी जरूरी काम से कहीं जाना हो तो गुरविंदर घर की चाबी किसी पड़ोसी को दे जाती थी. पर आज उसने ऐसा नहीं किया था. किसी भी पड़ोसी को गुरविंदर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. दविंदर सिंह के मन में बार-बार यह प्रश्न उठ रहा था कि आखिर गुरविंदर गई तो गई कहाँ. अंत में हारकर उन्होंने अपने बेटे मनप्रीत को फोन कर वस्तुस्थित से अवगत किया. मनप्रीत घर के पास ही किसी फैक्ट्री में काम करता था. अपने पिता का फोन सुनते ही वह दौड़ा चला आया था. उसने आकर 33 फूटा रोड पर रहने वाली अपनी बहन सोनम को फोन कर पूछा  कि क्या माँ वहां पर उनके घर है. सोनम में बताया कि माँ और बच्चे वहीँ-कहीं गये होंगे, यहाँ पर नहीं है. अब कोई चारा नहीं बचा था सो मनप्रीत ने किसीसे हथौड़ा लेकर मुख्यद्वार का ताला तोड़ा और बाप बेटे ने  भीतर प्रवेश किया. यह कोई सवा चार बजे के आसपास की बात है. अर्थात भाई दविंदर को घर के बहर इंतजार करते हुए ढाई घन्टे से उपर समय गुजर चुका था. घर में घुसकर बाप-बेटा उपरी मंजिल पर चले गए थे. मनप्रीत ने पिता को खाना परोस दिया था. खाना खाते समय भी उन दोनों के दिमाग में एक ही प्रश्न चल रहा था कि गुरविंदर और बच्चे कहाँ चले गए. इस बीच उन्हें अपनी छत से उनके पालतू कुत्ते के भौकने के आवाजें सुनाई दी. मनप्रीत ने ऊपर जाकर देखा तो कुत्ता छत पर बंधा हुआ था. वह आश्चर्यचकित होकर सोचने लगा कि कुत्ते को छत पर किसने बांधा है. बहरहाल वह कुते को खोलकर नीचे ले आया. इस बीच उसकी दोनों बहने सोनम और नीरू भी वहां पहुंच गई थी. वह भी माँ के इस तरह बिना बताये कहीं चले जाने पर हैरान थी. इसबीच सोनम नीचे वाले कमरे में आई. दरअसल नीचे वाले पोर्शन में अँधेरा रहता था. इसलिए सारा परिवार ऊपर ही रहता था. नीचे वाले पोर्शन को उन्होंने गोदाम बना रखा था. भाई दविंदर सिंह पाठ करने के साथ शादी ब्याह में गद्दे सप्लाई का काम भी किया करते थे. नीचे वाले पोर्शन को उन्होंने गद्दों का गोदाम बना रखा था.

                                                     गुरविंदर कौर की बेटी नीरू 

सो नम जब नीचे आई तो उसने गद्दे वाले कमरे में खून फैला देखा. घबराकर उसने अपनी बहन नीरू को आवाज़ दी और खून साफ़ करने के लिए पोंछा उठा लाइ. नीरू के साथ मनप्रीत सिंह भी नीचे आगया था. गद्दे वाले कमरे में जब उहोने लाईट जलाकर देखा तो सामने का द्रश्य देखकर उनके होश उड़ गए थे. एकाएक उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी आँखों ने जो देखा है वह सत्य है या उनकी आँखों का  भ्रम मात्र है. सोनम तो यह भयावह दृश्य देख गश खा गिर गई थी. कमरे में फर्श पर खून से लथपथ तीन लाशें पड़ी थी. एक लाश गुरविंदर कौर की थी और दो लाशे सोनम और नीरू के दो बच्चों 7 वर्षीय मनदीप कौर और 6 वर्षीय मासूम ऋतिक की थी. किसी ने बड़ी बेरहमी से उनकी हत्या करने के बाद घर को बाहर से ताला लगा कर उनकी दुनियां को उजाड़ कर रख दिया था. तुरंत ही वहां पर कोहराम मच गया था. पास पड़ोस की तो छोड़ो पूरी कालोनी के लोग घटनास्थल पर जमा हो गए थे. रूधन और चीत्कार से पूरी कालोनी काँप उठी थी. इसबीच किसी ने पुलिस कंट्रोलरूम को भी इस घटना की सूचना दे दी थी. शहर के व्यस्त भीड़ भाड़ वाले इलाके में दिनदहाड़े घर में घुसकर एक ही परिवार के तीन-तीन लोगों की हत्या करने की बात सुनकर पुलिस महकमें में भी हडकंप मच गया था. लुधियाना पुलिस कमिश्नर डाक्टर सुखचैन सिंह गिल, एडीसीपी-4  राजवीर सिंह बोपराय, एडीसीपी क्राईम रत्न सिंह, डीएसपी गगन अजीत, सीआइए इंचार्ज राजेश शर्मा, थाना डिविजन नम्बर-7 के प्रभारी व अन्य कई थानों के एसएचओ क्राईम टीम के साथ मौकाए वारदात पर पहुच गए थे. पुलिस ने वहां पहुँचते ही तुरंत उस क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया था. लाशों को देखने के बाद ऐसा लगा था जैसे किसी भारी चीज से वार करके हत्याएं की गई थी. तलाश करने पर एक कमरे से खून सन्ना हथौड़ा बरामद हो गया था. तीनों हत्याएं इसी हथौड़े से की गई थी. प्रथम दृष्टिय वारदात का मकसद लूटपाट दिखाई दे रहा था.क्योंकि घर के एक कमरे में अलमारी खुली हुई थी और उसमें रखे लगभग 40 हज़ार रुपये और सोने के कुछ आभूषण गायब थे. डाग स्क्यार्ड की मदद लेने से भी कुछ नहीं हुआ. ट्रेनी डाग गली का चक्कर लगाने के बाद वापिस घर लौट आया था. पुलिस को हथौड़े के आलावा वहां से कुछ और फिंगरप्रिंट भी मिले थे. बहरहाल तीनों लाशों को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर उनका पंचनामा तैयार किया और अज्ञात हत्यारे के विरुद्ध हत्या का मुकदमा धारा-302 के तहत दिनांक-3-8-2018 को थाना डिविजन नम्बर-7 में दर्ज करने के बाद तीनों  लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सिवल अस्पताल भेज दिया था. अपनी तफ्तीश के पहले चरण में पुलिस ने मृतकों के परिजनों और गली मोहल्ले वालों से पूछताछ की. इस पूछताछ से पता चला कि भाई दविंदर सिंह गुरुद्वारा साहब में पाठी का काम करते है और साथ ही शादी-ब्याह में किराये पर बिस्तर देने का काम भी करते है. दविंदर सिंह लुधियाना ताजपुर रोड स्थित किशोर नगर की गली नम्बर-7 में कई वर्षो से रह रहे थे. 

नके परिवार में पत्नी गुरविंदर कौर के अलावा तीन पुत्रियाँ और एक अविवाहित पुत्र मनप्रीत सिंह है. तीनों पुत्रियाँ शादीशुदा हैं. उनके निकट रहने वाली दो पुत्रियों में से एक पुत्री सोनम 33 फूटा रोड पर किराये के मकान अपने 7 वर्षीय बेटी  मनदीप के साथ रहती है. उसका अपने पति के साथ अदालत में तलाक का मुकदमा चल रहा है. दूसरी बेटी नीरू की शादी पटियाला के तरुण नामक युवक से हुई है. पिछले कुछ महीनों से तरुण का काम बंद हो गया था इसलिए वह पिछले ढाई महीनो से अपने पति और 6 वर्षीय बेटे ऋतिक के साथ अपनी माँ के घर पर ही रह रही थी. यहाँ पर तरुण लाटरी बेचने का काम करता है. तीसरी शादीशुदा बेटी अम्बाला में अपने पति के साथ रहती है. सोनम की बेटी मनदीप और नीरू का देता ऋतिक चंडीगढ़ पब्लिक स्कूल में पढ़ते है. ऋतिक का दाखिला तो इस घटना से मात्र 10 दिन पहले ही करवाया गया था. स्कूल की छुटी के बाद दोनों बच्चों को रिक्शा 1-30 बजे गुरविंदर कौर के 

                                                                                                       सोनम अपनी बेटी का टिफिन देख विलाप करती है

घर छोड़ जाया करता था. दिनभर दोनों बच्चे नानी के  पास ही रहा करते थे. 
शाम को अपनी माँ के घर आकर सोनम अपनी बेटी मनदीप को घर ले जाती थी. सबसे पहले दोनों बच्चे सुबह 8 बजे दोनों बच्चे स्कूल जाते थे उनके बाद 10 बजे तक गुरविंदर का बेटा मनप्रीत और दामाद तरुण अपने –अपने काम पर चले जाते थे. उनके बाद दविंदर सिंह गुरूद्वारे जाते थे और घर का काम निपटाकर नीरू अपनी बहन सोनम के घर चली जाया करती थी. दिनभर गुरविंदर कौर घर पर अकेली ही रहा करती थी.
पूछताछ में यह भी बात पता चली थी  कि  गुरविंदर के मामा का लड़का राजविंदर पिछले दो सैलून से उनके घर पर रह रहा था . राजविंदर ने किसी से भी कोई वास्ता नहीं रखा हुआ था. वह सिर्फ गुरविंदर कौर और उसके पारिवारिक सदस्यों के संपर्क में ही था. आरोपी राजविंदर सिंह करीब डेढ़ साल तक गुरविंदर कौर के घर में रहा और पिछले नौ महीने से किराए के मकान में रह रहा था. उसे घर की हर चीज के बारे में पूरी तरह से खबर थी कि कौन सी चीज कहां पड़ी हुई है. वह खाने-पीने के अलावा अधिकतर गुरविंदर के घर पर ही रहता था.  गुविंदर के बेटे बेटियों ने उसके वहां रहने पर एतराज़ भी जताया था पर गुरविंदर कौर  ने सब को यह कहकर चुप करा दिया था कि वह उसका भाई है और गरीब भी है. यदि वह दो वक्त की रोटी खा भी लेता है तो कोई हर्ज नहीं. इस हत्याकांड के बाद से वह फरार था. पुलिस ने आरोपी राजविंदर के भाई से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह उनसे मिले हुए करीब 15 साल हो चुके है. उसका अपने भाई से कोई वास्ता नहीं है. राजविंदर अपने किसी रिश्तेदार के संपर्क में नहीं था. करीब 17 साल से वह अपने भाई और परिजनों से भी नहीं मिला है. राजविंदर के बारे में उसके भाई ने बताया कि वह शुरू से ही काफी कम बोलता था. इससे उसके दिमाग में क्या चल रहा है, किसी को कुछ पता नहीं होता था. गुरविंदर कौर या उसके पारिवारिक सदस्यों को ही आरोपी राजविंदर के बारे में ज्यादा पता था। 


                   
पुलिस कमिशनर  लुधियाना डाक्टर सुखचैन सिंह गिल मौकाए वारदात पर 


राजविंदर के वहां रहने की बात सुनकर पुलिस ने तुरन गली की सीसीवी कैमरा फुटेज निकलवा कर चैक की तो राजविंदर  सिंह अपने किराये के कमरे से निकलकर बाहर रोड की तरफ जाता दिखाई दिया था. वह सवा दो बजे का टाइम था. स्कूल के रिक्शेवाले के बयाँ मुताबिक उसने दोनों बच्चों को सवा एक बजे घर के आगे छोड़ा था और बाकी बच्चों को उनके घर छोड़ने के बाद लगभग 2 बजे जब वह दोबारा उस गली से गुज़रा तब गुरविंदर कौर के घर के दरवाजे पर ताला लगा था. इसका अर्थ यह लगाया गया कि बच्चों के स्कूल से लौटने के तुरंत बाद ही राजिंदर ने इस वारदात को अंजाम दिया था. कुछ  और लोगों के बयाँन  लेने के बाद यह बात स्पष्ट हो गई थी कि इस हत्याकांड को राजिंदर ने ही अंजाम दिया था. पर क्यों? यह बात अभी तक पुलिस की समझ में नहीं आई थी. अगर उसने घर में रखे रुपये ही लूटने होते तो इस काम के लिए उसके पास अनेकों अवसर थे. केवल लूट के लिए अपनी बहन और दो मासूम बच्चों की हत्या करने की बात पुलिस की समझ से बाहर थी. इस हत्याकांड की कोई दूसरी तस्वीर भी थी जो इस समय पुलिस को ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी. यह बात पुलिस और रिश्तेदारों के लिए सोच का विषय बना हुआ था, आखिर दोनों बच्चों की हत्या क्यों की गई, इस बात का खुलासा तो हत्यारें के पकड़े जाने के बाद ही होना था. बहरहाल पुलिस ने उस किराये के कमरे का ताला तोडकर वहां की तलाशी ली. पुलिस को किराए के कमरें से खून से लथपथ कपड़े बरामद हुए हत्या करने के बाद राजविंद्र उन्हें वहीं पर छोड़ गया था. जब वे घर पर आया था तो मकान मालिक की बहू घर पर थी. हत्यारा घर से चंद मिनटों में ही फरार हो गया। हत्या करने के बाद राजिंदर  अपने कमरें में गया और हाथ पॉव धोकर दो बैग में कपड़े डाल लिए, जब मकान मालिक ने पूछा तो बताया कि वे किसी काम के चलते लुधियाना से बाहर जा रहा है. पुलिस को वहां से कुछ अजीबोगरीब चीजें भी वहां थी जैसे काफी मात्र में पिसी हुई लाल मिर्च, नीबू और तन्त्रमन्त्र में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी बरामद हुई थी.


              प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस कमिश्नर - पुलिस अधिकारी और दोषी राजविंदर उर्फ़ रविंदर 

पुलिस कमिश्नर के आदेश पर कई टीमे बनाकर युद्धस्तर पर हत्यारे राजिंदर की तलाश शुरू की गई. उसके फोन की लास्ट लोकेशन समराला चौक पर थी. पुलिस की अलग-अलग टीमों ने  अपने स्तर पर  राजिंदर की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी थी.पुलिस को राजविंदर का जो मोबाईल नम्बर मिला था वह पिछले एक हफ्ते से बंद था. उसकी लास्ट काल समराला चौक के पास थी उसके पहले उसके फोन पर भाई दविंदर सिंह का फोन आया था. हत्याकांड को अंजाम देकर राजविंदर  तो  वहां से चला गया था, उसी समय भाई दविंदर  अपने घर पहुंचा तो ताला लगा हुआ था. उसने ताले की चाबी के लिए आरोपी राजविंदर को कई बार फोन किया था. पहले तो राजविंदर ने फोन उठाया ही नहीं बाद में जब राजविंदर ने फोन उठाया तो कुछ न बोल कर 13 सेकेंड तक कॉल होल्ड रख दी और फिर फोन काट दिया. है। बाद में राजविंदर ने अपना फोन बंद कर दिया।
पुलिस की टीमें लगातार राजविंदर की तलाश में जुटी हुई उसका पता लगाने के लिए पुलिस की टीमें पंजाब के अलग अलग शहरों के साथ साथ पड़ोसी राज्यों और महाराष्ट्र भी गई.
अगले दिन दिनांक 4 अगस्त को  तीन डाक्टरों पर आधारित बोर्ड ने शवों का पोस्टमार्टम किया. पैनल में डाक्टर बिंदू नलवा, डाक्टर हरीश केयरपाल और डाक्टर कुलवंत शामिल थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हुए खुलासे दिल-दहला देने वाले थे. आखिर हत्यारे ने इतनी निर्ममता से तीनों की हत्या क्यों की थी. हत्यारे ने केवल हथौड़े का नहीं, बल्कि तेजधार हथियार का भी प्रयोग किया था. गुरविंदर कौर के शरीर पर 15, ऋतिक के शरीर पर 14 और दोहती मनदीप के शरीर पर 4 जगह चोटों के निशान थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पहले गुरविंदर कौर के गले में चुन्नी डाल दबाया गया था, जबकि उसके दोनों हाथों पर रस्सी बांधने के निशान भी थे. गर्दन पर तेजधार हथियार से दाईं तरफ वार किए गए. दाईं आंख पर हथौड़ी मारकर फोड़ दिया गया था. नाक की हड्डी और जबड़े पर ही हथौड़ा मारकर तोड़ दिया गया था और  सिर पर हथौड़े से कई वार किए गएथे. दोनों टांगों पर भी चोटों के निशान थे. इसके अलावा फेफड़े और लीवर भी हथौड़े मारे गए थे जिस कारण लीवर और फेफड़े  फट गए थे इसके अलावा और भी शरीर पर कई जगह चोटों के निशाने थे. 6 वर्षीय ऋतिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हत्यारे ने उसकी गर्दन पर दाईं तरफ 2 और छाती पर तेजधार हथियार से एक वार किया था. इसके अलावा सिर पर हथौड़े से 4 से 5 वार किए. उसके शरीर पर कई जगह चोटें आई, वहीं दोहती मनदीप कौर के सिर पर 2 से 3 बार हथौड़ा मार गया था. जिस कारण उसके दिमाग का कुछ हिस्सा भी बाहर आ गया था. पोस्टमार्टम के बाद तीनों की लाशों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया था. और उसी रोज़ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था. दो मासूमों और उनकी नानी की हत्या को लेकर डी.जी.पी. डाक्टर सुरेश अरोड़ा ने भी रोष प्रकट किया और उन्होंने इस मामले में लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल से बात की और हत्यारोपी की जल्द गिरफ्तार करने के आदेश दिए.
पुलिस ने राजविंदर के मोबाइल फोन की डिटेल निकलवाई तो उसमें कई ऐसे नंबर सामने आए थे  जो अमृतसर के रहने वाले लोगों के थे. जिनके साथ हत्यारा संपर्क में था. उनमें एक रिक्शावाला का नम्बर भी था.  पुलिस ने उन सबसे पूछताछ की थी पर कोई ख़ास सुराग हाथ नहीं लगा था. काल डिटेल में यह बात भी सामने आई थी कि हत्यारे ने वारदात के दिन वाली सुबह अपने भांजे  मनप्रीत सिंह से फोन पर भी बात की थी और उससे काम ढूंढने को कहा था. हत्यारें की तलाश में पुलिस की कई टीमें अमृतसर भेजी गई  जहां से पता चला है कि  राजविंदर समय-समय पर किराए का मकान बदलकर रहता था.  तफ्तीश में यह बात भी पता चली थी कि  हत्यारे पर पहले भी एक दहेज प्रताडना का मामला दर्ज है. इस मामले में वह पी.ओ. है और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. पुलिस की तरफ से उसकी पत्नी और ससुर को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनसे कुछ ज्यादा पता न चल सका था.
आखिर 16 दिनों तक चूहे-बिल्ली का खेल खेलने के बाद  दिनांक 19 अगस्त को सीआईए-2 इंचार्ज राजेश कुमार शर्मा ने एक गुप्त सूचना के आधार पर राजविंदर सिंह को संगरूर से गिरफ्तार कर लिया था. वह एक धर्मशाला के कमरा नम्बर-17 में छुपा बैठा था. उसे गिरफ्तार करने के बाद लुधियाना लाया गया और पुलिस कमिश्नर व एनी आला अधिकारीयों के सामने उसका बयान रिकार्ड किया गया था. पूछताछ के दौरान बिना किसी हील- हुजत के राजविंदर ने अपना  गुनाह कबूल करते हुए दिलदहला देने वाले इस तिहरे हत्याकांड की जो कहानी बताई वह एक विवेकहीन पुरुष की बिगड़ी हुई मानसिकता का परिणाम थी. दरअसल राजविंदर अपनी बहन गुरविंदर की हत्या नहीं करना चाहता था. और ना ही उसकी दो मासूमों से कोई दुश्मनी थी. वह तो केवल अपने जीजा भाई दविंदर सिंह की हत्या करना चाहता था. पर हालात ऐसे बन गए कि उसे इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देना पड़ा था.


गुरविंदर का दामाद तरुण 
राजविंदर का असली नाम रविंदर बखशी हैलेकिन बाद में उसने अपना नाम बदल कर राजविंदर कर लिया था. इसके पीछे कारण उसका दहेज प्रताडऩा के एक केस में भगौड़ा होना था. वह पिछले दो साल से अपने जीजा भाई दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था दरअसल राजविंदर सिंह को  यह शक था कि उसकी दोनों शादीयां टूटने व उसका घर बर्बाद होने के पीछे का कारण उसकी बुआ की लडक़ी गुरविंदर कौर का पति दविंदर सिंह है. असल में राजविंदर के पिता जसविंदर भी गुरूद्वारे में ग्रंथी थे और उसके हरचरण नगर व गुरु अर्जुनदेव नगर में अपने मकान थे. अब राजविंदर के पिता की भी मौत हो चुकी थी. राजविंदर के मन में यह बात बैठ गई थी कि उनके मकान बिकवाने के पीछे भाई दविंदर की कोई साजिश थी. इन्हीं कारण से ही उसके पिता की भी मौत हुई थी.
रविंदर की पहली पहली शादी साल 1997 में हुई थी. पत्नी के साथ विवाद रहने के कारण उसकी पत्नी ने सन 2000 में उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवा दिया था और उसे छोडकर चली गई थी. दहेज उत्पीड़न के मामले में रविंदर भगोड़ा हो गया था और अमृतसर चला गया. उन दिनों भाई दविंदर सिंह के साथ मिल उसके पिता काम करते थे. पहली पत्नी से तलाक होने के बाद भाई दविंदर ने रविंदर की अमृतसर में एक महिला से दूसरी शादी करवा दी. दहेज उत्पीडन के केस में भगोड़ा होने के कारण रविंदर ने अपनी पहचान छुपाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम बदल कर राजविंदर सिंह और पिता का नाम अजीत सिंह रख लिया था. उसके बाद राजविंदर पत्नी को लेकर दिल्ली व मुंबई चला गया. दूसरे शहरों में किराये पर रहते हुए कढ़ाई, लोन एजेंट, सेल्समैन आदि की अलग अलग नौकरियां करता रहा था. वह फिल्म भी बनाना चाहता था. लेकिन जब उसकी दूसरी पत्नी  को उसकी पहली शादी के बारे में पता चला तो वह उसे छोड़ कर चली गई थी. इस दौरान उसे सूचना मिली की काम में नुकसान होने पर पिता ने अपने सारे घर बेच दिये है.
अपने मन से हारे हुए रविंदर को यह शक हो गया कि उसकी दूसरी पत्नि को पहली शादी वाली बात दविंदर सिंह ने बताई है. जिसके कारण उसके मन में दविंदर सिंह के प्रति रंजिश पैदा हो गई तथा वह उसे कत्ल करने की प्लानिंग करने लगा. आरोपी लुधियाना में दविंदर सिंह के घर पर भी रहा लेकिन बाद में पास ही किराये के मकान में रहने लगा. वह पिछले दो साल से दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था तथा इसके लिए उसने हथौड़ा, कटर, दात, करंट वाली तारें व अन्य प्रकार के हथियार एकत्रित किए हुए थे तथा पिछले कुछ महीनों में वह कई बार भाई दविंदर सिंह को मारने के लिए उपरोक्त हथियार अपने साथ छिपा कर गया भी ले गया था लेकिन मौका नहीं मिल सका. इस दौरान रविंदर को उसके मकान मालिक ने घर खाली करने के लिए अंतिम चेतावनी दी थी क्योंकि उसने कई महीनों से किराया नहीं दिया था. जिसके बाद रविंदर ने अब और देर करना उचित न समझ और वारदात को जल्दी अंजाम देने का पक्का मन बना लिया था. वारदात वाले दिन उसे यह ज्ञात हुआ कि भाई दविंदर सिंह उसकी बुआ की लडक़ी गुरविंदर कौर के साथ घर पर ही मौजूद है. अपने साथ हथौड़ा लेकर वह उनके घर चला गया लेकिन दविंदर सिंह उसके आने से पहले ही किदवई नगर गुरुद्वारा चला गया था. दविंदर सिंह को घर में ना पाकर रविंदर का खून खौल उठा था. वह उपरी मंजिल पर चला गया और वहां मौजूद गुरविंदर कौर के सिर पर पीछे से हथौडे का एक भरपूर वार कर दिया. हथौड़े का वार इतना शक्तिशाली था कि एक ही वार से गुरविंदर कौर चारों खाने चित होकर वहीं गिर गई.. गुरविंदर की हत्या करने के बाद वह वहीँ बैठकर  दविंदर सिंह के आने का इंतजार करने लगा. आज वह अपने मन में तय करके आया था कि आज अपनी बर्बादी के कारण बने दविंदर सिंह को परलोक पहुंचा कर ही वहां से जायेगा. इस बीच गुरविंदर कौर को दोबारा खड़े होने के प्रयास करता देखकर आरोपी उसे घसीटकर नीचे ले आया तथा फिर से उस पर हथौड़े से वार किए। और गुरविंदर कौर का काम तमाम करने के बाद उपरी मंजिल से सारा खून साफ कर दिया और नीचे आकर बैठ गया. इसी बीच परिवार के बच्चों में पहले लडक़ा और बाद में लडक़ी स्कूल से घर आये जिन्होंने वहां पर नीचे कमरे में खून देख लिया. और पूछा.


‘’ नानाजी यह किसका खून है, और नानी कहाँ है.’’  
इतना पूछने के बाद दोनों बच्चे ऊपर जब गुरविंदर कौर को देखने उपर जाने लगे तो रविंदर ने पहले लडक़े और फिर लडक़ी की हथौड़े, कटर, व दात से निर्मम ढंग से हत्या कर दी. और उसने  अलमारी में रखे 10 हजार रुपये निकल लिए. तीनों हत्यायें किये जब कुछ देर बीत गई और भाई दविंदर नहीं लौटा तो पकड़े जाने के डर से वह घर के बाहर ताला लगाकर वहां से फरार हो गया. गुरविंदर के घर से निकलने के बाद वह अपने कमरे पर गया और हाथ मुंह धोकर खून आदि साफ़ करने के बाद कपडे बदल कर निकल गया. हत्या करने के बाद राजविंदर पहले माछीवाड़ा गया. उसके बाद अमृतसर चला गया. अमृतसर में दो दिन तक धर्मशाला में रहने के बाद राजस्थान स्थित हनुमानगढ़ चला गया. इस दौरान राजविंदर बार-बार बस बदलता रहा था. क्योंकि उसे पता था कि पुलिस उसकी तलाश कर रही है और फोन द्वारा उसकी लोकेशन भी पता लगा रही है. हनुमानगढ़ से वापस राजविंदर संगरूर आ गया और एक धर्मशाला में रहने लगा. उसने समाचार पत्रों में अपनी फोटो भी देख ली थी. चूंकी उसका टार्गेट दविंदर सिंह था तथा उसके मन में यह बात बैठी हुई थी कि दविंदर सिंह बच गया है. इसलिए उसने किसी अन्य आदमी के फोन से दविंदर सिंह को फोन कर जान से मारने की धमकी दी और यह भी बताया कि उसके घर से मात्र 10 हजार रुपये मिले थे 40 हजार की बात झूठी है. भाई दविंदर सिंह ने इस फोन के बारे में पुलिस को बताते हुए एक रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी और  इसी फोन की लोकेशन को ट्रैस करते हुए सीआईए  की टीम ने आरोपी को संगरूर की एक धर्मशाला में से जाकर धर दबौचा था. राजविंदर ने मौके से कुछ नगदी भी उठाई थी जिसके बारे में वैरिफाई करने के अलावा मौके से हथौड़ा बरामद कर लिया गया था तथा बाकी के हथियार बरामद करने के लिए पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर दो दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया था. रिमांड के दौरान राजविंदर उर्फ़ रविंदर की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग कतर और चुरी भी बरामद कर ली गई थी. रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दिनांक 21 अगस्त को उसे पुन अदालत में पेश किया गया जहाँ से अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया था.
( पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण )
--हरमिंदर कपूर    
       
      

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Milan Tomic

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