कोचिंग देने को नहीं हुआ कोई तैयार, सुधा ने नहीं मानी हार और एशियन गेम्स में देश को दिलाया मेडल
एशियन गेम्स-2018 में देश को रजत पदक दिलाने वाली यूपी की सुधा सिंह
को कोचिंग देने से कई प्रशिक्षकों ने मना कर दिया था। कई लोगों ने कहा था कि वह
मेडल नहीं ला सकती। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारियां जारी रखीं। लोगों की
इन बातों ने ही सुधा को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह बात खुद सुधा सिंह ने कही। धर्मशाला में अभ्यास के लिए आने के बाद वह अघंजर महादेव मंदिर में मन्नत
मांगकर एशियन गेम्स में भाग लेने गई थीं। मन्नत पूरी होने पर वह दोबारा मंदिर में
दर्शनों के लिए आई। सुधा ने कहा कि उनका फेडरेशन सहित किसी के साथ भी कोई विवाद
नहीं है।
वह केवल देश को मेडल दिलाना चाहती हैं। इसी का नतीजा है कि उन्होंने साल 2009 से अब तक लगातार विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में देश को मेडल जिताए हैं। अब उनका फोकस अगले साल होने वाली एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगा है।
सुधा सिंह ने एशियन गेम्स से पहले धर्मशाला में करीब एक साल तक अभ्यास किया। इस बीच वह अन्य स्थानों पर भी अभ्यास करने गईं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में ऊंचाई के अभ्यास के लिए अच्छा ट्रैक है। इससे पहले ऊटी में अभ्यास करना पड़ता था। मगर अब धर्मशाला एक अच्छा विकल्प मिल गया है, जहां एथलीट को अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं।
पढ़ाई में मन नहीं लगा तो दौड़ को चुना. यूपी के रायबरेली की रहने वाली 32 वर्षीय धाविका सुधा सिंह ने पढ़ाई से दूरी बनाने के लिए दौड़ लगाई, जो उन्हें मेडल की दौड़ में जीत दिला गई। सुधा का कहना है कि उन्हें पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इसलिए उन्होंने स्पोर्ट्स को चुना था। कई बार ट्यूशन मिस करके दौड़ लगाती थीं। बकौल सुधा जब छात्रावास में उनका चयन हुआ, तब ट्यूशन की चिंता समाप्त हुई।
वह केवल देश को मेडल दिलाना चाहती हैं। इसी का नतीजा है कि उन्होंने साल 2009 से अब तक लगातार विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में देश को मेडल जिताए हैं। अब उनका फोकस अगले साल होने वाली एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगा है।
सुधा सिंह ने एशियन गेम्स से पहले धर्मशाला में करीब एक साल तक अभ्यास किया। इस बीच वह अन्य स्थानों पर भी अभ्यास करने गईं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में ऊंचाई के अभ्यास के लिए अच्छा ट्रैक है। इससे पहले ऊटी में अभ्यास करना पड़ता था। मगर अब धर्मशाला एक अच्छा विकल्प मिल गया है, जहां एथलीट को अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं।
पढ़ाई में मन नहीं लगा तो दौड़ को चुना. यूपी के रायबरेली की रहने वाली 32 वर्षीय धाविका सुधा सिंह ने पढ़ाई से दूरी बनाने के लिए दौड़ लगाई, जो उन्हें मेडल की दौड़ में जीत दिला गई। सुधा का कहना है कि उन्हें पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इसलिए उन्होंने स्पोर्ट्स को चुना था। कई बार ट्यूशन मिस करके दौड़ लगाती थीं। बकौल सुधा जब छात्रावास में उनका चयन हुआ, तब ट्यूशन की चिंता समाप्त हुई।

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