15 लाख की सुपारी    


किस्तों में     

मंदीप की हत्या करने का सौदा 15 लाख रुपये में तय 

किया गया था. और यह 15 लाख रुपये सुपारी किल्लर 

को 1 साल की अवधि में किस्तों के हिसाब से मिलने 

थे. अब तक उसे 20 हज़ार रुपये अवैध रिवाल्वर 

खरीदने के लिए मिले थे और1 हज़ार रूपया उसे मंदीप 

की हत्या से कुछ समय पहले दिया गया था. बाकी 

सुपरी की 15 लाख रकम में से उसे 5 लाख रुपये मंदीप की हत्या करने के बाद, 

उसकी अपनी शादी से एक दिन पहले यानि 13 अक्टूबर को दिए जाने थे. पर इसके 

पहले ही पुलिस ने उसे धर दबोचा था.

र्कीटैक्ट मनदीप बंसल उर्फ़ मिंटी एक मशहूर भवन निर्माता था. वह बड़े-बड़े भवनों को ठेके पर बनाने के साथ अपने खुद के प्लाट खरीदकर उन पर कोठियां बनाने के बाद बेच दिया करता था. इस काम में उसे अच्छा खासा मुनाफा हो जाता था. मंदीप सिविल इंजीनियर था और इस काम का उसे बड़ा तजुर्बा था. वह भवन निर्माण कार्य में वह पूरी तरह से सक्षम था. लुधियाना शहर में उसकी गिनती बड़े बिल्डरों के रूप में होती थी. हालाँकि उसके पिता स्वर्गीय सुरिंदर सिंह कपड़े के व्यपारी थे, पर मिंटी ने भवन निर्माण क्षेत्र में काफी नाम कमाया था.
मनदीप तीन भाई-बहन थे. सबसे बड़े थे सुरजीत सिंह बंसल. जो कपड़े का व्यापार करते थे. दूसरे नम्बर पर मनदीप था और सबसे छोटी बहन थी, रवनीत कौर. सुरजीत को छोड़कर मनदीप और रवनीत अभी अविवाहित थे. आज से लगभग दो वर्ष पहले बंसल परिवार गुरु अंगत देव नगर में रहता था. और फिर अचानक उन्हें वह घर छोड़कर खन्ना एन्क्लेव, धान्दरा रोड पर एक किराये की कोठी में रहना पड़ा था. बंसल परिवार के गुरु अंगत देव नगर छोड़ने के पीछे भी एक अहम कहानी है जो आगे चलकर एक बहुत बड़े अपराध को जन्म देने वाली थी. बहरहाल खन्ना एन्क्लेव में रहते हुए बंसल बंधुओं ने लुधियाना के ही शहीद भगत सिंह नगर में एक प्लाट खरीद कर उसपर एक विशाल कोठी का निर्माण करवाया जो लगभग पूरा हो चुका था और शुभ महूर्त के अनुसार उन्हें दिनांक 14 अक्टूबर को नई कोठी में गृह प्रवेश करना था, इस के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थी. घर का सारा सामान बाँध लिया गया था.
दिनांक 11 अक्टूबर की सुबह 9 बजे मंदीप  बंसल अपनी एक निर्माण साईट दुगरी फेज़-1 की कोठी नम्बर- 196 पर वहां चल रहे काम को देखने गया था. यह कोठी सरदार सुखविंदर सिंह की थी जिसका निर्माण कार्य मंदीप करवा रहा था. निर्माणाधीन कोठी पर मंदीप पूरे एक घंटे तक रुका था. इसके बाद उसे दूसरी साईट पर जाना था. ठीक 10 बजकर 2 मिनट पर मंदीप कोठी से बाहर निकलकर अपनी इंडिका कार के पास आया और कार में सवार होने के लिए जैसे ही उसने ड्राइविंग सीट का दरवाज़ा खोलना चाहा, तभी कार के पीछे छुपा बाइक सवार एक आदमी अचानक से प्रकट हुआ और उसने मंदीप पर रिवाल्वर से अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. शूटर ने मंदीप पर 5 गोलियां दागी और वहां से निकल गया था.  गोलियां लगते ही मंदीप कटे हुए पेड़ की तरह लहराकर जमीन पर गिर गया था. गोलियों की आवाज़ सुनकर मौका पर लोग जमा हो गए थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि हत्यारा कौन था और उसने मंदीप पर गोलियां क्यों चलाई थी. निर्माणाधीन कोठी का मालिक सुखदेव सिंह भी दौड़ा हुआ बाहर आया और उसने मंदीप को सहारा देकर कुर्सी पर बिठाकर पानी पिलाने की कोशिश की पर मंदीप की हालत गंभीर थी और उसने अस्पताल चलने के लिए कहा. सुखदेव ने मंदीप के परिजनों और पुलिस को इस घटना की सूचना दी और मंदीप को डीएमसी अस्पताल ले गया. पर अस्पताल पहुंचते ही डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. तबतक मंदीप का बड़ा भाई सुरजीत और पुलिस भी वहां पहुंच गई थी. यह घटना 11अक्टूबर 2018 सुबह 10 बजे की है.
सुपारी किल्लर गुरविंदर और दोषी अमनपाल के साथ पुलिस अधिकारी प्रेसवार्ता के दौरान         
सूचना मिलते ही लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल, ए.डी.सी.पी. सुरिंदर लांबा, ए.सी.पी. क्राइम सुरिंदर मोहन, ए.सी.पी. रमनदीप सिंह भुल्लर, सीआइए स्टाफ-2 इंचार्ज राजेश शर्मा और थाना दुगरी प्रभारी इं राजेश ठाकुर घटनास्थल पर पहुंच गए थे. मंदीप बंसल की हत्या का मुकदमा मृतक के भाई सुरजीत बंसल की तहरीर पर अपराध संख्या- 230 पर भारतीय दंड विधान सहिंता की धारा 302- 120 बी और 25- 27- 54- 59 आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात अपराधियों के विरूद्ध थाना दुगरी में दर्ज किया गया था. घटनास्थल का मुआयना करने पर पुलिस को वहां से खाली कारतूस का कोई खोल नहीं मिला था जो हैरानी वाली बात थी. आखिर गोलियों के खाली खोखे कहाँ गायब हो गए थे. पुलिस इस आंतकवादी हमले से भी जोड़कर देख रही थी. पोलिस ने मंदीप बंसल हत्याकांड को जल्द सुलझाने के लिए पुलिस की कई टीमे बनाई थी. क्योंकि इस हत्याकांड से शहर भर में दहशत का माहौल था और व्यापारी वर्ग में आक्रोश. पुलिस टीमे काई एंगल्स और थियोरियों पर काम कर रही थी पार सबसे पहले यह जानना आवश्यक था.  
‘’ क्या मृतक की किसी के साथ कोई दुश्मनी थी.?’’ इस बात का जब पुलिस ने पता लगाना शुरू किया तो एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया था जिसके पास मृतक की हत्या करने की वजह थी और वह नाम था मृतक के पूर्व पड़ोसी बलविंदर सिंह का. जांच का दायरा जैसे –जैसे आगे बढ़ा तो यह बात भी स्पष्ट होती चली गई थी कि बलविंदर सिंह ही मंदीप का हत्यारा हो सकता है. और इसी के साथ ही दो वर्ष पूर्व बंसल बंधुओं के गुरु अंगत देव नगर वाली कोठी को छोड़ने की वजह भी स्पष्ट हो गई थी. बलविंदर का सेल नम्बर पुलिस को आसानी से मिल गया था. उन्होंने बलविंदर के फोन की लोकेशन चेक की तो वह उस के घर न्यू अमर कालोनी की बता रही थी. इसका मतलब साफ़ था कि बलविंदर ने यह काम खुद न करके किसी किराये के हत्यारे से करवाया होगा. एक पुलिस टीम बलविंदर के घर भेजी गई पर वह अपने घर नहीं मिला था, शायद वह फरार हो गया था. दरअसल पुलिस का ध्यान बलविंदर की ओर इस कारण गया था कि जब उन्होंने मृतक के भाई सुरजीत के बयानों को बारीकी से पढ़ा तो पुलिस को यह बात पता चली थी कि आज से दो वर्ष पूर्व मृतक और बलविंदर पड़ोसी हुआ करते थे और उनके बीच अच्छा –खासा याराना था. दोनों हम प्याला- हम निवाला दोस्त थे. और दोनों का एक दूसरे के घर पर काफी आना-जाना भी था. बलविंदर का स्पेयर पार्ट्स का बिजनेस था. बलविंदर की पत्नी कर्मजीत कौर, जो कि एक बहुत खूबसूरत महिला थी. जिसकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते थे. कर्मजीत कौर का झुकाव अविवाहित मंदीप बंसल की ओर हो गया था. कर्मजीत की अपनी कोई मजबूरी रही होगी जिसने उसे मंदीप से सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित किया था. बलविंदर में कोई कमी थी या फिर कोई और वजह भी रही हो सकती थी. पर मंदीप और कर्मजीत के बीच अवैध सम्बन्ध स्थापित हो गए थे जिस का बलविंदर को जल्द ही पता चल गया था. उसने अपनी पत्नी को रोकने के साथ-साथ मंदीप को भी अपने हर आने से रोक दिया था. मुहल्लेदारी देखते हुए एक टाईम तो मंदीप ने अपने आप को रोक लिया था पर कर्मजीत कौर अपने को रोकने में कामयाब नहीं हो सकी थी. वह कोई ना कोई बहाना कर मंदीप को मिलने उसके घर पहुँच जाया करती थी. बलविंदर अपनी पत्नी कर्मजीत पर नज़र रखे हुए था और हर बार उसे पता चल जाता था. ऐसे में उसके घर हर समय क्लेश रहने लगा था. बलविंदर और कर्मजीत के बीच रिश्ते अब सामान्य नहीं रह गये थे. उनके रिश्तों और शादीशुदा ज़िन्दगी में ज़हर घुल चुका था.

माडल चित्र, इसका कथा से कोई सम्बन्ध नहीं है.

कुछ रिश्ते कुदरत तय करती है जो मर्यादाओं और खून के धागों से बंधे होते हैं. कुछ रिश्ते समाज बनता है, जो मजबूरी की सलाखों में जकड़े होते है. और फिर कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो दिल की धड़कनों पर सवार, चाहत के मझदार में तैरते है. ये जहाँ चाहे वहां जा सकते है. कभी किनारे पहुंच सकते हैं तो कभी मझदार में डूब भी सकते है. बैचलर मंदीप बंसल और शादीशुदा कर्मजीत कौर का इसी तरह का सम्बन्ध था. ये दोनों अच्छे दोस्त तो थे ही पर इन दोनों के बीच अच्छा- खासा रोमांटिक अफेयर भी था. इस समय कर्मजीत कौर दो नावों पर सवार थी जबकि उसे सोचना चाहिए था कि अपने पति बलविंदर के साथ उसका रिश्ता टूटने के कागार पर था तो उसके लिए मंदीप के साथ नया रिश्ता जोड़ना, मूर्खता ही खतरनाक भी हो सकता था. मंदीप के साथ रिश्ता जोड़ना छेद वाली दो नावों में एक-एक पैर रखने के बराबर था. ऐसे में डूबना गारंटी होता है. और यही बात मंदीप पर भी लागू होती थी. जब कोई इन्सान अपनी जिन्दगी के अहम फैसले को बिना सोचे समझे या लापरवाही से लेता है तो ऐसा करके वो जूए की बाज़ी खेल रहा होता है. अगर जीत गए तो ठीक, लेकिन अगर हार हुई तो उसकी अपनी जिन्दगी और कईयों की जिन्दगियाँ इस कदर बर्बाद होती हैं कि सम्भलने का दूसरा मौका तक हाथ नहीं आता है. जैसा कि मंदीप और उसके परिवार के साथ हुआ था.

बलविंदर ने लाख प्रयास किया कि वह अपनी पत्नी को समझकर या मंदीप से बात कर दोनों के बीच चल रहे इस नाजायज़ रिश्ते को खत्म करवा सके, पर वह ऐसा कर नहीं सका था. बल्कि पानी उसके सिर के ऊपर से बहता हुआ कहीं दूर निकल गया था. आज से दो वर्ष पूर्व एक दिन मंदीप बंसल और कर्मजीत कौर अपना-अपना घर छोड़कर रात के अँधेरे में कहीं भाग गये थे. बलविंदर सिंह जब सुबह सोकर उठा था तब उसे इस बात का पता चला था. शर्म के मारे वह किसी को अपना मुंह दिखने लायक नहीं रहा था. उसने यह बात किसी को नहीं बताई थी. बताता भी तो क्या बताता कि उसकी खुद की बीवी उसके दोस्त के साथ घर से भाग गई थी. उसने अपने स्तर पर दोनों की तलाश शुरू की थी पर दो दिनों बाद ना जाने किन कारणवश वे दोनों अपने-अपने घर लौट आये थे. क्योंकि बलविंदर का सिर पूरे मोहल्ले और बिरादरी में शर्म से झुक गया था, पत्नी के इस शर्मनाक कारनामे से वह किसी से आँख मिलाने लायक नहीं रहा था. सो कर्मजीत कौर के वापिस आ जाने के बाद उसने बिना किसी से कोई बात किये और बिना कुछ कहे रातों रात अपना गुरु अंगत देव नगर वाला मकान छोड़ दिया और अपने परिवार सहित कोठी नम्बर-9, खन्ना एन्क्लेव, धांधरा रोड पर आकर रहने लगा था. इस बात को पूरे दो वर्ष बीत चुके थे और लगभग सभी लोग इस बात को भी भूल चुके थे.
पनी तफ्तीश को आगे बढ़ाने से पहले पुलिस के सामने यह बात लगभग पूरी तरह से साफ़ हो गई थी कि अपनी बेज्जती का बदला लेने के लिए ही बलविंदर ने मंदीप की हत्या किन्हीं भाड़े के लोगों से करवाई थी. अब पुलिस का टारगेट वो भाड़े के हत्यारे थे जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया था. सो उनकी तलाश में पुलिस ने पूरे क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में हत्यारे का चेहरा स्पष्ट दिखाई दे रहा था. वह बाईक पर आया था और वारदात को अंजाम देकर निकल गया था. हत्यारा कैमरे में कैद तो हो गया था पर पोलिस अभी पता नहीं लगा पायी थी कि वह कौन शक्स है. इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि वारदात के समय हत्यारे ने जिस बाईक का प्रयोग किया था वह दुगडी की मार्किट में लावारिस खड़ी है. पुलिस ने फौरन वह बाईक अपने कब्जे में लेकर ट्रांसपोर्ट अथार्टी से बाईक के मालिक का पता लगाने के बाद जब वहां पहुंची तो बाईक के मालिक ने बताया की दिनांक- 5 अक्तूबर को उसकी उक्त बाईक गुरुद्वारा आलमगीर साहब के बाहर से चोरी हो गई थी जिसकी उसने थाना डेहलों में बाईक चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी. पुलिस ने थाना डेहलों से इस बात की तस्दीक कर ली थी. कैमरे में कैद हत्यारा वैसे तो पुलिस के सामने था पर दिल्ली अभी बहुत दूर थी. घटनास्थल से गोलियों के खाली खोल का बरामद ना होना और हत्यारे का मौकाए-वारदात पर आधा घंटा इंतज़ार करना, यह बात भी पुलिस को हज़म नहीं हो रही थी. आधा घंटा इंतज़ार करने का मतलब था कि मंजीत की हत्या की प्लानिंग बहुत पहले से ही बना ली गई थी. हत्यारे ने  वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी रेकी की हुई थी. मौका देखकर उसने प्रदीप को गोली मारी और फरार हो गया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपी साढ़े नौ बजे के करीब ही घर के सामने आकर खड़ा हो गया था. उसने फरार होने के लिए पहले ही बाइक सीधी करके लगा रखी थी. वह काफी समय तक मंदीप का इंतजार करता रहा था. जब मंजीत बाहर आया तो आरोपी ने उस  पर गोलियां बरसा दी. लोगों का यह भी कहना था कि वह पहले तो बाइक पर बैठा मंदीप के लौटने का इंतजार करता रहा फिर इधर-उधर घूमता रहा था. मंदीप के सुखदेव के साथ खड़े होने के दौरान भी वह वहीं खड़ा था. बहरहाल पुलिस ने काफी भाग दौड़ करने के बाद हत्यारे की पहचान कर ली थी. उसका नाम गुरविंदर सिंह था और वह शिमला पूरी का रहने वाला था. गुरमीत के बारे में अधिक जानकारी जुटाने पर पुलिस को पता चला कि गुरविंदर कम्प्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर है. वह किसी कम्प्यूटर हार्डवेयर की दुकान पर काम करता था.
हत्या करने के बाद सीसीटीवी के कैद हत्यारा                                             
गुरविंदर के बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस ने अपना नेटवर्क फैलाने के साथ चारों ओर अपना जाल बिछा दिया और काफी मेहनत के बाद वारदात के 15 घन्टों बाद मंजीत हत्याकांड के सुपारी किल्लर शूटर गुरविंदर को दुगरी से धर दबोचा था. थाने में पुलिस के उच्चाधिकारियों के सामने उसने बिना किसी हूल हुज्जत के अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया था कि उसी ने ही बलविंदर के कहने पर मंदीप की हत्या करने का सौदा 15 लाख रुपये में तय किया था. और यह 15 लाख रुपये उसे 1 साल की अवधि में किस्तों के हिसाब से मिलने थे. अब तक उसे 20 हज़ार रुपये अवैध रिवाल्वर खरीदने के लिए मिले थे और 1 हज़ार रूपया उसे मंदीप की हत्या से कुछ समय पहले दिया गया था. बाकी सुपरी की 15 लाख रकम में से उसे 5 लाख रुपये मंदीप की हत्या करने के बाद, उसकी शादी से एक दिन पहले यानिकी 13 अक्टूबर को दिए जाने थे. इसी बात का गुरविंदर पर दबाव था और सही टाइमिंग पर उसने गुरविंदर की हत्या कर भी दी थी. अब उसे इस हत्या के कान्ट्रेक्ट अनुसार पहली किस्त 5 लाख रुपये मिलने थे लेकिन इस के पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. गुरविंदर को अब भी उम्मीद थी कि बलविंदर उसे पैसे देगा क्योंकि के कान्ट्रेक्ट के अनुसार समय रहते उसने मंदीप की हत्या कर दी थी. 14 तारीख को मंजीत बंसल ने अपनी नई कोठी में गृहप्रवेश करना था और 14 तारीख को ही गुरविंदर की भी शादी होनी थी, और शादी में खर्च किये जाने वाले रुपये उसे मंदीप की हत्या करने के बाद ही बलविंदर से मिलने थे इसी लिए उसे मंजीत की हत्या 13 तारीख तक हर हाल में ही करनी थी, जो उसने कर दी थी.  
लविंदर सिंह और हार्डवेयर की दुकान पर काम करने वाले आरोपी गुरविंदर की मुलाकात करीब छह महीने पहले हुई थी और जल्द ही वे दोनों एक दूसरे के दोस्त और हमराज़ बन गये थे. गुरविंदर सिंह ने बातों-बातों में बलविंदर सिंह को बताया था कि 14 अक्तूबर को उसकी शादी है. और उसे काफी पैसों की जरूरत है. गुरविंदर की शादी वाली बात को ध्यान में रखते हुए बलविंदर ने मंदीप को मौत के घाट उतारने की पूरी प्लानिंग बनाई. दो वर्ष से उसके अन्दर जो चिंगारी धीरे-धीरे सुलग रही थी उसे बुझाने का अब समय आ गया था. वैसे भी बीते दो सालों में वह खामोश नहीं बैठा था. अपनी हुई बेज्जती का बदला लेने के लिए उसने अपनी कोशिशें जारी रखी थी, और सही समय का इंतज़ार कर रहा था. दुसरे उसके पास ऐसा कोई आदमी भी नहीं था जो इस काम को अन्जाम तक पहुंचा सकता. उसे गुरविंदर जैसे जरूरतमंद आदमी की तलाश थी. गुरविंदर बहुत ज़रूरतमंद था. वह एक लड़की से प्रेम करता था और लड़की के घरवाले इस शादी के लिए तैयार नहीं थे. अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए उसने घर से भागकर कोर्टमैरेज कने की योजना बनाई थी और इस सब के लिए उसे पैसों की सख्त ज़रूरत थी.      बलविंदर ने जब गुरविंदर को मंदीप की हत्या के बदले 15 लाख रुपये देने का ऑफर किया तो वह झट से तैयार हो गया था. बलविंदर ने उसे कहा था कि वह जिस दिन हत्या करेगा, उस दिन पांच लाख रुपये और बाकी के दस लाख रुपये वह एक साल की किश्तों में देगा. इस पर गुरविंदर राजी हो गया था.    
मंदीप की हत्या की सुपारी लेने के बाद गुरविंदर ने चार महीने पहले मंदीप की रेकी करनी शुरु कर दी थी. गुरविंदर को पूरा पता था कि मंदीप कितने बजे घर से निकलता है और कहां-कहां जाता और रुकता है. गुरविंदर को इतना तक मालूम था कि मंदीप कौन सी जगह पर कितना समय व्यतीत करता है. पेच तो यहाँ फंसा कि वह हत्या करेगा कैसे.? उसके पास तो हथियार ही नहीं है. इसके लिए उसने बलविंदर से बीस हजार रुपये हथियार खरीदने के लिए मांगे थे. बीस हजार रुपये लेकर वह बलविंदर के साथ कुछ समय पहले फिरोजपुर गया और 32 बोर रिवाल्वर की 6 गोलियां उसने खरीदी. वहीँ उसने गोली चलाने की भी ट्रेनिंग ली और खरीदी हुई 6 गोलियों में से एक गोली भी चलाई. बाकी की बची 5 गोलियां उसने मंदीप की हत्या करने के लिए रख ली थी. गोलियां खरीदने के बाद बलविंदर ने गुरविंदर से पूछा था कि बिना रिवाल्वर के गोली कैसे चलाओगे.? रिवाल्वर कहाँ है.? तब गुरविंदर बात को टालमटोल करता रहा, बाद में उसने अपने मालिक का रिवाल्वर चुराकर मंदीप की हत्या की थी.  
गुरविंदर की मां डाबा इलाके में रहने वाले एक प्रापर्टी डीलर के घर खाना पकाने का काम करती थी और वहीं रहती थी. गुरविंदर भी अक्सर वहीं रहता था. वह कभी कभार जसपाल बांगड़ स्थित अपने घर भी चला जाता था. उसे अपने मालिक के बारे में पूरी जानकारी थी कि वह सुबह 11 बजे से पहले घर से नहीं निकलते. उसके मालिक के पास भी 32 बोर की रिवाल्वर है. वह पिछले डेढ़ महीने से मालिक बिल्ला की रिवाल्वर लेकर घर से निकल जाता था, वारदात वाले दिन भी आरोपी ने बिल्ला का रिवाल्वर उठाया और वारदात करने के बाद रिवाल्वर वहीं रख दिया था. 
तना सब होने के बावजूद जब गुरविंदर ने मंदीप की हत्या करने में इस्तेमाल रिवाल्वर बलविंदर को ना दिखाई और ना कोई संतोषजनक जवाब दिया तो बलविंदर को गुरविंदर पर शक होने लगा कि वह काम कर पाएगा या नहीं. इसके लिए उसने अपने एक ख़ास दोस्त अमनपाल से बात की और कहा वह गुरविंदर की रैकी करे. गुरविंदर जहां मदीप की रैकी कर रहा था, वहीं बलविंदर के कहने पर अमनपाल गुरविंदर की रैकी करने लगा था. वारदात वाले दिन सुबह अमनपाल और गुरविंदर एक स्कूल के पास मिले और वारदात को अंजाम देने के बाद फिर से वहीं मिलने की बात की. जिस समय गुरविंदर सिंह वारदात को अन्जाम देने दुगरी फेज-1 पहुंचा और मंदीप की इन्तजार में कार के पास खड़ा हो गया, जबकि अमनपाल दूसरी तरफ खड़ा उस पर नज़र रखे हुए था. जैसे ही गुरविंदर ने मंदीप को गोलियां मारी तो अमनपाल ने तुरंत ही बलविंदर को फोन कर यह बात बता दी थी कि काम हो गया है. वारदात को अंजाम देने के बाद गुरविंदर अमनपाल से मिला और उसे पूरा यकीन दिलाने के लिए रिवाल्वर से निकाले हुए पांच खाली  खोल दे दिए. उसके बाद वह अपने घर गया और रिवाल्वर रख कर कपड़े बदले के बाद बलविंदर से पैसे लेने के लिए निकल पड़ा था. पर इस घटना के बाद बलविंदर ने अपना फोन बंद कर दिया था. 
गुरविंदर का ब्यान दर्ज करने के बाद पुलिस ने उसकी निशानदेही पर अमनपाल को गिरफ्तार कर लिया और हत्या में प्रयोग रिवाल्वर भी दुगरी से बरामद कर लिया था. उसी दिन दिनांक-13 अक्तूबर को गुरविंदर और अमनपाल को अदालत में पेश कर आगामी पूछताछ के लिए दो दिन के रिमांड पर लिया गया. मंदीप[ हत्याकांड की विस्तृत पूछताछ करने और कागजी करवाई पूरी करने के बाद मंदीप की हत्या के अपराध में दोषी गुरविंदर और अमनपाल को पुनः दिनांक-15 अक्टूबर को अदालत में पेश किया गया जहाँ अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया था.
दूसरी ओर मृतक मंदीप बंसल के परिजनों और व्यापार मंडल के सदस्यों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया था. वह मंदीप का पोस्टमार्टम नहीं होने दे रहे थे. उनकी मांग थी कि जबतक मंजीत के सभी हत्यारे पकड़े नहीं जाते लाश का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे. पुलिस कमिश्नर सुखचैन सिंह गिल ने अस्पताल पहुंचकर उन्हें समझाया और आश्वासन दिया तब जाकर कहीं मृतक का पोस्टमार्टम किया गया था. सिविल अस्पताल के 3 डाक्टरों के बोर्ड, जिनमें डाक्टर रिपुदमन, डा. गुरिंदरदीप  ग्रेवाल और डा. दविंदर ने पोस्टमार्टम किया, डाक्टरों के अनुसार रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मनदीप की पीठ पर 2 गोलियां दाईं तरफ और 2 बाईं तरफ गोलियां लगीं, जो दिल और फेफड़े में जा घुसीं, जिससे उसकी मौत हुई थी. एक गोली उसकी बाजू में लगी थी. पोस्टमार्टम से पहले शव का एक्स-रे करवाया गया था. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया गया.
दूसरी तरफ वारदात में प्रयोग किए रिवाल्वर के असली मालिक का रहस्य पुलिस के लिए बरकरार था. पहले गुरविंद्र की तरफ से बताया गया था कि जिस घर में वह रहता है, उसके मालिक बिला का रिवाल्वर चुराकर उसने मंदीप की हत्या की थी, लेकिन जब पुलिस ने रिकार्ड खंगाला तो सामने आया कि उक्त व्यक्ति के पास रिवाल्वर है ही नहीं. पुलिस द्वारा बरामद किया गया रिवाल्वर उसी इलाके के रहने वाले एक अन्य व्यक्ति का है, जब पुलिस ने उस तक पहुंचने का प्रयास किया तो पता चला कि वह घर से फरार हो चुका है. सूत्रों के अनुसार उक्त मामले में एक कांग्रेसी नेता मैदान में उतर आया था, जो एक स्वयं-भू प्रधान को बचाना चाहता था. उसकी भूमिका इस हत्याकांड में है या नहीं पुलिस इस मामले में भी जांच करेगी. इस हत्याकांड के मास्टर माइंड बलविंदर सिंह की तलाश में पुलिस की कई टीमे लगातार छापेमारी कर रही हैं, वह अभी पुलिस की पकड़ से दूर था.

(पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण)

-हरमिंदर कपूर 

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Milan Tomic

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