-जजमेंट

अंतिम साँस तक उम्रकैद


बलात्कार कत्ल जितना ही संगीन जुर्म है, जो तीनों आरोपियों ने किया था. बलात्कार और औरतों की सुरक्षा एक ऐसा विषय है जो आज भी सारे देश के लिए सबसे बड़ा इशु है. और इसी वजह से मिडिया इस केस पर टूट पड़ा था. पुलिस पर बहुत ज्यादा दबाव था, ऐसे में काम करना बड़ा मुश्किल है. पर सराहना करनी होगी यूटी पुलिस की जिन्होंने अपना काम बखूबी निभाया और इस दबाव से जरा सा भी विचिलित ना होते हुए तीनों आरोपियों को अरेस्ट कर उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लिया था.

                
                                                            एसएसपी नीलाम्बरी विजय जगदले 

इस केस का ट्रायल फास्ट ट्रेक कोर्ट में 122 दिनों तक चला. शुक्र है कि यह फास्ट ट्रेक कोर्ट थी, जिस में इतनी जल्दी न्याय पाना आसान हुआ था अगर साधारण कोर्ट होती तो 122 दिनों की जगह 122 महीने या फिर साल भी लग सकते थे. आये दिन बच्चीओं से लेकर वरिष्ठ महिला नागरिकों तक, हर उम्र, हर तबके की औरतों का बलात्कार ब्रेकिंग न्यूज़ बनता है. मिडिया में आक्रोश बढ़ता है तब कहीं जाकर एक-आध केस में फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट एनाउंस किया जाता है. जब हम अपने देश में बुलेट ट्रेन का संकल्प कर रहे हैं हो न्याय की बुलेट ट्रेन क्यों नहीं चल सकती.? सरवाईकल कहो या पीड़िता,  अबला कहो या निर्भया. जिल्लत भरा इंतजार सबको बर्बाद कर देता है. जिन्दगी की गाड़ी आगे बढ़ती तो  है पर न्याय की हरी झण्डी बिना यह सफर बहुत कठिन हो जाता है. न्याय में देरी अपने आपमें अन्याय है. इस घातक विलंभ में कई मूल मसले कुचल दिए जाते है. इसी दौरान मर्यादाओं के ठेकेदारों की घिनौनी सोच शोर मचाने लगती है. घूमफिर कर उँगलियाँ औरतों पर ही उठती है. फिर कोई यह बताने लगता है कि औरतों को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं. कोई कहता है लडकियों को जींस नहीं पहननी  चाहिए. हम कहते हैं कि तकलीफ लडकियों की जींस में नहीं, हमारी जीन में है. तकलीफ या कमी हमारे अपने खून में है जो सभ्यता और तहज़ीब के नाम पर कमज़ोर मर्दों की विकृति को सींचता है. ऐसे में हम फ़ास्ट ट्रेक न्याय की मांग करते है. चार्ज सिस्टम इंतजार नहीं करवाता बल्कि एतबार और भरोसा दिलाता है.

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-                                                                       माडल चित्र 
देहरादून निवासी 21 वर्षीय रमा शाम के करीब 7 बजे सेक्टर-37 चंडीगढ़ स्थित कोचिंग सेंटर से अपनी कोचिंग क्लास खत्म कर के जैसे ही बाहर निकली थी कि तभी उसके घरवालों का देहरादून से फोन आ गया, वह चलते-चलते फोन पर अपने घरवालों से बात करते हुए ऑटो पकड़ने के लिए मेन रोड पर सेक्टर -37 के बस स्टाप पर पहुंची. फोन पर बात करते-करते ही उसने ऑटो रुकवाया. उसके बाद वह ऑटो में बैठ गई. ऑटो में पहले से ही दो सवारियां बैठी हुई थीं, जिसकी ओर रमा ने ध्यान नहीं दिया था. वह फोन पर बातें करने में व्यस्त थी. रमा चंडीगढ़ के एक प्राइवेट संस्थान में नौकरी करती थी. इसके   अलावा उसने सेक्टर- 37 के एक कोचिंग सेंटर में कोचिंग लेना भी शुरू किया था, आज उसका तीसरा दिन था. कुछ दूर आगे चलने के बाद ऑटो चालक ने डीजल भरवाने की बात कहते हुए ऑटो को सेक्टर-42 की ओर मोड़ लिया था. रमा ने उसे वहीं उतारने की बात कही तो ऑटो चालक इरफान ने अपनी बेटी की बीमारी की बात कहते हुए उसे ऑटो से न उतरने को कहा. इसके बाद वह ऑटो में ही बैठी रही थी. इस दौरान वह उसे बच्ची-बच्ची कहकर अपनी बेटी और उसकी बीमारी की कहानी सुनाकर उससे सांत्वना जुटाता रहा. बाद में सेक्टर-42 स्थित पेट्रोल पंप के पास आकर ऑटो रुक गया. इसके बाद चालक वह दोनों सवारियां ऑटो को धक्का मारकर अंदर ले गए थे. क्योंकि ऑटो में पेट्रोल खत्म हो गया था.
वहां से उन्होंने पेट्रोल भरवाया और उसके बाद सेक्टर-43 के राउंड अबाउट से यू-टर्न लिया. जैसे ही वह ऑटो से सेक्टर-53 पहुंचे तो ऑटो चालक ने ऑटो को स्लिप रोड पर ले लिया. आगे जाकर उसने ऑटो खराब होने का नाटक करते हुए ऑटो रोक लिया. जब चालक ने ऑटो खराब होने की बात कही तब रमा ऑटो से उतर गई और चालक को पैसे देने लगी. वह कोई दूसरा ऑटो पकड़ना चाहती थी, क्योंकि पेट्रोल आदि के चक्कर में अब तक उसका काफी समय नष्ट हो गया था और उसे अपने घर जाने की जल्दी थी.


ह ऑटो चालक को भाड़े के पैसे देने ही वाली थी कि इसी दौरान पीछे बैठे दोनों युवकों ने उसे ऑटो के अंदर खींच लिया था. उसके बाद ऑटो वहां से चलकर एक सुनसान जगह पर पहुंच गया था. रमा ने इस बात का विरोध करते हुए शोर मचाना चाहा तो उसका मुंह कसकर बंद कर दिया गया था. सुनसान जगह पहुंचने के बाद तीनों उसे ऑटो से निकाल कर पास ही जंगली एरिया में ले गए थे और वहां तीनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. दुष्कर्म करने के बाद तीनों ने रमा को शोर मचाने और इस बारे में किसी को कुछ भी बताने पर चाकू दिखाते हुए जान से मार देने की धमकी दी. इससे वह बुरी तरह डर गई थी. हालांकि, वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों रमा को छोड़कर वहां से फरार हो गए थे और रमा का मोबाइल भी अपने साथ ले गए थे. लडखडाते हुए रमा किसी तरह से मेन रोड पर पहुंची और उसने एक बाइक सवार को रोक कर अपनी आपबीती सुनाई और उस बाईक सवार की सहायता से उसने  फोन द्वारा पुलिस को सूचना दी थी. सूचना मिलते ही सेक्टर- 36 एसएचओ इं नसीब सिंह ने अपनी पुलिस टीम के साथ मौका पर पहुंच कर रमा की सहायता की और उसे सेक्टर- 16 के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया. रमा गहरे सदमे में थी. मामला एक छात्रा से सम्बन्धित था सो खबर मिलते ही डीएसपी साऊथ और एसएसपी नीलाम्बरी विजय जगदले तुरंत अस्पताल पहुंच गई थी. डाक्टरों के अनुसार रमा सदमे में तो थी पर उसकी हालत खतरे से बाहर थी. रमा के बयानों के आधार पर सेक्टर-36 में तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ सामूहिक दुराचार का मामला आईपीसी की धारा-376 (डी) 376 (2) जी और 506 के अंतगत दर्ज किया गया. रमा के परिजनों को देहरादून में फोन द्वारा सूचना दे दी गई थी.


                           सज़ा सुनने के बाद अदालत से बाहर आते हुए तीनों दोषी 

स मामले में पुलिस ने विलंभ ना करते हुए तुरंत पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया और चंडीगढ़ से बाहर जाने वाली हरियाणा- पंजाब और हिमाचल की सीमाओं को सील कर दिया था. उसी रात रमा की निशानदेही पर उस पेट्रोल पम्प की सीसीटीवी फुटेज निकाल कर चेक की गई और रमा को साथ लेकर पूरा क्राईम सीन क्रियेट किया गया था. दरअसल रमा यहाँ नई थी उसे रास्तों का पूरा ज्ञान नहीं था इसी लिए तो ऑटो चालक उसे बहकाकर गलत रास्ते ले गये थे. पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से कुछ खास हाथ नहीं लगा था. ऐसा लगता था जैसे अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से इस घटना को अंजाम दिया था. ऑटो की आगे-पीछे की नम्बर प्लेट को दो युवकों ने अपने हाथों से ढक रखा था. केवल एक युवक का अस्पष्ट चेहरा ही दिखाई दे रहा था. पुलिस ने उसी अस्पष्ट चेहरे को ही लेकर अपनी जाँच आगे बढ़ानी शुरू कर दी थी.
अगले दिन इस घटना को लेकर पूरे शहर में हंगामा खड़ा हो गया था. इस घटना को दिल्ली के निर्भया कांड से जोड़कर देखा जाने लगा था. स्कूलों- कालेजों के छात्र-छात्राएं, समाज सेवी संस्थाए, और राजनैतिक दल सड़कों पर उतर आये थे. आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सज़ा देने की मांग उठने लगी थी. विधानसभा में भी पुलिस की नाकामी और इस घटना की निंदा की गई और विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. इसी दिन दिनांक- 18-11-2017 को पीड़िता रमा के अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा- 164 के तहत बयान दर्ज करवाए गये थे. 

मा ने मजिस्ट्रेट साहब को पूरा घटनाक्रम विस्तार से बताया था. और दरख्वास्त की थी कि मीडियाकर्मियों को उससे दूर रखा जाये. रमा की अपील स्वीकार करते हुए पुलिस को आदेश दिया था और यह भी कहा कि इस मामले से जुड़ा कोई भी दस्तावेज़ लीक नहीं होना चाहिए. एसएसपी नीलाम्बरी विजय जगदाले ने आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए क्राईम ब्रांच, स्पेशल सेल और साइबर क्राईम को अलर्ट करने के साथ सभी थानों के एसएचओ और पूरी फ़ोर्स को इस काम पर लगा दिया था और यह भी आदेश दिया कि सभी अफसर अपने-अपने एंगल से इस केस पर काम करते हुए आरोपियों तक पहुंचें. इस के साथ ही उन्होंने थाना सेक्टर-36 के एसएचओ इं नसीब सिंह, इं राम रतन, इं रंजीत सिंह, इं बलदेव, इं आर आर शर्मा के नेतृत्व में कई टीमे बना कर 

                                                                          मुख्य दोषी मोहम्मद इरफ़ान 

आरोपियों की तलाश शुरू करवा दी थी. कई डीएसपी और इंस्पेक्टरों को इस केस पर लगा दिया गया था. हर एंगल से जाँच की जाने लगी थी. पुलिस ने सीसीटीवी में कैद एक 
आरोपी के चेहरे को लोकल टीवी, सोशल मीडिया पर दिखाकर उसे पकडवाने में सहयोग की अपील की साथ ही गली-गली में उसके पोस्टर बनवा कर भी चिपकवा दिए थे, पर इतना कुछ करने के बावजूद और घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली ही थे. पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही थी कि यह कहीं ऑटो चालकों का कोई गैंग तो नहीं जो मौका देखकर अकेली युवतियों को पकड़ उनसे दुराचार करता है. क्योंकि 12 दिसम्बर 2016 को भी ऐसी ही वारदात हुई थी. काल सेंटर में काम करने वाली युवती ने सेक्टर-34 से अपने घर जाने के लिए ऑटो लिया था. ऑटो में दो लोग पहले से ही सवार थे, चालक सहित तीन लोगों ने युवती के साथ सामूहिक दुराचार किया था. इस केस में 6 दिन बाद ऑटो चालक तो पकड़ा गया था पर बाकी के दो लोग अबतक पुलिस की गिरिफ्त से बाहर है. अगस्त 2016 को ही मिस्र की रहने वाली एक युवती से ऑटो में दुष्कर्म का प्रयास हुआ था, जिसका आरोपी पकड़ा गया था. इसी तरह 24 मार्च 2017 को ही एक युवती के साथ चलते ऑटो में दुष्कर्म का प्रयास किया गया था. युवती ने ऑटो से कूदकर अपनी जान और इज्जत बचाई थी. इस केस का दोषी भी अभी तक पकड़ा नहीं गया था. इन सब मामलों को देखते हुए पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही थी. सैकड़ों ऑटो और ऑटो चालकों को खंगाला गया था. इसके अलावा आसपास के हिस्ट्रीशीटरों से भी पूछताछ की गई थी पर नतीजा सिफर निकला था. इस घटना के 4 दिन बीत जाने पर भी जब पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा तो चंडीगढ़ पुलिस ने 21 नवम्बर को इनाम के पोस्टर छपवाकर गली-गली चिपकवा दिए थे. इन पोस्टरों पर लिखा था की आटो चालक आरोपी के बारे में या इस केस से सम्बन्धित कोई भी जानकारी देने वाले को नगद 1 लाख रूपए का ईनाम दिया जायेगा.
खिर 7 दिन-रात की भाग दौड़ के बाद पुलिस को इस मामले में सफलता मिली थी. सेक्टर-49 की थाना पुलिस ने जीरकपुर निवासी मोहम्मद इरफान को चंडीगढ़ से ही गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद पुलिस ने उसकी निशानदेही पर दिनांक- 28-11-2017 को अन्य दोनों अभियुक्तों मोहम्मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू को उत्तर प्रदेश स्थित पैतृक आवास अमेठी और फैजाबाद से गिरफ्तार किया था. पुलिस उनके घर में इंश्योरेंस एजेंट बनकर पहुंची थी और उनकी पहचान होने पर उन्हें धर दबोचा था. इस के पहले दिनांक-25-11-2017 को पीड़िता रमा ने मजिस्ट्रेट के समक्ष ऑटो चालक मुख्य अभियुक्त मोहम्मद इरफ़ान की पहचान ( टी आई पी ) की थी. इरफ़ान को 6 अन्य लोगों के साथ पीड़िता के सामने खड़ा किया गया था. पहचान हो जाने के बाद पुलिस इरफ़ान को अदालत में पेश कर उसे प्रोडेक्शन वारंट पर लेना चाहती थी कि उसने खिड़की का कांच तोड़कर अपने पेट में 3-4 वार कर आत्महत्या करने का प्रयास किया था. उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जब वह ठीक हो गया तो उसकी निशानदेही पर मोहम्मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू को गिरफ्तार किया गया था. उन दोनों की भी शिनाख्त मजिस्ट्रेट के सामने करवाई गई थी. पीड़िता ने उन्हें पहचान लिया था.  

                                                                             दोषी किस्मत अली 
इस मामले में पुलिस ने अभियुक्तों की पहचान से लेकर डीएनए टेस्ट तक मुकमल करने के बाद अपनी सारी  करवाई पूरी कर तीनों अभियुक्तों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था.  अभियुक्तों को जेल भेजने के बाद दिनांक- 21 फरवरी 2018 को  सेक्टर-36 थाना पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में चालान दायर कर दिया था.  
दिनांक- 13 मार्च 2018 को पुलिस ने प्रोडक्शन रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में  मोहम्मद इरफान के अपराध स्वीकार करने के बाद दिसंबर 2016  को कॉल सेंटर में काम करने वाली एक युवती से गैंगरेप मामले में भी आरोपी बनाया था. दिनांक- 23 अप्रैल 2018 को  ऑटो गैंगरेप के तीनों दोषियों पर अदालत में आरोप तय किये गए थे. और 2 मई 2018 की इस  केस का ट्रायल शुरू हुआ. दिनांक- 8 मई 2018 को  पीड़िता ने अदालत में अपना बयान दर्ज करवाया और  तीनों अभियुक्तों के खिलाफ गवाही दी थी. दिनांक- 23 मई 2018 को तीनों दोषियों के डीएनए टेस्ट की सीएफएसएल रिपोर्ट अदालत में सौंपी गई थी,  रिपोर्ट पॉजीटिव थी. और 01 अगस्त 2018 को  तीनों दोषियों के सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज हुए थे उन्हें अपनी सफाई में बात रखने का मौका दिया गया था.  दिनांक- 21 अगस्त 2018 को इस केस की  अंतिम बहस के बाद केस का ट्रायल पूरा हो गया था. इसके बाद 27 अगस्त 2018 को  अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया, और बताया कि इस केस का फैसला  31 अगस्त को सुनाया जायेगा.

स केस के फैसले के दिन दिनांक- 31 अगस्त 2018 को 17 नवंबर 2017 के दिन  सेक्टर- 53 में हुए गैंगरेप के मामले में जिला की विशेष अदालत की माननीय जज एडीजे पूनम आर जोशी ने तीनों दोषियों को अंतिम सास तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई और सज़ा के साथ जुर्माना भी लगाया.  सजा पाने वालों में 27  वर्षीय मोहम्मद इरफान मूल निवासी अंबेडकरनगर, यू पी-  21 वर्षीय किस्मत अली मूल निवासी अमेठी और 21 वर्षीय मोहम्मद गरीब मूल निवासी फैजाबाद, यूपी शामिल हैं. विशेष अदालत ने 122 दिनों में ट्रायल समाप्त करते हुए तीनों को आईपीसी की धारा 376डी और 506 के तहत दोषी करार देते हुए सजा के अलावा 2.05-2.05 लाख रुपये प्रत्येक पर जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना राशि में से दो-दो लाख (कुल छह लाख) रुपये पीड़िता को बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए गये हैं. इससे पहले सेक्टर-36 थाना पुलिस ने मोहम्मद इरफान, मोहम्मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (डी), 376 (2) जी और 506 के तहत केस दर्ज किया था. हालांकि, बाद में पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट आईपीसी की धारा 376 (डी) (सामूहिक दुराचार) और 506 (आपराधिक धमकी ) देने 

दोषी मोहम्मद गरीब 

के तहत दायर की थी. इन्हीं दोनों धाराओं में अदालत ने ट्रायल चलाया गया था. तीनों की डीएनए रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई थी. वहीं, पीड़िता ने भी तीनों को अदालत में पहचानते हुए उनके खिलाफ बयान दिए थे. इस केस में कुल 19 सरकारी गवाह पुलिस की ओर से पेश किए गए थे जिन्होंने अदालत में अभियुक्तों के खिलाफ गवाही दी थी.
( मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता का नाम बदला गया है.)
-हरमिन्दर कपूर




 





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Milan Tomic

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