प्यार का भूत या वासना का नशा ...?
![]() |
| प्रतीक चित्र सरिता |
सोनिया और कुलविंदर कभी साथ-साथ
पढ़ा करते थे. दसवीं पास कर के सोनिया ने पढ़ाई छोड़ दी तो दोनों अलग हो गए. सालों
बाद युवा होने पर जब उन की मुलाकात हुई तो बचपन की यादें ताजा हो उठीं. युवा होने
पर उन के शरीरों में जो बदलाव आया था, वह
काफी आकर्षक था. दोनों ही खूबसूरत तो थे ही, कुलविंदर
का कसरती बदन काफी लुभावना था, जिस
से दोनों ही एक-दूसरे के आकर्षण में बंधते गए. परिणामस्वरूप दोनों गांव के बाहर
खेतों में मिलने लगे. जब इस बात की जानकारी सोनियां की माँ शकुंतला को हुई तो वह
परेशान हो उठी. वैसे तो कुलविंदर में कोई कमी नहीं थी,
लेकिन वह नशा करता था. इस के
अलावा वह दूसरी जाति का भी था, यही
वजहें थीं कि शकुंतला ने बेटी को मर्यादा में रहने का पाठ पढ़ाया. जो सोनियां को
रास नहीं आया था.इसके बाद जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
बलराम ने जल्दीजल्दी इंटरव्यू
लैटर,
नोट
बुक,
पैन
आदि बैग में रख कर सोनिया को आवाज दी, ‘‘दीदी,
जल्दी
से मेरा नाश्ता लगा दीजिए, मुझे
देर हो रही है.’’
‘‘आ कर
नाश्ता कर लो, मैंने
तुम्हारा नाश्ता तैयार कर दिया है.’’ सोनिया
ने रसोईघर से ही कहा.
बलराम ने जल्दीजल्दी नाश्ता किया
और अपना बैग ले कर मां के पास पहुंचा. शकुंतला देवी चारपाई पर लेटी थीं. बेटे को
देख कर उन्होंने कहा, ‘‘जाओ
बेटा,
सफल
हो कर लौटो. लेकिन तुम ने यह तो बताया ही नहीं कि इंटरव्यू देने कहां जा रहे हो?’’
‘‘मां
चंडीगढ़ जा रहा हूं, एक
बहुत बड़ी कंपनी में. अगर यह नौकरी मिल गई तो जिंदगी सुधर जाएगी.’’
‘‘जैसी
प्रभु की इच्छा.’’ शकुंतला
देवी ने कहा.
मां के पैर छू कर बलराम घर से
निकल गया. यह 5 जून,
2015 की बात है. इंटरव्यू देने के बाद वह शाम के 7,
साढ़े
7
बजे
घर लौटा तो सोनिया रात का खाना बना रही थी. बैग रख कर बलराम मां के कमरे में
पहुंचा तो वहां मां नहीं थी. बाहर आ कर उस ने बहन से मां के बारे में पूछा तो उस
ने कहा,
‘‘शाम को कीर्तन करने की बात कह कर गई थीं,
पर
अभी तक लौटी नहीं हैं.’’
बलराम को पता था कि मां अकसर
कीर्तन पर जाती थीं तो देर रात को लौटती थीं. पिताजी के घर छोड़ कर जाने के बाद
मां ने खुद को भजनकीर्तन में लगा लिया था. मां की चिंता छोड़ कर उस ने हाथमुंह
धोया तो बहन ने उस के लिए खाना परोस दिया.
खाना खा कर बलराम अपने कमरे में
आराम करने चला गया. दिन भर का थका होने के कारण लेटते ही उसे नींद आ गई. रात के
लगभग 1
बजे
उस की आंख खुली तो उठ कर वह मां के कमरे में गया. मां वहां नहीं थी. समय देखा,
रात
के सवा बज रहे थे. वह बड़बड़ाया, ‘मां
अभी तक नहीं आई?’
बलराम को चिंता हुई. उस के मन में
बुरे विचार आने लगे. उस की चिंता यह थी कि पिताजी की तरह कहीं मां भी तो उसे छोड़
कर नहीं चली गईं?
पंजाब के जिला खन्ना के थाना जुलकां का एक गांव है मलकपुर कंबोआ. इसी गांव में लाल सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी शकुंतला के अलावा 2 बेटे और एक बेटी थी.
बड़ा बेटा सोहनलाल खेती करने के
अलावा दूसरे राज्यों में जा कर कंबाइन मशीन से फसल काटने का काम करता था. उस से
छोटी सोनिया थी, जो दसवीं
तक पढ़ाई कर के अब घर में रहती थी. सब से छोटा बलराम बारहवीं पास कर के नौकरी की
तलाश में था.
लाल सिंह के पास जो जमीन थी,
उसी
में मेहनत कर के जैसेतैसे तीनों बच्चों को पालापोसा और पढ़ायालिखाया था. बड़ा बेटा
सोहन काम करने लगा तो उन्हें थोड़ी राहत मिली. अचानक न जाने ऐसा क्या हुआ कि लाल
सिंह के ऊपर काफी कर्ज हो गया, जिस
की वजह से उन्हें अपनी कुछ जमीन बेचनी पड़ी.
जमीन बेचने के बाद लाल सिंह
गुमसुम रहने लगे. वह ना किसी से बात करते थे और ना किसी मामले में दखलंदाजी करते
थे. ऐसे में ही एक दिन वह बिना किसी को कुछ बताए घर से निकले तो लौट कर नहीं आए.
यह 5
साल
पहले की बात है.
शकुंतला पति के इंतजार में दरवाजे
की ओर टकटकी बांधे देखती रहती थी. उस दिन मां के कीर्तन से न लौटने पर बलराम
चिंतित हो उठा. उस ने बहन को जगा कर कहा, ‘‘दीदी
उठो,
अभी
तक मां लौट कर नहीं आई है.’’
‘‘क्या कहा,
मां
अभी तक लौट कर नहीं आई है?’’
‘‘हां
दीदी,
रात
के 2
बज
रहे हैं. इस समय कौन सा मंदिर खुला होगा, जो
मां कीर्तन कर रही हैं?’’ रुआंसा
हो कर बलराम बोला.
सोनिया घबरा कर उठी. उस ने चिंतित
हो कर कहा, ‘‘बल्लू,
इस
समय हम मां को ढूंढने कहां चलेंगे?’’
बात सही भी थी. उस समय रात के 2
बज
रहे थे. उतनी रात को वे कहां जाते. लेकिन मां के बारे में पता तो करना ही था.
भाईबहन हिम्मत कर के घर से बाहर निकले. पूरे गांव में सन्नाटा पसरा था,
सिर्फ
कुत्ते भौंक रहे थे. दोनों मंदिर तक गए. वहां घुप्प अंधेरा था. गांव की हर गली में
चक्कर लगाया कि शायद किसी के घर कथाकीर्तन हो रही हो,
लेकिन
गांव में ऐसा कुछ भी आयोजन नहीं था.
सवेरा होने पर बलराम ने मंदिर जा
कर पूछा तो पता चला कि शकुंतला तो कल मंदिर आई ही नहीं थी. थोड़ी ही देर में
शकुंतला के गायब होने की बात पूरे गांव में फैल गई. हर कोई अफसोस जता रहा था कि 5
साल
पहले बच्चों का बाप गायब हो गया और अब मां गायब हो गई. गांव के कुछ लोग भी शकुंतला
की तलाश में लग गए.
बलराम ने बड़े भाई सोहन को भी फोन
कर के मां के गायब होने की बात बता दी. उस समय वह मध्य प्रदेश में कंबाइन मशीन ले
कर फसल की कटाई कर रहा था. छोटे भाई को सांत्वना दे कर उस ने कहा कि वह तुरंत आ
रहा है. अगले दिन दोपहर बाद सोहन घर पहुंचा तो कुछ रिश्तेदार एवं गांव वालों के
साथ थाना जुलकां जा कर मां की गुमशुदगी दर्ज करा दी.
शकुंतला का फोटो ले कर पुलिस ने
इश्तेहार शोरेगोगा छपवा कर सभी थानों, बस
अड्डों,
रेलवे
स्टेशनों तथा प्रमुख स्थानों पर लगवा दिए, साथ
ही वायरलैस द्वारा उस का हुलिया भी प्रसारित करवा दिया.
दिन,
सप्ताह,
महीने
बीतने लगे, शकुंतला
का कुछ पता नहीं चला. धीरे धीरे साल बीत गया. उस की गुमशुदगी के रहस्य से परदा
नहीं उठ सका. सोनिया और सोहन ने तो संतोष कर लिया, पर
बलराम,
जो
मां का चहेता भी था, वह
मां के गायब होने के रहस्य को जानना चाहता था. इसलिए मार्च,
2016 में उस ने मां की गुमशुदगी की एक चिट्ठी लिखी और खन्ना
जा कर एसपी (डी) जसकरण सिंह तेजा से मिला. उन से उस ने हाथ जोड़ कहा,
‘‘सर, मेरी
मां को ढुंढवा दीजिए.’’
जसकरण सिंह तेजा ने बलराम के
निवेदन को गंभीरता से लिया और डीएसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क और डीएसपी (सिटी)
हरवंत कौर को बलराम द्वारा दी गई चिट्टी दे कर सख्त आदेश दिया कि जल्द से जल्द वे
इस मामले का खुलासा करें.
हरविंदर सिंह और हरवंत कौर ने
शकुंतला का पता लगाने के लिए थाना जुलकां के थानाप्रभारी इंसपेक्टर रणवीर सिंह को
नियुक्त किया. उन की मदद के लिए इंसपेक्टर जगजीत सिंह को लगा दिया गया.
शकुंतला की गुमशुदगी की फाइल को
निकाल कर फिर से जांच शुरू हुई. पुलिस अधिकारियों ने अपने मुखबिरों को भी शकुंतला
की गुमशुदगी का रहस्य पता करने को लगा दिया.
शकुंतला के दोनों बेटों,
बेटी
तथा रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई. सोहन उन दिनों मध्य प्रदेश में था. उस से
छोटा बलराम इंटरव्यू देने चंडीगढ़ गया था. सिर्फ बेटी सोनिया ही घर में थी. पूछताछ
में पुलिस ने देखा कि सोनिया बारबार बयान बदल रही है.
रणवीर सिंह ने यह बात डीएसपी
हरवंत कौर को बताई तो उन्होंने कहा कि वह अपने मुखबिर सोनिया पर नजर रखने के लिए
लगा दें,
साथ
ही उस के बारे में पता करें.
मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि
सोनिया के गांव के ही कुलविंदर से प्रेमसंबंध थे. जब से पुलिस दोबारा इस मामले की
जांच कर रही है, तब से वह
काफी बेचैन और परेशान रहती है. अकसर वह गांव से बाहर खेतों में कुलविंदर से सलाह-मशविरा
करती दिखाई देती है.
रणवीर सिंह और जगजीत सिंह ने समय
न गंवाते हुए एएसआई सुरजीत सिंह से कहा कि वह शकुंतला के घर जा कर उस के बेटों
सोहन,
बलराम
और बेटी सोनिया तथा नजदीकी रिश्तेदारों को थाने ले आएं. अगर वे थाने आने की वजह
पूछें तो उन्हें बता देना कि शकुंतला का पता चल गया है. सुरजीत सभी को थाने ले आए.
जैसा रणवीर सिंह ने सोचा था वैसा ही था.
सोनिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ
था. उस के पैर कांप रहे थे. उन्होंने बड़े नाटकीय ढंग से कहा,
‘‘सोहन सिंह, तुम्हारी
मां का पता चल गया है. यह मेरे अलावा तुम्हारी बहन सोनिया को भी पता है कि
तुम्हारी मां कहां है? इसलिए
तुम उस से पूछ लो कि वह कहां हैं, वरना
मैं तो तुम्हारी मां से तुम्हें मिलवा ही दूंगा.’’
रणवीर की इस बात पर सोहन सिंह ने
हैरानी से बहन की ओर देखा. वह खुद हैरानी से रणवीर सिंह को देख रही थी. उस का
चेहरा एकदम सफेद पड़ा हुआ था. टांगें पहले से ज्यादा कांप रही थीं. सोहन सिंह ने
जब उस से पूछा कि क्या वह जानती है कि मां कहां हैं तो वह कांपती आवाज में बोली,
‘‘नहीं भैया, मुझे
नहीं पता कि मां कहां है.’’
‘‘बताओ न
तुम्हारी मां कहां है?’’ रणवीर
सिंह ने डांट
कर कहा तो सोनिया ने सिर झुका लिया. उस के दोनों भाई और साथ आए रिश्तेदार उसे
हैरानी से देख रहे थे.
उन की समझ में नहीं आ रहा था कि
जब सोनिया को मां के बारे में पता था तो उस ने अब तक बताया क्यों नहीं. रणवीर सिंह
ने जब दोबारा डांट कर पूछा तो उस ने रोते हुए अपनी मां की लगभग 11
महीने
की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाते हुए कहा कि उस ने अपने प्रेमी कुलविंदर के साथ
मिल कर उस की हत्या कर दी है.
इस के बाद उस ने शकुंतला की गुमशुदगी
के पीछे की जो कहानी सुनाई, वह
इस प्रकार थी—
सोनिया और कुलविंदर कभी साथ-साथ
पढ़ा करते थे. दसवीं पास कर के सोनिया ने पढ़ाई छोड़ दी तो दोनों अलग हो गए. सालों
बाद युवा होने पर जब उन की मुलाकात हुई तो बचपन की यादें ताजा हो उठीं. युवा होने
पर उन के शरीरों में जो बदलाव आया था, वह
काफी आकर्षक था.
दोनों ही खूबसूरत तो थे ही,
कुलविंदर
का कसरती बदन काफी लुभावना था, जिस
से दोनों ही एक-दूसरे के आकर्षण में बंधते गए. परिणामस्वरूप दोनों गांव के बाहर
खेतों में मिलने लगे. जब इस बात की जानकारी शकुंतला को हुई तो वह परेशान हो उठी.
उस ने कुलविंदर को देखा था. वैसे
तो उस में कोई कमी नहीं थी, लेकिन
वह नशा करता था. इस के अलावा वह दूसरी जाति का भी था,
यही
वजहें थीं कि शकुंतला ने बेटी को मर्यादा में रहने को कहा.
जबकि सोनिया पर तो कुलविंदर के
प्यार का ऐसा नशा चढ़ा था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी,
बल्कि
वह खुश थी कि मां को उस के और कुलविंदर के प्यार के बारे में पता चल गया था.
इस के बाद वह कुलविंदर को घर
बुलाने लगी. अगर शकुंतला कुछ कहती तो वह कुलविंदर को ले कर अपने कमरे में चली
जाती. गायब होने से 2 दिन
पहले 3
जून,
2015 को शकुंतला गांव में किसी के यहां गई थी. मां के जाते ही
सोनिया ने कुलविंदर को बुला लिया था.
अचानक शकुंतला आ गई और उस ने
सोनिया और कुलविंदर को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. कुलविंदर तो डर के मारे
भाग गया,
बेटी
को शकुंतला ने खूब खरी-खोटी सुनाई. चुप रहने के बजाय सोनिया विद्रोह कर बैठी. उस
ने मां को धमकाते हुए कहा, ‘‘सुन
मां,
अगर
मेरे और कुलविंदर के बीच कोई आया तो मैं उसे छोड़ूंगी नहीं.’’
फिर उसी दिन शाम को सोनिया ने
कुलविंदर के साथ मिल कर मां को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली. उस ने यह योजना
कुलविंदर को समझा दी. 5 जून
को सोनिया ने दोपहर को खाना बनाया और मां के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं.
खाना खाने के कुछ देर बाद ही शकुंतला गहरी नींद में सो गई थी. सोनिया ने मां को
हिलाडुला कर देखा. जब देखा कि मां होश खो बैठी है तो उस ने फोन कर के कुलविंदर को
बुला लिया. कुलविंदर के आने पर सोनिया ने उसे फावड़ा दे कर आंगन में गड्ढा खोदवाया
और शकुंतला की गला दबा कर हत्या कर दी.
इस के बाद लाश को उसी गड्ढे में
डाल कर मिट्टी भर दी. ऊपर से गोबर का लेप लगा दिया, ताकि
किसी को संदेह न हो. सारे काम निपटा कर दोनों ने शकुंतला के कमरे में उसी के
बिस्तर पर इच्छा पूरी की. इस के बाद क्या हुआ आप पढ़ ही चुके हैं. सोनिया के अपराध
स्वीकार करने के बाद शकुंतला की गुमशुदगी को हत्या में तब्दील कर सोनिया और
कुलविंदर को दोषी बनाया गया.
सोनिया की निशानदेही पर
मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट बहादुर सिंह, एसपी
(डी) जसकरण सिंह तेजा, डीएसपी
(देहात) हरविंदर सिंह विर्क, डीएसपी
(सिटी) हरवंत कौर, थाना
जुलकां के प्रभारी रणवीर सिंह एवं जगजीत सिंह, सोहन,
बलराम
और गांव के सरपंच की मौजूदगी में आंगन में गड्ढा खोद कर शकुंतला की लाश बरामद की
गई,
जो
कंकाल बन चुकी थी.
लाश का पंचनामा तैयार कर फौरैंसिक
लैब भेजा गया. इस के बाद सोनिया को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस
रिमांड पर लिया गया. चूंकि कुलविंदर फरार हो चुका था,
इसलिए
रिमांड खत्म होने पर सोनिया को पुन: अदालत में पेश किया गया,
जहां
से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस कुलविंदर की तलाश कर रही है.
-हरमिन्दर कपूर


0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
crimestopindia ब्लॉग में हम अपराध से जुड़ी सच्ची कहानियाँ प्रकाशित करते हैं.आशा है यह ब्लॉग आपको पसन्द आया होगा.आप ब्लॉग को लाईक और शेयर जरुर करे. काहानियों से सम्बन्धित अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें ताकि हम अपने ब्लॉग को आपके रूचिकर बना सकें.