श्रापित बच्ची और निर्दयी माँ
आखिर यह कैसी माँ है - कोई भी मां अपने बच्चे को त्यागने की
कल्पना तक भी नहीं सकती है । लेकिन इस छोटी सी बच्ची की मां ने उसके साथ जो किया, उसकी कल्पना आप नहीं कर सकते हैं !
''माँ'' किसी बालक बालिका का संसार से प्रथम परिचय है। भगवान संसार में स्वयं नहीं आ सकते थे इसलिये उन्होंने माँ को भेजा। सम्पूर्ण संसार जिसमें सिमट जाता है, वो है माँ का आँचल। उम्र के साथ आँचल की पकड़ कमजोर जरूर हो जाती है, पर उसकी छाया में मृत्युपर्यन्त जीवन बिताने की अभिलाषा हर मानव की होती है। माँ के सम्बन्ध में यह
लघुकथा लगभग हजारों बार लिखी और सुनी गई होगी उच्चकोटि के लेखकों से लेकर साधारण
लोगो दुवारा कही गई यह चन्द बातें इतनी
ह्रदयस्पर्शी हैं कि बार-बार पढ़नें पर भी मन नहीं भरता
एक समय की बात है, एक बच्चे का जन्म होने वाला था. जन्म से कुछ क्षण पहले वह भगवान् से पूछता है, ” मैं इतना छोटा हूँ, खुद से कुछ कर भी नहीं पाता, भला धरती पर मैं कैसे रहूँगा, कृपया मुझे अपने पास ही रहने दीजिये, मैं कहीं नहीं जाना चाहता.”
भगवान् बोले, ” मेरे पास बहुत से फ़रिश्ते हैं, उन्ही में से एक मैंने तुम्हारे लिए चुन लिया है, वो तुम्हारा ख़याल रखेगा. वह तुम्हारे लिए गायेगा -मुस्कुराएगा भी . और तुम उसका प्रेम महसूस करोगे और खुश रहोगे.”
‘’ पर मुझे तो उनकी भाषा नहीं आती ? और जब मुझे आपसे बात करनी हो तो मैं क्या करूँगा? मैंने सुना है कि धरती पर बुरे लोग भी होते हैं . उनसे मुझे कौन बचाएगा ?”
” तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे बचाए गा , भले ही उसकी अपनी जान पर खतरा क्यों ना आ जाये.”
“लेकिन मैं हमेशा दुखी रहूँगा क्योंकि मैं आपको नहीं देख पाऊंगा.”
” तुम इसकी चिंता मत करो ; तुम्हारा फ़रिश्ता हमेशा तुमसे मेरे बारे में बात करेगा और तुम वापस मेरे पास कैसे आ सकते हो बतायेगा.”
उस वक़्त स्वर्ग में असीम शांति थी, पर पृथ्वी से किसी के कराहने की आवाज़ आ रही थी….बच्चा समझ गया कि अब उसे जाना है, और उसने रोते-रोते भगवान्
से पूछा,” हे ईश्वर, अब तो मैं जाने वाला हूँ, कृपया मुझे उस फ़रिश्ते का नाम बता दीजिये ?’
भगवान् बोले, ” फ़रिश्ते
के नाम का कोई महत्त्व नहीं है, बस इतना जानो कि तुम उसे ''माँ'' कह कर पुकारोगे .”
यह उपरोक्त कहानी इस कथा से एकदम विपरीत है कोई भी मां अपने बच्चे को त्यागने की
सोच भी नहीं सकती। लेकिन इस छोटी सी बच्ची की मां ने उसके साथ जो किया, वो सोच से
परे है। मुंबई से 138 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव में एक महिला ने जैसे ही अपनी
नवजात बच्ची का चेहरा देखा, उसने उससे सारे रिश्ते तोड़ दिए। हालाँकि बीमारी के कारण बच्ची का
ऐसा हाल हुआ था
इस बच्ची का जन्म समय से पहले हो गया था। अजीबोगरीब बीमारी की वजह
से इसकी स्किन पूरी तरह सिकुड़ी हुई थी। डॉक्टर्स के मुताबिक, गर्भ में न्यूट्रीशन
और ऑक्सीजन की कमी के कारण उसका ऐसा हाल हो गया था। इसके जन्म लेते ही गांव के लोग
इसे श्रापित कहकर डरने लगे। इसकी मां ने तो बच्ची को अपना दूध पिलाने से भी मना कर
दिया था। और उठाकर दूर फैंकते हुए बच्ची
को त्याग दिया था , तब उसके 50 साल के दादा
दिलीप ने उसकी जिम्मेदारी उठाई। वो बच्ची को अपने साथ ले आए। उन्होंने अकेले ही
बच्ची का का ख्याल रखा और उसके इलाज के लिए
लोगों से मदद मांगी।
इस बच्ची के इलाज में करीब 5 लाख रुपए का खर्च आता। वाडिया
हॉस्पिटल को जब बच्ची के हाल के बारे में पता चला तो उन्होंने उसका इलाज मुफ्त में
करने का फैसला किया। हॉस्पिटल की CEO डॉ मिनी बोधान्वाला ने बताया कि जब बच्ची को
हॉस्पिटल लाया गया था तब वो काफी कमजोर थी। शुरुआत में उसपर किसी भी दवा का असर
नहीं हो रहा था लेकिन धीरे-धीरे उसके स्वास्थ में सुधार आने लगा। अब बच्ची की हालत
में काफी सुधार है और वो अपने दादा के साथ ही रह रही है।


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