भगवान के अवतार का हुआ जन्म- लोगों ने शुरू कर दी पाठ-पूजा
यह कुदरत का करिशमा ही है कि कभी-कभी जावनर के बच्चे की जन्म की चर्चा भी इनती तेजी से होती है कि लोग उसे भगवान या उनका अवतार ही समझ बैठते है।
भले ही हम कितने ही आधुनिक बन जाये
चन्द्र ग्रह –मंगल ग्रह –शनि ग्रह
आदि के आलावा किसी भी अन्य दुनियां मे ही भले ही क्यों ना चले जाएँ पर अन्धविश्वास का दामन सदैव थामें रखें गे अंधविश्वास हमारे
पीछे पूंछ की तरह इस प्रकार चिपका हुआ है की हम लाख कोशिश का ले उस पूंछ को उखाड़ना
हमारे लिये मुश्किल ही नहीं बल्कि असम्भव है!और असम्भव के आगे पूर्णविराम होता है
!
अगर किसी के शरीर में असमान्य अंग नजर आता है। तो लोग उसको भगवान मानकर पूजा
करने लगते हैं। ऐसा सिर्फ हमारे देश में ही होता हैं।हर घर में बच्चे के जन्म के साथ कई तरह की
खुशियां दस्तक देती है, ऐसे में चाहे वह बच्चा किसी इंसान का हो या किसा जानवर का खुशियां
तो दस्तक देती ही हैं, लेकिन ऐसा हो सकता है कि जानवर के बच्चे के जन्म
के समय उतनी खुशी नहीं होती जितनी की इंसान के बच्चे की जन्म के बाद खुशी होती है।
लेकिन यह कुदरत का करिशमा ही है कि कभी-कभी जावनर के
बच्चे की जन्म की चर्चा भी इनती तेजी से होती है कि लोग उसे भगवान या उनका अवतार ही
समझ बैठते है। ऐसी ही एक सच्ची घटना देखने को मिली उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में।
यहां एक गाय ने जब अपने बछड़े को जन्म दिया तो उसका
चेहरा इंसान की तरह था।
बस क्या जैसे ही लोगों तक इस की खबर पहुंती, लोगों
के मन में आस्था उबाल लेने लगा और गाय के इस अनोखे बछड़े को देखने के लिए
लोगों का तांता लग गया। यहीं नहीं कुछ लोग तो इसे भगवान का अवतार समझ कर पूजा-पाठ करने के साथ-साथ चढ़ावा भी चढ़ाने लगे।यहाँ तक कि आस-पास
प्रसाद और पूजा आदि की सामग्री बेचने वालों की दुकानें भी लगने लगी!
दरअसल यह पूरा मामला है मुजफ्फर नगर के पछेंदा गांव
से, यहां जन्में इस गाय के बचड़े का आधा शरीर तो गाय जैसा ही था, लेकिन इसके धड़ से
ऊपर का हिस्सा बिलकुल इंसानों जैसा था। इसके नाक, कान और चेहरे की बनावट इंसानों जैसे
थे। ऐसा ही एक मामला पंजाब में भी देखने को
मिला है !
अमृतसर पंजाब में ऐसा एक और मामला प्रकाश
में आया है। जहां पर एक बालक चर्चा का विषय बना हुआ है। बालक के चर्चा में रहने की
वजह उसकी बढ़ती पूछ हैं। इस बालक का नाम दूल्हा सिंह हैं।
वहां के लोग इस बालक को हनुमान जी का
अवतार मानते हैं। जो भी इस बालक को देखता है वह आश्चर्यचकित हो जाता हैं। कुछ लोग तो
इस बालक की पूजा भी करते हैं।
यह बालक अपने चाचा साहिब सिंह और चाची मजीर कौर के
साथ रहता हैं। बालक के
चाचा और चाची ने बताया कि यह पूंछ बचपन से ही है। जो उस बालक के बढऩे के साथ
बढ़ती जा रही हैं। इसी लिये लोग इसे हनुमान जी का अवतार मान
आशीर्वाद लेने और अपनी समस्या का समाधान पूछने चले आते हैं !
भारत में अंधविश्वास एक व्यापक सामाजिक समस्या माना जाता
है।लोग अंधविश्वास के चलते कुछ भी करने तो तैयार हो जाते हैं। अंधविश्वास का कारण
शिक्षा की कमी को माना जाता है,लेकिन भारत में अंधविश्वासी शिक्षित लोगों की भी कमी नहीं है।
वैसे तो हमारे देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है,
लेकिन इसके पीछे की वजह धार्मिक नहीं है। बच्चों का दिल साफ होता
है। उनके दिल में किसी के लिए भी पक्षपात नहीं होता। इस कारण बच्चों को भगवान के
रूप में देखा जाता है।

इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस मासूमियत को धर्म में परिवर्तित कर देते हैं ।सच में एक बच्चे को भगवान मान कर पूजने लग जाते हैं। ऐसा ही मामला जालंधर में देखने को मिला है। यहां एक बच्चे को उसकी शक्ल के चलते लोगों ने भगवान बना दिया। लोग उसे भगवान मान कर पूजा अर्चना में लगे हुए हैं कमलेश नामक व्यक्ति के घर 6 वर्ष पहले बेटे प्रांशु का जन्म हुआ। बच्चे को जिसने भी देखा वह चकित रह गया। बच्चे का सिर सामान्य से कुछ बड़े आकार का था तथा आंखें सामान्य आकार से कुछ छोटी थी। इसी वजह से बच्चे का चेहरा कुछ अनुपात में पौराणिक भगवान गणेश के जैसा ही था। अगर वैज्ञानिक तौर पर देखें तब यह तभी संभव होता है जब बच्चे का मां के गर्भ में पूर्ण विकास नहीं हो पाता। जिस दिन बच्चे का जन्म हुआ उस दिन से लोगों ने इस बच्चे को भगवान गणेश का ही अवतार मान लिया और उसके प्रति अपने मन में आस्था रखने लगें। वर्तमान में स्थिति यह है कि अब यह बच्चा 6 साल का हो गया है।
गांव के काफी स्त्री-पुरुष इस बच्चे का आर्शीवाद लेने के लिए
प्रांशु के पास में आते हैं। लोगों में यह धारणा बन गई है कि अगर यह बच्चा किसी को
आशीर्वाद दे दे तो उस व्यक्ति की किस्मत बदल जाती है।यहां तक कि बच्चे के
घरवाले भी उसे भगवान मन कर पूजने लगे है !यहाँ सोचने वाला विषय यह है कि बच्चे का
बाप मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता है यदि बच्चा भगवान गणेश का अवतार
है तो उनके स्वंय के घर के कष्ट दूर क्यों नहीं होते है ! रहा सवाल पूछने और
आशीर्वाद लेने वालों का तो वह यह देखा गया है आप बच्चे से कोई प्रशन पूछें जैसे –मेरा काम कब बनेगा –तो उत्तर में बच्चा अपनी एक या
दो ऊँगली उठा देता है जिसका अर्थ है एक या दो महीनें !इसका एक और गणित भी है की
यदि आप दस अलग-अलग लोगो को दस अलग-अलग बातें बताएं गे तो कम से कम दो-चार की बात
सत्य आवश्य ही निकले गी और जिन की बात सत्य साबित हुई वही आप को भगवान होने का
प्रणाम पत्र दे गा !
(टू डे समाचार जगत )





0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
crimestopindia ब्लॉग में हम अपराध से जुड़ी सच्ची कहानियाँ प्रकाशित करते हैं.आशा है यह ब्लॉग आपको पसन्द आया होगा.आप ब्लॉग को लाईक और शेयर जरुर करे. काहानियों से सम्बन्धित अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें ताकि हम अपने ब्लॉग को आपके रूचिकर बना सकें.