प्रेम-त्रिकोण का तीसरा कोण
                         पहले दो से प्रेम-फिर खेली यह गेम
                                                        


  का तपता गरम महीना. इन दिनों गर्मी के कारण लोगों का बुरा हाल रहता है .उत्तर भारत मे रहने वाले अधिकांश धनवान एवं सेलानी लोग अपने - अपने शहरों से निकल कर पहाड़ों का रुख करते है मध्यवर्गया लोग  इन दिनों ज्यादातर  लोग शिमला -नैनीताल -कुल्लू -मंसूरी आदि जैसी जगहों पर जाना पसंद करते है तो उच्चवर्गया अधिक धनवान लोग ऊटी -कश्मीर -स्विटजर लैंड जैसी जगहों पर जाकर गर्मी से राहत पाने के साथ-साथ छुटिया मनाते हुए मस्ती और मनोरंजन का आनंद लेते हैसाहिल-नीरज और मिंटू ला ग्रुप भी गर्मियों की छुटिया मनाने दिल्ली से वाया लुधियाना मनाली के लिए गया था. होटल की बुकिंग उन्हों ने पहले से ही करवा रखी थी क्यों कि वह जानते थे इन दिनों सीजन होने के कारण वहां पाव रखने कि भी जगह नहीं मिलती हैमनाली पहुंच कर उन्हों ने पहले दिन होटल में ही आराम किया था यह  यह बात 22 मई 2017 की है ! अगले दिन सभी नहा-धो कर तैयार हुए और होटल से निकल कर पहाड़ों की और घूमने निकल गए थे .मैदानी क्षेत्र में भीषड़ गर्मी होने के बावजूद कुल्लू-मनाली का मौसम अधिक सुहाना था दूर-दूर तक फैली पर्वतों की श्रंखला उस के साथ ऊँचे लम्बे घने देवदार के वृक्ष !कैसे सुन्दर- मनोहारी दृश्य थे! उस क्षेत्र में बहुत सैलानी घूम रहे थे . दोपहर के लगभग 12 बजे तक कुदरती नजरों के फोटो और सेल्फी लेते हुए नीरज अदि के ग्रुप के साथ और बहुत सैलानी  फालीनाला की और निकल गए थे कि पर्वतीय  झाड़ियों के पास से आये एक भयानक दुगंध के झोंके ने उन सब को कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था थोड़ा निकट जा कर उन्हों ने देखा तो वहां एक नौजवान कि लाश पड़ी थी . लाश देख कर वह कई सैलानी जमा हो गए थे . सभी लाश पह्चानने कि कोशिश कर रहे थे. इस बीच किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था . थाना मनाली पुलिस के साथ डी-एस-पी पुनीत  रघु भी घटनास्थल पर पहुंच गए थेलाश एक दिन पुरानी लगती थी वह कोई 30-35 वर्षीय युवक की लाश थी उसके शरीर पर जींस की पेन्ट प्रिंटिड शर्ट थी शरीर पर कहीं चोट आदि के निशान नहीं थे हीं वहां संघर्ष के चिन्ह भी दिखाई नहीं देते थे बस जहाँ लाश पड़ी थी उसके पास तीन-चार लोगों के पावं से जमीन खुरचने या घिसरणे जैसे निशान मौजूद थे ! बहरहाल वहां से कोई ऐसा सबूत नहीं मिला था जिस से कि मृतक कि शिनाख्त हो पाती ! घटना की सुचना मिलते ही एस पी पदम चन्दर भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे . उन्हों नए भी मौका मुआयना करने के बाद इस केस की तफ्तीश का कार्य भार  डी एस पी पुनीत रघु को सौंप दिया था डी एस पी पुनीत ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध थाना मनाली में आई पी सी की धारा -320 के तहत मुकदमा दर्ज कर करवाई शुरू कर दी थी ! यह बात 23-5-2017 कि है ! तफ्तीशकि शरुआत में उन्होने सब से पहले मृतक का फोटो लोकल समाचार पत्रों में छपवा कर लोगों से शिनाख्त की अपील की . इस का नतीजा यह निकला कि अगले दिन दो आदमियों ने थाने कर बताया कि वह लोग मृतक को जानते है और उसकी तलाश कर रहे हैं ! उन दोनों के नाम राजीव सिंह और दुर्गा दत्त थे .उन्हों ने पुनीत रघु को बताया था कि वे दोनों एड़ी हाइड्रो प्रोजेक्ट साइंस -2011  में काम करते है . मृतक का नाम बिंदु सिंह है वह गावं तोपरा कुठेर जिला -चम्बा  निवासी -धीरू सिंह का पुत्र है और हमारे ही प्रोजेक्ट पर बतौर कुक तैनात है पूरे यूनिट के लिय्रे खाने का इंतजाम उसी कि देख-रेख में होता  है कम्पनी कि तरफ से उसे प्रजेक्ट के गेस्ट हॉउस में रहने के लिए क्वाटर मिला हुआ था अपनी ड्यूटी  से फारिग होने के बाद वह वहीं सोया करता था    लेकिन 22-5-2017 कि शाम के बाद उसको किसी ने नहीं देख था रात को वह क्वाटर पर भी सोने नहीं आया था प्रोजेक्ट अधिकारिओ ने उसे लापता घोषित कर उसकी तलाश शुरूं कर दी थी हम भी उसी कि तलाश कर रहे थे कि अख़बार में छपी उसकी फोटो देख कर आप के पास खबर देने  आए थे 


                                                   पुलिस हिरासत में मृतक धीरू सिंह की महबूबा और अन्य हत्यारे 

राजीव के बयान लेने के बाद इस मुकदमे को राजीव सिंह कि तरफ से रजिस्टर्ड किया गया था पूछ ताछ के बाद यह पता चला कि मरने वाले की किसी से कोई दुश्मनी वगैरह थी हाँ वह खानेपीने का शौकीन था .उसके घरवालों को गावं में सुचना दे दी गई थी पोस्टमार्टम के बाद लाश उसके परिजनो को सौंप दी गई थी ! डी एस पी पुनीत रघु ने एड़ी हाइड्रो प्रोजेक्ट में जा कर उसके सहकर्मियों से भी पूछताछ की थी पर कही कोई काम की बात पता चली थी . सीजन का समय था किसी की लाश का पर्यटन  स्थान पर मिलना सैलानियों के लिए चिंता का विषय बन सकता था इस लिए पुनीत रघु इस मामले को जल्द से जल्द हल करना चाहते  थे उन्हों नै पुनः मृतक बिंदु के सहकर्मियों से पूछताछ की तो एक काम की बात पता चली थी कि जब वह अपने क्वाटर से लापता हो गया और अपने काम पर भी नहीं मिला था तब उन्हों ने कई बार उसके मोबाईल फोन पर सम्पर्क किया था पर वह बंद था ! तो इसका मतलब है कि बिंदु के पास कोई मोबाईल  फोन था? अगर बिंदु के पास मोबाईल फोन था तो गया कहाँ ? सोचने वाली बात थी अतः पुनीत रघु ने पुलिस कर्मियों को साथ ले कर पुनः घटनास्थल पर जा कर बारीकी से छानबीन कि तो उन्हे एज झाड़िओ के पास से मोबाईल फोन बरामद हो गया था उन्हों ने फोन कि डिटेल चेक कि तो एक नंबर से बिंदु को लगातार कई फोन किये गए थे  वह नंबर मीना नाम कि किसी युवती का था उन्होने तुरंत मीना के बारे में पता लगवाया तो मालूम पड़ा कि मीना एक शादीशुदा -विधवा चरित्र हीन औरत है .उसके कई पुरषों के साथ जायज -नाजायज सम्बन्ध है मृतक के सहकर्मियों ने भी बताया कि बिंदु का उठना बैठना आजकल मीना के साथ था ! समय व्यर्थ करते हुए पुनीत रघु ने मीना को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलवा लिया था शरुआती पूछताछ में मीना ने बिंदु को पह्चानने  से भी इंकार कर दिया था पर जब उसपर सख्ती की गई तो उसने बिंदु की हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया था यह काम उसने अपने दो अन्य प्रेमियों की सहायता से किया था ! मीना को गिरफ्तार कर पुनीत रघु ने एस पी के सामने पेश किया और मीना की निशानदेही पर तिब्बती  कालोनी के पास से देविंदर शर्मा और जीत राम को भी गिरफ्तार कर लिया गया था . सभी तीनो अभियुक्तों को अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया था तीनो अभियुक्तों से पूछताछ केबाद बिंदु की हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई वह प्रेम त्रिकोण पर आधरित नाजाइज़ संबंधों का पुलंदा थी !   
 हिमालय की गोद में बसे पहाड़ी क्षेत्र मनाली जिसे देव भूमि का नाम भी दिया गया है ऐसी सुन्दर पहाड़ों के बीच बसे गावं शारु में मीणा का जन्म हुआ था  प्रकीर्ति और सौंदर्य की मूर्त थी मीना, सैलानियों की सैरगाह  होने के कारन पर्यटकों  को देख कर बचपन से ही मीणा के मन में महत्वकांक्षा  ने अपंने पाव पसारने शुरू कर दिए थे वह सपने देखने लगी थी वह देखती उसके पास भी कोठियां है -लम्बी मोटर कारें है -नौकर चाकर हाे,युवा होने पर स्थानीय लोगो के इलावा सैलानी भी उसके सौंदर्य के दीवाने थे वे भी उसे सपने दिखाते थे वह भी सपने देखती चली गई थी वह सपने तो देखती पर अपने सपनों की ताबीर उसे कहीं दिखाई नही देती थी वह आसमान की ऊंचाईयों को छूना चाहती थी पर समाज में वह बहुत नीचे मक़ाम पर थी उसके पिता मेहनत –मजदूरी कर घर का खर्च चलाते थे माँ भी मजदूरी करती थी वह भी उस के साथ जाया करती थी अपने सपनों का साथ उसने कभी नही    सपनो के पीछे भागने के बाद जब वह थक जाती तो वापस लौट कर मायूस हो कर बैठ जाती थी एक दिन उसे अपने ही इस छोटे संसार में कोई मिल गया था जिस नए वादा किया था कि वह उसके सपनों को साकार करे गए इसी लिए तो मीना अपना घर छोड़ कर उस युवक प्रेम के साथ चली आई थी प्रेम ने भी अपना वादा पूरा किया था अपने परिवार से विद्रोह कर सन-2008 में वह मीना से प्रेमविवाह कर अपने गावं -बंजार ले आया था ! मीना ने सोचा था शायद अब उसके सपनों को ताबीर मिले गी, पर यह उसकी कल्पना थी शादी के कुछ समय बाद ही प्रेम कि अकाल मृत्यु हो गई थी और वह अपने कर्मों को रोती हुई अपने मायके शारु लौट आई थी  


पने मायके लौट कर कुछ दिन  विधवापन में  गुजारने के बाद मीणा के सपनो और महत्वकक्षा ने पुनः अंगड़ाई ली थी पर इस बार उसने अपने सपनो को बेकाबू नहीं होने दिया था कियो कि जीवन के मिले अबतक के अनुभव से वह यह बात अच्छी तरह समँझ चुकी थी कि वही सपने देखने चाहिए जो पुरे हो सकें !बहरहाल उसकी मुलाकात बिंदु से हुई थी . बिंदु चम्बा के टोपरा  कुठेर का रहने वाला था और मनाली स्थित साइंस -2011 अंतर्गत चलने वाले एड़ी प्रोजेक्ट में बतौर कुक तैनात था कम्पनी कि तरफ से ही उसे फ्री निवास मिला हुआ था उम्र मए भले ही वह उससे बड़ा था पर दिलों -जान से उसकी सुंदरता और अदाओ पर फ़िदा था . वह मीना से शादी करना चाहता था पर मीना अब किसी एक कि बन कर नहीं रहना चाहती थी .उसने बिंदु के साथ शादी का वादा तो किया पर अपने मन से कभी शादी का नहीं सोच था वह बस बिंदु के साथ मौज -मस्ती कर अपना समय गुजरना चाहती थीइस बीच मीना कि मुलाकात देविंदर शर्मा नामक युवक से हो गई थी दविंदर मालदार असामी था और मीना रूप पर का दीवाना था उसके साथ मीना ने खूब ऐश की थी , महंगे उपहार खरीदे थे ! बिंदु और दविंदर के आलावा मीना के और भी कई युवको के साथ याराने थे मजे की बात है की मीना एक साथ कई युवको के साथ सम्बन्ध बनाए हुए थी पर किसी को इस बात की वह भनक तक नहीं लगने देती थी उस का हर प्रेमी यही समनझता तह की वह केवल उसी की है जबकि वास्तविक हकीकत कुछ और ही थी ! बिंदु को जब इस बात का पता चला तो उसके दिल को बड़ा झटका लगा था उसने जब मीणा से इस विषय में बात की तो उसने हँसते हुए खा था -''तुमभी न किस गुज़रे जमाने की बात करते हो बिंदु लेकिन आज -कल की दुनिया कुछ और है .तुम ने जो सुना वह सुच है पर हकीकत यह है की वह सब केवल मेरे दोस्त है और कुछ नहीं ...मए उन के साथ घूमती -फिरती हूँ ...ऐश करती हूँ बस और कुछ  नहीं !''  लेकिन मुझे तुम्हारी यह दोस्ती पसंद नहीं है !''
''क्यों मैं क्या तम्हारी बीवी या गुलाम हूँ जो तुम्हारे इशारो पर नाचूं गी,''
 मीना की बात सुनकर बिंदु अवाक् रह गया था पर उस समय उसने चुप रहने में अपनी भलाई समझी थी पर अगले ही दिन से उसने मीना पर शादी करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था उधर दूसरी ओर से दविंदर भी कई दिनों से शादी करने की अपनी दावेदारी पेश कर चुका था मीना की समझ में नहीं आ रहा था की वह इन बातो से अपना पीछा कैसे छुडवाए! कुछ बिना तक तो वह दोनों को बेवकूफ बनती रही थी पर बकरे की माँ कब तक ख़ैर मनाती? बिंदु को शक ही नहीं पूरा विश्वास हो गया था की मीना उसका उल्लू बना रही है ! एक  दिन उसने मीना की बाजू  बाजू पकड़ गुस्से से पूछा -'' सुच-सच बताओ ,यह बहाने बाज़ी कब तक चले गई ?''
''मैं अभी शादी नहीं करना चाहती,''
'' अभी करना नहीं चाहती या करना ही नहीं चाहती.?'' 
''तुम जो मर्जी समझो '' मीणा ने बिंदु को टक्का सा जवाब दे कर चुप करने की कोशिश की थी पर बिन्दू भी शायद आज कुछ और तय क्र के आया था वह आज मीणा से अपनी शादी की तारीख पकी करके ही मानने वाला था .इस  .इसी  बात को ले कर दोनों के बीच तीखी झड़प हो गई थी अंत में बिन्दू ने उसके पंख काटते हुए मीना को धमकी दी   '' ठीक है तुम जितना चाहो झूठ बोलो और बहाने बनाओ लेकिन में सच बोल रहा हूँ कि अगर एक सप्ताह में तुमने मेरे साथ शादी नहीं कि तो में तुम्हारी सभी वीडियो बिरादरी के साथ पूरे मनाली में दिख दूगा कि तुम कितनी सति-सावित्री हो!''
बिन्दू के मुहं से धमकी भरे यह शब्द सुन कर मीना भीतर तक कांप गई थी , यह बात  15-16 मई के आस-पास कि है ! सही मायने में अब मीना को बिन्दू से डर लगने लगा था उस ने सोच आज तक उसने बिन्दू के माल पर जितनी ऐश कि है अब उसकी वसूली का समय आ गया था वैसे बिन्दू के साथ शादी करने में उसे कोई हर्ज भी न था पर उसकी महत्वकांक्षों को जो ऐश काने का चस्का लग चूका था वह शादी के बाद बंद हो जाना था और वैसे भी मीना को कसी एक खूँटे से बांध कर रहना गंवारा नहीं था अतः बिन्दू के नाम कि इस मुसीबत से पीछा छुड़वाने का उसे एक ही उपाय दिखाई दिया था उसी शाम मीना ने दविंदर को मिल कर बताया था कि बिन्दू हमारे प्यार का दुश्मन बन गया है वह कहता है कि अगर में उससे शादी नहीं करूँगी तो वह तुम्हारी हत्या कर देगा!
सुन कर दविंदर को तैश आ गया था उसने उत्तेजित होते हुए कहा ''उसके बाप का राज है मेरे पास आकर तो देखे ...तुमने उसे क्या जवाब दिया था?''दविंदर ने पूछा तो मीना ने अपना तीर चलते हुए कहा -''मै क्या कहती, में तुम्हारी हत्या होते थोड़े ही देख सकती हूँ ,मैने कह दिया कि में शादी करने के लिए तैयार हूँ पर वह दविंदर को कुछ न कहे !''    '' तुम पागल तो नहीं हो जो बेवजह उसकी गीदर भभकी से डर गई-में नहीं डरने वाला और तुम्हे उसके साथ शादी करने कि कोई जरूरत नहीं है ...समझी !''
''तो फिर में क्या करूं ? जब तक बिन्दू जिन्दा है वो कभी मेरी शादी तुम्हारे साथ नहीं होने दे गा,'' मीना ने टसुए बहाते हुए कहा तो देख कर दविंदर का खून खौल उठा था  
'' उसकी ऐसी-तैसी ,इसके पहले कि वो मुझे ख़त्म करे मए ही उसका काम तमाम कर यह झंझट निपटा दूँ गा,पर पहले तुम बताओ मुझ स शादी करो गी?''
मए तो हमेशा से ही तुम्हारी हूँ दविंदर !''
''तो फिर ठीक है '' बस उसी दी ही बिंदु कि हत्या कि योजना का तानाबाना बना गया था इस काम के लिए देविंदर ने अपने ऐ दोस्त जीत राम को भी कुछ पैसों का लालच दे कर तैयार कर लिया था जीत राम मीणा को भी जानता था पैसों के आलावा उसे मीणा के शरीर का भी लालच था अपनी योजना के अनुसार दिनांक 22-5-2017 की शाम 7 बजे  मीना ने बिन्दू को फोन कर शादी की बात करने के लिए फ़ानीनाला  के पास बुलाया था वहां देविंदर और उसका दोस्त जीत राम एक झाड़ी की ओट में पहले ही छुपे बैठे थे बिन्दू जैसे ही फणिनाला पहुंच मीना उसे अपनी बातों में उलझा कर उस जगह लेगई थी जाहपर दविंदर और जीत राम छुपे बैठे थे इस बीच शादी की बात को ले कर मीना बिन्दू से उलझने लगी थी बिन्दू का सारा ध्यान मीना की बातो में था उसी समय दविंदर और जीत राम ने उसे पीछे से दबोच लिया था बिन्दू ने संघर्ष करते हुए अपने आप को उन के चंगुल से छुड़वाने का बहुत प्रयास किया था पर वह असफल रहा था इतने में  मीना ने अपने गले से दुपटा निकाल कर बिन्दू के गले में डालते हुए कहा था ''लो दविंदर कर दो इसकी शादी! यह शादी के लिए मरा जा रहा है ,'' तभी सबने पोजीशन बदलते हुए अपना-अपना मोर्चा संभाल लिया था    मीना ने आगे से बिन्दू  हाथ पकड़ लिए थे, जीत राम ने उसे पीछे से जकड़ लिया रथ और दविंदर ने मीना का दुपट्टा पूरी ताकत से उसके गले में कसकर उसे यमलोक पहुंचा दिया था इसके बाद वह बिन्दू की लाश को व्ही छोड़ कर चले गए थे शायद वे कभी पकड़े न जाते अगर थोड़ा सा दिमाग से काम लेकर बिन्दू का फोन अपने साथ ले जाते .पर एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है भले ही अपराधी कितना ही चालक क्यो ना न हो कोई न कोई गलती कर ही जाता है ! पुलिस रिमांड खत्म होने पर तीनो दोषियों को पुनः मनाली की सक्ष्म अदालत मए पेश किया गया था जहां से सभी को बिन्दू की हत्या के अपराध में दोषी बना कर जिला जेल भेज दिया गया था
         (कथा पुलिस सूत्रों पर नाट्य रूपांतरण )   -हरमिंदर खोजी  


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Milan Tomic

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