सागर की हत्या का रहस्य
रविवार होने के कारण अधिकांश कामगार मजदूर इसदिन अपने घरो की
साफ-सफाई फाई और कपड़े अदि धोने का काम करते है,
२५ वर्षीय सागर और सरवन दोनों भाई घर की सफाई में लगे थे शाम करीब ४ बजे सारा काम निपटने के बाद छोटा सरवन कमरे में लेट कर आराम करने लगा और सागेर ऊपर छतपर जा कर टहलने लग था !सागर और सरवन दोनों भाई मुलत भूठे अरड़िया -बिहार निवासी सदानंद मंडल के बेटे थे ,सदानंद की चार संताने थी बड़ी दोनों बेटिओ की शादी कर दी थी सागर और सरवन अभी अविवाहित थी , सागर लगभग ७ वर्ष पहले काम की तलाश में लुडिआना आया था दो वर्ष काम सिख जाने के बाद वह अपने छोटे भाई सरवन क भी यह ले आया था दोनों भाई लुधिआना सिथित दरेसी के फतेहगढ़ मुहल्ले की गली नम्बर -3 पाली की बिल्डिंग के तीसरे मेल पैर किराए के कमरे में रहते थे इस बिल्डिंग में पाली के 30 कमरे थे जो उसने प्रवासी कामगारों को किराए पैर दे रखे थे पास ही उसकी राशन की दुकान थी सभी किराएदार उसीकी दुकान से सामान खरीदते थे इस तरह उसकी अतिरिक्त आमदनी हो जाया करती थी
साफ-सफाई फाई और कपड़े अदि धोने का काम करते है,
२५ वर्षीय सागर और सरवन दोनों भाई घर की सफाई में लगे थे शाम करीब ४ बजे सारा काम निपटने के बाद छोटा सरवन कमरे में लेट कर आराम करने लगा और सागेर ऊपर छतपर जा कर टहलने लग था !सागर और सरवन दोनों भाई मुलत भूठे अरड़िया -बिहार निवासी सदानंद मंडल के बेटे थे ,सदानंद की चार संताने थी बड़ी दोनों बेटिओ की शादी कर दी थी सागर और सरवन अभी अविवाहित थी , सागर लगभग ७ वर्ष पहले काम की तलाश में लुडिआना आया था दो वर्ष काम सिख जाने के बाद वह अपने छोटे भाई सरवन क भी यह ले आया था दोनों भाई लुधिआना सिथित दरेसी के फतेहगढ़ मुहल्ले की गली नम्बर -3 पाली की बिल्डिंग के तीसरे मेल पैर किराए के कमरे में रहते थे इस बिल्डिंग में पाली के 30 कमरे थे जो उसने प्रवासी कामगारों को किराए पैर दे रखे थे पास ही उसकी राशन की दुकान थी सभी किराएदार उसीकी दुकान से सामान खरीदते थे इस तरह उसकी अतिरिक्त आमदनी हो जाया करती थी
थाना अध्यक्ष इं-मोहन लाल और दोषी अशोक मण्डल
सागर सिलाई का अच्छा कारीगर था उसने गाँधी नगर सिथित एक गारमेंट्स की फैक्ट्री में सिलाई का ठेका ले रखा था जहा दोनों भाई काम करते थे उन्होने अपने पास और भी कई कारीगर सप्ताहिक वेतन पर लगा रखे थे दोनों भाई अच्छा पैसा कमा भी रहे थे और गांव में अपने माँ-बाप को भी भेज रहे थे !
शाम को लगभग 7 बजे के करीब सागर ने छत से नीचे उतर कमरे में आकर छोटे भाई सरवन को खाना बनाने के लिए कहा और खुद पुन छत पर चला गया था बड़े भाई का आदेश मन कर सरवन खाना बनाने में लग गया था लगभग 7 -३० बजे पड़ोस के कमरे में रहने वाले संजय ने आकर सरवन को बताया कि उसका भाई सागर कौन से लथपथ उपरके जीने में पड़ा है , संजय के मुँह से यह बात सुनकर सरवन तुरंत कमरे से निकल कर छत की तरफ भगा , ऊपर जा कर उसने देखा सागर के शरीर पैर कई घाव थे जिनमे से कौन बह रहा था हैरानी की बात यह थे की छत पैर दूसरा कोई नहीं था फिर सागर को किसने घायल किया था ? पैर यह वकत इस समय ऐसी बाटे सोचने का नहीं था ! संजय व् एक -दो और लोगो की मदद से सरवन ने अपने घायल भाई को पास के राम चेरिटेबल अस्पताल पहुँचाया डाक्टरों ने जाते है उसे मृतक घोषित कर दिया था इस बीच किसी ने पुलिस को इस मामले की सुचना दे दी थी यह बात १०-४-२०१७ शाम की है !
सुचना मिलते ही थाना डिवीजन -4 के एस एच ओ- इंस्पेक्टर मोहन लाल अपने दल-बल सहित घटनास्थल पर पहुंच गए थे ; सरवन ने बताया कि शाम को वह अपने कमरे पर खाना बना रहा था और उसका भाई सागर छत पर टहल रहा था किसी अनजान नामालूम वयक्ति ने उन्हे किसी तेजधार हथियार से वर कर घ्याल कर दिया था जिस कारण उनकी मृत्यु हो गई है ! सरवन के बयान दर्ज कर इंस्पेक्टर मोहन लाल ने अपराध संख्या -116 पर आई पी सी कि धरा -302 के तहत अज्ञात लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लाश अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवा दिया ! इस घटना की सुचना उन्होंने अपने उच्च अधिकारिओं को भी दे दी थी अस्पताल से फारिग होने के बाद वे सरवन को साथ ले कर घटनस्थल मुहल्ला फतेहगढ़ दरेसी पहुंचे तब तक सुचना पाकर ए, सी पी सचिन गुप्ता व् क्राइम टीम भी घटनास्थल पर पहुँच गई थी जिस जगह सरवन-सागर रहते थी उस पाली की बिल्डिंग का छत से लेकर बाहर सड़क का अच्छी तरह मुआयना किया गया था , बिल्डिंग के बाहर मुख्य द्वार के पास गली में खून सने जूतों के फीके से निशान थे और छत और जीने में भी काफी मात्रा में खून बिखरा पड़ा था , बिल्डिंग के बाहर गली में कम से कम २० साईकिल खड़ी थी जो वहा रहने वाले कारीगरों की थी . काफी तलाश करने पर भी वहा से कोई खास सुराग नहीं मिला था
लुधियाना में ऐसे कामगार मजदूरो के मामलो में अक्सर दो बाटे सामने आती है ऐसी हत्याए या तो रुपए - पैसे के लेनदेन में होती है या फिर अवैध सम्बन्धो की वजह से ! तो सब से पहले इंस्पेक्टर मोहन लाल ने रुपयो के लेनदेन वाली थियोरी पर कम शुरू आकर किया . पता चला की मृतक सीधा-सदा शरीफ इंसान था उसका किसी से कोई लेनदेन या दुश्मनी वगेरा नहीं थी! इंस्पेक्टर मोहन लाल ने इस मामले की आगामी तफ्तीश का कार्यभार ए एस आई जसविंदर सिंह को सौंप दिया था!
जसविंदर सिंह ने मामले की तहकीकात जब शुरू की तो उन्हें पता चला कि मृतक के अन्य और भी कई रिश्तेदारो के लड़के यहा रहते और काम करते है जिनमें से एक अशोक मंडल है जो मृतक के ताऊ का लड़का था . अशोक मंडल टिब्बारोड कि किसी सिलाई फैक्टरी में काम करता था और उसका मृतक के घर काफी आना-जाना था .साथ है यह भी पता चला था कि अशोक का किसी बात को लेकर मृतक से दो-तीन बार झगड़ा भी हुआ था पहले अशोक मंडल भी मृतक के साथ है रहता था झगड़े के बाद से वो अलग रहने लगा था . ए एस आई जसविंदर सिंह ने हवलदार अमरीक सिंह को अशोक मंडल के बारे में पूरी जानकारी जुटाने का काम सौंप दिया था ! इस बीच इंस्पेक्टर मोहन लाल इस केस के घटनाक्रम पर ध्यान दे कर जब सोचने लगे तो उन्हें चाबी का स्मरण हो आया था दरअसल उन्हें पाली की बिल्डिंग के बाहर से एक चाबी मिली थे चाबी वहां खड़ी साईकलों के पास से मिली थी चाबी वहां खड़ी साईक्लो में से ही किसी एक साईकिल की हो सकती थी ! उस समय मोहन लाल ने इसे गैर मामूली समझ कर इस ओर अपना ध्यान नहीं दिया था लेकिन आज न जाने क्यों उन्हें यह चाबी कुछ महत्वपूर्ण लगने लगी थी ! वह ए एस आई जसविंदर सिंह व् कुछ अन्य पुलिसकर्मिओ को साथ लेकर तुरंत पाली की बिल्डिंग के पास पहुंचे , साइकिलें अब भी वही खड़ी थी , मोहन लाल ने जसविंदर सिंह को आदेश देते हुए कहा '' बिल्डिंग के सभी किराएदारों को बुलवाओ '' जसविंदर सिंह ने कुछ ही देर में वहां रहने वाले सभी किराएदारों को इकठा कर लिया था , किराएदारों के आने के बाद मोहन लाल ने उन सब को कहा - ''अपनी-अपनी साइकिलों का टाला खोल कर उन्हें एक तरफ हटा लो ''- सभी किराएदार अपनी-अपनी साइकिलों का ताला खोल साइकिलें वहां से हटाने लगे थे सब लोग जब वहां से अपनी साइकिलें हटा चुके तो एक साईकिल वहां खड़ी रह गई थी -''यह किस की साईकिल है?'' इंस्पेक्टर मोहन ने सब से पूछा था सभी ने अपनी गर्दन इंकार में हिलाते हुए एक स्वर में कहा था '' साहब ये हमारी साईकिल नहीं है ! इस के बाद मोहन लाल ने अपनी जेब से चाबी निकल कर जसविंदर को देते हुए कहा - ''जरा देखो तो यह चाबी इस साईकिल के टेल में लगती है या नहीं ?'' जसविंदर सिंह ने मोहन लाल से चाबी ले कर वहां खड़ी एकलौती साईकिल के ताले में जब लगा कर देखी तो ताला झट से खुल गया था, यह देख कर मोहन लाल की आँखों में चमक दौड़ गई थी , उन्होंने सबसे पूछा था -''यह साईकिल किसकी है ?'' पर कोई नहीं जानता था कि वह साईकिल वहां कौन खड़ी कर गया था . तभी अचानक मोहन लाल कि नज़र सामने कि दुकान पर लगे सीसी टी वी कैमरे पर पड़ी .उन्होंने तुरंत कैमरे को कब्जे में ले लिया और उसकी फुटेज निकलवा कर चेक की तो पता चला घटना वाले दिन शाम के 6 -40 बजे एक युवक ने वहां आकर साइकिल खड़ी की और पाली की बिल्डिंग में चला गया.इसके लगभग 25 मिनट बाद वही युवक घबराया हुआ बड़ी तेज़ी से बिल्डिंग के बाहर आया और साइकिलों से टकरा कर नीचे गिर पड़ा और फिर झटसे उठ कर अपनी साईकिल उठाए बगैर वहांसे चला गया था!
मोहन लाल ने मृतक के भाई सरवन को थाने बुलाकर कैमरे की फुटेज दिखाकर पूछा -''पहचानते हो यह साईकिल खड़ी करके बिल्डिंग में जाने वाला लड़का कौन है ?''
''जीहा साहब ,यह तो मेरे चाचा का बेटा मेरा भाई अशोक मंडल है !''घबराते हुए सरवन ने बताया और पूछा -" क्या बात है साहब ? सब ठीक तो है "
"ऐसी कोई घबराने की बात नहीं " मोहन लाल ने कहा और पूछा '' अब जरा सोच कर बताओ क्या ये अशोक मंडल कल शाम तुम्हारे कमरे पर आया था?
''नहीं साहब भैया {मृतक} से इनका जबसे झगड़ा हुआ है तबसे ये हमारे कमरे पर नहीं आते है और ना हीं हम दोनों भाई इनके कमरे पर जाते है ''
''ठीक है अब हम जाओ जब जरुरत होगी तुम्हे बुलवा लूगा'' ! इंस्पेक्टर मोहन लाल ने सरवन को वापिस भेज दिया और खुद सोचने लगे कि या तो सरवन को इस बारे में जानकारी नहीं है या फिर वो झूठ बोल रहा है . पर सवाल यह था कि सरवन झूठ क्यों बोले गए यह भी हो सकता है कि वह नीचे कमरे में खाना बना रहा हो और अशोक मंडल या कोई और आदमी चुपचाप चाट पर गया हो और सागर का काम तमाम कर चुपचाप निकल गया हो ! बात कुछ भी रही हो पर यह बात सच थी कि वारदात के समय अशोक मंडल घटनास्थल पर ठीक घटना के समय मौजूद था इस बात कि गवाही सी सी टी वी कैमरा समय के साथ दे रहा था !
घटना स्थल की जाँच करते हुए सहायक पुलिस आयुक्त और पुलिस कर्मी
अशोक मंडल का इस घटना से कोई ना कोई सम्बन्ध अवश्य है .इस बात का पूरा संदेह मोहन लाल को हो गया था ए एस आई जसविंदर ने मुखबिरों दुवारा अशोक मंडल के विषय में प्राप्त जानकारी जब मोहन लाल को बताई तो उनका संदेह विश्वास में बदल गया था उन्हों ने एक मिन्ट समय वयर्थ करना उचित ना समझा और तुरंत अशोक मंडल को थाने बुलवा लिया था - थाने ला कर जब उस से पुछताछ शुरू कि गई तो हर अपराधी कि तरह वह अपनेआप को बेगनाह बताते हुए इस अपराध से इंकार करता रहा था और कहता रहा था कि घटना वाले दिन वो शहर में ही नहीं था पर इंस्पेक्टर मोहन लाल ने जब उसे सी सी कैमरे कि फुटेज दिखाई तो वह बगले झाँकने लगा था आखिर अपना अपराध स्वीकार करते हुए सागर कि हत्या करने का जुर्म स्वीकार किया ! इंस्पेक्टर मोहन लाल ने उसके बयान कलमबद्ध करने के बाद उसे दिनांक १२-५-२०१७ को सक्षम अदालत में पेश कर आगामी पूछताछ के लिए २ दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया था !
पुलिस रिमांड के दौरान सागर हत्याकांड कि जो कहानी प्रकाश में आई वह कोई चौकाने वाली बात ना थी आज के समाज में पथभृष्ट होकर मर्यादाओ से गिरने वाले नवयुवको के लिए यह एक मामले से बात है ! अशोक मंडल सागर के ताऊ का बेटा था अशोक कई वर्ष पहले काम कि तलाश में लुधियाना आया था जब उसका लुधियाना में अच्छी तरह काम जम गया तो वह एक्सपोर्ट कि फैक्ट्रियो में खुद के ठेके लेकर सिलाई का काम करने लगा था कुछ समय में ही उसने कई फैक्ट्रयों में काम के लिए ठेके ले लिए थे जब काम बढ़ने लगा तो अधिक कारीगरों कि जरुरत पड़ने लगी ऐसे समय में अशोक मंडल ने एक भलाई का काम सोचा था ! उसने गाँव में रहने वाले अपनी बेरोजगार चाचा-ताऊ के बेटो को लुधियान बुलवा कर काम पर लगा दिया था उन्ही में से एक सागर मंडल भी था .अन्य लोगो को तो अशोक ने अलग -अलग कमरे किराए पर ले दिए थे पर चूकि सागर उसके ताऊ का बेटा था इस लिए भाई होने के नाते सागर को उस ने अपनी कमरे पर ही रहने दिया था ' कुछ महीनो बाद जब रोटी-पानी कि दिक्कत हुई तो अशोक ने गाँव से अपनी पत्नी राधा को घर कि देखभाल के लिए बुलवा लिया था . अशोक शादीशुदा एक बचे का बाप था बहरहाल घर में औरत आने से खाना आदि बनाने कि दिक्कत ख़तम हो गई थी सभी भाई डटकर काम में लग गए थे इस बीच सागर ने अपनी छोटे भाई सरवन को भी लुधियाना बुलवा लिया था
देवर होने के नाते सागर और अशोक मंडल कि बीवी राधा के बीच हंसी -मज़ाक चलता रहता था जिस का अशोक ने कभी बुरा नहीं मन था पर देवर-भाभी का हंसी-मज़ाक कब सीमाए लाँघ गया था इस बात कि भनक तक अशोक को नहीं लागल थे.देवर-भाभी को जब एक-दूजे की देह का चस्का लगा तो फिर यह रोज़ का क्रम बन गया था .अब सागर कभी बीमारी के बहाने तो कभी किसी और कारण से घर पर रुकने लगा था कियोकि अशोक ठेकेदार था अतः उसे अपने सभी कारीगरों को और फ़ैक्टरिओ को संभालना होता था इस कारण कभी-कभी वह रात को भी घर नहीं आ पता था ऐसे में देवर-भाभी की तो जैसे निकल मौज लग जाती थी लेकिन पाप एक ना एक दिन सामने आ ही जाता है ! अशोक ने एक दिन दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था उसे गुस्सा तो बहुत आया पर अपनी इज्जत की खातिर वह खामोश ही रहा था . सागर और राधा ने भी माफ़ी मांग ले थी बात यही ख़तम हो गई थी अशोक ने भी उन्हें आगे से मर्यादा में रहने की हिदायत देकर छोड़ दिया था यही अशोक ने बहुत बड़ी भूल की थी यदि उस समय वह इस बात को गंभीरता से लेता या सागर को अपने घर से निकल देता तो शायद यह घटना ही नहीं घटनी थी
अशोक ने अपनी पत्नी और छोटे भाई सागर पर विश्वास कर लिया था कि आज के बाद वह पुनः अपनी गलती नहीं दौराहे गए पर यह उस की भूल थी .इस घटना के कुछ ही दिनों बाद उसने दोनों को फिरसे रेंज हाथो पकड़ लिया था! इस बार भी उस ने यह सोच कर दोनों को माफ़ कर दिया था कि गाँव तक इस बात के चर्चे उठे गें और उसके परिवार की बदनामी हो गी! जब तीसरी बार उसने फिरसे दोनों को रेंज हाथो एक-दूजे की बाहो में देखा तो उसके सब्बर का बांध टूट गया था अशोक ने पहले तो दोनों की जमकर पिटाई की उस के बाद सागर को तुरंत घर से निकल दिया था .इसके अगले दिन वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चो को गाँव छोड़ने चला गया था यह बात अक्टूबर 2016 की है
अशोक से अलग होने के बाद सागर अपने छोटे भाई सरवन को साथ ले कर पाली के माकन में कमरा किराए पर लेकर रहने लगा और गाँधी नगर सिथित एक फैक्ट्री में काम करने लगा था सागर को अपने घर से निकल कर और बीवी को मायके छोड़ आने के बाद अशोक ने सोचा था कि बात अब खतम हो गई है पर वह यह नहीं जानता था कि अब भी बात वही की वही थी शरीर से भले ही देवर-भाभी एक-दूजे से भले ही दूर हो गए थी पर मोबाईल फोन से वे एक-दूजे के संपर्क में थे! अशोक को जब इस बात का पता चला तो वह आग बबूला हो उठा था समंझदारी से काम लेते हुए उसने एक बार सागर को साझाया पर वह अपंनी हरकतों से बाज नहीं आया था बल्कि अब तो गाँव में भी यह खबर फैल गई थी लोग चटकारे ले कर बाते करते थे गाँव में अशोक के परिवार की बहुत बदनामी हो रही थी इस लिए अशोक की समझ में नहीं आ रहा था किवो किया करे घटना वाले दिन १०-4 -2017 कि शाम सागर को समझने के लिए उस ने फोन कर पूछा कि वह कहा है . सागर ने उसे बताया कि वह छत पर है ऊपर चले आये ! अशोक जब छत पर पहुंचा इत्तफाक से उस समय सागर फोन दुवारा गाँव में अशोक कि बीवी से बाते कर रहा था और उसकी पीठ अशोक कि तरफ थी अशोक गया तो सागर को समझने था पर अपनी पत्नी से फोन पर अश्लील बाते करते देख उसका खून खौल उठा था अशोक उसी समय बाजार से सब्जी काटने वाला चाकू खरीद कर लाया था पर कुछ करने से पहले एक बार बात कर लेना चाहता था पर बात करने से पहले है सागर उसकी बीवी के बारे में उल्टा-सीधा बोलने लगा तो अशोक से यह बात बर्दाश्त नहीं हुई थी उसने भी सब रिश्ते-नाते भुला कर अपने पास सब्जी काटने वाले चाकू से अशोक पर ताबरतोड़ वर करने शुरू कर दिए थे चाकू के वर इतने घातक थे कि अशोक लहूलुहान हो कर जमीन पर गिर पड़ा था !
सागर को जमीन पर गिरते और उसका खून देखकर अशोक घबर्रा गया कियोकि वह कोई पेशेवर अपराधी तो था नहीं अतःघबरा कर वह नीचे की तरफ भगा और अपनी
साईकिल को उठाए बिना ही वहा से भाग गया था
रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने अशोक से वह चाकू बरामद कर लिया था जिससे उसने सागर की हत्या की थी. रिमांड अवधि समापत होने पर अशोक को पुनः अदालत में पेश किया गया था जहा से उसे न्यायक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया था !
{कथा पुलिस सूत्रों पर आधरित )
Sahil kapoor

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