*तथाकथित भगवानों द्वारा भावनाओं से खिलवाड़ *



    तथाकथित भगवानों द्वारा भावनाओं से खिलवाड़ 
    काले जादू और दिव्य सिद्धियों के नाम पर भोले लोगों का शोषण 


र्म मात्र बौद्धिक उपलब्धि ही नहीं है, वह इंसान की स्वाभाविक आत्मा है. धर्म का अर्थ है आत्मा से आत्मा को देखना. आत्मा से आत्मा को जानना. आत्मा से आत्मा में स्थित होना. धार्मिकता अंत:करण की पवित्रता है. लेकिन आज धर्म में भोग-विलास तेजी से पैठ बना रहा है. जहां त्याग और भोग की दूरी खत्म होती जाती है, धर्म धन से संयुक्त होता है, वहां धर्म अधर्म से ज्यादा भयंकर बन जाता है; और उसकी परिणति कथित संत आसाराम, रामपाल और राधे मां जैसे लोगों के रूप में होती है.
धर्म शांति और मोक्ष का साधन माना जाता है. यही वजह है कि लोग धर्म की ओर आकृष्ट होते हैं, लेकिन कुछ ढोंगी बाबाओं की वजह से आज धर्म के प्रति लोगों की आस्था कम और धर्म के साधकों के प्रति कमजोर होती जा रही है. पर यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर वो कौन सी वजहें है जिससे लोग ऐसे बाबाओं के चंगुल में फंस जाते हैं. उनको भगवान मानने लगते हैं. उनके पीछे पागल हो जाते हैं. ये हैं आधुनिक बाबाओं की ढोंग कला... 

स्वांग रचने की कला- 




संत आसाराम से लेकर राधे मां तक कथित ढोंगी संतों की सबसे बड़ी कला स्वांग रचने की है. स्वांग यानी एक चरित्र खुद को दूसरे चरित्र में ढाल कर नाटक करता है. आसाराम और राधे मां की बॉडी लैंग्वेज पर बारीक नजर डालें, तो यह स्वांग साफ-साफ नजर आता है. ढोंगी संत खुद को भगवान के रूप में प्रदर्शित करते हैं. भगवान की काल्पनिक मुद्रा और भाव-भंगिमाएं बनाने की कोशिश करते हैं.
बचपन से ही हम टीवी-सीरियल या पोस्टर में दिखने वाले भगवान को अपने दिमाग में सहज सहेज लेते हैं. ऐसे में जब ये ढोंगी बाबा उनकी तरह स्वांग रचाते हैं, तो हमें लगता है कि वे भगवान हैं. हम उनकी तरफ आकर्षित होते चले जाते हैं. उन्हें भगवान मानकर पूजा करने लगते हैं. इसी का फायदा उठाकर इच्छाधारी बाबा और आसाराम जैसे कथित संत लोगों का शोषण करते हैं. ज्यादातर महिलाएं इनकी शिकार बनती हैं.

बात बनाने और बरगलाने की क्षमता -

कथित संत रामपाल और आसाराम जैसे लोगों की वाकपटुता की वजह से भोले-भाले लोग आसानी से उनकी बातों में आ जाते हैं. उनके अंदर बात बनाने की वो कला 


होती है, जो लोगों को सम्मोहित कर लेती है. इसके बाद उनकी हर बात सही लगने लगती है. अपनी बातों में फंसाकर ये ढोंगी बाबा लोगों को बरगलाने लगते हैं. तरह-तरह के बहाने बनाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं. उनकी बातों में फंसी जनता को इसका आभास बहुत देर से होता है.

            3- आकर्षक आवरण            

ढोंगी बाबाओं के केस में अक्सर देखा गया है कि ये आकर्षक आवरण में होते हैं. उदाहरण के लिए इच्छाधारी बाबा भीमानंद, राधे मां, स्वामी नित्यानंद और निर्मल बाबा के कपड़ों और रहन-सहन पर गौर कीजिए. ये सामान्य से हटकर परिधान पहनते हैं. इनके बैठने के आसन, कपड़ों का स्टाइल, बैठने का तरीका, मंच की साज-सज्जा अनोखी होती है, जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है.



कमजोरियों का फायदा उठाने की कला 

ढोंगी बाबाओं को लोगों और धर्म की कमजोरियों को फायदा उठाने की कला बखूबी आती है. उन्हें पता होता है कि लोग की कमजोरियां क्या हैं. वे उसे धर्म से जोड़ देते हैं. लोगों को भनक भी नहीं लगती कि आस्था के नाम पर उनके साथ खेल हो रहा है. ऐसे फर्जी संतों के निशाने पर गरीब और अनपढ़ लोग होते हैं. कुछ अमीर अपने काले धन को सफेद करने के लिए ही उनकी शरण में जाते हैं.

ब्रैंडिंग और मार्केटिंग की कला-

इस जमाने में ब्रैंडिंग और मार्केटिंग सबसे बड़ी कला मानी जाती है. ढोंगी बाबाओं का ये सबसे बड़ा औजार होता है. टीवी, अखबार और सोशल मीडिया के माध्यम से ये लोग खुद के पैसे से खुद का प्रचार कराते हैं. खुद को भगवान का अवतार बताते हुए, लोगों की सभी परेशानियां दूर करने का दावा करते हैं. अपने दुख में उलझी जनता इनके झांसे में आसानी से आ जाती है. कुछ ट्रिक की वजह से इनको भगवान मानने लगती है.

कहते हैं झूठ कितना भी शक्तिशाली हो, उसका पर्दाफाश जरूर होता है. जी हां, इसके सबसे बड़े उदाहरण कथित संत आसाराम, इच्छाधारी बाबा भीमानंद, निर्मल बाबा, रामपाल और राधे मां हैं. देर ही सही इनकी सच्चाई से पर्दा उठा चुका है. हां, इससे आहत हुई है, तो लोगों की आस्था.




 ऐसे ढोंगियों से बचने के सरल तरीके
विदेशयात्राकर्जा मुक्तिवशीकरणप्रेम विवाहपति-पत्नी में अनबननौकरीगृह क्लेशरूठे प्रेमी प्रेमिकामनचाही शादीमुठकरणीकारोबार में बाधा और जाने क्या-क्या। पिछले लंबे समय से ऐसे इश्तहार देकर कुछ कथित बाबामियां और काले जादू का सम्राट होने का दावा करने वाले लोगों को गुमराह करके उनका शोषण करने में लगे हैं। प्रशासन ऐसे कथित दावे करने वालों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा रहा। लोगों की भोली-भाली मानसिकता का फायदा उठाकर ऐसे कथित तांत्रिक और बाबा हर रोज हजारों के वारे-न्यारे कर रहे हैं।





ऐसे लोगों की ओर से की जा रही कमाई पर तो कोई टैक्स है और ही इसका कोई हिसाब-किताब नजर रहा है। आए दिन अखबारों और अन्य मीडिया संसाधनों पर ऐसे लोगों का प्रचार आम है। सभी समस्याओं का हल कुछ ही घंटों मेंघर बैठे ही रिजल्ट पाएंहमारे किए जादू की कोई काट नहीं जैसे लुभावने और लोगों को गुमराह करने वाले इश्तिहार हर रोज देखने को मिलते हैं। काले इल्म के बादशाहबंगाली जादूकुछ ही घंटों में समाधान की गांरटीखुला चैलेंजगुरुबाबामियां जी और कुछ इसी तरह के नाम दावों को लोगों के बीच बड़ी चतुराई से परोसा जाता है। एक बार जो इनका शिकार बन गया तो उसके शोषण का सिलसिला लंबा चलता है। एेसा नहीं कि प्रशासन और आम आदमी को इसकी खबर नहींलेकिन एक सरसरी नजर इन विज्ञापनों पर डाली जाती है और फिर हर कोई अपने रोजमर्रा के कामों में लग जाता है। बुद्धिजीवी वर्ग और समाजसेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे लोग समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं जो गैर कानूनी है। संविधान में ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के प्रावधान हैं।

स्कूल-कॉलेज स्तर पर चेतना पैदा की जाए...

समाज में अपनी जड़े जमा चुके इस तरह के अंधविश्वास को मात्र कानून से खत्म ही किया जा सकता। इसके लिए स्कूल कॉलेज स्तर पर स्टूडेंट्स में चेतना पैदा की जानी चाहिए। राष्ट्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से दिखाए जा रहे सिगरेटशराब के नुकसान वाले विज्ञापनों की तरह अंधविश्वास विरोधी विज्ञापन भी दिखाये जाने चाहिए।

लोगों के सेंटिमेंट्स का उठाते हैं फायदा...

डॉक्टरी पेशे और समाजसेवा से जुड़े अदलक्खा हॉस्पिटल के डाॅ. एएल अदलक्खा कहते हैं कि समाज में ऐसी बातें किसी भी तरह से टालरेट करने योग्य नहीं हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और उन चीजों को दिल में रखे हुए हैं जो तर्क के आधार पर किसी भी तरह से खरी नहीं उतरती। समाज में ऐसे लोग अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं और जादू टोने के नाम पर लोगों के सेंटिमेंट्स को भुनाते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

ऐसे इश्तिहार गैर-कानूनी हैं...

ड्रग्स मैजिक रेमिडीज ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइज एक्ट 1954 के तहत ऐसे इश्तहार गैर-कानूनी है। टीवी चैनल पर इस तरह की एडवरटाइजमेंट केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट 1994 के तहत बैन है। देश के संविधान की धारा 51 (एएच) के तहत हर नागरिक को अधिकार है कि वह जहां कही भी ऐसे कुछ हो रहा देखेइसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए प्रशासन से संपर्क करें। महाराष्ट्र की तर्ज पर पुरे देश में भी अंधविश्वास विरोधी कानून लाया जाए।
-हरमिन्दर खोजी





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Milan Tomic

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