‘सोने
की मोहरों से भरे घड़े’
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| माडल चित्र सरिता |
बाबाजी के सामने बैठे युवक ने झट से
अपने हाथ में थामी कपड़े की छोटी सी पोटली बाबा की ओर बढ़ा दी. उस में शायद मिट्टी
थी. बाबा ने पोटली से चुटकी भर मिट्टी निकाल कर अपनी हथेली पर रख कर उसे सूंघा. .
उस के बाद हैरानी से आंखें फाड़ कर सामने बैठे युवक को घूरते हुए कहा,
‘‘हूं…मैं
ने पहले ही कहा था कि जरूर कोई बला है. अब पता चला कि वह बला नहीं,
बल्कि शेषनाग बैठा है धन पर कुंडली
मारे., अरे भाई, तुम
लोग तो बड़े भाग्यशाली हो, तुम्हारे
घर के अंदर बहुत बड़ा खजाना दबा है.’’ बाबा
ने उन्हें समझाते हुए कहा. ‘‘वह
खजाना इन समस्याओं के माध्यम से तुन्हें बारबार चेतावनी दे रहा है कि मुझे बाहर
निकालो. लेकिन बात तुम लोगों की समझ में नहीं आ रही है. खैर,
कोई बात नहीं,
अब तुम मेरे पास आ गए हो तो समझ लो कि
तुम्हारे भाग्य खुल गए.’’
कमरे का वातावरण रहस्यमय था. लाल रंग का
मद्धिम रोशनी वाला बल्ब टिमटिमा रहा था. कमरे के एक कोने में बिछी काली दरी पर एक
बाबाजी बैठे थे. उन की उम्र 35 से
40
साल
के बीच रही होगी. वह साधुसंन्यासियों या तांत्रिकों जैसे कपड़े पहनने के बजाय
पैंटशर्ट पहने था. सिर पर गुलाबी रंग की पगड़ी बांधे उस बाबा के सामने 30-32
साल
का एक युवक बैठा था. उस के पीछे 2 अन्य
लोग भी बैठे थे. उन की उम्र 55-60 साल
रही होगी. सामने गद्दी पर बैठे बाबा ने थोड़ी सख्त आवाज में पूछा,
‘‘आप लोग घर के आंगन की मिट्टी लाए हैं?’’
बाबाजी के सामने बैठे युवक ने झट से
अपने हाथ में थामी कपड़े की छोटी सी पोटली बाबा की ओर बढ़ा दी. उस में शायद मिट्टी
थी. बाबा ने पोटली से चुटकी भर मिट्टी निकाल कर अपनी हथेली पर रख कर उसे सूंघा. उस
के बाद हैरानी से आंखें फाड़ कर सामने बैठे युवक को घूरते हुए कहा,
‘‘हूं…मैं ने पहले ही कहा
था कि जरूर कोई बला है. अब पता चला कि वह बला नहीं, बल्कि
शेषनाग बैठा है धन पर कुंडली मारे.’’
‘‘शेषनाग…धन…कुंडली..?
हम
कुछ समझे नहीं बाबाजी.’’ सामने
बैठे युवक ने ही नहीं, उस के पीछे बैठै
दोनों लोगों ने हैरानी से कहा.
‘‘अरे भाई, तुम
लोग तो बड़े भाग्यशाली हो, तुम्हारे घर के अंदर
बहुत बड़ा खजाना दबा है.’’ बाबा
ने उन्हें समझाते हुए कहा.
‘‘यह आप क्या कह रहे हैं बाजाजी,
हम
कुछ समझ नहीं पाए? हमारे घर की समस्याएं,
परेशानियां..?’’
‘‘सब इसी खजाने की वजह से है.’’
बाबा
ने उन की बात बीच में ही काटते हुए कहा, ‘‘वह
खजाना इन समस्याओं के माध्यम से बारबार चेतावनी दे रहा है कि मुझे बाहर निकालो.
लेकिन बात तुम लोगों की समझ में नहीं आ रही है. खैर, कोई
बात नहीं,
अब
तुम मेरे पास आ गए हो तो समझ लो कि तुम्हारे भाग्य खुल गए.’’
‘‘लेकिन बाबाजी,
हमें
क्या पता कि हमारे घर में खजाना कहां गड़ा है?’’ युवक
ने कहा.
‘‘यह काम तुम्हारा नहीं है. कहीं खजाने के
चक्कर में अपने घर को मत खोद डालना. गड़ा धन ऐसे नहीं मिल जाता. उस के लिए बड़ी
पूजा करनी पड़ती है. तरहतरह के उपाय और साधना करनी पड़ती है. इस के लिए काफी रुपए
खर्च करने पड़ेंगे. अगर बिना पूजापाठ के धन निकालने की कोशिश की गई तो परिवार तबाह
हो जाता है.
‘‘तुम्हारे घर के अंदर 16
मटके
दबे हुए हैं, जिन में सोने की मोहरें भरी हैं. एक बात
और ध्यान से सुन लो, मैं श्री गुरुनानक
देवजी का वंशज हूं. वह बेदी थे और मैं भी बेदी हूं, इसीलिए
यह काम पूरी दुनिया में सिर्फ मैं ही कर सकता हूं. दूसरा कोई माई का लाल पैदा नहीं
हुआ,
जो
यह काम कर सके. समझे कि नहीं?’’
‘‘नहीं महाराज,
हम
खुद धन निकालने की कैसे सोच सकते हैं, क्योंकि
हमें कहां पता है कि मटके कहां गड़े हैं? अब
आप ही बताइए कि इस काम में कितना खर्च आएगा?’’
‘‘लगभग 3 लाख
रुपए तो खर्च हो ही जाएंगे. और सुनो, अगर
यह काम इसी सप्ताह शुरू नहीं हुआ तो धन तो जाएगा ही, तुम्हारा
सब सत्यानाश कर के जाएगा. इसलिए यह काम 2-4 दिनों
में ही शुरू करना होगा.’’ बाबा
ने चेतावनी देते हुए कहा.
बाबा की बात सुन कर युवक और उस के पीछे
बैठे दोनों लोगों ने एक साथ कहा, ‘‘ठीक
है बाबाजी, हम 2 दिनों
में रुपयों की व्यवस्था कर के आते हैं.’’
इस के बाद तीनों बाबा को प्रणाम कर के
चले गए.
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| खजाना निकलने वाला ढोंगी बाबा रविंदर सिंह बेदी |
दोनों बेटों को उन्होंने 12वीं
तक पढ़ा कर समय से उन की शादियां कर दी थीं. शादी के बाद दोनों बेटे टैंपो खरीद कर
चलाने लगे थे. कुछ सालों पहले तरसेम और उन की पत्नी की मौत हो गई थी.
दोनों भाइयों की कमउम्र में ही शादियां
हो गई थीं, इसलिए उन्हें बच्चे भी जल्दी हो गए थे.
इस समय हरजिंदर का बेटा 12वीं में पढ़ रहा है
तो चरणजीत का 9वीं में. वैसे तो दोनों भाइयों को किसी
चीज की कमी नहीं थी, पर इधर कुछ दिनों से
उन के सारे काम उलटेपुलटे हो रहे थे.
यह इत्तफाक था या कुछ और कि पूरे परिवार
को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि आखिर यह हो क्या रहा है?
उन
के बने काम भी एकदम से बिगड़ने लगे थे. घर का वातावरण भी नकारात्मक हो गया था.
परिवार के सदस्यों को बुरे और डरावने सपने आने लगे थे.
हालांकि यह सब मात्र संयोग था,
लेकिन
वहम हो जाए तो उस का इलाज किसी के पास नहीं है. ऐसे में किसी ने कह दिया कि यह सब
किसी ऊपरी साए की वजह से हो रहा है तो सब ने मान भी लिया. फिर तो सभी ने यही माना
कि बिना किसी उपचार के यह ठीक नहीं होगा.
चरणजीत के चाचा परमजीत सिंह भी गांव में
ही रहते थे. उन के एक मित्र थे जसवीर सिंह. वह काफी समझदार और अनुभवी आदमी थे.
उन्होंने किसी अखबार में एक इश्तहार देखा था, जिस
में लिखा था, ‘बनते काम बिगड़ते हों,
ऊपरी
हवा का चक्कर हो, संतान हो कर गुजर
जाती हो,
बीमारी
या मुकदमेबाजी हो, दुश्मनों का भय या
फिर काम बंद हो, हर समस्या का समाधान,
हर
मुसीबत से शर्तिया छुटकारा. एक बार अवश्य मिलें. नोट: कृपया आने से पहले फोन अवश्य
कर लें.’
समाचारपत्र में छपा यह विज्ञापन देख कर
जसवीर सिंह ने यह बात अपने मित्र परमजीत को बता कर कहा,
‘‘क्यों न तुम्हारे भतीजों को इस के यहां दिखाया जाए,
शायद
उन की समस्या का समाधान हो ही जाए?’’
‘‘बात तो तुम ठीक कह रहे हो. जाने में कोई
हर्ज भी नहीं है.’’ परमजीत
सिंह ने कहा था.
दरअसल, उन्हें
भी यह बात जंच गई थी. उस समय हरजिंदर घर पर नहीं था. उन्होंने छोटे भतीजे चरणजीत
से बात की और उसे साथ चलने को राजी कर लिया. हालांकि वह बड़े भाई से पूछे या सलाह
किए बिना जाना नहीं चाहता था, पर
चाचा की वजह से वह इनकार भी नहीं कर सका.
24 दिसंबर, 2016 को
चरणजीत सिंह, जसवीर सिंह और परमजीत सिंह समाचारपत्र
में दिए पते के अनुसार फ्लैट-2055 नियर
बीएमसी स्कूल, चंडीगढ़ रोड,
लुधियाना
पहुंच गए.
चलने से पहले जसवीर ने फोन कर दिया था.
वहां पहुंचने पर तीनों की मुलाकात रविंदर सिंह बेदी नामक सिख युवक से हुई. वह खुद
को तंत्रमंत्र, ज्योतिष आदि का विशेषज्ञ बताता था. इन
लोगों की समस्या सुन कर उस ने इन्हें अगले दिन घर की मिट्टी ले कर आने को कहा. इस
तरह ये लोग 2-3 दिनों तक कपूरथला से लुधियाना आतेजाते
रहे.
26 दिसंबर, 2016 को
रविंदर सिंह बेदी ने चरणजीत से उस के घर में खजाना दबे होने की बात बता कर उसे
निकालने के लिए पूजा के लिए 3 लाख
रुपए का खर्च बताया.
चरणजीत का बड़ा भाई हरजिंदर गाड़ी ले कर
बाहर गया था. उस के वापस आने का कोई निश्चित दिन नहीं था. दूसरी ओर रविंदर के कहे
अनुसार,
एक
भी दिन देर करना उचित नहीं था. अकेले कोई फैसला लेने में चरणजीत को मुश्किल हो रही
थी. दूसरी ओर चाचा और जसवीर सिंह बारबार कह रहे थे कि वह चिंता न करे,
सब
ठीक हो जाएगा.
दिमाग पर ज्यादा जोर न देते हुए चरणजीत
ने रुपयों का इंतजाम किया और 28 दिसंबर,
2016 को चाचा परमजीत और जसवीर सिंह के साथ अपनी अल्टो कार से
लुधियाना रविंदर के यहां पहुंच गया. रविंदर ने कहा, ‘‘मैं
कोई भी काम गलत या कच्चा नहीं करता. हर काम लिखित और गारंटी के साथ करता हूं.
इसलिए पहले कोर्ट चल कर इस काम को करने के लिए एग्रीमेंट बनवाते हैं.’’
जसवीर, परमजीत
और चरणजीत ने बहुत कहा कि उन्हें उस पर पूरा विश्वास है,
लेकिन
रविंदर ने उन की एक नहीं सुनी. वह तीनों को लुधियाना की न्यू कोर्ट ले गया और
नोटरी के माध्यम से चरणजीत की अल्टो कार अपने नाम पर यह कह कर ट्रांसफर करवा ली कि
अभी उसे इस की जरूरत है. काम हो जाने के बाद वह उसे वापस कर देगा.
जिस एग्रीमेंट के लिए रविंदर उन्हें
कोर्ट ले गया था, वह पीछे रह गया.
कोर्ट से लौट कर चरणजीत सिंह ने 50-50 हजार
कर के 2
लाख
रुपए रविंदर बेदी को नकद दे दिए. इस के अलावा उस ने चरणजीत से हजारों रुपए के
महंगे स्टोन, पुखराज, पन्ना,
नीलम
आदि मंगवाए.
रविंदर बेदी का कहना था कि पूजा के समय
ये स्टोन पूजा वाले स्थान पर रखे जाएंगे. जिस जगह खजाना दबा होगा,
ये
स्टोन अपने आप चल कर उस जगह को बताएंगे. उस दिन के बाद चरणजीत को वे स्टोन खजाने
का पता क्या बताते, रविंदर बेदी खुद ही
गायब हो गया.
चरणजीत लुधियाना स्थित रविंदर बेदी के
घर के चक्कर लगालगा कर थक गया, उसे
न उस की कार मिली और न खजाना. उस के रुपए भी चले गए. रविंदर का कुछ अतापता नहीं था,
काफी
चक्कर लगाने के बाद एक दिन बेदी मिला भी तो सिवाय आश्वासन के उस ने कुछ नहीं दिया.
उस ने कहा, ‘‘चिंता करने की जरूरत नहीं है. शुभ
मुहूर्त आते ही वह पूजा शुरू कर के तुम्हें राजा बना देगा.’’
इस के बाद न कभी वह शुभ मुहूर्त आया और
न ही चरणजीत राजा बन सका. धीरेधीरे चरणजीत की समझ में आ गया कि रविंदर बेदी ने उसे
ठग लिया है. एक दिन वह अपने बड़े भाई हरजिंदर और 2 रिश्तेदारों
को साथ ले कर रविंदर बेदी के घर पहुंचा. उस ने अपनी कार और 2
लाख
रुपए वापस मांगे.
रविंदर ने उन्हें टका सा जवाब देते हुए
कहा,
‘‘कैसे रुपए? जो
रुपए तुम ने दिए थे, वे पूजापाठ की
सामग्री में खर्च हो गए. रही बात कार की तो उसे खुद तुम ने मुझे बेचा था. बाबाजी
की सेवा के लिए.’’
रविंदर की बात सुन कर चरणजीत सिंह के
पैरों तले से जमीन खिसक गई. दुख तो उसे 2 लाख
रुपयों का भी था, लेकिन कार की चिंता
अधिक थी,
क्योंकि
कार उस ने एचडीएफसी बैंक से फाइनैंस करवाई थी, जिस
की किस्तें वह अभी भी भर रहा था.
वह समझ गया कि खजाने का लालच दे कर
रविंदर ने उस के साथ जबरदस्त चीटिंग की है. एक बार और उस ने बेदी से निवेदन करते
हुए कहा कि उसे खजानावजाना कुछ नहीं चाहिए. वह उस की कार और 2
लाख
रुपए लौटा दे. इस के बाद वह उस के द्वारा ठगी का किसी के सामने जिक्र नहीं करेगा.
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| बाबा के ढोंग का शिकार बने चरनजीत और उसके रिश्तेदार |
चरणजीत का इतना कहना था कि रविंदर
आगबबूला हो उठा. उस ने चरणजीत को धमकी देते हुए कहा, ‘‘चुपचाप
शराफत से चले जाओ, वरना पुलिस को बुला
कर बंद करवा दूंगा.’’
‘‘कमाल है, एक
तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी. ठगा भी मैं ही गया हूं और तुम बंद भी मुझे ही कराओगे.
बदमाशी की भी हद होती है. अब मैं पुलिस के पास जाता हूं.’’
‘‘जाओ, शौक
से जाओ. पुलिस थानों में मेरी इतनी चलती है कि वहां कोई तुम्हारी बात नहीं सुनेगा.
तुम्हें पता नहीं कि मैं पुलिस को हफ्ता देता हूं.’’
सच पूछो तो उस समय रविंदर बेदी की धमकी
से चरणजीत डर गया था. उस ने घर जा कर यह बात अपने बड़े भाई और रिश्तेदारों को
बताई. तब सब ने यही सलाह दी कि उसे पुलिस के पास जाना चाहिए. लेकिन सब ने सोचा कि
एक बार और रविंदर के पास जा कर बात कर लेनी चाहिए. पर जब वे रविंदर के फ्लैट पर
पहुंचे तो उस ने कोई बात सुने बिना सभी को धमका कर भगा दिया.
पूरे 6 महीने
हो गए थे चरणजीत को रविंदर के पीछे भटकते हुए. हार कर लुधियाना के थाना डिवीजन-7
में
जा कर उस ने थानाप्रभारी सतवंत सिंह को अपने साथ रविंदर बेदी द्वारा की गई ठगी की
पूरी कहानी सुना दी. चरणजीत की पूरी बात सुन कर सतवंत सिंह ने एएसआई सुखविंदर सिंह
को बुला कर यह मामला उन के हवाले कर काररवाई करने को कहा.
सुखविंदर सिंह चरणजीत की शिकायत पर
काररवाई करते हुए सिपाही बलबीर सिंह को रविंदर बेदी के घर बुलाने भेजा,
ताकि
आमनेसामने बैठ कर बात की जा सके.
दरअसल, ऐसे
मामलों में काफी हद तक पीडि़त खुद ही दोषी होता है, जो
अंधविश्वास के झूठे मायाजाल में फंस कर अपना नुकसान कर बैठता है. सोचना चरणजीत को
चाहिए था कि उस के घर से लगभग 150 किलोमीटर
दूर बैठा आदमी यह बात कैसे जान गया कि उस के घर में खजाना दबा है. लालच और
अंधविश्वास में ही उलझ कर चरणजीत जैसे लोग रविंदर बेदी जैसे फरेबी तांत्रिकों के मायाजाल
में फंस कर उल्लू बन जाते हैं.
बहरहाल, सुखविंदर
सिंह के बुलवाने पर रविंदर बेदी थाने नहीं आया. वह घर से ही गायब हो गया. पुलिस उस
की तलाश करती रही. पुलिस अपना काम अपने तरीके से कर रही थी. कार और 2
लाख
रुपए तो चरणजीत के फंसे हुए थे, इसलिए
वह और उस के रिश्तेदार गुपचुप तरीके से रविंदर के घर की निगरानी कर रहे थे.
एक दिन रविंदर बेदी कपड़े और कुछ रुपए
लेने जैसे ही घर आया, चरणजीत और उस के
रिश्तेदारों को देख कर ठिठका. वह शहर छोड़ कर भाग जाना चाहता था. चरणजीत और उस के
रिश्तेदारों को देख कर वह गली में भागा, पर
चरणजीत और उस के रिश्तेदारों ने दौड़ा कर उसे पकड़ लिया. इस में मोहल्ले वालों ने
भी उन की मदद की. क्योंकि मोहल्ले वाले भी उस की ठगी के धंधे से अच्छी तरह परिचित
थे. सभी रविंदर को पकड़ कर थाने ले गए.
रविंदर का साथी कमल शर्मा उर्फ ड्राइवर
भी पकड़ा गया था. वह रविंदर के हर काम में उस का सहायक था. चरणजीत की कार भी
रविंदर ने उसी के नाम करवाई थी. थाने पहुंच कर रविंदर ने नौटंकी शुरू कर दी. काफी
देर तक उस की नौटंकी चलती रही.
कभी वह कहता कि अपनी तंत्रमंत्र की ताकत
से सभी को भस्म कर देगा तो कभी कहता कि वह इन के 2 लाख
रुपए किस्तों में लौटा देगा. रही बात कार की तो इसे उस ने चरणजीत से खरीदी थी,
जिस
के उस के पास बाकायदा कागज हैं.
लेकिन पुलिस ने न उस की बातों पर ध्यान
दिया और न नौटंकी पर. 16 मई,
2017 को अपराध संख्या 109/2017 पर
भादंवि की धारा 420, 406, 120बी
के तहत उस के और उस के साथी कमल शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में पेश कर
के एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया.
लेकिन रिमांड
अवधि
में पुलिस उस से ज्यादा जानकारी हासिल नहीं कर सकी. रिमांड खत्म होने पर उसे अदालत
में पेश कर जेल भेज दिया गया था. बाद में चरणजीत ने अपनी कोशिश से उस से कार वापस
ली थी.
इस मामले में चरणजीत का कहना है कि
पुलिस ने उस की बात ठीक से नहीं सुनी. लेकिन पुलिस ऐसे मामलों में कर भी क्या सकती
है?
पुलिस या कानून किसी से नहीं कहता कि
लालच में अपना सब कुछ लुटा दो. यहां तो हर कोई लूटने को बैठा है. लुटने वाले को भी
तो कुछ सोचना चाहिए.
लुटना या बचना आदमी के अपने हाथ में है.
कुदरत ने हर इंसान को बराबर दिमाग दिया है. अगर कोई फंसाने के लिए दिमाग लगाता है
तो सामने वाले को बचने के लिए अपने दिमाग का उपयोग करना चाहिए. ऐसे में अगर कोई
फंस जाता है तो वह भी कम दोषी नहीं है.
– कथा
पुलिस सूत्रों पर आधारित
*साहिल कपूर



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