ग्रंथी को उम्रकैद
गल्त सलाह का खाम्याज़ा
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| माडल चित्र सरिता |
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| दोषी ग्रंथी महिंदर सिंह |
इंस्पेक्टर विमलकांत ने ग्रंथी महेंद्र सिंह की निशानदेही पर गांव
बुलीना, दोआबा के गुरुद्वारा साहिब भगतराम के सीवर से कमलप्रीत कौर की जो
लाश बरामद की थी, वह अर्ध नंग्न थी, उसके शरीर पर मात्र
ब्रा और पैंटी ही थी. उन्होंने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर लाश को
पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा कर थाने आकर कमलप्रीत के अपहरण के दर्ज मुकदमे
को हत्या की धाराओं में तब्दील कर उसी दिन यानी 7
अप्रैल,
2014 को महेंद्र सिंह को
जेईआईसी सिमरन सिंह की अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए 2
दिनों के पुलिस रिमांड पर
ले लिया.
जुलाई, 2016 को पंजाब के जिला जालंधर की अतिरिक्त जिला
एवं सत्र न्यायाधीश डा. हरप्रीत कौर की अदालत में हत्या के एक मुकदमे का फैसला
सुनाया जाना था. चूंकि इस मुकदमे में हत्या का दोषी मुख्य ग्रंथी को माना गया था,
इसलिए उस से हमदर्दी रखने वाले पंजाब के
तमाम गुरुद्वारों के ग्रंथी, सेवादार तो आए ही थे,
आम लोग भी अदालत में जमा थे.चूंकि यह
चर्चित मामला था, इसलिए मीडिया वाले भी अदालत परिसर में जमा
थे. जिस की हत्या हुई थी, उस की बहन रंजीत कौर और मां भी अन्य घर
वालों के साथ फैसला सुनने अदालत आई थीं. पिछली तारीख पर दोनों पक्षों के वकीलों की
बहस होने के बावजूद बचाव पक्ष के वकील के अनुरोध पर 11
बजे से साढ़े 12
बजे तक एक बार फिर बहस हुई.जबकि जज डा.
हरप्रीत कौर ने पिछली तारीख पर हुई बहस के आधार पर ही इस मुकदमे का फैसला सुरक्षित
कर लिया था. फिर भी बचाव पक्ष के वकील के अनुरोध पर उन्होंने बहस का आदेश दे दिया
था,
जो करीब डेढ़ घंटे तक चली थी.लंच के बाद
ठीक सवा 2
बजे जज डा. हरप्रीत कौर ने अदालत में
प्रवेश किया तो वहां उपस्थित लोगों ने खड़े हो कर उन का स्वागत किया. इस के बाद वह
अपनी सीट पर बैठ गईं तो मुकदमे के फैसले की फाइल पेशकार ने उन के सामने रख दी.
उन्होंने इस मुकदमे में क्या फैसला सुनाया, यह जानने से पहले आइए इस पूरे मामले के
बारे में जान लें.5 अप्रैल, 2014 को जालंधर के पटेल अस्पताल की स्टाफ नर्स
रंजीत कौर ने अपनी मां परविंदर कौर के साथ जा कर थाना डिवीजन नंबर 8
के थानाप्रभारी विमलकांत से मिल कर शिकायत
दर्ज कराई थी कि उस की 30 साल की विधवा बहन कमलप्रीत कौर कल यानी 4
अप्रैल, 2014 से अपने पृथ्वीनगर स्थित मकान नंबर एनए-28
से दोपहर 12 बजे से स्कूटर के साथ गायब है. दोपहर को
उस के जेठ महेंद्र सिंह ने किसी से पैसा लेने के लिए बुलाया था. उसे महेंद्र सिंह
का 14
साल का बेटा गगनदीप सिंह बुलाने आया था.
उस के साथ वह भी गया था. देर रात तक कमलप्रीत नहीं लौटी तो उन्होंने महेंद्र सिंह
को फोन किया. उस ने बताया कि कमलप्रीत को उस ने 12 बजे बुलाया था,
लेकिन 2 बजे तक इंतजार करने के बाद भी जब वह नहीं
आई तो वह अपने काम से कहीं और चला गया. उस के बाद से कमलप्रीत का कुछ पता नहीं है.
उस के दोनों फोन भी बंद हैं.
इं विमलकांत ने रंजीत कौर की शिकायत पर
कमलप्रीत की गुमशुदगी दर्ज कर के उस की तलाश का आश्वासन दे कर उसे और उस की मां को
घर भेज दिया. इस के बाद उन्होंने एएसआई अजमेर सिंह को कमलप्रीत के बारे में पता
लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी. इस मामले में वह कुछ करते,
अगले दिन सवेरे ही रंजीत कौर थाने पहुंची
और थानाप्रभारी को दूसरी तहरीर दे कर कहा कि उस की बहन कमलप्रीत के गायब होने के
पीछे उस के जेठ महेंद्र सिह का हाथ है. उसी ने उसे कहीं छिपा दिया है या फिर उस की
हत्या कर के लाश गायब कर दी है. क्योंकि वह उस की बहन से रंजिश रखता था. रंजीत कौर
की इस तहरीर के आधार पर विमलकांत ने अपराध संख्या 55/2014 पर कमलप्रीत के अपहरण का मुकदमा महेंद्र
सिंह निवासी गुरुद्वारा भगतराम, गांव बुलीना,
दोआबा के खिलाफ दर्ज करा कर उस की तलाश
शुरू कर दी.जांच शुरू करते ही विमलकांत ने कमलप्रीत के दोनों फोन नंबरों पर फोन
किया. उन में से एक नंबर तो बंद था, पर दूसरे फोन की घंटी बज उठी. थोड़ी देर
बाद किसी ने फोन उठाया तो उन के पूछने पर उस ने अपना नाम संजीव बता कर कहा,
‘‘सर,
मैं लवली यूनिवर्सिटी का छात्र हूं. यह
फोन मुझे लुधियाना जाने वाली बस में सीट के नीचे मिला था.’’विमलकांत ने संजीव से थाने आ कर फोन जमा
कराने को कहा तो उस ने थाने आ कर फोन जमा करा दिया. इस के बाद उन्होंने इस मामले
की जांच के लिए एएसआई संजीव कुमार, अजमेर सिंह, गुरदेव सिंह,
जगदीश कुमार,
हैडकांस्टेबल सतनाम सिंह,
तरसेमलाल, मुंशी नरेंद्र मोहन और सिपाही जतिंद्र की
एक टीम बनाई.महेंद्र सिंह पुलिस के हाथ नहीं लग रहा था. उस के इस तरह गायब होने से
उस पर संदेह बढ़ता जा रहा था. वह 2 दिनों से गुरुद्वारा साहिब से गायब था.
पुलिस ने उस के बेटे गगनदीप सिंह से पूछताछ की तो उस ने बताया,
‘‘मैं अपने पिता महेंद्र
सिंह के कहने पर चाची कमलप्रीत को बुलाने गया था. मैं चाची के साथ ही था,
लेकिन जम्मू रोड पर फ्लोईओवर से पहले चाची
के फोन पर किसी का फोन आया तो फोन पर बात करने के बाद उन्होंने मुझे वहीं उतार
दिया और अकेली ही फ्लाईओवर की ओर चली गईं.’’बहरहाल, आगे की काररवाई करते हुए विमलकांत ने
कमलप्रीत का हुलिया बता कर जिले के सभी थानों से उस के बारे में पता किया. इस के
अलावा उस के फोटो सहित इश्तेहार शोरे गोगा छपवा कर शहर भर में चस्पा करवा दिए.
ग्रंथी महेंद्र सिंह की तलाश में पुलिस तो लगी
ही थी,
मुखबिर भी उस के बारे में पता कर रहे थे. काफी
मशक्कत के बाद मुखबिर की सूचना पर महेंद्र सिंह को पठानकोट चौक से गिरफ्तार कर
लिया गया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपने
भाई गुरमेल सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए कमलप्रीत कौर की हत्या कर उस की लाश
को सीवर में फेंक दिया था. महेंद्र सिंह को लगता था कि उस के भाई गुरमेल सिंह की
मौत अधिक शराब पीने से नहीं, बल्कि अपने अवैध संबंधों को छिपाने के लिए
कमलप्रीत कौर ने अपने प्रेमियों सन्नी और प्रिंस के साथ मिल कर शराब में जहर दे कर
कराई थी. उस के पास इस बात के सबूत भी हैं. मरने से पहले कमलप्रीत ने उसे लिख कर
दिया था. इस के अलावा भी महेंद्र सिंह ने कमलप्रीत कौर की हत्या की एक और कहानी
सुनाई. लेकिन उस की बातों पर ध्यान दिए बगैर विमलकांत ने उसे साथ ले जा कर उस की
निशानदेही पर कमलप्रीत कौर की लाश बरामद कर ली. उन्होंने एसीपी सतीश मल्होत्रा,
एडीसीपी (प्रथम) नरेश डोगरा को भी
घटनास्थल पर बुला लिया था.
विमलकांत ने महेंद्र सिंह की निशानदेही पर
गांव बुलीना, दोआबा
के गुरुद्वारा साहिब भगतराम के सीवर से कमलप्रीत कौर की जो लाश बरामद की थी,
वह मात्र ब्रा और पैंटी में थी. उन्होंने
घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर थाने आ कर
अपहरण के दर्ज मुकदमे को हत्या की धाराओं में तब्दील कर उसी दिन यानी 7
अप्रैल, 2014 को महेंद्र सिंह को जेईआईसी सिमरन सिंह की
अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड
अवधि के दौरान की गई पूछताछ में महेंद्र सिंह ने कमलप्रीत की हत्या की जो कहानी
बताई,
वह ईर्ष्या, आपसी रंजिश और दूसरे की संपत्ति हड़पने के
लिए की गई हत्या की कहानी थी.
महेंद्र सिंह अपने 4
भाईबहनों में सब से बड़ा था. वह शुरू से
ही काफी शरारती और लापरवाह किस्म का आदमी था. पिता सुरजीत सिंह की मौत के बाद सारे
भाईबहन अपनीअपनी शादियां कर के अलग रहने लगे थे. महेंद्र सिंह के 2
बेटे और एक बेटी थी. बेटी शादी के बाद
ससुराल चली गई थी तो बड़ा बेटा अलग रहने लगा था. उस के साथ सिर्फ छोटा बेटा गगनदीप
सिंह ही रहता था. महेंद्र सिंह की घटिया सोच और बुरी आदतों को सालों तक सहने के
बाद अंत में परेशान हो कर उस की पत्नी उसे छोड़ कर चली गई थी. इस के बाद गांव के
कुछ पुरानी जानपहचान वालों ने उस पर तरस खा कर बुलीना गांव के गुरुद्वारा भगतराम
में उसे 4
हजार रुपए महीने की गुरुद्वारा के ग्रंथी
पाठी की नौकरी दिलवा दी थी.रहना और खानापीना सब गुरुद्वारा साहिब की ओर से था. वह
चाहता तो फ्री का भोजन और बिना किराए के मकान में रह कर अपना और बेटे गगनदीप सिंह
का भविष्य संवार सकता था. लेकिन उसे तो अपने और बेटे के भविष्य से ज्यादा चिंता
अपने छोटे भाई के बढ़ते रुतबे और कमाई की थी.महेंद्र सिंह का छोटा भाई गुरमेल
भांगड़ा पार्टी में काम करता था. इस काम से उसे अच्छीखासी कमाई हो रही थी. वह
मेहनती,
ईमानदार और दूसरों की मदद करने वाला आदमी
था. इसलिए वह हर तरह से सुखी था. उस की शादी कमलप्रीत कौर से हुई थी. कमलप्रीत कौर
के पिता इकबाल सिंह बहरीन में काम करते थे. सालों पहले उन की मौत हो चुकी थी. उन
की मौत के बाद परिवार में विधवा मां परमिंदर कौर और छोटी बहन रंजीत कौर रह गई थी,
जो पटेल अस्पताल में स्टाफ नर्स थी.शादी
के बाद गुरमेल और कमलप्रीत कौर 2 बेटियों खुशप्रीत कौर और राजबीर कौर के
मातापिता बने. इस के बाद गुरमेल ने दोस्तों की मदद से लाम्मा पिंड चौक के पास राजा
भांगड़ा ग्रुप के नाम से अपनी भांगड़ा पार्टी बना ली. देखते ही देखते उस का यह काम
चल निकला और वह दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने लगा.पास में पैसे आए तो गुरमेल ने
अपना मकान भी बनवा लिया. इस के अलावा उस की मां मरने से पहले पृथ्वीनगर वाला अपना
मकान बहू कमलप्रीत के नाम कर गई थीं. जबकि महेंद्र सिंह उस मकान को हासिल करने के
लिए दिनरात मां और भाई से झगड़ा करता रहता था.इस तरह गुरमेल सिंह करोड़ों का मालिक
बन गया था, जबकि
महेंद्र सिंह के पास कुछ नहीं था. इसीलिए वह भाई की संपत्ति हथियाने की योजनाएं
बनाने लगा था. दुर्भाग्य से 23 अक्तूबर, 2013 को गुरमेल की अधिक शराब पीने से मौत हो
गई. उस की दोनों बेटियां अभी छोटी थीं. पास में पैसे थे,
इसलिए उस ने तमाम लोगों को काफी रकम उधार
दे रखी थी, जिसे
अब कोई लौटाने का नाम नहीं ले रहा था.बहरहाल, छोटे भाई की मौत के बाद उस की जायदाद
हथियाने के लिए महेंद्र सिंह को उचित मौका मिल गया था. उसे कुछ उन लोगों के बारे
में पता था, जिन्होंने
गुरमेल से रुपए उधार ले रखे थे. महेंद्र उन से रुपए वसूल करने लगा. इस के बाद वह
गुरमेल की पत्नी कमलप्रीत कौर को बदनाम करने के लिए कहने लगा कि उस के पड़ोस में
रहने वाले सन्नी और प्रिंस से अवैध संबंध हैं.अपने अवैध संबंधों को छिपाने के लिए
ही उस ने प्रिंस और सन्नी के साथ मिल कर गुरमेल को जहर मिली शराब पिला दी थी,
जिस से उस की मौत हो गई थी.
विमलकांत ने महेंद्र सिंह के इस बयान की
पुष्टि के लिए सन्नी और प्रिंस को थाने बुला कर पूछताछ की. उन्होंने बताया कि वे
कमलप्रीत को बहन मानते थे, जिस की वजह से वे उस का छोटामोटा काम कर
दिया करते थे.बहरहाल, महेंद्र सिंह द्वारा फैलाई गई अफवाह पर
किसी ने ध्यान नहीं दिया तो उसे गुस्सा आ गया और उस ने कमलप्रीत कौर की हत्या की
योजना बना डाली. उसे लगा कि उस की मौत के बाद उसे अपनी मां द्वारा दी गई जायदाद तो
मिल ही जाएगी, मृतक
गुरमेल सिंह की बेटियों के संरक्षक के तौर पर उस की भी जायदाद उसे ही मिल
जाएगी.बहरहाल, कमलप्रीत
कौर की हत्या की योजना बना कर उस ने 4 अप्रैल, 2014 की सुबह 11 बजे उसे फोन कर के कहा कि गुरमेल से एक
आदमी ने डेढ़ लाख रुपए ले रखे थे, वह रुपए देने को तैयार है. 50-50
हजार कर के वह 3
बार में रुपए दे देगा. 50
हजार वह आज ही दोपहर को देने वाला
है.कमलप्रीत को उस की बातों पर विश्वास हो गया और वह रुपयों के चक्कर में उस के
साथ जाने को तैयार हो गई. विश्वास जमाने के लिए उस ने दोपहर को उसे लाने के लिए
अपने बेटे गगनदीप सिंह को भेज दिया. दोपहर साढ़े 12 बजे कमलप्रीत कौर गगनदीप को साथ ले कर
अपनी ऐक्टिवा स्कूटर से निकली तो अपनी छोटी बहन रंजीत कौर को मैसेज कर दिया कि वह
महेंद्र सिंह के साथ रुपयों की वसूली के लिए जा रही है. कमलप्रीत कौर फ्लाईओवर तक
पहुंची थी कि महेंद्र सिंह ने फोन कर के उस से कहा कि वह गगनदीप को वहीं छोड़ कर
अकेली ही किशनपुरा आ जाए, यहीं से वह उस के साथ उस आदमी के गांव
चलेगा. महेंद्र सिंह से बात होने के बाद कमलप्रीत कौर ने गगनदीप को वहीं उतार दिया
और खुद किशनपुरा की ओर चल पड़ी. किशनपुरा मोड़ पर महेंद्र सिंह उसे इंतजार करता
मिल गया. कमलप्रीत ने उस से पूछा कि अब कहां चलना है तो उस ने कहा,
‘‘अभीअभी उस आदमी का फोन
आया था कि वह रुपए ले कर गुरुद्वारा साहिब आ रहा है. इसलिए अब गुरुद्वारे चलना है.’’महेंद्र सिंह झूठ बोल कर कमलप्रीत को
गुरुद्वारा साहिब ले आया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया. इस के बाद उस ने
गुरुद्वारा साहिब का मुख्यद्वार बंद किया और कमरे में आ कर उस की पिटाई कर के मन
की भड़ास निकाली. इस के बाद कमलप्रीत की गरदन पर तलवार रख कर पूछा,
‘‘सचसच बता,
प्रिंस और सन्नी तेरे यार हैं न?
उन्हीं के साथ मिल कर तू ने मेरे भाई की
हत्या की थी न?’’‘‘मैं
पति की हत्या कर के खुद को विधवा क्यों बनाऊंगी?’’ कमलप्रीत ने रोते हुए कहा,
‘‘आप को एक विधवा की जिंदगी
के बारे में क्या पता होगा.’’‘‘मुझे सब पता है. मरने के 2
महीने बाद गुरमेल ने मेरे सपने में आ कर
मुझे बताया था कि जब तक मैं तुम से उस की मौत का बदला नहीं ले लेता,
तब तक उस की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी.’’महेंद्र सिंह का इरादा भांप कर कमलप्रीत
कांप उठी थी. उस ने कमलप्रीत को कागज और पेन दे कर कहा,
‘‘इस पर लिखो कि तुम्हारा
सन्नी और प्रिंस से नाजायज संबंध था और उन्हीं के साथ मिल कर तुम ने गुरमेल की
हत्या की थी.’’अपनी
जान बचाने के लिए कमलप्रीत कौर ने महेंद्र ने जो कहा,
वह लिख कर नीचे हस्ताक्षर कर दिए.
दरअसल किसी वकील ने महेंद्र सिंह को सलाह
दी थी कि अगर वह किसी तरह कमलप्रीत कौर को बदचलन साबित कर दे तो उस की बेटियों और
मकान की देखभाल की जिम्मेदारी उसे मिल सकती है. इसीलिए उस ने ऐसा किया था. कमलप्रीत
ने जैसे ही उस की कही बातें कागज पर लिख कर दीं, उस ने धक्का दे कर उसे पलंग पर गिरा दिया
और उस के सीने पर सवार हो कर गला दबाने लगा. जान बचाने के लिए कमलप्रीत कौर ने
काफी संघर्ष किया, लेकिन महेंद्र सिंह के हाथों वह बच नहीं
पाई. कमलप्रीत की हत्या कर के महेंद्र सिंह ने कैंची से उस के शरीर के सारे कपड़े
काट कर अलग किए और फिर गुरुद्वारा परिसर में ही बने सीवर टैंक में उस की लाश को
डाल कर ढक्कन बंद कर दिया. इस के बाद कपड़ों को जला कर राख नजदीकी गांव जोहला के
गुरुद्वारे के पास खेतों में बिखेर दी. स्कूटर ले जाकर उस ने रेलवे स्टेशन की
पार्किंग में खड़ी कर दी और कमलप्रीत कौर के दोनों मोबाइल फोन जालंधर से लुधियाना
जा रही बस में रामामंडी के स्टैंड पर चढ़ कर बस की सीट के नीचे रख दिए और बाईपास
के पास आ कर बस से उतर गया. इतना सब कर के महेंद्र सिंह कमलप्रीत कौर के घर गया और
उस की बहन रंजीत कौर तथा दोनों बेटियों से कहा कि उस ने किसी से रुपए लेने के लिए
कमलप्रीत को बुलाया था, पता नहीं वह आई क्यों नहीं?विमलकांत ने महेंद्र सिंह की निशानदेही पर
रेलवे स्टेशन से स्कूटर और उस की चाबी, गुरुद्वारा साहिब के उस के कमरे से कैंची
बरामद कर ली थी. उन्होंने जांच पूरी कर के समय से आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर
दिया था. इस मामले की सुनवाई 2 साल 3 महीने 18 दिन चली, जिस के बाद अदालत ने 28
जुलाई, 2016 को इस केस का फैसला सुना दिया.अतिरिक्त
जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. हरप्रीत कौर ने महेंद्र सिंह को कमलप्रीत कौर की
हत्या,
उस की लाश खुर्दबुर्द करने और साक्ष्य
मिटाने का दोषी मानते हुए सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई,
साथ ही 20 हजार रुपए जुरमाना भी लगाया. जुरमाना न
अदा करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा. इस तरह महेंद्र सिंह को उस के किए की
सजा मिल गई.
( कथा पुलिस सूत्रों पर
एवम् अदालती करवाई पर आधारित )
- हरमिन्दर खोजी





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