केवल
सिंह का एक ही बेटा था जगदीप सिंह. उसे बचपन से ही पहलवानी का शौक था. उन्होंने भी
उसे कभी मना नहीं किया. जगदीप के दो ही काम थे,
पढ़ना और पहलवानी करना.
युवा होते-होते वह अच्छा-खासा पहलवान बन गया. जिला स्तर पर कुश्तियां जीतने के बाद
उस ने राज्य स्तर के पहलवानों को पछाड़ कर अपने नाम का डंका बजाया. जगदीप शादी
लायक हुआ तो केवल सिंह ने अपने एक दोस्त की सुंदर बेटी परमजीत कौर से उस की शादी
कर दी. उसी बीच पंजाब में नशे की ऐसी लहर चली कि पंजाब, उड़ता पंजाब के नाम से मशहूर
हो गया. घर-घर नशीली चीजों का उपयोग होने लगा. जगदीप भी इस का शिकार हो गया. फिर
तो वह पहलवानी ही नहीं, घर-परिवार को भी भूल कर नशे का गुलाम बन
गया. और नशा पूर्ति की खातिर उसने एक दिन कुछ ऐसा कर दिया जिसकी किसी ने कल्पना तक
नहीं की थी.
केवल सिंह खेत की मेड़ पर
बैठे सुस्ता रहे थे, तभी उन के नजदीक आ कर एक लंबी सी कार
रुकी. कार से 3 लोग
उतरे. उन में एक उन का बेटा जगदीप भी था. उस के साथ आए लोगों ने केवल सिंह के
नजदीक आ कर नमस्कार किया तो नमस्कार कर के केवल सिंह ने उन लोगों को सवालिया नजरों
से देखा.
दोनों कुछ कहते,
उस के पहले ही उन दोनों का परिचय कराते
हुए जगदीप सिंह ने कहा, ‘‘बापूजी, यह सिद्दू साहब हैं. इन्हें हमारी जमीन बहुत पसंद है. यह
हमें बाजार भाव से कई गुना ज्यादा दाम दे कर हमारी जमीन खरीदना चाहते हैं.’’
जगदीप सिंह की बातें सुन
कर केवल सिंह की त्यौरियां चढ़ गईं. उन्होंने बेटे को एक भद्दी सी गाली देते हुए
कहा,
‘‘तुझ से किस ने कहा कि
मेरी यह जमीन बिक रही है. जब देखो तब तू किसी न किसी को परेशान करने के लिए पकड़
लाता है. जब एक बार कह दिया कि यह हमारे पुरखों की जमीन है,
मैं इसे जीतेजी नहीं बेच सकता तो तू क्यों
लोगों को परेशान करने के लिए यहाँ लाता है. अगर आज के बाद फिर कभी किसी को ले कर
आया तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’
इस के बाद बाप-बेटे में
बहस होने लगी. बाप-बेटे को झगड़ा करते देख जमीन का सौदा करने आए लोग चुपचाप वहां
से खिसक गए. बाप-बेटे में जमीन को ले कर हुआ यह झगड़ा कोई नया नहीं था.
पंजाब के जिला बरनाला के
थाना भदौड़ के गांव मुजूक के रहने वाले पाल सिंह के 3
बेटे थे, केवल सिंह, सुखमिंदर सिंह और मंजीत सिंह. पाल सिंह ने
तीनों बेटों की शादियां कर के जीतेजी जमीन को उन में बांट दिया था. तीनों भाई गांव
में अलगअलग मकान बना कर अपनेअपने परिवारों के साथ रह रहे थे. तीनों भाई रहते भले
अलग थे,
लेकिन उन में और उन के परिवारों में काफी
मेलजोल था.
केवल सिंह का एक ही बेटा
था जगदीप सिंह. उसे बचपन से ही पहलवानी का शौक था. उन्होंने भी उसे कभी मना नहीं
किया. जगदीप के दो ही काम थे, पढ़ना और पहलवानी करना. युवा होते-होते वह
अच्छा-खासा पहलवान बन गया. जिला स्तर पर कुश्तियां जीतने के बाद उस ने राज्य स्तर
के पहलवानों को पछाड़ कर अपने नाम का डंका बजाया.
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| अभागा बाप केवल सिंह |
जगदीप ऐसा नशा करता था,
जिस में एक ही बार में 4-5
हजार रुपए खर्च हो जाते थे. जबकि उस के
पास इतने रुपए नहीं होते थे. लेकिन नशा तो नशा है, उसे कैसे भी करना था. कुछ दिनों तक तो वह
यार-दोस्तों और रिश्तेदारों से झूठ बोल कर रुपए उधार ले कर अपना काम चलाता रहा.
लेकिन इस तरह कब तक चलता. लोग अपने-अपने पैसे मांगने लगे तो वह मुसीबत में फंस
गया.
केवल सिंह ने जब अपने
बेटे में बदलाव देखा तो उन्हें चिंता हुई. हर समय खुश रह कर हंसने हंसाने वाला
जगदीप उदास मुंह लटकाए बैठा रहता था. उन्होंने उस की उदासी का कारण पूछते हुए कहा,
‘‘क्या बात है बेटा,
आजकल पहलवानी भी बंद है और हर समय चेहरे
पर मुर्दानगी छाई रहती है?’’
पिता के इस सवाल पर नशे
को ले कर परेशान जगदीप के दिमाग में तुरंत उपाय आ गया. पिता को बेवकूफ बनाते हुए
उस ने रोआंसा हो कर कहा, ‘‘बापूजी, बात ही ऐसी है. उदास न होऊं तो क्या
खुशियां मनाऊं.’’
‘‘क्यों,
क्या बात है?’’
‘‘बापूजी,
नैशनल लेवल पर कुश्ती लड़ने के लिए मैट
चाहिए,
वह मेरे पास नहीं है.’’
‘‘तो
उस के लिए क्या करना होगा?’’
‘‘करना
क्या होगा, खरीदना
पड़ेगा,
जिस के लिए 8-10
लाख रुपए की जरूरत पड़ेगी.’’
‘‘तुम्हें
इस की चिंता करने की जरूरत नहीं है.’’ केवल सिंह ने बेटे की बात बीच में ही काट
कर कहा,
‘‘तू तैयारी शुरू कर,
पैसे की व्यवस्था मैं करता हूं.’’
जगदीप का तीर सही निशाने
पर लगा. भावुकता में केवल सिंह ने वादा तो कर लिया, पर इतने रुपयों की व्यवस्था करना उन के
लिए आसान नहीं था. फिर भी उन्होंने कुछ घर से, कुछ रिश्तेदारों से तो कुछ जमीन गिरवी रख
कर रुपयों का इंतजाम कर दिया.
10 लाख
रुपए हाथ में आते ही जगदीप की तो मानो लौटरी लग गई. उस ने पिता से मिले रुपए नशे
पर उड़ाने शुरू कर दिए. कुछ ही दिनों में सारे रुपए नशे पर फूंक कर उस ने तमाशा
देख लिया. केवल सिंह जब भी मैट के लिए पूछते, वह कहता कि और्डर दे दिया है,
जल्दी ही आ जाएगा.
यह बहाना कब तक चलता.
केवल सिंह अनपढ़ जरूर थे, लेकिन नासमझ नहीं थे. जल्दी ही उन्हें
असलियत का पता चल गया. बेटे को नशे में डूबा देख कर वह समझ गए कि जगदीप झूठ बोल
रहा है. मैट के बहाने उस ने जो रुपए लिए हैं, नशे में उड़ा दिए हैं. फिर तो घर वालों को
ही नहीं,
लगभग सभी को पता चल गया कि जगदीप पहलवान
नशे का आदी हो गया है. अब लोग उस से दूरियां बनाने लगे.
जगदीप के लिए अब रुपए का
इंतजाम करना मुश्किल हो गया था. फिर तो नशा न मिलने की वजह से वह गंभीर रूप से
बीमार हो गया. केवल सिंह ने लगभग 2 लाख रुपए खर्च कर के उस का इलाज कराया.
ठीक होने के बाद एक बार फिर उस ने कारोबार के नाम पर पिता से 8-10
लाख रुपए झटक लिए. इन रुपयों को भी उस ने
नशे पर उड़ा दिए.
इस के बाद वह पिता की
जमीन बिकवाने के चक्कर में पड़ गया कि वह यहां रह कर नशा नहीं छोड़ सकता,
इसलिए उसे विदेश भेजा जाए,
ताकि वहां जा कर वह नशा छोड़ कर कोई
कामधंधा कर सके. लेकिन 2 बार धोखा खा चुके केवल सिंह को अब जगदीप
की बातों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया था.
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| भूसे वाले कमरे से लाश बरामद करती पुलिस |
3 फरवरी,
2017 को इसी बात को ले कर केवल
सिंह और जगदीप के बीच जम कर झगड़ा हुआ. परमजीत कौर ने भी ससुर पर दबाव डालते हुए
कहा,
‘‘बापूजी,
यह जमीन क्या अपनी छाती पर रख कर ले जाओगे?
बेटे की जिंदगी का सवाल है,
बेच क्यों नहीं देते थोड़ी जमीन?’’
‘‘तू
जमीन की बात कर रही है. मैं मर जाऊंगा, लेकिन इस झूठे धोखेबाज नशेड़ी को एक फूटी
कौड़ी नहीं दूंगा.’’ केवल सिंह ने गुस्से में कहा और घर से
निकल गए.
उस समय केवल सिंह घर से
गए तो फिर लौट कर नहीं आए. इस ओर न जगदीप ने ध्यान दिया,
न उस की पत्नी परमजीत कौर ने. क्योंकि ऐसा
अकसर होता था. केवल सिंह जब भी नाराज होते थे, घर छोड़ कर अपने दोनों भाइयों में से किसी
एक के यहां चले जाते थे. लेकिन इस बार वह न भाइयों के घर गए थे,
न खेतों पर.
जब अगले दिन भी केवल सिंह
का कुछ पता नहीं चला तो जगदीप उन की तलाश में निकला. इधर-उधर तलाश करता हुआ वह शाम
को चाचा सुखमिंदर सिंह के घर पहुंचा. उस ने उन से पिता के लापता होने की बात बता
कर मां को घर भेजने को कहा. क्योंकि बाप-बेटों के झगड़ों से तंग आ कर उन दिनों
कुलवंत कौर सुखमिंदर सिंह के घर पर ही थीं.
जगदीप की बात सुन कर
सुखमिंदर सिंह ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘तू चिंता मत कर पुत्तर,
सब ठीक हो जाएगा. तू घर चल,
मैं तेरी मां को ले कर आता हूं.’’
सुखमिंदर सिंह उसी समय
कुलवंत कौर को उन के घर छोड़ गए. इस के बाद वह जगदीप को साथ ले कर केवल सिंह की
तलाश में निकल पड़े. काफी भागदौड़ के बाद भी जब केवल सिंह का कुछ पता नहीं चला तो
सुखमिंदर सिंह ने 5 फरवरी को उन की गुमशुदगी थाना भदौड़ में
दर्ज करा दी.
केवल सिंह की गिनती गांव
के संपन्न किसानों में होती थी. वह सज्जन व्यक्ति थे,
इसलिए गांव के सरपंच गोरा सिंह ने गांव
वालों के साथ मिल कर केवल सिंह को जल्द से जल्द ढूंढने का पुलिस पर दबाव बनाया.
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| प्रतीक चित्र |
6 फरवरी,
2017 की सुबह सुखमिंदर सिंह को
गांव वालों से पता चला कि जगदीप भूसा ले जाने के लिए ट्रौली खोज रहा है,
क्योंकि उस की ट्रौली खराब है. तीनों
भाइयों के मकान भले ही अलग थे, पर सभी की जमीन की फसलों का भूसा केवल
सिंह के घर से लगे एक बड़े कमरे में रखा जाता था. गांव वालों की बात सुन कर
सुखमिंदर को लगा कि जगदीप नशे के जुगाड़ में भूसा बेच रहा होगा. उन्होंने सोचा कि
भूसा नहीं रहेगा तो जानवरों को क्या खिलाया जाएगा.
जगदीप भूसा बेचे,
उस के पहले ही वह जानवरों के लिए कुछ
दिनों का भूसा लेने के लिए जगदीप के घर जा पहुंचे. वह भूसा वाले हालनुमा कमरे से
भूसा भरने लगे. अभी वह 3-4 गट्ठर भूसा ही निकाल पाए थे कि अचानक भूसे
के ढेर से हाथ में एक इंसानी पैर आ गया.
उन्होंने बेटे और नौकर की
मदद से वहां का भूसा हटा कर देखा तो उन्हें वहां एक लाश दबी नजर आई,
जिस का एक पैर बाहर निकला था. लाश देख कर
उन की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं. उन्होंने तुरंत ऊंची आवाज में अपने भतीजे
जगदीप को बुलाया. जगदीप आया तो उन्होंने पूछा, ‘‘यह क्या है?’’
जगदीप भी वहां का दृश्य
देख कर हैरान था. उस ने असमंजस की स्थिति में कहा, ‘‘चाचाजी, यह तो किसी की लाश है. आप रुकें,
मैं फावड़ा ले कर आता हूं.’’
यह कह कर जगदीप भूसे वाले
कमरे से बाहर चला गया. सुखमिंदर उस लाश को देख कर बारबार यही सोच रहे थे कि पता
नहीं यह किस की लाश है, किस ने इसे यहां दबाया है?
किसी अनहोनी की आशंका से उन का दिल घबरा
रहा था. काफी देर हो गई, जगदीप फावड़ा ले कर नहीं लौटा तो वह बाहर
आए. घर के दरवाजे खुले थे. न वहां पर जगदीप था न उस की पत्नी परमजीत कौर.
भाभी कुलवंत कौर एक कमरे
में बैठी पाठ कर रही थीं. पलभर में ही सुखमिंदर सिंह को अपने भाई केवल सिंह की
गुमशुदगी का रहस्य समझ में आ गया. समझदारी दिखाते हुए उन्होंने बिना एक पल गंवाए
अपनी मोटरसाइकिल उठाई और सीधे थाना भदौड़ के थानाप्रभारी के पास पहुंचे. उन्हें
पूरी बात बताई तो मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने केवल इतना पूछा,
‘‘जगदीप को गए कितना समय
हुआ होगा?’’
‘‘
जी लगभग आधा घंटा.’’
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| प्रतीक चित्र |
उन का अनुमान ठीक निकला.
जगदीप और परमजीत कौर भागने के लिए एक बस में सवार हो चुके थे. सुरेंद्र सिंह ने
उन्हें बस से उतारा और थाने ले आए. इस के बाद वह
गांव मुजूक केवल सिंह के घर पहुंचे और
अपने सामने उस जगह की खुदाई करवाई.
बरामद लाश देख कर सभी
हैरान थे. लाश केवल सिंह की थी, जिसे बड़ी बेरहमी से मार कर भूसे वाले
कमरे में दफना दिया गया था. सुरेंद्र सिंह ने लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम
के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और थाने लौट कर दर्ज गुमशुदगी के स्थान पर हत्या
का मुकदमा दर्ज करा दिया. इसी के साथ ही जगदीप और परमजीत से पूछताछ शुरू कर दी.
जगदीप और परमजीत कौर ने
केवल सिंह की हत्या का अपराध तो स्वीकार कर लिया, पर उन्होंने हत्या क्यों की,
इस के पीछे बड़ी विचित्र कहानी बताई.
दरअसल,
नशा एक ऐसी घातक बीमारी और कलंक है,
जिस के सेवन से आदमी की बुद्धि ही नहीं,
जमीर भी भ्रष्ट हो जाता है. आदमी इतना
खुदगर्ज हो जाता है कि अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए या बचाव के लिए कुछ भी कर सकता
है.
जगदीप और परमजीत कौर ने
केवल सिंह की हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने यह हत्या इसलिए
की थी,
क्योंकि केवल सिंह अपनी बहू परमजीत कौर पर
बुरी नजर रखते थे. उस ने अकेले में कई बार परमजीत से छेड़छाड़ की थी.
जगदीप ने आगे बताया कि
घटना वाले दिन यानी 3 फरवरी को वह घर पर नहीं था. शाम को जब वह
घर आया तो उस ने देखा कि उस के पिता केवल सिंह उस की पत्नी को दबोचे बैड पर लेटे
हैं और परमजीत बचाव के लिए चिल्ला रही है.
यह देख कर उसे गुस्सा आ
गया और उस ने गंडासे से पिता की हत्या कर दी. लेकिन उस की इस कहानी पर किसी को
विश्वास नहीं हुआ.
जब पति-पत्नी पर सख्ती की
गई तो उन्होंने सच्चाई उगल दी. जगदीप ने इस बार बताया कि नशे की पूर्ति के लिए वह
जमीन बेचना चाहता था. जबकि पिता इस के लिए तैयार नहीं थे. इसीलिए उस ने पिता की
हत्या कर दी. हत्या कर लाश उस ने भूसे वाले कमरे में इसलिए दबा दी थी कि मौका
मिलने पर वह उसे भूसे के बीच छिपा कर कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगा देगा. लेकिन वह
अपने इरादे में कामयाब होता, उस के पहले ही भूसे के चक्कर में उस की
पोल खुल गई.
7 फरवरी,
2017 को पुलिस ने पिता के
हत्यारे जगदीप सिंह और उस की पत्नी को सक्षम अदालत में पेश कर के 2
दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया.
रिमांड अवधि में उन की
निशानदेही पर हत्या करने वाला हथियार गंडासा व कस्सी बरामद कर ली. रिमांड अवधि
समाप्त होने पर दोनों को पुन: अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में जिला जेल
भेज दिया गया.
– पुलिस सूत्रों पर आधारित
-साहिल कपूर






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