*तांत्रिकों के मायाजाल से रहें सावधान*
विज्ञापन छपवाने वाले तथाकथित तांत्रिक
खुद को बाबा हुसैनजी, बाबा बंगाली, बाबा मिर्जा, बाबा अमित सूफी आदि बताते हुए चंद
घंटों में समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं.
सौतन से छुटकारा पाएं,
पति या प्रेमी को वश में करें. गृहक्लेश, व्यापार
में घाटा, संतान न होना आदि समस्याओं से समाधान’ के स्टीकर सार्वजनिक स्थानों, ट्रेनों, बसों आदि में चिपके दिख जाते हैं. इतना ही नहीं, इस
तरह के विज्ञापन विभिन्न समाचारपत्रों में भी छपते रहते हैं.
विज्ञापन छपवाने वाले तथाकथित तांत्रिक
खुद को बाबा हुसैनजी, बाबा बंगाली, बाबा मिर्जा, बाबा अमित सूफी आदि बताते हुए चंद
घंटों में समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं. कुछ तो खुद को गोल्ड मैडलिस्ट,
वशीकरण स्पैशलिस्ट बताते हैं. इंसानी जीवन की कोई ऐसी समस्या नहीं
होगी, जिस के समाधान का दावा ये तांत्रिक न करते हों.औरतों का यौन शोषण इन की पहली प्रर्थिमिकता होती है.
गाजियाबाद के विजयनगर का रहने वाला मिथुन
सिंह पेशे से ट्रक ड्राइवर था. एक दिन वह ट्रक ले कर मेरठ जा रहा था तो गाजियाबाद
में ही एक लालबत्ती पर उसे अपना ट्रक रोकना पड़ा. लालबत्ती होते ही चौराहे पर
सामान बेचने वाले वहां रुकी गाडि़यों के पास जा-जा कर सामान बेचते हैं.
उन्हीं में 18-19
साल का एक लड़का वहां रुकी हर गाड़ी में विजिटिंग कार्ड फेंक रहा
था. जिस कार के खिड़कियों के शीशे बंद मिलते, वह विजिटिंग
कार्ड कार के आगे के वाइपर में फंसा देता. लड़का अपना काम बड़ी फुरती से कर रहा
था. ट्रक में बैठा मिथुन सिंह उसे देख रहा था.
वह लड़का मिथुन के ट्रक के पास आया और एक
विजिटिंग कार्ड उस की केबिन में फेंक कर चला गया. उसी वक्त हरी बत्ती जल गई तो
मिथुन ने अपना ट्रक आगे बढ़ा दिया. इस से पहले उस ने उस लड़के द्वारा फेंका गया
विजिटिंग कार्ड उठा कर अपनी जेब में रख लिया था.
करीब घंटे भर बाद मिथुन ने कुछ खानेपीने
के लिए ट्रक एक ढाबे पर रोका. खाने के लिए आता, उस के
पहले वह शर्ट की जेब से वह विजिटिंग कार्ड निकाल कर देखा. वह कार्ड बाबा आमिल सूफी
नाम के किसी तांत्रिक का था. उस में उस ने हर तरह की समस्या का समाधान करने की बात
कही थी.
विजिटिंग कार्ड पढ़ कर कुछ देर तक मिथुन
सोचता रहा. उस की भी एक समस्या थी, जिस की
वजह से वह काफी परेशान था. दरअसल, मिथुन की अपनी पत्नी से पट
नहीं रही थी. कई ऐसी वजहें थीं, जिन की वजह से पतिपत्नी में
मतभेद थे. मिथुन थोड़ा जिद्दी स्वभाव का था, इसलिए पत्नी की
हर बात को गंभीरता से नहीं लेता था.
मिथुन समझ नहीं पा रहा था कि उस के घर में
शांति कैसे आए? विजिटिंग कार्ड पढ़ कर उसे लगा कि
बाबा आमिल सूफी उस की समस्या का समाधान कर देंगे. कार्ड में बाबा के मिलने का कोई
पता तो नहीं था, केवल 2 मोबाइल नंबर 844xxxxx और 985xxxxx लिखे थे.
मिथुन ने उसी समय अपने मोबाइल से कार्ड पर
लिखा एक नंबर मिला दिया. दूसरी ओर से किसी ने फोन रिसीव कर के कहा,
‘‘हैलो कौन?’’
‘‘मैं गाजियाबाद से मिथुन सिंह बोल रहा
हूं. मुझे बाबा आमिल सूफीजी से बात करनी थी.’’ मिथुन ने कहा.
‘‘देखिए, बाबा तो
अभी-अभी बाहर से आए हैं. वह 2-3 भक्तों की समस्या का समाधान
करने में लगे हैं. मैं रिसैप्शन से बोल रहा हूं. आप की क्या समस्या है, मुझे बता दीजिए.’’ दूसरी तरफ से कहा गया.
मिथुन ने रिसैप्शनिस्ट को बताया कि उस का
पत्नी से अकसर झगड़ा होता रहता है, जिस की
वजह से घर में अकसर कलह बनी रहती है. वह घर में शांति चाहता है.
‘‘बाबा आप की समस्या का समाधान अवश्य कर
देंगे. मैं उन से आप की बात करा दूंगा, पर इस के लिए पहले आप
को रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए 251 रुपए आप
को बैंक एकाउंट में जमा कराने होंगे.’’ उस व्यक्ति ने कहा.
‘‘अभी तो मैं कहीं जा रहा हूं, आप एकाउंट नंबर दे दीजिए, जब भी समय मिलेगा, मैं पैसे जमा करा दूंगा.’’ मिथुन ने कहा.
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| प्रतीक चित्र |
मोबाइल पर चल रही बातचीत खत्म होते ही
मिथुन के मोबाइल पर एक मैसेज आ गया, जिस में
बैंक का खाता नंबर दिया हुआ था. वहां आसपास कोई बैंक भी नहीं था और न ही उस समय उस
के पास पैसे जमा करने का समय था, इसलिए ढाबे से ट्रक ले कर
आगे बढ़ गया.
मेरठ से लौटने के बाद उस ने उस खाते में 251
रुपए रजिस्ट्रेशन के जमा करा दिए. इस के बाद उस ने तांत्रिक के फोन
नंबर पर फोन कर के पैसे जमा कराने की जानकारी दी. तब रिसैप्शन पर बैठे व्यक्ति ने
बाबा से बात कराने के लिए 2 घंटे बाद का समय दे दिया.
2 घंटे बाद मिथुन ने बाबा आमिल सूफी को
अपने गृहक्लेश की सारी बात बता कर कहा, ‘‘बाबा, काफी दिनों से पत्नी से मेरी बन नहीं रही है.’’
उस की बात सुन कर बाबा ने कहा,
‘‘तुम्हारी इस समस्या का समाधान हो जाएगा, पर
इस के लिए पूजा करनी पड़ेगी. उस पूजा में करीब 5200 रुपए का
खर्च आएगा.’’
मिथुन को बाबा की बातों पर भरोसा था,
इसलिए उस ने पूछा, ‘‘बाबा, पूजा हमारे घर में करेंगे या फिर कहीं और?’’
‘‘हम पूजा अपने यहां ही करेंगे. यहीं से
उस का असर हो जाएगा, तुम उसे खुद महसूस करोगे. जितनी जल्दी
तुम पैसे भेज दोगे, उतनी जल्दी हम पूजा शुरू कर देंगे.’’
बाबा ने कहा.
‘‘बाबा, मैं पैसे
अभी भेज देता हूं. उसी एकाउंट में जमा करा दूं, जिस में पहले
जमा कराए थे?’’ मिथुन ने पूछा.
‘‘नहीं, उस में
नहीं. तुम खाता नंबर 34xxxx में जमा करा दो.’’ बाबा ने कहा.
मिथुन ने उसी दिन बाबा द्वारा दिए गए
एकाउंट नंबर में 5200 रुपए जमा करा दिए और
फोन कर के उन्हें बता दिया. पैसे जमा कराने के बाद मिथुन को तसल्ली हो गई कि अब उस
के घर के सारे क्लेश दूर हो जाएंगे. पर 15 दिन बाद भी घर के
माहौल में कोई फर्क नहीं पड़ा. पत्नी का व्यवहार पहले की तरह ही रहा तो मिथुन ने
बाबा आमिल सूफी से इस बारे में बात की.
बाबा आमिल सूफी ने कहा,
‘‘दरअसल, तुम्हारी समस्या बड़ी विकट है. इस का
निवारण अब बड़ी पूजा से होगा. एक पूजा और करनी पड़ेगी. उस पूजा का खर्च 5100
रुपए आएगा. तुम्हारे नाम की एक पूजा हो ही चुकी है. यह पूजा और करा
लोगे तो जल्द लाभ मिल सकता है.’’
मिथुन और पैसे जमा करने को तैयार हो गया.
तब बाबा ने उसे पहले वाले एकाउंट नंबर में 5100 रुपए
जमा कराने को कहा. मिथुन ने फटाफट रुपए जमा करा दिए.
ये पैसे जमा कराने के महीने भर बाद भी
मिथुन के हालात जस के तस रहे. न तो पत्नी के स्वभाव में कोई अंतर आया और न ही उस
के घर की कलह दूर हुई. मिथुन ने बाबा से फिर बात की. उस ने कहा कि अभी तक की गई
पूजा से घर में कोई फर्क नहीं पड़ा है. पत्नी का स्वभाव आज भी पहले की ही तरह है.
चूंकि वह बाबा द्वारा बताए गए खातों में 10 हजार
से ज्यादा रुपए जमा कर चुका था, इसलिए उस की बातों में कुछ
गुस्सा भी था.
बाबा ने उसे शांति से समझा कर गुस्सा न
करने को कहा. बाबा ने उस से कहा कि 4 रातें
जागजाग कर उस ने खुद पूजा की है. पूजा का परिणाम कोई इंजेक्शन की तरह तो होता नहीं
है, धीरे-धीरे होगा. और यदि जल्दी परिणाम चाहते हो तो महाकाल
की पूजा करानी होगी. इस में तुम्हारा 5100 रुपए का खर्च और
आएगा. आज अमावस्या है. पैसे आज ही जमा करा दोगे तो आज रात ही पूजा शुरू कर दूंगा.
मिथुन सिंह बाबा को 10
हजार रुपए से ज्यादा दे चुका था और फायदा रत्ती भर नहीं हुआ था. अगर
उसे इस का थोड़ा सा भी लाभ मिल गया होता तो वह फिर से पैसे जमा करने की बात एक बार
सोचता. उस ने पैसे जमा न करने की बात तो नहीं कही, पर अभी
पास में पैसे न होने का बहाना कर दिया.
मिथुन को लगा कि बाबा आमिल सूफी ने समस्या
दूर करने के नाम पर उस से ठगी की है. वह एक बार बाबा से मिल कर यह देखना चाहता था
कि वह बाबा है भी या नहीं? इसलिए उस ने फिर से बाबा
को फोन किया. तभी बाबा ने उस से 5100 रुपए जमा कराने की बात
कही.
‘‘बाबा, मैं आप के
दर्शन करना चाहता हूं. पैसे मैं उसी समय नकद दे दूंगा. आप बस अपना पता बता दीजिए.’’
मिथुन ने कहा.
‘‘हम से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि हमारा कोई निश्चित ठिकाना नहीं है. हम इधरउधर आतेजाते रहते हैं.
आप का काम जब घर बैठे हो रहा है तो मिलने की क्या जरूरत है?’’ बाबा ने कहा.
‘‘बाबा, आप के
दर्शन करने की मेरी अभिलाषा है.’’ मिथुन ने कहा तो बाबा ने
फोन काट दिया. इस के बाद उस ने बाबा के नंबर पर कई बार फोन किया, पर बात नहीं हो सकी. बाबा ने शायद उस का नंबर रिजेक्ट लिस्ट में डाल दिया
था.
मिथुन ने अगले दिन भी बाबा से बात करने की
कोशिश की,
लेकिन उस के किसी भी नंबर पर बात नहीं हो सकी. अब उसे पूरा विश्वास
हो गया कि उस के साथ ठगी हुई है. उस ने इस बात की शिकायत गाजियाबाद के एसपी से की.
मिथुन ने तांत्रिक बाबा आमिल सूफी के जिन मोबाइल नंबरों पर बात की थी, एसपी ने उन नंबरों की जांच सर्विलांस टीम से कराई.
इस जांच में पता चला कि वे फोन नंबर
साहिबाबाद थाने के अंतर्गत अर्थला में एक्टिव हैं. लिहाजा मिथुन सिंह की शिकायत पर
15
मई, 2017 को थाना साहिबाबाद में अज्ञात लोगों
के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 417 के तहत मुकदमा दर्ज कर
लिया गया.
थानाप्रभारी सुधीर कुमार त्यागी के
नेतृत्व में एक टीम बनाई गई, जिस में एसएसआई
अखिलेश गौड़, एसआई मनोज कुमार, हैडकांस्टेबल
छीतर सिंह, कांस्टेबल मंगत सिंह, पंकज
शर्मा, सुनील कुमार, विपिन सिंह,
नारायण राय आदि को शामिल किया गया.
तथाकथित तांत्रिक के फोन नंबरों की जांच
में उन की लोकेशन अर्थला की मिल रही थी. अर्थला थाने से पूरब दिशा में करीब 3
किलोमीटर दूर था. उसी लोकेशन के सहारे पुलिस ने एक मकान में छापा
मारा तो ग्राउंड फ्लोर पर एक औफिस बना मिला, जिस में 8
युवक बैठे थे.
औफिस का जो बौस था,
उस की मेज पर 20 मोबाइल फोन रखे थे. पुलिस ने
उन युवकों से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि वह तांत्रिक दिलशाद का कालसेंटर
था. औफिस की तलाशी में तथाकथित तांत्रिक के तमाम विजिटिंग कार्ड, स्टीकर आदि मिले. इस के अलावा दिलशाद की केबिन से 6 लाख
72 हजार 3 सौ रुपए नकद बरामद हुए.
पुलिस की मौजूदगी में ही वहां रखे मोबाइल फोनों
पर कई समस्याग्रस्त लोगों के फोन आए. पुलिस ने फोन रिसीव किए तो फोन करने वाले लोग
तांत्रिक से अपनी समस्या का निदान पूछ रहे थे. पुलिस सभी को थाने ले आई.
थाने में उन सभी से पूछताछ की गई तो पता
चला कि दिलशाद योजनाबद्ध तरीके से कालसैंटर चला कर उस के जरिए पूरे देश में ठगी का
अपना धंधा चला रहा था.
मिथुन से जो 10
हजार रुपए से ज्यादा की ठगी की गई थी, वह
दिलशाद और उस के साथियों ने ही की थी. इसी कालसैंटर के जरिए लोगों को बेवकूफ बना
कर ये लोग महीने में लगभग 20 लाख रुपए की ठगी कर रहे थे.
आखिर एक मामूली सा पढ़ालिखा दिलशाद तथाकथित तांत्रिक कैसे बना और उस ने पूरे देश
में अपना नेटवर्क कैसे तैयार किया? इस की एक दिलचस्प कहानी
है.
गाजियाबाद के थाना साहिबाबाद के अंतर्गत
आती है अर्थला कालोनी. दिलशाद इसी कालोनी के रहने वाली अल्लानूर का बेटा था. वह
जूनियर हाईस्कूल से आगे नहीं पढ़ सका तो पिता ने उसे एक दुकान पर लगवा दिया. साल,
दो साल नौकरी करने के बाद वह घर बैठ गया.
वह पढ़ालिखा भले ज्यादा नहीं था,
लेकिन खूब पैसे कमाने के सपने देखता था, इसलिए
उसे दुकान पर काम करना पसंद नहीं आया. दिलशाद के घर बैठने पर उस के पिता को जो
पैसे मिलते थे, वे बंद हो गए. इसलिए उन्हें उस का घर बैठना
पसंद नहीं आया.
उन्होंने किसी से कह कर उस की नौकरी एक फैक्ट्री
में लगवा दी. वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, पर
ख्वाब अमीरों के देखता था. वह चाहता था कि उस के पास भी सभी तरह की सुखसुविधाएं
हों. इन्हीं ख्वाबों की वजह से फैक्ट्री में भी वह ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका.
फैक्ट्री की नौकरी छोड़ कर वह अपने
यारदोस्तों के साथ घूमता रहता. उस का खाली घूमना उस के पिता को अच्छा नहीं लगा. वह
बारबार उसे कोई न कोई काम करने को कहते. काम तो दिलशाद भी करना चाहता था,
पर उसे उस के मन के मुताबिक काम नहीं मिल रहा था.
उसी दौरान वह अपने एक परिचित के साथ मेरठ
चला गया. वह परिचित मेरठ में तथाकथित तांत्रिक बन कर अपना धंधा चला रहा था. दिलशाद
उस के औफिस में बैठने लगा. वहां पर दिलशाद का मन लगने लगा. वह बड़े गौर से देखता
था कि ग्राहक से कैसे बात की जाती है और किस तरह से उन की जेब से पैसा निकाला जाता
है. एकएक कर के सारा काम वह एक साल के अंदर सीख गया.
अब वह खुद का सैंटर चलाना चाहता था,
ताकि मोटी कमाई की जा सके. घर लौट कर दिलशाद ने सब से पहले विजिटिंग
कार्ड्स छपवाए. विजिटिंग कार्ड में उस ने सभी तरह की समस्याओं का समाधान करने का
दावा करते हुए अपने 2 मोबाइल नंबर लिख दिए और खुद को बाबा
आमिल सूफी बताया. कार्ड में पता नहीं लिखा था, केवल फोन पर
ही समस्या बताने को कहा गया था.
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| प्रतीक चित्र |
आजकल ज्यादातर लोग किसी न किसी वजह से
परेशान हैं. इसी का फायदा यह तथाकथित तांत्रिक उठाते हैं. कुछ ही दिनों में दिलशाद
उर्फ बाबा आमिल सूफी के पास लोगों के फोन आने लगे. वह उन लोगों से रजिस्ट्रेशन के 251
रुपए अपने एकाउंट में जमा कराने को कहता. रजिस्ट्रेशन के पैसे जमा
कराने के बाद वह पूजा आदि के नाम पर 5100 या ज्यादा रुपए
खाते में जमा करा लेता.
जो लोग खाते में पैसे जमा कराते,
उन में से कुछ की समस्याएं खुदबखुद कम या खत्म हो जातीं तो वे बाबा
का खुद ही प्रचार करते और जिन की समस्या जस की तस रहती, वे
उसे दोबारा फोन करते तो दिलशाद उस का फोन नंबर रिजेक्ट लिस्ट में डाल देता.
इस तरह दिलशाद का धंधा चलने लगा तो उस ने
बाबा आमिल सूफी, बाबा हुसैनजी, बाबा
मिर्जा, बाबा बंगाली आदि कई फरजी नामों से आकर्षक स्टीकर
छपवा कर सार्वजनिक स्थानों, ट्रेनों, बसों
आदि में चिपकवा दिए. इस का उसे अच्छा रेस्पांस मिलना शुरू हुआ. उस की कमाई बढ़ी तो
उस ने अपने भाई इरशाद को भी अपने साथ जोड़ लिया. दिलशाद लोगों को अपनी चिकनीचुपड़ी
बातों में फंसा कर उन से मोटी कमाई करने लगा. उसी कमाई से उस ने अर्थला में ही
अपना तीनमंजिला आलीशान घर बनवा लिया.
अब दिलशाद इस क्षेत्र का माहिर खिलाड़ी बन
चुका था. हिंदी के अलावा उस ने देश की विभिन्न भाषाओं में अपने स्टीकर छपवाने शुरू
कर विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवा दिए. इस का नतीजा यह निकला कि
उस के पास सैकड़ों फोन आने लगे. इस के बाद दिलशाद अपने गांव के ही रहने वाले
शाहरुख,
नासिर, आसिफ, नसीरुद्दीन,
शाहरुख पुत्र मंसूर और आसिफ को अपने यहां नौकरी पर रख लिया. ये सभी
युवक कुछ ही दिनों में इतने ट्रेंड हो गए कि कस्टमर की दुखती रग पर बातों का मरहम
लगा कर उस की जेब ढीली करा लेते.
अलगअलग बैंकों में इन्होंने 20
एकाउंट खुलवा रखे थे. जैसे ही कस्टमर पैसा जमा करता, दिलशाद तुरंत ही एटीएम से पैसे निकलवा लेता. चूंकि दिलशाद अखबारों,
केबल टीवी आदि पर दिए जाने वाले विज्ञापन पर मोटा पैसा खर्च करता था,
इसलिए गोविंदपुरम, गाजियाबाद और नोएडा के रहने
वाले जयवीर और शीतला प्रसाद ने दिलशाद से संपर्क किया. ये दोनों विज्ञापन एजेंसी
चलाते थे. बातचीत के बाद जयवीर और शीतला प्रसाद ने ही दिलशाद के धंधे के विज्ञापन
की जिम्मेदारी ले ली.
दिलशाद की महीने भर में जो भी कमाई होती
थी,
उस का आधा वह विज्ञापन पर खर्च करता था. दिलशाद के कालसैंटर में काम
करने वाले सभी लोग दिन भर व्यस्त रहते थे. रोजाना ही उस के कालसैंटर में करीब एक
हजार फोन आते थे, जिन से उसे लगभग 20 लाख
रुपए की आमदनी होती थी. इस में से 10 लाख रुपए वह विज्ञापन पर
खर्च करता था. इस तरह उस का धंधा दिनोंदिन फलफूल रहा था. मिथुन सिंह की तरह ज्यादा
घरों में लोग किसी न किसी वजह से परेशान रहते हैं, ऐसे ही
लोग तथाकथित तांत्रिकों के चक्कर में फंसते हैं.
दिलशाद और उस के 7
साथियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गाजियाबाद के गोविंदपुरम से
जयवीर और सैक्टर-25 नोएडा से शीतला प्रसाद को भी गिरफ्तार कर
लिया था. सभी 10 अभियुक्तों से व्यापक पूछताछ के बाद 18
जुलाई, 2017 को उन्हें गाजियाबाद के सीजेएम की
अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया. मामले की आगे की
विवेचना एसआई मनोज बालियान को सौंप दी गई थी.
– कथा पुलिस सूत्रों पर
आधारित
-कपूर चन्द



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