इस कहानी को क्राईम पैट्रोल डायल-100 के एपिसोड-452 में दिनांक-२ जनवरी 2015 को दिखाया गया है. अपराधी रिशु अपनी ताई की बेटी को अपने जाल में फांस कर उससे शादी करना चाहता था. इसके लिए उसने अपनी ताई और उसकी बेटी की हत्या कर दी थी. बाद में रिशु को इस अपराध के लिए फांसी की सज़ा मिली थी.
--शैतानी दिमाग की साजिश--
किसी और की मेहनत की कमाई को अपनी समझ
अय्याशी में उड़ा देना नाजायज़ क्या अपराध की श्रेणी में भी माना जाता है. रिशु ने भी यही रास्ता इख़्तियार किया
था. अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए रिशु ने हिना को अपने जाल में फंसना शुरू किया और जल्दी
ही उसके साथ नाजायज़ रिश्ता कायम कर लिया था. फिर इसी नाजायज़ रिश्ते की आड़ लेकर वह
उसे ब्लैकमेल करने लगा और उससे मिले धन का इस्तेमाल अपने सपने पूरे करने में खर्च
करने लगा था. उसका जब दिल करता वह हिना को धमकाकर उससे पैसा ले जाता और जुए शराब
और अपनी तमाम अय्याशियों में उड़ा देता था.
बलदेव
राज का एक छोटा सा सीमित परिवार था. पत्नी ऊषा रानी, पुत्री आशना, पुत्री हिना और
पुत्र राहुल. पांच लोगों का यह परिवार लुधियाना के बाबा थान सिंह चौक के निकट मोहल्ला
फतेहगंज इलाके के मकान नंबर बी-5 397/1 में रहता था. बलदेव राज मेहनती और सुलझे
हुए इन्सान थे. अपने सभी बच्चों को उन्होंने अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए थे. बड़ी
बेटी आशना की शादी के बाद उनका देहांत हो गया था. आशना की शादी मकान नंबर 234 गली
नंबर 4 मोचपुरा बाज़ार लुधियाना निवासी राज कुमार मल्होत्रा के पुत्र विकास
मल्होत्रा के साथ हुई थी. विकास का पेकिंग मटिरियल का बिजनेस था. बलदेव राज की
मृत्यु और आशना की शादी के बाद राहुल आस्ट्रेलिया चला गया था. उसे वहां अच्छा काम
मिल गया था.
राहुल के आस्ट्रेलिया सैटल हो जाने के बाद
पीछे उसके घर में 55 वर्षीय माँ ऊषा और 21 वर्षीय बहन हिना ही रह गए था. उनका
ध्यान रखने के लिए कुछ लोग थे यहाँ. बेटी-दामाद विकास और आशना के आलावा रिशु
ग्रोवर भी था. रिशु ऊषा के देवर का लड़का था. रिशु टिब्बा रोड के इक़बाल नगर में
रहता था. क्योंकि ऊषा रानी का घर बाबा थान सिंह चौक पर ऐसी जगह रास्ते में स्थित
था कि रिशु आते-जाते अपनी ताई ऊषा का हाल चाल जान लिया करता था. राहुल ने भी उसे
कह रखा था कि वह अपनी ताई का ध्यान रखा करे. धीरे-धीरे हालात यह बनते चले गए कि
ऊषा रानी घर के छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिशु को बुलाने लगी. इस बात में रिशु के
माता-पिता को भी कोई एतराज़ नहीं था. ताई की सेवा करने में उन्हें क्या आशना और
विकास को भी कोई बुराई नहीं दिखाई देती थी. कुछ समय और बीत जाने के बाद अपनी ताई
ऊषा के कहने पर रिशु रात को भी उनके घर पर रुकने लगा था. इस बीच एक यह बात हो गई
कि एक बाबू नाम का लड़का हिना के पीछे पड़ गया था. बाबू का सेनेटरी का काम था. और
उसकी दुकान उस रास्ते पर पड़ती थी जिस राह से हिना का आना-जाना रहता था. हिना कोई
कोर्स कर रही थी और वह जब भी घर से बहर निकलती बाबू उसका रास्ता रोककर उससे छेड़छाड़
करता था. इस बात से परेशान होकर हिना ने इस बात की शिकायत पहले रिशु से की और बाद
में अपनी बहन और जीजा को भी बताया. रिशु ने अपने तरीके से बाबू को समझाने का
प्रयास किया था पर जब कोई हल नहीं निकला और बाबू की हरकते जरी रही तब विकास
मल्होत्रा ने इस बात की शिकायत थाना डिविजन नंबर- 3 में की थी. पुलिस ने बाबू को
थाने बुलाकर सबक भी सिखाया था. बावजूद इसके वह अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आया था.
उसने हिना को छेड़ना तो बंद कर दिया था पर उसका पीछा करना नहीं छोड़ा था. यह साल
2012 की बात है. इस बीच राहुल आस्ट्रेलिया से लुधियाना लौटा तो उससे भी यह बात पता
चली थी. लगभग दो माह लुधियाना रहने के बाद जब वह वापिस आस्ट्रेलिया लौटा तो अपनी
माँ ऊषा और बहन हिना की जिमेदारी वह रिशु को सौंप गया था. आगे चलकर यह बात राहुल
की सबसे बड़ी भूल साबित हुई थी. वैसे देखा जाए तो राहुल ने कुछ गलत भी नहीं किया
था. रिशु उसके सगे चाचा का बेटा था.
राहुल हो, ऊषा- आशमा- हिना या फिर विकास
मल्होत्रा. कोई यह बात नहीं जनता था कि रिशु एक आवारा, बदचलन जलील और एक बेहद गिरा
हुआ इन्सान है. सिगरेट, शराब, जुआ से लेकर दुनिया का ऐसा कौनसा गलत एब था जो रिशु
में नहीं था. ऊषा और हिना का ध्यान रखने की आड़ में अब वह ऊषा के घर पर ही अपना
डेरा जमा बैठा था. दरअसल रिशु के खुराफाती दिमाग में एक भयानक षड्यंत्र ने जन्म ले
लिया था. उसका सीधा निशाना हिना थी जो इस बात से बिलकुल अनजान थी कि आगे भविष्य में
चलकर क्या अनर्थ होने वाला है.
अर्थी
बेचने वाला भी दुवा किसी की मौत की नहीं बल्कि अपना पेट भरने की करता है. लेकिन
दुनिया में रिशु जैसे लोग भी होते हैं जो दूसरों की चिता पर अपना चूल्हा जलाने की
सोचते हैं, नाजायज़ रिश्ते, नाजायज़ तरीके.
कब किसी इन्सान को गुनाह के रास्ते पर लाकर खड़ा कर देते है. इस बात का अंदाज़ा नहीं
लगाया जा सकता. सपने देखना, कामयाब होना, बेहतर जिन्दगी पाना यह सब के लिए जायज़
है. लेकिन नाजायज़ हैं वो तरीके जो झूठ और फरेब की बुनियाद पर रखे जाते है. किसी और
की मेहनत की कमाई को अपनी समझ अय्याशी में उड़ा देना नाजायज़ क्या अपराध की श्रेणी
में भी माना जाता है. रिशु ने भी यही
रास्ता इख़्तियार किया था. अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए रिशु ने हिना को अपने जाल
में फंसना शुरू किया और जल्दी ही उसके साथ नाजायज़ रिश्ता कायम कर लिया था. फिर इसी
नाजायज़ रिश्ते की आड़ लेकर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा और उससे मिले धन का इस्तेमाल
अपने सपने पूरे करने में खर्च करने लगा था. उसका जब दिल करता वह हिना को धमकाकर
उससे पैसा ले जाता और जुए शराब और अपनी तमाम अय्याशियों में उड़ा देता था. मजे की
बात यह थी कि उसी ही घर में रहते हुए यह बात ऊषा को कभी पता नहीं चली थी. इसके
पीछे भी एक कारण यह था कि रिशु अपनी ताई को नींद की गोलियां देता था. गोलियों के
नशे के कारण वह कभी अपने पूरे होश में ही नहीं रहती थी इसे वह अपनी उम्र का रोग
समझती थी. उसे इस बात का पता ही नहीं चला था कि उसकी यह हालत रिशु द्वारा दी जा
रही नशे की गोलियां है. ऊषा को नींद में करने के बाद हिना पर रिशु का पूरा अधिकार
हो जाता था उअर वह अपनी मनमर्जी करता था.
अदालत परिसर
शूरू शुरू में हो हिना भी रिशु के अकर्ष्ण
में फंस गई थी पर जैसे ही उसको रिशु की नियत का पता चला तबतक बहुत देर हो चुकी थी
और वह सर से लेकर पांव तक रिशु के चंगुल में फंस चुकी थी. जहाँ से अकेले निकलना
उसके बूते से बहर की बात थी. अंत में हारकर हिना ने अपने भाई राहुल को आस्ट्रेलिया
में फोन करके बात बता दी थी. यहाँ एक बार दोबारा हिना ने बड़ी भरी गलती की थी. वह
राहुल से अपने और रिशु के शारीरिक सम्बन्धों और रिशु द्वारा ब्लैकमेल करने की बात
छिपा गई थी. यह बात फरवरी 2013 की है. अपनी बहन की बात सुन राहुल ने लुधियाना आकर
रिशु को आड़े हाथों लिया था. रिशु के माता पिता ने भी उसकी अच्छी खबर ली थी. और
अपनी करनी से शर्मिंदा होकर रिशु ने राहुल के आलावा अन्य सभी रिश्तेदारों से माफ़ी
मांग ली थी. बात तो यहीं खत्म हो गई थी पर राहुल कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था.
उसने हिना की शादी करने के लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी और पखोवाल रोड लुधियाना
निवासी सौरव के साथ हिना की मंगनी कर शादी पक्की कर दी थी. हिना की शादी के लिए तारीख़
20 नवम्बर 2013 तय की गई थी. हिना की शादी की जिमेदारी इस बार राहुल अपनी बहन आशमा
और जीजा विकास को सौंप कर 24 अप्रेल 2013 को आस्ट्रेलिया लौट गया था. आस्ट्रेलिया
जाकर उसने वहां से 4 लाख रुपये और लगभग 100 डालर अपनी माँ ऊषा को भेजे थे. क्योंकि
हिना की शादी में कुछ ही समय रह गया था इसलिए शादी की तैयारियां जोरों से चल रही
थी.
दिनांक 21-5-2013 को राहुल ने आस्ट्रेलिया
से अपनी माँ को फोन करके हालचाल पूछना चाहा तो उषा का फोन बंद मिला था. 21 और 22
तारीख़ को उसने कई बार उषा और हिना को फोन किया पर हर बार उनका फोन बंद मिला था.
परेशान होकर उसने अपने जीजा विकास मल्होत्रा को फोन कर पूछा.
‘’ जीजा जी क्या बात है माँ और हिना का फोन
नहीं लग रहा है, जाकर वहां पता तो करें क्या बात है?’’
विकास
ने राहुल से कहा कि ऐसी कोई बात नहीं, ‘’मैं और आशमा रात को वहीँ थे, हो सकता है
वे लोग सो रहे हों या कोई सामान खरीदने बाज़ार गए हों. फिर भी जाकर में देखता
हूँ.’’ उसके बाद विकास अपनी पत्नी आशमा को साथ लेकर ससुराल गया. वहां जाकर उसने
देखा तो बाहर का मुख्य दरवाज़ा बंद जरूर था पर उसमे कुण्डी नहीं लगी थी. असमंजस की
हालत में विकास ने अंदर जाकर देखा तो नीचे वाले कमरे में बेड पर ऊषा की खून से
लथपथ लाश पड़ी थी. वह घबरा गया और सोचने लगा कि हिना कहाँ है. इसके बाद उसने
ऊपर
जाकर देखा तो बाथरूम के बाहर हिना की भी खून सनी लाश पड़ी थी. उसकी लाश के पास
दीवार पर खून से ‘’ बाब ‘’ लिखा हुआ था. बाब यानि बाबू. विकास को यह बात समझते देर
नहीं लगी थी कि यह दोनों हत्याएं बाबू सेनेटरी बाले ने ही की है. उसने तुरंत इस
बात की सूचना थाना डिविजन – 3 को दी. साथ ही उसने फोन द्वारा राहुल को भी बता दिया
था. सूचना मिलते ही थाना प्रभारी इं बृज मोहन, सब इं प्रितपाल सिंह, एएसआई राजवंत
पाल, हवलदार वरिंदर पाल सिंह, सरबजीत सिंह और सिपाही राजिंदर सिंह के साथ मौकाए
वारदात पर पहुंचे थे. मौके पर करवाई करते हुए इन बृज मोहन ने क्राईम टीम को
बुलवाया . कई जगह से फिंगर प्रिंट और खून के सैम्पल लिए और दोनों लाशों का पंचनामा
तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए उन्हें सिविल अस्पताल भेज दिया. प्रथम पूछताछ में
विकास मल्होत्रा से यह बात भी पता चली थी कि हत्यारे या हत्यारा दोनों माँ बेटी की
हत्या करने के बाद घर में रखे हुए 4 लाख रूपये- 100 डालर और एक सोने की चेन भी लूट
ले गया है. बहरहाल विकास के बयानों के
आधार पर इन बृज मोहन ने इस दोहरे हत्याकांड का मुकदमा अपराध संख्या 54 पर आईपीसी की
धारा 302 – 460 के तहत दिनांक 22 – 5 -2013 को दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी थी.
विकास ने इस हत्याकांड का शक बाबू पर जाहिर किया था और दीवार पर भी खून से बाब
लिखा हुआ था सो इन बृज मोहन ने बाबू को हिरासत में लेकर पूछताछ शूरू कर दी थी. सख्ती से पूछताछ करने पर भी बाबू इस हत्याकांड
की नहीं कबूला था, वह अपना हाथ होने से इनकार करता रहा था. उसका कहना यह था कि वह
हिना का पीछा जरूर करता था पर इन हत्याओं में उसका दूर-दूर तक भी कोई हाथ नहीं है.
यह एक ब्लाइंड मडर केस था. माँ बेटी की हत्या करते हुए या उनके घर में घुसते और
निकलते हुए किसी ने कुछ नहीं देखा था. बाबू के ब्यान भी अपनी जगह विचारणीय थे.
उसके अनुसार वह हिना से प्यार करता था फिर उसकी हत्या वह कैसे कर सकता था. इन सब
संभावनाओं के बाद भी यह बात अपनी जगह कायम थी कि एक नहीं दो हत्याएं हुई थी और कोई
तो ऐसा था जो वहां गया था और माँ बेटी की हत्या करने के बाद घर में रखे कैश को उठा
ले गया था. क्या पैसे के लालच में विकास ने इस घटना को इनजाम दिया था. उसे भी तो
पता था कि घर में इतना कैश रखा है. या कोई और था. फोरिसिक रिपोट भी यही बताती थी
कि घटनास्थल से मिले खून के सैम्पल के साथ एक किसी तीसरे आदमी का भी खून था जो शायद
माँ बेटी की हत्या करते समय हत्यारे का हाथ कट जाने के कारण यस कहीं और चोट लग
जाने के कारण वहां गिर गया था. संभावनाओं
का पिटारा पुलिस के सामने खुला हुआ था लेकिन अभी तक कोई ठोस लीड नहीं मिल रही थी
सिवाय इसके कि दोनों हत्या लूट के इरादे से की गई थी. इन सब के बावजूद एक शख्स था जिस ने हत्यारे को घर से निकलते देखा
था और वह उसे अच्छी तरह से पहचानता भी था.
बहरहाल इन बृज मोहन ने हिना के मोबाईल फोन की डिटेल निकलवाकर खंगाली तो उसमें कई
संदिग्ध नाम नम्बर दिखाई दिए थे. उन सभी नम्बरों एक नम्बर ऐसा भी था जिस पर हिना
की सबसे ज्यादा बातें हुआ करती थी और वह नम्बर हिना के चचेरे भाई रिशु का था. इस
बीच इस ह्त्याक्न्द के दो दिन बाद राहुल आस्ट्रेलिया से आया और 25 मई को उसने अपने
बयान इन बृज मोहन को दर्ज करवाए. राहुल के बयानों ने इस केस का पासा पलटते हुए
कातिल को लाकर कटघरे में खड़ा कर दिया था. हिना और उषा का हत्यारा कोई और नहीं
बल्कि उन्हीं का भतीजा रिशु ग्रोवर था. इस केस में पुलिस ने सबसे पहले सेनेटरी वाले
बाबू को हिरासत में लिया,
मगर उससे कोई राज नहीं उगलवा सकी. वह बेकसूर साबित हुआ था. दीवार पर
‘’ बाब ‘’ लिखकर हत्यारे ने पोलिस को गुमराह किया था. फिर हिना के मोबाइल फोन की डिटेल निकाली तो उसके
ताया के बेटे रिशु ग्रोवर की कॉल्स मिलीं. इसी बीच हिना का भाई राहुल ऑस्ट्रेलिया
से लौटा और 25 मई को उसने बयान दर्ज कराए कि आरोपी रिशु ने
उसकी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना लिए थे. वह उसको ब्लैकमेल कर संबंध कायम रखने
का दबाव डालता था. इसी साल फरवरी में ये राज खुलने पर फैमिली मेंबरों ने बात की थी
तो रिशु ने गलती मानते हुए कसम खाई थी कि वह दोबारा हिना को परेशान नहीं करेगा.
फिर माता ने बताया कि रिशु की हरकतें ठीक नहीं है. इसके बाद हिना की सगाई कर नवंबर
में शादी तय कर दी गई थी. राहुल ने भी रिशु को बहुत समझाया था कि वह बाज आ जाए,
वर्ना हमारी बहुत बेइज्जती होगी. अब तक की तफ्तीश और हिना के फोन की
डिटेल, राहुल के बयानों से यह बात साबित हो गई कि इन हत्याओं के पीछे रिशु का ही
हाथ है. लिहाज़ा रिशु को पुलिस हिरासत में ले लिया गया था. हिना और ऊषा के खून के
आलावा घटनास्थल पर मिले किसी तीसरे के खून के सैम्पल रिशु के खून से मैच हो गए
थे. रिशु ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था.
उसकी निशानदेही पर इं बृज मोहन ने गंदे नाले से हत्या में प्रयोग चाकू, प्लास्टिक
के दस्ताने, एक रूमाल भी बरामद कर लिया था. और हत्या के बाद लूटे हुए पैसों में से
2 लाख 11 हजार रूपए और 100 डालर भी बरामद कर लिए थे. करवाई पूरी करने के बाद आशु
को न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया था.
माननीय सेशन जज लुधियाना अरूणवीर वशिष्ट
तफ्तीश
पूरी करने के बाद इन बृज मोहन ने एक महीने बाद अदालत में इस केस की चार्जशीट दाखिल
कर दी थी.
पांच साल की पैरवी के बाद अतिरिक्त सत्र
न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ट की अदालत ने इस केस का फैसला सुनाया था. रिशु ग्रोवर पर
बड़े गंभीर आरोप थे.
बहन के साथ नाजायज संबंध, ब्लैकमेलिंग, शादी ना करने का दबाव बनाना, पुलिस को उलझाने के लिए दीवार पर ‘’बाब’’ लिखना आदि. अभियोजन पक्ष ने इस केस में पुलिसवालों, फोटोग्राफर, फिंगरप्रिंट एक्सपर्टों, पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों, शिकायतकर्ता विकास राहुल आदि सहित कुल 23 गवाह बनाए थे. जिन में एक भुत मजबूत गवाह था जिसने रात के अँधेरे में इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद रिशु को घटनास्थल से फरार होते देखा था. दरअसल उसी मोहल्ले की एक औरत रोज तडके ढाई बजे सेवा करने के लिए गुरुद्वारा साहब जाती थी. हिना और ऊषा की हत्या करने के बाद जब रिशु वहां से निकला तो उक्त औरत ने उसे देखकर पहचान लिया था. अदालत ने इस औरत की गवाही को अहम माना था. इसके आलावा रिशु के ब्लड और फिंगर प्रिंट का मैच होना भी उसे मुजरिम साबित करने के लाइट काफी था. जिला अटार्नी रविदर कुमार अबरोल की स्पष्ट दलीलों से भी यह बात अदालत में साफ हो गई थी कि 21-22 की दरमियानी रात हिना और ऊषा की हत्या कर वहां से लूट रिशु ने ही की थी.
जिला एडिशनल सेशन जज अरुणवीर वशिष्ठ की अदालत ने सितम्बर की 10 तारीख को ही रिशु को दोषी करार दे दिया था. और दिनांक 13 सितम्बर 2018 को माननीय जज साहब ने अपना फैसला सुनते हुए कहा कि जिला अटर्नी रविंदर कुमार अबरोल की दलीलें, गवाहों के बयानों और अन्य मिले साक्ष्यों से यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है कि रिशु ग्रोवर ने अपनी ताई और हिना को खंजर से ताबड़तोड़ वार करके बेरहमी से मार डाला था. वह चचेरी बहन से अवैध संबंध बना उसे ब्लैकमेल कर पैसा भी वसूलता था. करीब छह महीने बाद उसकी शादी तय थी, लिहाजा ब्लैकमेलिंग का धंधा व पैसा मिलना बंद होने की रंजिश में ही उसने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था और हिना की शादी के लिए घर में रखा पैसा लूट लिया था. रिशु इतना शातिर दिमाग था कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए घर में गहने व कैश भी गायब कर दिया था. साथ ही दीवार पर खून से ‘बाब’ लिख दिया था. परिस्थितियों की श्रंखला और बरामद लूट के रूपए, चाकू और दोषी की घृणित मानसिकता से यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि दोषी ने जन्घ्न्य से भी बढ़ कर अपराध किया है ऐसे आदमी को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अभियोजन पक्ष ने अपनी चार्जशीट में आरोपी पर जो आरोप लगाए हैं वह उन्हें पूरी तरह से साबित करने में सक्षम रहा है. आरोपी का दोष पूरी तरह से साबित होता है लिहाजा भारतीय दंड सहिंता की धारा 302 के अंर्गत आरोपी रिशु ग्रोवर को दोषी करार देते हुए डेथ सेंटेंस की सजा सुनती है. अपना फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ठ ने अपनी कलम की निब तोड़ दी और उठकर अपने चेम्बर में चले गए.
इसके सात साल पहले साल 2011 में 20 अक्टूबर को मैडम मनदीप कौर की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी. इसमें शिवसेना नेता सूरज अहलूवालिया पर अपने बाडीगार्ड की कारबाइन से टैक्सी ड्राइवर को गोली मारकर कत्ल करने का दोष साबित हुआ था.
बहन के साथ नाजायज संबंध, ब्लैकमेलिंग, शादी ना करने का दबाव बनाना, पुलिस को उलझाने के लिए दीवार पर ‘’बाब’’ लिखना आदि. अभियोजन पक्ष ने इस केस में पुलिसवालों, फोटोग्राफर, फिंगरप्रिंट एक्सपर्टों, पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों, शिकायतकर्ता विकास राहुल आदि सहित कुल 23 गवाह बनाए थे. जिन में एक भुत मजबूत गवाह था जिसने रात के अँधेरे में इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद रिशु को घटनास्थल से फरार होते देखा था. दरअसल उसी मोहल्ले की एक औरत रोज तडके ढाई बजे सेवा करने के लिए गुरुद्वारा साहब जाती थी. हिना और ऊषा की हत्या करने के बाद जब रिशु वहां से निकला तो उक्त औरत ने उसे देखकर पहचान लिया था. अदालत ने इस औरत की गवाही को अहम माना था. इसके आलावा रिशु के ब्लड और फिंगर प्रिंट का मैच होना भी उसे मुजरिम साबित करने के लाइट काफी था. जिला अटार्नी रविदर कुमार अबरोल की स्पष्ट दलीलों से भी यह बात अदालत में साफ हो गई थी कि 21-22 की दरमियानी रात हिना और ऊषा की हत्या कर वहां से लूट रिशु ने ही की थी.
जिला एडिशनल सेशन जज अरुणवीर वशिष्ठ की अदालत ने सितम्बर की 10 तारीख को ही रिशु को दोषी करार दे दिया था. और दिनांक 13 सितम्बर 2018 को माननीय जज साहब ने अपना फैसला सुनते हुए कहा कि जिला अटर्नी रविंदर कुमार अबरोल की दलीलें, गवाहों के बयानों और अन्य मिले साक्ष्यों से यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है कि रिशु ग्रोवर ने अपनी ताई और हिना को खंजर से ताबड़तोड़ वार करके बेरहमी से मार डाला था. वह चचेरी बहन से अवैध संबंध बना उसे ब्लैकमेल कर पैसा भी वसूलता था. करीब छह महीने बाद उसकी शादी तय थी, लिहाजा ब्लैकमेलिंग का धंधा व पैसा मिलना बंद होने की रंजिश में ही उसने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था और हिना की शादी के लिए घर में रखा पैसा लूट लिया था. रिशु इतना शातिर दिमाग था कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए घर में गहने व कैश भी गायब कर दिया था. साथ ही दीवार पर खून से ‘बाब’ लिख दिया था. परिस्थितियों की श्रंखला और बरामद लूट के रूपए, चाकू और दोषी की घृणित मानसिकता से यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि दोषी ने जन्घ्न्य से भी बढ़ कर अपराध किया है ऐसे आदमी को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अभियोजन पक्ष ने अपनी चार्जशीट में आरोपी पर जो आरोप लगाए हैं वह उन्हें पूरी तरह से साबित करने में सक्षम रहा है. आरोपी का दोष पूरी तरह से साबित होता है लिहाजा भारतीय दंड सहिंता की धारा 302 के अंर्गत आरोपी रिशु ग्रोवर को दोषी करार देते हुए डेथ सेंटेंस की सजा सुनती है. अपना फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ठ ने अपनी कलम की निब तोड़ दी और उठकर अपने चेम्बर में चले गए.
इसके सात साल पहले साल 2011 में 20 अक्टूबर को मैडम मनदीप कौर की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी. इसमें शिवसेना नेता सूरज अहलूवालिया पर अपने बाडीगार्ड की कारबाइन से टैक्सी ड्राइवर को गोली मारकर कत्ल करने का दोष साबित हुआ था.
--हरमिंदर कपूर.




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