--ब्लैकमेलिंग के हवनकुंड में पूरा परिवार स्वाह--
अपनी पत्नी मनदीप कौर की बात सुनकर अगर कुलविंदर सिंह हिम्मत ना
हारता और पुलिस की शरण में चला गया होता तो शायद उसका पूरा परिवार आज सलामत होता.
पढ़िये एक दिल दहला देने वाला मामला
कुलविंदर सिंह और मनदीप कौर
थाना
सदर कपूरथला अंतर्गत आने वाले क़स्बा आलमगीर काला संघिया में कुलविंदर सिंह बुग्गा
का परिवार रहता था. कुलविंदर की शादी लगभग 9 वर्ष पहले मनदीप कौर के साथ हुई थी.
वह अपनी पत्नी से बहुत खुश और संतुष्ट था. मनदीप कौर भी कुलविंदर जैसा मेहनती और
शरीफ पति पाकर फुले नहीं समाती थी. कुलविंदर में सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह आम
युवकों की तरह कोई नशा पता नहीं करता था. बस दिनरात अपने और अपने परिवार की ख़ुशी
और कामयाबी के विषय में ही सोचा करता था. वह सोचता था कि इतनी मेहनत की जाये जिससे
उसका परिवार शिक्षित और सुखी रह सके. क्योंकि कुलविंदर खुद एक दलित परिवार का अशिक्षित नौजवान था इसलिए अशिक्षित होने का
दर्द वह अच्छी तरह से समझता था. उसका यही प्रयास रहता कि जो दर्द और दुःख तकलीफ
उसने झेली है, वह उसके बच्चों को न झेलनी पड़े. इसी लिए वह दिन रात परिश्रम करता
रहता था. कुलविंदर के परिवार में 30 वर्षीय पत्नी मनदीप कौर के अलावा 8 वर्षीय
बेटी सोनल और 5 वर्षीय बेटा अभि थे. पिता की मृत्यु हो जाने के बाद वह अपनी माँ महिंदर कौर के साथ रहता
था.वैसे उसकी बड़ी बहन जसविंदर कौर और जीजा सरबजीत सिंह भी वहीँ पास रहते थे.
वैसे तो पूरे पंजाब से अधिकांश कामगार लोग
विदेशों में पैसा कमाने गए हुए हैं पर विदेश जाने वालों में कपूरथला- नवां शहर-
बंगा- जालन्धर आदि शहरों के लोगों की तादात दूसरे शहरों से अधिक है. इसलिए
कुलविंदर भी अपने परिवार का सुंदर भविष्य बनाने तथा पैसा कमाने के लिए विदेश जाने
के प्रयास कर रहा था. काफी हाथ पांव मारने के बाद उसे जार्डन की एक कम्पनी में
नौकरी मिल गई थी. यह 2016 की बात है. जार्डन में नौकरी लग जाने के बाद वह अपनी
पत्नी और दोनों बच्चों को अपनी बड़ी बहन जसविंदर कौर और माँ महिंदर कौर के भरोसे
छोड़कर जार्डन चला गया था. कुलविंदर के जार्डन चले जाने के बाद उनके घर के दिन
फिरने लगे थे. कुलविंदर एक मोटी रकम जार्डन से अपने घर भेजने लगा था. परिवार ने भी
वाहेगुरु का शुक्र अदा किया था.सब कुछ ठीक थक चल रहा था. कुलविंदर के दोनों बच्चे
भी अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे थे. घर में किसी चीज की कमी नहीं रही थी. अगस्त
2018 में कुलविंदर को जार्डन गए और अपने परिवार से बिछड़े हुए डेढ़ वर्ष गुजर चुका
था कि अचानक बिना किसी को पूर्व सूचना दिए कुलविंदर सिंह 2 अगस्त 2018 की रात 12
बजे अपने घर काला संघिया आ पहुंचा. एकाएक उसका इसतरह से गाँव आना सबको अजीब लगा
था. उसे देख उसके परिवार के सदस्यों में जहाँ ख़ुशी की लहर दौड़ गई थी वहीँ सभी इस
बात से भी परेशान थे कि कुलविंदर यूँ अचानक बिना किसी को बताए जार्डन से अपने गाँव
कैसे लौट आया था. कुलविंदर की माँ का तो ना जाने क्यों किसी अनहोनी का सोचकर ह्रदय
कांपने लगा था. कुलविंदर किसी से बात किये बिना सीधा अपने कमरे में चला गया और
उसने दरवाज़े को अंदर से कुण्डी लगा ली थी.
मासूम बच्चे सोनम और अभि
कमरे में जाने के बाद वह बेचैनी के आलम
में काफी देर तक कमरे में चहलकदमी करता रहा था. इस बीच उसने किसीसे कोई बात नहीं
की थी और ना ही पत्नी और जान से भी प्यारे अपने बच्चों को मिला था. फिर अचानक से
वह रुका और अपनी पत्नी मंजीत कौर के पास बेड पर बैठकर उसे बड़ी बेबसी से देखने लगा
था. सो रहे दोनों बच्चों की ओर भी उसने इसी तरह से देखा और पत्नी से कुछ बातें की
थी. इसके बाद उसने अपने मोबाईल फोन से मंजीत कौर की कुछ कहते हुए विडिओ बनाई और उस
विडिओ में खुद भी कोई सन्देश छोड़ा. इतना सब करने के बाद कुलविंदर ने घर में रखा
इंजन स्टार्ट करने वाला डीज़ल का भरा केन
उठाया और पूरे घर में छिडकाव कर दिया था. पास वाले कमरे में उसकी माँ और
बहन जसविंदर कौर को इस बात का तनिक भी आभास नहीं था कि साथ वाले कमरे में क्या
अनर्थ होने जा रहा है. उन्हें पता तब चला जब कुलविंदर का कमरा धू-धू के जलने लगा
और कमरे के अंदर से दिल को दहला देने वाली चीखों की आवाजें आने लगी थी. पलक झपकते
ही वहां जैसे कोहराम मच गया था. महिंदर कौर और जसविंदर कौर उनको बचाने में जुट गई
थी. पास पड़ोस के लोग भी इस आग को बुझाने के लिए जूझ रहे थे पर कुलविंदर और उसकी
पत्नी बच्चों को बचना संभव नहीं था, क्योंकि कमरे का दरवाज़ा भीतर से बंद था. फिर
भी जिससे जो बन पड़ा उसने किया. काफी मुशाकत के बाद कमरे का दरवाज़ा तोड़कर सब को
बाहर तो निकल लिया गया था पर तब तक वह आग में काफी हद तक जल चुके थे. सबकी हालत
बड़ी नाजुक थी. इस आग को बुझाते हुए जसविंदर कौर भी बुरी तरह से झुलस गई थी. सभी को
तुरन्त जालंधर के अस्पताल में लाया गया. कुलविंदर सिंह और उसके बेटे अभि की तो
अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई थी. जबकि मनदीप कौर और उसकी बेटी 90 प्रतिशत तक जली
हुई थी और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. दोपहर तक उनकी बेटी सोनम ने भी दम तोड़ दिया
था. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया था. वहीं इस पूरे
घटनाक्रम ने वर्ष 2015 में काला संघियां में
ही एक व्यक्ति द्वारा अपने 2 बच्चों तथा पत्नी को जहर देकर
मारने के बाद खुद भी आत्महत्या करने के सनसनीखेज मामले की बुरी यादें ताजा करवा दी
थी.
घटना
की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रमुख सतिंदर सिंह, एसपी इन्वेस्टीगेशन जगजीत सिंह
सरोआ, डीएसपी सब-डिवीजन कपूरथला सरबजीत सिंह, थाना सदर कपूरथला प्रभारी इं सरवन
सिंह बल, पुलिस चौकी इंचार्ज काला सिंघिया सब इं परमिंदर सिंह सहित कई आला अधिकारी
मौकाए वारदात और अस्पताल पहुंच गए थे. मनदीप कौर की हालत अब तक बेहद नाजुक बनी हुई
थी. किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. एक साथ, एक ही जगह चार लोगों द्वारा
आत्महत्या करने की बात भी किसी के गले नहीं उतर रही थी. पुलिस मनदीप कौर के होश
में आने और उसके ब्यान लेने का इंतजार कर रही थी ताकि आगे की करवाई की जा सके. पुलिस
ने घटनास्थल को पहले ही से सील कर दिया था ताकि कोई सबूत से छेड़छाड़ ना कर सके.
दिल दहला देने वाला यह मामला महज़ एक
आत्महत्या का केस नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी भयानक सच्चाई छुपी हुई थी जो जल्द
ही पुलिस और बाकी लोगों के सामने आने वाली
थी. आखिर मनदीप कौर को होश आ गया और इस अग्निकांड का उसने जो खुलासा किया उसे
सुनकर सबके पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. आत्महत्या की वजह गाँव के दबंग लोगों
द्वारा दलितों पर किये जाने वाले शोषण और उन्हें प्रताड़ित करने से सम्बन्धित था.
मंजीत कौर के ब्यान पुलिस प्रशासन, एसएमओ डाक्टर दीपक सिक्का और (जेएमआईसी) ड्यूटी
जुडिशियल मजिस्ट्रेट राहुल कुमार की उपस्तिथि में दर्ज किये गए थे. दम तोड़ने से
पहले मनदीप कौर ने को पुलिस को दिए बयान में बताया कि गांव के चार लोग बलकार सिंह,
तीर्थ सिंह, गुरप्रीत सिंह उर्फ सन्नी और उसकी
माँ सत्या देवी उन्हें परेशान कर रहे थे. इन लोगों ने उसकी अश्लील वीडियो बना ली
थी, उसे दिखाकर वे उसे ब्लैकमेल कर रहे थे. और यह सिलसिला पिछले काफी समय से चल
रहा था. यहाँ तक कि इन की बात ना मानने पर यह लोग उसे, उसके बच्चो. और सास को बुरे
तरीके से मारते-पीटते थे. एक तरह से इन लोगों ने उसे व उसके परिवार पर अपना अधिकार
जमाकर उन्हें गुलाम बना रखा था. घटना वाली रात का ज़िक्र करते हुए मनदीप कौर ने बताया कि इन चारों लोगों के उक्त
विडीयो उसके पति को भी भेज दिया था. दरअसल घटना से कुछ दिन पहले कुलविंदर को किसी
ने एक अश्लील विडीयो भेजा था जिसमें उसकी पत्नी मनदीप कौर गाँव के एक युवक
गुरप्रीत सिंह उर्फ सन्नी के साथ सेक्स करती दिखाई दी थी. पत्नी का उक्त विडीयो
देखने के बाद इस की सच्चाई जानने वह अपने घर आया और मनदीप से जब इस विडीयो के बारे
में पूछा तो उसने रो-रोकर अपने ऊपर हुए पूरे अत्याचारों की कहानी सुना दी थी और
बताया था की उन चारों ने मिलकर कैसे उसकी अश्लील विडीयो बनाई और विडीयो के बल पर
उसे ब्लैकमेल किया जाता रहा था. मनदीप कौर ने अपने पति कुलविंदर को यह भी बताया था
कि हिम्मत जुटाकर उसने एक बार पुलिस में भी शिकायत की थी पर कुछ नहीं हुआ था. सो
मनदीप की बातें सुनकर कुलविंदर बहुत ज्यादा नर्वस और भयभीत हो गया था. एक तो उसकी
बहुत बदनामी हुई थी, उसकी पत्नी ने जो झेला सो अलग था. और आगे भी उसमे हिम्मत नहीं
थी कि वह उन दबंगों से टक्कर ले पता. पुलिस प्रशासन पर उसे तनिक भी भरोसा नहीं था.
उसे इस बदनामी से और उन चारों ब्लैकमेलरों से बचने का एक ही उपाय नजर आया था.
हत्यारों की गिफ्तारी के लिए धरना
मनदीप
के ब्याओं के आधार पर पुलिस ने अपराध संख्या – 87 पर आत्महत्या के लिए विवश करने
के अपराध में धारा – 306/34 पर मंत्री बलकार सिंह,
नम्बरदार तीर्थ सिंह, गुरप्रीत सिंह उर्फ
सन्नी और उसकी माता सत्या देवी के खिलाफ दिनांक 2-8-2018 को मुकदमा दर्ज कर उसी
दिन गुरप्रीत सिंह सन्नी तथा बलकार सिंह मंत्री को गिरफ्तार कर लिया था. और उसी
दिन दिनांक 3 अगस्त को एक ही परिवार के 4 सदस्यों को
आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने के आरोप में गुरप्रीत सिंह सन्नी तथा बलकार सिंह
मंत्री को एस.एच.ओ. सदर इंस्पैक्टर सरवन सिंह बल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने
अदालत में पेश किया, जहां पुलिस ने अदालत को तर्क दिया कि
दोनों आरोपियों ने मृतक महिला मनदीप कौर की अश्लील फोटो तथा वीडियो बनाई है,
जिनको आरोपियों की निशानदेही पर बरामद करना है. इसलिए दोनों
आरोपियों का 3 दिन का पुलिस रिमांड जरूरी है, जिस पर अदालत ने सन्नी तथा बलकार सिंह मंत्री को 2 दिन
के पुलिस रिमांड पर भेज दिया था वहीं 2
अन्य फरार आरोपियों तीर्थ सिंह नंबरदार तथा सत्या देवी की तलाश में
छापेमारी शुरू कर दी गई थी. इन दोनों अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की खबर सुनते ही वह
फरार हो गए थे. पुलिस रिमांड के दौरान पुलिस ने कुलविंदर सिंह के जले हुए घर से
उसका वह फोन भी बरामद कर लिया था, जिस फोन
द्वारा जार्डन से लौटने के पश्चात उसने विडीयो बनाकर यह आरोप लगाया था कि
कैसे-कैसे ये चारो लोग उसकी पत्नी का यौन शोषण और उसे ब्लैकमेल कर रहे थे. पुलिस उस फोन को इसलिए भी अहम् मानकर चल रही थी, कि कुलविंदर को उसी फोन
पर किसी ने वह अश्लील विडीयो भेजा था जिसके कारण इतना बड़ा कांड हुआ था. यदि किसी
ने उसे विडीयो भेजा था तो उसकी फुटेज भी उसके फोन में हो चाहिए थी. इसीलिए पुलिस
ने जाँच के फोन को फोरेंस्सिक लेब मौहाली भेज दिया था क्योंकि आग में जलजाने के
कारण फोन को भी नुकसान पहुंचा था. सन्नी का फोन पुलिस ने उससे बरामद कर लिया था और
उस विडीयो को भी अपने कब्जे में ले लिया था जिसकी बिना पर वह मनदीप कौर को
ब्लैकमेल करता था.
इस पूरे मामले के दौरान कुलविन्द्र सिंह
की माँ महिंदर कौर रो-रो कर सवाल करती रही थी, कि उन्होंने पापियो का क्या बिगाड़ा
था जो हमारा हँसता खेलता परिवार तबाह करके मेरा बुढ़ापा खराब कर दिया है. कुलविंद्र
सिंह उर्फ बुग्गा की बड़ी बहन जसविंद्र कौर जो अभी तक अस्पताल में भर्ती थी ने कहा
कि हमारा हंसता घर तबाह करने वाले लोग सख्त सजा के हकदार हैं और यदि हमारे देश का
कानून इन 4 कथित आरोपियों को फांसी
की सजा देता है तो ही हम समझेंगे कि कानून गरीबों को
इंसाफ देता है, समाज विरोधी तत्वों के साथ किसी भी किस्म
की रियायत नहीं होनी चाहिए.
अब इस नए मामले ने सरकार द्वारा महिलाओं
से छेड़छाड़ व उनका शोषण रोकने के लिए बनाए गए सख्त कानूनों के बावजूद समाज में
घूमने वाले उन असामाजिक तत्वों को कटघरे में ला खड़ा किया है जो इतने सख्त कानूनों
के बावजूद उन मासूम महिलाओं को अपना निशाना बना रहे हैं जो बदनामी के कारण पुलिस
के समक्ष शिकायत भी दर्ज करवाने से कतराती है. इस पूरे मामले ने यह साबित कर दिया है कि दिल्ली के दामिनी कांड के बाद
केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं से जुड़े अपराधों व शोषण को रोकने के लिए
चाहे कितने भी सख्त कानून बना दिए गए हों पर इसका उन दरिंदों पर कोई खास असर देखने
को नहीं मिल रहा. ऐसे समाज विरोधी तत्व उन महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर खतरनाक
हद तक ब्लैकमेल करते हैं जो पारिवारिक क्लेश तथा समाज में बदनामी के डर के कारण
उनकी करतूतों को झेलती रहती हैं. कई परिवारों का अंत तो बेहद दर्दनाक व चौंकाने
वाला होता है.
कैंडल मार्च
गौर
हो कि किसी महिला की अश्लील तस्वीरें
बनाकर उसकी वीडियो बनाने का यह कोई नया मामला नहीं है. इससे पहले भी ऐसे आपराधिक
तत्वों से दुखी होकर कई महिलाएं पुलिस को शिकायत देकर ऐसे अपराधियों को सलाखों के
पीछे भेजने की हिम्मत कर चुकी हैं लेकिन मनदीप कौर के मामले में पीड़िता द्वारा
पुलिस के समक्ष आरोपियों की शिकायत न करना कहीं न कहीं उक्त परिवार की बर्बादी का सबसे
अहम कारण बन गया. हालांकि नए कानूनों के मुताबिक ऐसे मामलों में महिला की शिकायत
पर तुरंत कार्रवाई करने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं वहीं पूरे मामले की जांच
में जुटी पुलिस टीम का मानना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके द्वारा बनाई
गई महिला की वीडियो संबंधी जहां कई खुलासे सामने आ सकते हैं वहीं इस पूरे मामले
में पर्दे के पीछे छिपे कई और तथ्य भी सामने आने की भी सम्भावना है. फ़िलहाल रिमांड
अवधि समाप्त होने के बाद गुरप्रीत उर्फ़ सन्नी और बलकार सिंह को अदालत में पेश किया
गया जहाँ अदालत के निर्देश पर दोनों को न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया
था. इस कांड से जुड़े दो अभियुक्तों की तलाश पुलिस बड़ी सरगर्मी से कर रही थी कथा
लिखे जाने तक दोनों फरार था.
इस मामले में पुलिस की मुश्किलें अभी तक
कम नहीं हुई थी. कुलविंदर ने विदेश से लौट कर तेल छिड़क अपने पूरे परिवार को जिंदा
जला दिया था, इस घटना को अंजाम देने से
पहले उसने अपने मोबाइल में पत्नी मनदीप कौर को ब्लैकमेल करने और अश्लील वीडियो
तैयार करने के लिए गुरप्रीत सिंह सन्नी, बलकार सिंह मंत्री,
तीर्थ सिंह नम्बरदार और सत्या को जिम्मेवार बताया था, वहां मनदीप कौर ने भी अपनी मौत से कुछ पल पहले ड्यूटी मैजिस्ट्रेट,
सविल सर्जन और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में उक्त चारों आरोपियों को
अपने परिवार की मौत के लिए जिम्मेवार बताकर सख्त सजा देने की मांग की थी.
गिरफ्तारी से बचे दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी को लेकर शहर की कई समाजसेवी संस्थाओं
ने आवाज़ उठाते हुए रोष मार्च निकला था. मृतक कुलविंद्र सिंह बुग्गा के घर के सामने
से शुरू हुआ यह कैंडल मार्च विभिन्न स्थानों से होता हुआ करीब डेढ़ घंटे बाद वापस
पीड़ित परिवार के घर आगे आकर सम्पन्न हुआ. कैंडल मार्च के आगे छोटे बच्चे हाथों में
पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए बैनर पकड़े हुए थे और उनके पीछे नौजवान,
बुजुर्ग व महिलाएं भी शामिल थीं.
(पुलिस
सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण )
--हरमिंदर कपूर




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