--बेटी बरी-सुपारी किल्लर को उम्रकैद--
अमृतसर का दीदार गैस एजेंसी की मालकिन राजिंदर कौर की हत्या का बहुचर्चित मामला. राजिंदर कौर की हत्या उसी की बेटी ने ही अपने प्रेमी को 5 लाख रुपये की सुपारी देकर करवाई थी पर साक्ष्यों के अभाव से अदालत ने उसे बरी कर दिया.

बेटी ने ही सुपारी देकर अपनी माँ की हत्या करवाई थी यह बात सुनकर सभी रिश्तेदारों के होश उड़ गए थे. किक्की को उसके माँ-बाप ने बड़े लाड प्यार से पाला था. अपनी माँ की मौत का दिल दहलाने वाला मंजर देखकर उसने मगरमच्छ के आंसू भी बहाए थे और पुलिस को भी इस असमंजस में डाले रखा था कि उसे अपनी माँ की मौत का बड़ा दुःख है और उनकी हत्या में उसका कोई हाथ नहीं है. जबकि हकीकत यह थी कि किक्की शुरू से ही पुलिस को झूठ बोलकर गुमराह करती रही थी. जब असलियत का खुलासा हुआ तो पुलिस के साथ उसके सगे संबंधियों के भी होश उड़ गए थे.
************************************** पुलिस को शुरू से ही यह केस झूठ की नींव पर खड़ा दिखाई दे रहा था. आगे चलकर पुलिस की मुश्किलें घटने की बजाय और ज्यादा बढ़ने वाली थी. इस केस से जुड़ा हुआ हर आदमी अपने को बेहद चालाक और पुलिस को बेवकूफ समझ रहा था. उनका ऐसा सोचना था कि जैसा-जैसा वो बोलेंगे वैसा-वैसा पुलिस मान लेगी. सिवाय अँधेरी गलियों में भटकने के पुलिस के हाथ अब तक कोई पुख्ता सुराग नहीं लगा था. फिर भी पुलिस टीम निराश नहीं थी और आखिर एक झूठ के पकड़े जाने से पूरे का पूरा मामला पुलिस के सामने खुद-बाखुद खुलता चला गया था.
नरेश नामक व्यक्ति ने थाना मकबूल पुरा अमृतसर में फोन द्वारा सूचना दी थी कि दीदार गैस एजेंसी की मालकिन 67 वर्षीय राजिंदर कौर की उनकी गोल्डन एवेन्यू स्थित कोठी नं – 5 में बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. सुचना मिलते ही थाना मकबूल पूरा के एसएचओ अमरीक सिंह, एसआई कुलदीप सिंह, एएसआई बलजिंदर सिंह, सुरजीत सिंह हवलदार प्रेम सिंह मुख्त्यार सिंह और लेडी हवलदार गुरविंदर कौर घटनास्थल पर पहुंचे थे. घटना वाली रात राजिंदर कौर कोठी में अकेली थी, उसका बेटा तजिंदर सिंह दो दिन पहले ही डलहौजी गया था और बेटी इन्दर राज कौर उर्फ़ किक्की किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी.   
राजिंदर कौर की हत्या बहुत ही सोचे समझे तरीके से की गई थी. वह शायद कोठी की दूसरी मंजिल पर थी. दूसरी मंजिल से बहना शुरू हुआ राजिंदर कौर का खून घर की पहली मंजिल तक आया था जहाँ खून से लथपथ उसका शव पड़ा था. 
टनास्थल को देख कर यह साफ़ लग रहा था कि हत्यारों को इस बात की पूरी जानकारी रही होगी कि मृतका घर में अकेली है और वो इस घर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ रहे होंगे. क्योंकि गेट के पास सीसीटीवी कैमरे लगे थे जो कोठी में हर आने जाने वाले की रिकार्डिंग करते थे, वो इस समय बेकार पड़े थे. हत्यारे गेट के पास लगे सीसीटीवी कैमरों को तोडकर बड़ी सावधानी से घर में घुसे थे और अपना काम कर चुपचाप वहां से निकल गए थे. मौकाए वारदात पर बिखरा हुआ सामान इस बात की साफ़ गवाही दे रहा था कि मरने से पूर्व मृतका की हत्यारों से लम्बी हाथापाई हुई होगी. प्रथम तफ्तीश में पता चला था कि रजिंदर कौर की नौकरानी सुबह के लगभग 11 बजे घर पर काम करने के लिए आई थी और उसने देखा कि जमीन पर खून से लथ-पथ राजिंदर कौर की लाश पड़ी थी. उसने घबराकर गैस एजेंसी फोन कर यह बात नरेश को बताई और नरेश ने आकर पुलिस के आलावा इस घटना की सूचना राजिंदर कौर की पुत्री इन्दर राज कौर उर्फ़ किक्की को भी दी थी. किक्की किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी. माँ की मौत की खबर मिलते ही वह भी उसी दिन मौका पर पहुंच गई थी. नरेश के कहे अनुसार एजेंसी का दो दिन का कैश कोठी में ही था. छुट्टी होने के कारण कैश बैंक में जमा नहीं करवाया गया था. बहरहाल प्रथमदृष्टया यह मामला लूट और हत्या का लग रहा था.
घटना की सूचना मिलते ही एडीसीपी परमपाल सिंह, डीसीपी क्राईम जगजीत सिंह वालिया, डीसीपी विक्रम पाल भट्टी, एसीपी बालकिशन सिंगला, एसीपी गौरव गर्ग, क्राईम टीम सहित घटनास्थल पर पहुंच गए थे. मौका से फिंगरप्रिंट प्रिंट और खून के सैम्पल लिए गए थे. डाग स्कवायड का ट्रेनी कुत्ता कोठी के चारों ओर चक्कर लगाकर बैठ गया था. हत्यारे कोठी से कितना कैश और जेवर ले गए थे इस बात का उस वक्त कोई अनुमान नहीं था. बहरहाल इं अमरजीत सिंह ने इन्दर राज कौर उर्फ़ किक्की के बयानों पर राजिंदर कौर की हत्या का मुकदमा अपराध संख्या- 07/15 पर धारा – 302/34 में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ दिनांक 21 जनवरी 2015 को दर्ज कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज कर मामले की गंभीरता से जाँच शुरू कर दी थी.  














                                                  एडीसीपी परमपाल सिंह
मृतसर के न्यू गोल्डन एवेन्यू की कोठी नम्बर-5 में मेजर दीदार सिंह औजला का परिवार रहता था. उनके परिवार में पत्नी राजिंदर कौर के अलावा बेटी इन्दरराज कौर उर्फ़ किक्की और बेटा तजिंदर सिंह उर्फ़ लाली थे. सन 1981 में मेजर साहब की मौत के बाद सरकार ने अनुकम्पा के आधार पर फौजियों की विधवाओं को पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसियां आदि वितरित की थी तो उस समय राजिंदर कौर ने भी एक गैस एजेंसी अपने नाम आवंटित करवा ली थी. राजिंदर कौर ने गैस एजेंसी का गोदाम और शोरूम सुल्तानविंड रोड के अजीत नगर में खोला था और स्वंय ही उस पर बैठा करती थी. कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब किक्की भी एजेंसी पर जाने लगी थी. लाली अभी पढ़ रहा था.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार राजिंदर कौर की हत्या दम घुटने से हुई थी. हालाँकि उसके सर पर चोटों के गहरे घाव थे पर उसकी मौत गला घोटे जाने के कारण ही हुई थी. दो दिन तक पुलिस को इस केस का कोई सिरा हाथ नहीं आया था. और पुलिस इस एंगल को मानकर चल रही थी कि हत्यारा राजिंदर कौर के परिवार का परिचित रहा होगा. लेकिन इस ओर कुछ ना मिलने के दो दिन बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दी थी. पुलिस ने राजिंदर कौर, उसके बेटे तजिंदर उर्फ़ लाली,  इन्दर कौर उर्फ़ और किक्की के फोन काल्स की डिटेल निकलवाई तो किक्की की काल डिटेल से उन्हें कई चौंकाने वाली बातें पता चली थी. इन कल डिटेल्स में पुलिस के सामने एक ऐसा नम्बर आया जिस पर किक्की की दिन रात कई-कई घंटे बातें होती थी. वह नम्बर किसी गणेश के नाम रजिस्टर्ड था. इस बार  पुलिस के हाथ कुछ ऐसा लगा था जिसके सहारे वह अपनी जाँच को आगे बढ़ा सकती थी. इसके पहले पुलिस सिर्फ अँधेरी गलीयों में ही भटक रही थी. पोलिस ने कोठी नम्बर-5 के पड़ोसियों और गैस एजेंसी पर काम करने वालों से भी पूछताछ की थी. इस पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे थे. यह बात तो तय थी कि जो कुछ भी हुआ था. वह कोठी के अन्दर से ही हुआ है. बाहर के किसी व्यक्ति का इस हत्याकांड से कोई लेना देना नहीं था. वर्ना हत्यारे राजिंदर कौर की ही हत्या क्यों करते. हत्यारे एक रहे हों या दो, इस बात से अभी कोई फर्क नहीं पड़ना था. समझने वाली बात यह थी कि आखिर राजिंदर कौर की ही हत्या क्यों की गई थी. उसकी हत्या से किसे फायदा पहुंचने वाला था. आखिर घटना के चौथे दिन दो ऐसे गवाह खुद सामने से चलकर पुलिस के पास आये जिन्होंने इस केस का रुख पलट कर हत्यारों का चेहरा पुलिस के सामने रख दिया था.
दिनांक 28 जनवरी 2015 को पुलिस ने राजिंदर कौर की हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था. एक थी खुद मृतका राजिंदर कौर की बेटी इन्दर राज कौर उर्फ़ किक्की और दूसरा उसका प्रेमी गणेश था जो स्थानीय भुल्लर अस्पताल में कम्पाऊण्डर और चतुरश्रेणी कर्मचारी था. गणेश गुन्दली चौगान, नूरपुर-हिमाचल प्रदेश का निवासी था और पिछले ढाई सालों से किक्की के साथ उसके नाजायज़ सम्बन्ध थे. गणेश किक्की के बीमार भाई तजिंदर की देखभाल के लिए उनके घर आता था और इसी बीच किक्की के साथ उसके अवैध सम्बन्ध बन गए थे. बेटी ने ही सुपारी देकर अपनी माँ की हत्या करवाई थी यह बात सुनकर सभी रिश्तेदारों के होश उड़ गए थे. किक्की को उसके माँ-बाप ने बड़े लाड प्यार से पाला था. अपनी माँ की मौत का दिल दहलाने वाला मंजर देखकर उसने मगरमच्छ के आंसू भी बहाए थे और पुलिस को भी इस असमंजस में डाले रखा था कि उसे अपनी माँ की मौत का बड़ा दुःख है और उनकी हत्या में उसका कोई हाथ नहीं है. जबकि हकीकत यह थी कि किक्की शुरू से ही पुलिस को झूठ बोलकर गुमराह करती रही थी. जब असलियत का खुलासा हुआ तो पुलिस के साथ उसके सगे संबंधियों के भी होश उड़ गए थे.
अक्सर देखा गया है कि जायदाद की खातिर इन्सान अपने सभी रिश्ते भुलाकर अपराधिक घटनाओं को अंजाम दे जाता है, मगर किक्की ने ने तो दरिंदगी की सारी हदें पार कर अपने प्रेमी को 5 लाख की सुपारी देकर जन्म देने वाली माँ को ही मरवा डाला था. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया और रिमांड के दौरान गणेश की निशानदेही पर लोहे की राड और खून सने कपड़े आदि बरामद कर लिये थे. बाद में दोनों को जेल भेजा गया था.
                                                      पुलिस हिरासत में दोषी गणेश 
पुलिस को राजिंदर कौर के हत्याकांड की जो कहानी पता चली थी और जिसके आधार पर उन्होंने चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी वह यह थी कि इस हत्याकांड की मूल वजह वो जायदाद थी जो मृतका राजिंदर कौर ने किक्की के नाम ना करके अपने बेटे तजिंदर उर्फ़ लाली के नाम कर दी थी. दरअसल लाड प्यार से पली किक्की बचपन से ही अपनी मर्जी करने वाली एक जिद्दी और अड़ियल स्वभाव की लड़की थी. उम्र के साथ उसका यह पागलपन भी बढ़ता गया था. पिता की मृत्यु के समय वह मात्र 4-5 वर्ष की रही होगी. पिता की मृत्यु के बाद माँ राजिंदर कौर का सारा वक्त गैस एजेंसी सँभालने में गुजरता था. ऐसे में किक्की बेलगाम होती चली गई थी. यहाँ यह बात कहना भी गलत ना होगा कि  बच्चों को सुविधाओं और ऐश आराम के साथ माता-पिता के दिशा निर्देशों की भी सख्त जरूरत होती है, अन्यथा परिणाम भयानक ही निकलते है. इस मामले में भी यही हुआ था. कालेज तक पहुँचते वह एक दिशाहीन, भटकी हुई युवती बन चुकी थी. शराब के नशे में और क्लबों में ख़ुशी तलाशना उसकी आदत बन चुकी थी. दूसरे सहपाठियों को नीचा दिखाना उसका मनपसन्द शौक था. माँ द्वारा मेहनत से कमाया पैसा वह पानी की तरह बहाने लगी थी. उसके दोस्तों में लडकियाँ कम लडके अधिक थे. कपड़ों की तरह ब्वाय फ्रेंड बदलना उसका स्वभाव बन गया था. माँ की किसी बात का जवाब ना देना, आधी-आधी रात को घर लौटना. ऐसी तमाम खूबियाँ किक्की में थी. पढ़ाई पूरी कर उसने माँ के साथ गैस एजेंसी पर बैठना शुरू किया था वह भी अपने स्वार्थ की खातिर. गैस एजेंसी से पैसे उठाकर वह अपनी अय्याशियों में उडा दिया करती थी. उसकी इन हरकतों से राजिंदर कौर बड़ी दुखी थी. वह मन ही मन अन्दर घुलती रहती थी. वह इस आशा से अपने मन पर पत्थर रख लेती थी कि शादी के बाद जब किक्की अपने घर चली जाएगी तब उसे भी चैन का साँस नसीब होगा पर यह उसकी भूल थी. 37 साल की हो जाने के बाद भी किक्की शादी करने का नाम नहीं लेती थी. ऐसे में आपसी रिश्तों में जहर घुल गया था. राजिंदर कौर किक्की को समझा-समझा कर हार चुकी थी, पर दिन पर दिन कम होने की बजाय किक्की की नादानियाँ बढ़ती चली जा रही थी. इसबीच उसके गणेश से सम्बन्ध बन गए थे. जो काम वह घर के बाहर जाकर किया करती थी अब वह सुविधा उसे गणेश के माध्यम से घर पर ही मिलने लगी थी. राजिंदर कौर को जब इस बात का पता चला तो उसने हंगामा करते हुए किक्की को बहुत कुछ समझाया, पर किक्की ने बिलकुल परवाह नहीं की थी. और घर में ही गणेश के साथ अपनी अय्याशी चालू रहने दी थी. घटना से कुछ दिन पहले किक्की और राजिंदर कौर के बीच पैसों को लेकर जबरदस्त झगड़ा हुआ था. किक्की को ना सुधरता देखकर राजिंदर कौर ने उसका गैस एजेंसी पर आना बंद करवा दिया साथ ही उसके जेब खर्च पर भी पाबन्दी लगा दी थी. यह सब देख किक्की तिलमिला उठी थी. उसने राजिंदर कौर से इस विषय में बात की तो राजिंदर कौर ने कहा, यदि वह अपने आप को नहीं सुधारती और एक शरीफ घर की बच्ची की तरह घर में पेश नहीं आती तब तक उसका उससे कोई सम्बन्ध नहीं है. राजिंदर कौर ने किक्की को सुधारने के लिए यह कदम उठाया था मगर इसका उल्टा ही परिणाम निकला था. किक्की यारों दोस्तों और अपनी जान-पहचान वालों से पैसा कर्ज लेकर अपनी अय्याशी पूरी करने लगी थी. इस बात का राजिंदर कौर को और अधिक दुःख पहुंचा था. बेटी के कर्ज को लेकर उसकी बड़ी बदनामी भी हुई थी. अंत में राजिंदर कौर ने एक और सख्त कदम उठाया जो आगे चलकर उसकी जान का दुश्मन बन गया था. राजिंदर कौर ने अपनी सारी चल- अचल सम्पति, बिजनेस आदि अपने बेटे तजिंदर सिंह के नाम कर दिया था. किक्की के नाम उसने एक रुपैया भी नहीं छोड़ा था. इस बात का पता लगने पर किक्की आग बबूला हो उठी थी. उसे सपने में भी यह उम्मीद नहीं थी कि राजिंदर कौर ऐसा भी कुछ कर सकती है. घटना से कुछ दिन पहले इसी बात को लेकर माँ- बेटी में जमकर झगड़ा हुआ था. राजिंदर कौर अब किसी भी कीमत पर किक्की को आज़ादी नहीं देना चाहती थी.
णेश और किक्की के बीच लगभग ढाई सालों से अवैध सम्बन्ध स्थापित थे. इन सम्बन्धों को बनाये रखने के लिए किक्की गणेश को पैसा देती थी. जिस कारण वह पूरी तरह से किक्की के चंगुल में फंस कर उसका गुलाम बना हुआ था. यदि किक्की का बैंक खाली हो जाता तो जाहिर सी बात थी कि गणेश की जेब भी खाली हो जानी थी. इसलिए चिंता गणेश को भी थी. इन्दर राज कौर उर्फ़ किक्की इतनी शातिर दिमाग थी कि जहाँ वह खुद अपनी जरूरते पूरी करने के लिए गणेश का इस्तेमाल कर रही थी वहीँ उसका खुराफाती दिमाग गणेश के हाथों अपनी ही माँ राजिंदर कौर की हत्या करवाने की साजिश तैयार करने लगा था. क्योंकि जब से उसे पता चला था कि करोड़ों की जायदाद उसकी माँ ने तजिंदर सिंह के नाम कर दी है उसी दिन से ही किक्की ने राजिंदर कौर की हत्या करने का मन बना लिया था. अपनी माँ के विरुद्ध उसके मन में जबरदस्त जहर भरा पड़ा था. राजिंदर कौर की हत्या की योजना बनाने के बाद उसने गणेश शर्मा को 5 लाख रुपये की सुपारी देकर राजिंदर कौर का कत्ल करने के लिए तैयार कर लिया था. अपनी योजना के तहत किक्की ने सबसे पहले अपने भाई तजिंदर को 3 दिन पहले घूमने-फिरने के लिए मनाली-डलहौजी भेज दिया था. इसके बाद 21 जनवरी को वह खुद दिल्ली जाने का बहाना करके घर से निकल गई थी. पीछे से गणेश का रास्ता साफ़ हो गया था. तस्सली करने के लिए हत्या से एक दिन पूर्व किक्की ने तजिंदर को फोन करके पूछा था. कि वह घर वापिस कब लौट रहा है. तजिंदर ने बताया था कि वह अभी कुछ दिन और मनाली में रहेगा. गणेश के लिए राजिंदर कौर की हत्या करने के लिए अब पूरा रास्ता साफ़ था. 20-21 की मध्य रात्रि वह सीसीटीवी कैमरों को बेकार कर कोठी में दाखिल हुआ. और कमरे में सो रही राजिंदर कौर के सिर पर पहले तो उसने लोहे की छड से वार कर उसे गंभीर घायल कर दिया था. उस के उपरांत बिजली की तार से उसका गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया और चुपचाप अपना काम खत्म कर वह वहां से कुछ दूरी पर स्थित अपने कमरे पर लौट गया और वहीँ से फोन द्वारा उसने किक्की को काम हो जाने की खबर दी थी.
राजिंदर कौर की हत्या के समय किक्की ने पुलिस को गुमराह करने के लिए यह ब्यान दिया था कि उसका भाई मनाली गया हुआ था और वह किसी काम से दिल्ली गई हुई थी. जबकि वह अमृतसर के ही एक होटल में टिकी हुई थी. हत्या के दो दीन बाद गणेश शर्मा गायब हो गया था. किक्की और गणेश की काल डिटेल देखने के बाद और गणेश के गायब हो जाने के बाद हत्या की सीधी सुई इन दोनों पर चली गई थी. इस बीच वहां के पूर्व पार्षद तरसेम भोला ने मामले को नया मोड़ दे दिया था. 
                                                 प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधिकारी 
त्या के इस मामले की तहकीकात के बीच पुलिस को पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला ने 27 जनवरी 2015 को यह जानकारी दी कि इन्द्र राज कौर उर्फ किक्की उसके पास आई थी और उसने बताया था कि उसकी मम्मी ने अपनी सारी जायदाद की वसीयत उसके भाई तेजिन्द्र सिंह लाली के नाम पर कर दी है। उसकी मम्मी द्वारा उसे कोई भी जायदाद न दिए जाने के कारण वह बहुत ही गुस्से में थी. इस बात की रंजिश रखते हुए वह भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा निवासी गणेश कुमार को 5 लाख रुपए का लालच देकर अपनी मम्मी राजिन्द्र कौर की हत्या करवा बैठी है. उससे बहुत भारी गलती हो गई है, इसलिए किसी न किसी तरह वह उसका बचाव करवा दे. इसी तरह मकबूल पुरा निवासी एक स्वतंत्र गवाह कश्मीर सिंह ने भी उसी दिन पुलिस को जानकारी दी थी कि भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले गणेश कुमार ने उसे बताया था कि वह इन्द्र राज कौर उर्फ किक्की नामक एक लड़की के कहने पर उसकी मां राजिन्द्र कौर की हत्या कर बैठा है. इस मामले में पुलिस उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है, इसलिए वह किसी न किसी तरह उसका बचाव करवा दे. इन दोनों गवाहों द्वारा सामने आने पर हत्या व डकैती के माने जा रहे इस मामले  में एकदम नया मोड़ आ जाने से यहीं पर्दा गिर गया था.
इस केस में पुलिस ने जितने भी गवाह बनाये थे उनमें से अहम गवाह पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला और एक अन्य व्यक्ति था. पुलिस ने भले ही अपनी तरफ से इस केस की तफ्तीश में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी और चार्जशीट पुख्ता सबूतों की बिना पर ही बनाकर अदालत में पेश की थी. लेकिन गवाहियों के दौरान इस केस में काफी उठा पटक हो गई थी जिस कारण कई गवाह अपनी बात से मुकर गये थे. फिर भी पुलिस के पास गणेश शर्मा के खिलाफ पक्के सबूत थे जिसे लाख कोशिशों के बाद भी अदालत में झुठलाया नहीं जा सका था.
गवाहों के ब्यान और मौका से मिले साक्ष्यों के आधार पर माननीय जिला एवं सत्र न्यायधीश कर्मजीत सिंह की अदालत ने दिनांक 25 मई 2018 को मृतका की जिस बेटी पर सुपारी देकर अपनी मां की हत्या करवाने के आरोप लगाए गये थे, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. लेकिन जिस हिमाचल प्रदेश निवासी हत्यारोपी गणेश पर सुपारी लेकर हत्या किए जाने के आरोप लगाए गए थे, उसके खिलाफ आरोप सही पाए जाने पर अदालत ने उसे धारा -302 के तहत उम्रकैद की सजा के साथ-साथ 10 हजार रुपए जुर्माने की भी सजा सुनाई है. जुर्माना राशि अदा ना करने पर उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी.

—हरमिंदर कपूर




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Milan Tomic

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