रेखा की नादानी से
\\उजड़ा परिवार //
साधारण शक्ल सूरत वाले
लोकेश के पास इतनी खूबसूरत बीवी देख वीरेंदर के कलेजे पर सांप लोटने लगे थे. वह हर हाल में रेखा से
अपने सम्बन्ध बनाना चाहता था. इसके लिए दो-चार बार उसने रेखा को छेड़ने की कोशिश भी
की थी पर रेखा ने उसे घास नहीं डाली तो शातिर दिमाग वीरेंदर ने रेखा के निकट आने
का एक दूसरा रास्ता अपनाया.
रेखा ने वीरेंदर को प्यार से समझाते हुए कहा था.
‘’देखो वीरेंदर, बात को समझने की
कोशिश करो. जो बात तुम कह रहे हो वह असम्भव है, मेरा अपना एक घर संसार है, पति है,
दो बच्चे है, अच्छीखासी गृहस्थी है हमारी. और तुम कहते हो मैं यह सब छोड़ छाड़ कर
तुम्हारे साथ भाग चलूं. ऐसा नहीं हो सकता है. हम दोनों अच्छे दोस्त है और हमेशा
दोस्त ही रहेंगे. हमारे बीच जो रिश्ता है, जो सम्बन्ध है. वह सदैव ही बने रहेंगे.
हाँ एक बात का मैं वादा करती हूँ कि जो रिश्ता हम दोनों के बीच बना है उसे तोड़ने
में मैं पहल नहीं करूँगी. इतना कह कर रेखा
ने अपनी बात समाप्त कर दी.
‘’तुम मेरी बात समझने की कोशिश
नहीं कर रही हो,’’
‘’मैं सब समझ रही हूँ वीरेंदर,
मैं कोई दूध पीती बच्ची नहीं हूँ. तुम चाहते हो मैं अपने पति को, अपने बच्चों को
हमेशा के लिए छोडकर तुम्हारे साथ चली आऊ. यह मुझे मन्जूर नहीं है.’’
‘’तुम मेरी बात सुनोंगी भी या
नहीं. तुम अच्छी तरह जानती हो मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ, तुम्हारे बिना एक
पल जुदा रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता और इसी लिए कह रहा हूँ कि यह पति और
बच्चों का मोह त्याग कर मेरे साथ चली चलो, हम अपनी एक नई दुनियां बसायें गे जहाँ
सिर्फ मैं हूँगा और तुम. रहा सवाल बच्चों का तो हमारे तुम्हारे और बच्चे पैदा हो
जाएँगे. यौम नहीं जानती तुम मेरी कल्पना हो, तुम्हें पाना ही मेरा एक मात्र सपना
है. ’’
‘’वाह वीरेंदर बाबू वाह, रेखा ने
वीरेंदर का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, ‘’तुम्हारे सपने और कल्पनाओं
को पूरा करने के लिए मैं अपने परिवार की बलि चढ़ा दूँ.’’ ऐसा
हरगिज़ नहीं होगा.’’
‘’ अच्छी तरह सोच लो रेखा रानी.
मैं तुम्हें बदनाम और बर्बाद करके रख दूंगा.’’
अपनी बात मानते ना देखकर वीरेंदर ने रेखा को
धमकी देते हुए कहा.
‘’ बदनाम करने की धमकी किसे दे
रहे हो.’’ अब रेखा भी गुस्से में आ गई थी. ‘’ बर्बाद तो मैं उसी दिन होगई थी जिस दिन मैंने अपने सीधे सादे पति को धोखा
देकर तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाये थे. रहा बदनामी का सवाल तो तुम्हारे साथ
सम्बन्धों को लेकर पूरा मौहल्ला मुझ पर थूकता है, यहाँ तक कि मेरे पति को भी मेरे
और तुम्हारे सम्बन्धों के बारे में पता है. उनकी जगह कोई और होता तो कब का निकाल
बाहर किया होता मुझे अपने घर से. पर उनकी शराफत तो देखो, उनहोंने कभी मुझे
तुम्हारे नाम का ताना देकर भी ज़लील नहीं किया, अरे ऐसे पति के तो पैर धो-धोकर पीने
चाहिए और तुम कहते हो मैं ऐसे देवता समान पति को छोडकर तुम्हारे साथ भाग जाऊ.’’
‘’वाह क्या कहने, नौ सौ चूहे खाकर
आज बिल्ली हज को चली है, पतिव्रता और सती सावित्री होने का ढोंग करके दिखा रही है
मुझ को. वह दिन भूल गई जब अपने उसी देवता समान पति की आँखों में धूल झोंक कर मुझे
मिलने आया करती थी.’’
‘’ अपनी जिन्दगी की इस भयानक भूल
को मैं कैसे भूल सकती हूँ, जब तुम्हारे सपनों के झूठे मायाजाल में फंसकर मैंने
अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया था, शायद मैं आज अपनी उसी गलती की सज़ा भुगत रही
हूँ.’’ यह बात कहते हुए एकाएक रेखा क्रोध से भड़क उठी और
गुस्से से उसने वीरेंदर को कहा, ‘’ जाओ निकल जाओ मेरे घर से,
अपनी मनहूस शक्ल दोबारा मत दिखाना और जो करना है कर लेना, अब दफा हो जाओ.’’
रेखा का पति लोकेश मूलतः जिला सहारनपुर (उतरप्रदेश) के गाँव कंबोह माजरा के
निवासी है. साल 2006 में उसकी शादी देहरादून ( उतराखंड ) के गाँव दंदोली निवासी
ठेपा दास की मंझली बेटी रेखा के साथ हुई थी, लोकेश साधारण शक्ल सुरत का सीधा-सदा
युवक था जबकि रेखा बहुत खूबसूरत थी. रेख जैसी खूबसूरत पत्नी पाकर लोकेश अपने आपको
बड़ा भाग्यशाली समझता था. वह रेखा से बहुत प्यार करता था और रेखा भी इसे अपने भाग्य
का फैसला मानकर बहुत प्यार करती थी कुल मिला कर दोनों पति-पत्नी एक दूसरे से
संतुष्ट थे. समय रहते वह दो बच्चों 10 वर्षीय कार्तिक और 7 वर्षीय कृष के
माता-पिता बन गए थे. लोकेश के माता-पिता के पास थोड़ी सी मात्र गुज़ारे लायक खेती थी
जिस से घर खर्च भी बड़ी मुश्किल से चलता था इसी लिए अरसा 7 साल पहले लोकेश काम की
तलाश में लुधियाना चला आया था. पहले पहल वह अपने पैर जमाने के लिए छोटी-मोटी
नौकरियां करता रहा और अच्छे काम की तलाश में भी जुटा रहा था, आखिर उसे सन 2014 में
भारत की प्रसिद्ध साइकल कम्पनी हीरो में नौकरी मिल गई थी यहाँ वेतन भी अच्छा था और
अन्य सुख सुविधाएँ भी थी. हीरो में नौकरी लगने के बाद लोकेश ने रहने के लिए सुरजीत
नगर 33 फुटा रोड गली नम्बर-1 ग्यासपुरा
स्थित एक वेहड़े में किराये पर कमरा ले लिया और गाँव से अपनी पत्नी रेखा और बच्चों
को भी लुधियाना ले आया था. लुधियाना आने के बाद लोकेश ने अपने दोनों बच्चों को
सरकारी स्कूल में दाखिल करवा दिया था. दोनों पति पत्नी अब मज़े में रहने लगे थे कि
अचानक एक दिन वीरेंदर सिंह उर्फ़ चाचा की नज़र रेखा पर पड़ी. वीरेंदर भी उसी गली
नम्बर -1 में लोकेश के घर के सामने ही रहता था. शातिर वीरेंदर की नज़र जब खूबसूरत
रेखा पर पड़ी तो वह उसे पाने के लिए छटपटाने लगा. उसने रेखा को भी देखा था और उसके
पति लोकेश को भी. साधारण शक्ल सूरत वाले लोकेश के पास इतनी खूबसूरत बीवी देख वीरेंदर
के कलेजे पर सांप लोटने लगे थे. वह हर हाल
में रेखा से अपने सम्बन्ध बनाना चाहता था. इसके लिए दो-चार बार उसने रेखा को छेड़ने
की कोशिश भी की थी पर रेखा ने उसे घास नहीं डाली तो शातिर दिमाग वीरेंदर ने रेखा
के निकट आने का एक दूसरा रास्ता अपनाया. उसने रेखा के पति लोकेश के साथ दोस्ती कर
ली और दोस्ती की आड़ लेकर वह अब लोकेश के घर आने-जाने लगा था. जबकि दूसरी ओर
वीरेंदर के नापाक इरादों से अनजान भोला-भला लोकेश उसे अपना हितैषी समझता रहा था. रेखा
को अपने जाल में फंसाने के लिए उसने पति लोकेश व उसमें ऐसी दरार पैदा की कि अक्सर
घर में झगड़ा रहने लगा था।
लोकेश की अधिकांश नाईट डयूटी होती थी जिसका वीरेंदर ने जमकर फायदा उठाया था. शातिर
वरिंद्र ने रेखा को अपने प्रेम जाल में फंसाकर अवैध संबंध स्थापित कर लिए. दोनों
के बीच बने अवैध संबंधों ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया, जब वरिंद्र ने रेखा पर पति व बच्चों को छोड़कर साथ भागने का
दबाव बनाना शुरू किया. उस समय रेखा को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसने
रेखा का पति लोकेश बेमौत मारा गया
अपने पति और
बच्चों को धोखा देकर अच्छा नहीं किया परन्तु अब क्या हो सकता था, अब तो वह शैतान
के जाल में फंस चुकी थी.
पहले तो रेखा उसे टालती रही परंतु जब वह उसे
अधिक परेशान करने लगा तो रेखा ने पति व बच्चों को छोड़कर उसके साथ भागने से साफ
इंकार कर दिया था. रेखा के स्पष्ट इंकार करने से वीरेंदर तड़प कर रह गया, हर प्रकार
के हथकंडे अपनाने के बाद भी जब वह नाकाम हो गया तो उसने रेखा को सबक सिखाने की ठान
ली थी.
रेखा द्वारा किए इंकार से गुस्साया वीरेंदर 2
अप्रैल की सुबह उस समय मौका पाकर रेखा के
घर पहुंचा, जिस समय वह घर में अकेली थी. उसका
पति लोकेश ड्यूटी पर व बच्चे स्कूल गए हुए
थे, वीरेंदर ने रेखा से साफ शब्दों में
पूछा कि वह उसके साथ भागेगी या नहीं.? रेखा के इंकार करने पर वीरेंदर ने भागकर रसोई से चाकू उठाकर रेखा के पेट में
वार किया अचानक हुए इस वार से रेखा घबरा गई उसे वीरेंदर से ऐसी उम्मीद नहीं थी.
उसने वीरेंदर के वार से बचने की कोशिश की लेकिन
बचाव करते समय रेखा की एक उंगली कट गई. तत्पश्चात वीरेंदर ने उसे धका देकर बेड पर
गिरा दिया और उसके गले में चुनरी डालकर उसका गला घोंटकर हत्या कर दी. वारदात को
अंजाम देने के बाद वह अपने घर चला गया और अपने घर पर रखी चूहे मारने की दावा
निगलकर आत्महत्या करने का प्रयास किया.
इसी दौरान संदेह होने पर मोहल्ले के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया.
इसी दौरान संदेह होने पर मोहल्ले के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया.
रेखा के दोनों बच्चे कार्तिक और कृष- इन मासूमों का क्या दोष था.?
सूचना मिलते ही ए.सी.पी. अमन बराड़ व डाबा थाना के प्रभारी इं गुरविंदर सिंह
घटनास्थल पर पहुंच गए उन्हों ने वीरेंदर को काबू करके जब लोकेश के घर जाकर देखा तो बिस्तर
पर रेखा का शव पड़ा हुआ था. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल
अस्पताल भेज दिया. लोकेकेश की तहरीर पर इं गुरविंदर सिंह ने रेखा की हत्या के
अपराध में वीरेंदर के खिलाफ अपराध संख्या -296 पर भारतीय दंड विधान सहिंता की धारा
302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया जहाँ अदालत के आदेश पर उसे जिला
जेल भेज दिया गया था. रेखा ने जो किया वह उसे मिल गया, अपने पति से बेवफाई की सज़ा
रेखा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी पर इस सारे प्रकरण में लोकेश और उन के बच्चो.
का क्या दोष था जिस की सज़ा निर्दोष होते हुए भी अब वह आजीवन भोगते रहें गे . यह बात सत्य है कि लोकेश के मुकाबले उसकी पत्नी
रेखा कहीं अधिक खूबसूरत थी. पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते में दरार डालने के लिए
शातिर वरिंद्र ने इसी फर्क को मुख्य वजह बनाते हुए हंसते-खेलते परिवार में जहर घोल
दिया. परिवार पर अचानक पहाड़ टूट जाने से न दोनों बच्चे अनाथ हो गए है.
(पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रूपांतरण)
-हरमिंदर कपूर
(पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रूपांतरण)
-हरमिंदर कपूर


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