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--नासमझी--
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दिल दहला देने वाला अग्निकांड – छोटी सी तकरार और संदेह की बलि
चढ़ा पूरा परिवार.
क्या किसी
के परिवार को जिन्दा जलाकर मौत के घाट उतारने के लिए यह वहज काफी है.?
लक्ष्मण सिंह और उनके पड़ोसी हरजिन्दर सिंह उर्फ जिन्दा लहौरिया के बीच
कहासुनी तो अक्सर चलती रहती थी पर पिछले कुछ दिनों से दोनों परिवारों के बीच
छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े होने भी शुरू हो गए थे. हालाँकि बात इतनी बड़ी नहीं
थी पर जिन्दा ने बेवजह बात का बतंगड़ बनाकर मामले को गम्भीर बना दिया था कि दोनों
परिवार एक दूसरे के खून के प्यासे बन बैठे थे. मौहल्ले की पंचायत ने दोनों
परिवारों को, विशेष तौर पर जिन्दा को कई बार सख्त ताकीद की थी कि वह अपनी हरकतों
से बाज आकर रोज-रोज का यह तमाशा बंद कर दे. पर जिन्दा ने कभी भी किसी की परवाह
नहीं की थी.
जिन्दा का कहना था कि लक्ष्मण सिंह के बेटे
कुलदीप सिंह ने उससे 5 लाख रूपए ब्याज पर उधार लिए थे जो अब तक नहीं लौटाए गये है.
पहले उसके रूपए लौटाए जाए और उसकी पत्नी की मौत की माफ़ी मांगी जाये. कुछ अरसा पहले
जिन्दा की पत्नी की मौत हो गई थी जिसका जिम्मेदार वह लक्ष्मण सिंह के परिवार को
ठहरता था. उसका कहना था कि लक्ष्मण सिंह का परिवार उसकी गैरमौजूदगी में उस की
पत्नी को परेशान किया करता था. इन लोगों के उसका जीना हराम कर रखा था. इन लोगों ने
उसे इतना दुःख पहुंचाया कि वह मर गई थी और उसके बच्चे अनाथ होकर रह गए थे. इस लिए
वह उन्हें कभी माफ़ नहीं कर सकता है.
लक्ष्मण सिंह के बेटे कुलदीप सिंह का कहना था कि
जो रूपए उसने कभी जिन्दा से लिए थे वह कब के लौटा चुका था. उसने जिन्दा का एक
रुपया भी नहीं देना है. उसने इस बात का भी खुलासा किया कि रुपये आदि का बहाना बना
कर जिन्दा द्वारा झगड़ा करने के पीछे मकसद यह है कि जिन्दा अपने घर पर बाहर से औरतें
बुलाकर धंधा करता है और वह और उसका परिवार जिन्दा के इस धंधे का विरोध करते है, इस
लिए जिन्दा नित नए-नए बहाने बना कर उनके परिवार से झगड़ा कर उन्हें परेशान करता है
ताकि हम उसकी बदमाशियों पर पर्दा डाले रखे और कुछ ना बोले.
मृतका राजवंत कौर
बात किया थी, दोनों परिवारों में किस बात की खुनस
थी यह समझना बेहद मुश्किल था. फिर भी दोनों परिवारों को समझाने वास्ते मोहल्लावासी
एक बार फिर जमा हुए और उन्होंनें दोनों परिवारों को अपने-अपने तरीके से समझया था.
75 वर्षीय लक्ष्मण सिंह और जिन्दा के पिता गेजा
सिंह आपस में बड़े अच्छे मित्र थे पर आगे उनकी संतानों का आपस में अधिक प्रेम नहीं
था. लक्ष्मण सिंह पिछले काफी अरसे से जिला होशियारपुर- टांडा की संत बाबा ईशर सिंह
कालोनी में रह रहे थे. लक्ष्मण सिंह किसान थे वह और उनका बीटा कुलदीप अपनी जमीन पर
ही खेतीबाड़ी का काम करते थे क्योंकि लक्ष्मण सिंह अब उम्रदराज हो चुके थे सो वह
अधिकांश अपने घर पर ही रहते थे और खेतीबाड़ी का काम कुलदीप सम्भालता था. लक्ष्मण
सिंह के परिवार में बेटे कुलदीप के अलावा उनकी 72 वर्षीय पत्नी गुरदेव कौर, कुलदीप
की पत्नी राजवंत कौर, 18 वर्षीय बेटा जसकरण सिंह. 16 वर्षीय बेटी परमिंदर कौर और
नवजात 10 माह का बेटा हरमनप्रीत सिंह थे.
बात दिनांक 6 मई 2018 की सुबह 6.30 बजे की है.
लक्ष्मण सिंह ने अपने बिस्तर से उठकर चाय बनाई और चाय ठंडी होने के लिए गिलास में
डाल कर रखने के बाद गली में बंधी अपनी गे को चारा डालने चले गए. चारा डालते समय
उन्होंने देखा कि जिन्दा अपने घर के बाहर खड़ा उन्हें घूर रहा था. यह कोई नई बात ना
थी, ऐसी जिन्दा की आदत थी और वह उसकी आदत से परिचित थे सो जिन्दा की ओर लक्ष्मण
सिंह ने ध्यान नहीं दिया था. जिन्दा भी उन्हें कुछ देर घूरने के पश्चात् सामने बनी
पीरों की मजार की ओर चला गया था और लक्ष्मण सिंह चाय का गिलास लेकर अपने घर के
आंगन में पड़ी कुर्सी पर बैठ कर चाय पीने लगे थे. चाय खत्म कर उन्होंने गिलास अभी
जमीन पर रखा ही था कि तभी जिन्दा, उसकी माँ और एक अन्य औरत, गली गलौच करते हुए
लक्ष्मण सिंह के घर में आ घुसी और बिना कोई बात किये जिन्दा की माँ ने कुर्सी पर
बैठे हुए लक्ष्मण के सिर पर ईंट दे मारी जिससे वह चक्करा कर कुर्सी से नीचे गिर
गया था. लक्ष्मण सिंह का पूरा परिवार इन सब बातों से बेखबर घर में सो रहा था और
उनका बेटा कुलदीप सिंह अपने किसी दोस्त की लड़की की शादी में शामिल होने के लिए
भोगपुर गया हुआ था. लक्ष्मण को ईंट मार घायल करने के पश्चात जिन्दा अपने साथ लाई
हुई पेट्रोल की कैन लेकर भीतर घर में घुस गया और उसने लक्ष्मण के परिवार के सोए
हुए सभी सदस्यों पर पेट्रोल छिडक कर आग लगा दी थी.
अचानक लगी इस आग ने सब को चौंककर रख दिया था. लक्ष्मण सिंह की पत्नी जो कि
आग लगने से पहले उठ चुकी थी ने जिन्दा को पकड़ने की कोशिश की थी और इसी कोशिश में
जिन्दा भी कुछ हद तक आग की लपटों की चपेट में आ गया था. इस के बाद वह मौके से फरार
हो गया था. आग लगने से लक्ष्मण सिंह का घर धू-धू कर जलने लगा था, उसके परिवार के
सभी सदस्य आग की भयानक लपटों के बीच घिर चुके थे किसी के बचने की कोई उम्मीद नहीं
थी आग की लपटों के बीच से रह-रहकर चीखने और बचाओ – बचाओ की आवाजें आ रही थी. कालोनी वासी आग में पानी डाल कर उसे बुझाने
का प्रयास कर रहे थे पर आग थी जो बेकाबू होकर बुझने का नाम ना ले रही थी. इसी बीच
किसी ने थाना टांडा पुलिस को इस अग्निकांड की सूचना दे दी थी.
मृतका गुरदेव कौर
सूचना मिलते ही थाना
टांडा मुखी प्रदीप सिंह, ए.एस.आई रछपाल सिंह, सुरिंदर सिंह, हवलदार- गुरमीत सिंह,
जगदेव सिंह, और जगजीत सिंह घटनास्थल पर पहुच गए था.पुलिस ने मौका पर पहुंच कर आग
बुझाने के प्रयास किये और फायरब्रिगेड को भी बुलवाया पर तब तक कुलदीप के 10 माह के
बेटे हरमनप्रीत की मौका पर ही मौत हो गई थी. जबकि परिवार के चार लोग आग में 90
फीसदी तक झुलस चुके हैं. 90 फीसदी झुलसी गुरदेव कौर पत्नी लछमण सिंह, रजवंत कौर पत्नी कुलदीप सिंह, जसकरण सिंह
पुत्र कुलदीप सिंह और परमिंदर कौर पुत्री कुलदीप सिंह को पुलिस की मदद से टांडा के
सरकारी अस्पताल में पहुंचाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद चारों को सिविल अस्पताल
होशियारपुर रेफर कर दिया गया था सभी की हालत नाजुक बनी हुई थी.
इस घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी जे एलांचेलियन भी
पहुंच गए थे. घटनास्थल का दौरा करने के बाद उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों का हाल
पता किया और थाना प्रभारी को दिशा निर्देश देने के बाद रवाना हो गए थे. एसएसपी के
आदेश पर पुलिस ने लक्ष्मण सिंह के बयानों पर इस दिलदहला देने वाले अपराध को अपराध
संख्या- 94 पर भारतीय दंड विधान सहिंता की धारा- 302-336-450-307-427 के तहत
मुख्यारोपी हरजिन्दर सिंह उर्फ जिन्दा लहौरिया, उसकी मां और गांव धुरिया की एक
अन्य महिला गुरमीत कौर पत्नी दविन्द्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें अपनी
हिरासत में ले लिया था. चूंकि आग लगाते और गुरदेव कौर से हुई हाथापाई में जिन्दा
भी झुलस गया था इस लिए जिन्दा को गिरफ्तार करने के बाद उसे भी अस्पताल में भर्ती
करवाया गया . परमिन्द्र कौर और उसका भाई जसकरण सिंह 10वीं कक्षा के छात्र थे जिनका परीक्षा परिणाम आज ही आया था, जिसमें वह
और उसका भाई पास हो गए हैं.
बहरहाल होशियारपुर के अस्पताल में कुलदीप सिंह की
पत्नी राजवंत कौर की भी मौत हो गई थी. और डाक्टरों ने बाकी बचे हुए तीन मरीजो
मृतका परमिन्द्र कौर
गुरदेव कौर, जसकरण सिंह और परमिंदर कौर को लुधियाना के डी.एम.सी अस्पताल में रैफर
कर दिया था. इस अग्निकांड, जिसकी भेंट पूरा एक परिवार चढ़ गया था की चर्चा पूरे शहर
भर में थी, लोग जिन्दा व इस घटना के जिम्मेदार बाकी लोगों को सबक सिखाने के लिए
सडकों पर उतर आये थे. जिन्हें पुलिस ने बड़ी मुश्किल से काबू किया था.
अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद जिन्दा व
इस अग्निकांड से जुड़े जिन्दा की माँ और गुरमीत कौर को जिला अदालत में पेश कर उसका
रिमांड लिया गया. लुधियाना रैफर होने के बाद 8 तारिक को कुलदीप के 18 वर्षीय बेटे
जसकरण की भी मौत हो गई थी. अथक प्रयासों के बाद भी डाक्टर उसे बचा नहीं पाए थे.
कुलदीप की माँ और बेटी की हालत भी बड़ी गम्भीर बनी हुई थी और अपने भाई जसकरण की मौत
के अगले दिन दिनांक 9 मई को परमिंदर की मौत भी हो गई थी. और इसीदिन ही इस
अग्निकांड के मुख्य आरोपी हरजिन्दर सिंह उर्फ जिंदा ने घबराकर थाना टांडा में
खुदकुशी कर ली थी. पुलिक के मुताबिक जिंदा ने हिरासत दौरान बाथरूम में अपनी पट्टियों
का फंदा बनाकर आत्महत्या की थी. पुलिस हिरासत में हुई जिन्दा की मौत की जाँच के
आदेश दे दिए गए है. अंत में 6 दिनों तक जिन्दगी
इस दिल दहला देने वाले कांड को अंजाम देने वाला दोषी जोगिन्दर सिंह उर्फ़ जिन्दा
और मौत के साथ लड़ते हुए इस परिवार
की मुख्या 72 वर्षीय गुरदेव कौर ने भी दम तोड़ दिया था. पलक झपकते ही एक ही परिवार
के 5 सदस्यों की बड़ी दर्दनाक मौत हो चुकी थी और इन जिन्दा लोगों को मौत के मुंह तक
पहुँचने वाला जिन्दा भी अपने अंजाम को पहुंच गया था. इन सब की मौत अपने पीछे हमारे
सभी समाज के लिए एक सवाल जरुर छोड़ गई है कि आपसी तकरार या रंजिश जैसी समस्या का
क्या यही एक विकल्प है, दूसरा कोई मार्ग नहीं बचता .?
अब तक इस हत्या और अग्निकांड के पीछे की जो वजह
समझ में आती है वह मात्र छोटी सी नासमझी जैसी बात और बेवजह का संदेह है.
आरोपित जोगिंदर सिंह उर्फ़ जिन्दा को लगता था कि
उसकी पत्नी की मौत का कारण लक्ष्मण सिंह का परिवार है वे उसकी पत्नी से झगड़ा कर
उसे परेशान करते थे.
जोगिंदर सिंह जिन्दा ने लक्ष्मण सिंह के बेटे
कुलदीप से पांच लाख रुपये लेने थे. दोनों के बीच पहले भी लेनदेन को लेकर झगड़ा हो
चुका था.
पैसों को लेकर हुए झगड़े के दौरान हर बार लक्ष्मण
सिंह के परिवार ने जोगिंदर सिंह जिन्दा पर अपने घर में बाहर से महिलाएं लाने का
आरोप लगाया था. कि वह अपने घर में गलत महिलाओं को लाकर अनैतिक कार्य करता है. क्या
किसी के परिवार को जिन्दा जलाकर मौत के घाट उतारने के लिए यह वहज काफी है.?
--साहिल कपूर





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