**आशिक दीवाना**
दीवाना-ए-इश्क में पागल हुए
आसिफ ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए पहले तो फंदा लगाने की सोची परंतु
रमजान का पवित्र महीना होने की वजह से वो यह कदम उठाने से तो खौफ खा गया पर मरने
के लिए अलसुबह वह भारत-पाक सीमा पर आ पहुंचा ताकि बार्डर पार करते हुए सेना की
गोली से मर सके.
‘’ आखिर वही हुआ जिसका मुझे डर था, आज सारा जहान
ही हमारे प्यार का दुश्मन बन बैठा है. जब अपनों ने ही साथ देने से साफ इंकार कर
दिया तो दूसरे किसी को क्या दोष दे.’’
‘’ मेरी बात मानों तो तुम एक बार भाई और
भाभीजान से बात करके देखो. आखिर किसी न किसी की तो मदद लेनी ही पड़ेगी.’’
‘’ कोई फायदा नहीं है शबनम,’’ आसिफ ने ठंडी आह भरते हुए कहा. ‘’ मै सबसे बात कर चुका
हूँ, अम्मी-अब्बू को भी यह बात बता चुका हूँ की अगर मेरा निकाह शबनम से नहीं हुआ
तो मैं जहर खाके मर जाऊंगा, पर उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर दिया था. कहने लगे,
‘मरना हो तो कहीं दूर जाकर मरना ताकि बिरादरी को मेरे मरने
की खबर न लगे.’ तुम्ही बताओ शबनम, क्या अपने कभी ऐसा व्यवहार
करते है, वो भी सगी औलाद के साथ.?
फिर कुछ देर तक दोनों के बीच ख़ामोशी छाई रही थी, सामने आये
मसले पर दोनों अलग-अलग तरीके से सोचने लगे थे पर उनकी समझ में ऐसी कोई बात नहीं आ
रही थी जिससे वह इस समस्या का सामना करते. आखिर आसिफ ने ही ख़ामोशी तोड़ते हुए कहा.
‘’ शबनम, क्यों न तुम ही अपने अम्मी-अब्बू या
भाभी से बात कर देखो, शायद कोई बात बन जाये. आखिर हम दोनों कोई गैर थोड़े ही है,
हैं तो सगे रिश्तेदार ही.’’
‘’आसिफ आप भी कैसी बातें करते है. आप क्या
समझते है कि मैं हाथ पर हाथ धरे बैठी हूँ. इस बारे में मैं अम्मी-अब्बू तो क्या,
अपनी खाला से भी बात कर चुकी हूँ. मुझे भी वही सब जवाब मिले थे जो तुम्हें अपने
परिवार से मिले है. अब हमारे सामने कोई रास्ता नहीं बचा है.’’ एक आह सी लेकर शबनम ने बताया तो आसिफ चौंककर उसकी ओर देखने लगा था. फिर
कुछ सोचते हुए उसने कहा.
‘’ अब एक ही रास्ता बचता है शबनम अगर तुम साथ
दो तो सारी मुश्किलें खत्म हो सकती है.’’
‘’ कौन सा रास्ता,’’
शबनम ने हैरानी से पूछा तो आसिफ ने बताया, ‘’ शबनम हमें घर
से भागकर अपनी एक नई दुनियां बनानी होगी, इसके अलावा अब और कोई दूसरा रास्ता नहीं
बचा है और जब...’’
‘’तुम पागल तो नहीं हो गए हो आसिफ,’’ आसिफ की बात बीच में ही काटते हुए शबनम ने कहा.
‘’यह तुम कैसी बातें कर रहे हो, क्या घर से
भागना इतना आसान है.? चलो एक बार तुम्हारी बात मान भी लें, मगर यह सोचा है कि
हमारे घर से भाग जाने के बाद पीछे क्या कयामत बरपाए गी. इस बात का सारा इलज़ाम
तुम्हारे भाईजान और भाभी पर आएगा और इसके नतीजे हमारे परिवार और तुम्हारे परिवार
के बीच दुश्मनी पैदा हो जायेगी जिसकी सज़ा मेरी बहन को जीवन भर भुगतनी पड़ेगी. उसे
अपने घर में कैद कर लिया जायेगा. क्या तुम चाहते हो कि जो जुर्म मेरी बहन ने किया ही
नहीं उसकी सज़ा वह जिन्दगी भर भुगतती रहे.’’
‘’नहीं शबनम मैनें ऐसा कभी नहीं सोचा और ना
ही चाहता हूँ,पर हमारे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं.’’
‘’रास्ता हो या न हो, पर एक बात आप ध्यान से
समझ लें, पहली यह कि आज यह हमारी आखरी मुलाकात है. आजके बाद हम कभी नहीं मिल
सकेगे. दूसरे अगले सप्ताह मेरा निकाह है इस बीच अगर तुम अपने घरवालों को मना सको
तो ठीक है, नहीं तो मुझे भूल जाना और मुझे बेवफा कहकर दोषी मत ठहराना. खुदा हाफिज ‘’ इतना कहकर शबनम वहां से उठकर अपने घर की तरफ चली गई थी.
आसिफ काफी देर तक वहां बैठा
सोचता रहा था.
मोहम्मद आसिफ मूलरूप से पाकिस्तान के जिला कसूर अंतर्गत
गाँव जलोकि उस्मान वाला, निवासी खलील मोहम्मद का
पुत्र था. खलील मोहम्मद की चार संताने, दो पुत्र और दो पुत्रियाँ थी. आसिफ अपने सब
भाइयों बहनों में छोटा था. उसे छोडकर बाकी सभी बहन भाइयों की शादी हो चुकी थी. खलील
मोहम्मद के पास अपने गुजारे लायक जमीन थी,जिस में घरखर्च बड़े मज़े से चलता था. उसका
एक खुशहाल परिवार था. सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था. आसिफ की जिन्दगी में उस दिन से
हलचल शुरू हुई थी, जंवा होने के बाद जिस रोज उसने पहली बार शबनम को देखा था.
‘’ वल्लाह, क्या हुस्न है. कुर्बान जाऊ.’’
मन ही मन आसिफ ने उसकी तारीफ की थी. उन की यह मुलाकात किसी
शादी समारोह में हुई थी. शबनम की एक झलक देखते ही आसिफ अपना दिल हार बैठा था. वह
सोचने लगा था कि अगर यह खुबसुरत अप्सरा उसकी जिन्दगी में आ जाए तो वह जन्नत को भी
ठुकरा देगा. मन में उसे पाने की चाहत ने जब जन्म लिया तो उसने अपने हमउम्र मामू,
खाला आदि की लडकियों से यह जानने की कोशिश की कि वह कौन है, कहाँ से आई है, कहाँ
रहती है.? फिर जल्द ही उसे पता चल गया कि वह उसके बड़े भाई हमीद की साली है और उसका
नाम शबनम है. फिर क्या था वह शबनम को पाने के लिए बेताब हो उठा था. दूसरी ओर शबनम
भी उसकी ओर आकर्षित हो चुकी थी, यानि के आग दोनों तरफ बराबर लग चुकी थी. फिर खुदा
के फजल से जल्द ही आसिफ को शबनम के निकट रहने का मौका मिल गया था. शादी समारोह के
बाद सभी रिश्तेदार विदा हिकर अपने-अपने घरों को लौटने लगे थे पर आसिफ के बड़े भाई
हमीद को उसके ससुर के कुछ दिनों के लिए अपने यहाँ रोक लिया था. अपनी भाभी से जिद
कर आसिफ भी उनके साथ अपने भाई की ससुराल में रुक गया था. एक तरह से वह शबनम के
बिलकुल करीब पहुंच गया था. घर में गहमा गहमी का माहौल था. घर के बड़े अपनी बातों
में मशगूल रहते थे तो बच्चे और किशोर अपनी अलग मण्डली जमाये बैठे थे. ऐसे में आसिफ
और शबनम को अपने-अपने दिल की बात कहने का अवसर मिल गया था. दोनों ने एक दूसरे के
सामने प्यार का इज़हार किया,साथ जीने मारने की कसमें खाई और शादी करने का फैसला कर
लिया था. शादी का फैसला करते वक्त उस समय दोनों ने
यह बात सपने में भी नहीं सोची थी कि उन के परिवार वालों को
उनका यह फैसला मंजूर होगा भी या नहीं. वह
अपने प्यार की पीन्घे अभी पूरी तरह बढ़ा भी नहीं पाए थे कि जल्द ही शबनम के अब्बू
को उनकी प्रेम कहानी का पता चल गया. शबनम पर तो जैसे आफत का पहाड़ ही टूट पड़ा था.
इसी बात को लेकर सुसर और दामाद में भी खा सुनी हो गई थी, और हामिद अपनी ससुराल से
नाराज़ होकर अपने गाँव लौट आया था. उसने अपनी बीवी को भी सख्त ताकीद कर दी थी कि अब
वह अपने अम्मी अब्बू को
जाँच अधिकारी इंस्पेक्टर रछपाल सिंह
भूल जाये. आसिफ और शबनम के प्यार का घरौंदा बसने से पहले
ही उजड़ गया था. आसिफ और शबनम ने अपने-अपने तरीकों से इस रिश्ते को कायम रखने की
बहुत कोशिश की थी पर दोनों परिवारों की जिद के आगे उनकी एक न चली थी. शबनम के
अब्बू ने शबनम का रिश्ता कहीं और कर दिया था. इस शादी में उसने अपनी बेटी और दामाद
को भी नहीं बुलाया था. और फिर ना ना करते शादी का दिन भी आ गया था.
मोहम्मद आसिफ ने बड़ी बेबसी के साथ शबनम के घर के तरफ देखा. चारो
तरफ जगमगाती लाइट जल रही रही थी. चहुँ ओर ज्यादा चहल-पहल दिखाई दे रही थी. घर और
आप-पास के पेड़ो में लगे लाउडस्पीकर में बड़े जोर-जोर से पंजाबी गाने बज रहे थे. वहां से 100 मीटर की दूरी पर आसिफ एक जगह अँधेरे में बैठा था. वह नहीं
चाहता था कोई उसे और उसके दर्द को देखे. जिसे देखना था वह अपने खुशियों में व्यस्त
थी. लाउडस्पीकर पर बजते गाने उसके दिल में तीर के जैसे चुभ रहे थे. अंदर से एक
बेचैनी खाए जा रही थी. क्या करू, क्या न करूं, न दिल बस में
था और न मन. धडकन भी अपनी सबसे तेज रफ्तार में थी. जैसे आज ही सब खत्म कर देना हो.
एक पल को मन किया चले जाऊ उसके पास और पुछू “क्या हक़ है. तुमको
किसी को रुलाने का, किसी की जिन्दगी बर्बाद करने का.” फिर
सोचा था की कसूर शबनम का नहीं है, सारा कसूर तो खुद उसी का ही है जो वह कुछ भी न
कर सका था. शबनम ने तो उसे बार-बार ताकीद किया था, वह ही हिम्मत नहीं जूटा पाया
था.
बारात धीरे-धीरे शबनम के
घर की तरफ बढ़ रही थी. आवाज की तेजी बढती ही जा रही थी. जैसे वह सारी आवाज़े उसकी
तरफ आ रही हो. बाजे वाले के हर डंके की चोट में वह जैसे चीख-चीख कर रही हो -“मैं जा रही हूँ आसिफ. तुमको छोड कर. मेरी शादी किसी और के साथ हो रही है. अब
कोई और मेरा होने वाला है. मैं अब तुम्हारी नहीं हूँ. अब मेरे पास कोई और है.”
आसिफ धीरे-धीरे वहां से उठा और खेतों की तरफ जाने लगा. वह इन
शोरो से दूर जाना चाहता था बहुत दूर. काली अंधरी रात में वह कहा जा रहा था उसे पता
नही चल रहा था. बस चले जा रहा था. उसके मन में तो उस समय एक ही धुन सवार थी की
जितनी जल्दी हो सके वह इस बोझ बनी जिन्दगी से छुटकारा पाकर सकून हासिल कर ले. वह
चले जा रहा था, पर शहनाई की आवाज़ उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी. उसने अपने क़दमों को
और तेज कर दिया था वह जितना दूर जा रहा था
आवाज उसका उतना ही पीछा कर रही थी.
अब वह शबनम के गावं से बहार आ चूका था. आवाज पहले से और साफ़
आ रहा थी. शादी का रस्में चल रही थी. उसने अपने दोनों कान बंद किये और वही बैठ गया.
नीचे क्या है क्या नहीं क्या फर्क पड़ता है. अचानक उसने अपना मुंह आसमान की तरफ
उठाया और मैं चीख-चीख कर रोने लगा. जैसे खुदा से शिकायत कर रहा हो. अपने भीतर कितने
दिनों से दबा रखा आंसुओ के भंडार को वह आज जी भर के बाहर निकलना चाहता था. वहाँ न
कोई सुनने वाला था, और ना कोई कुछ कहने वाला. रोता ही रहा-
रोता ही रहा. जब तक सारे जहर भरे आंसू बाहर नहीं निकल गए.
हल्का मन फिर से शबनम की यादो में खोने लगा था. इस के पहले
कि वह शबनम की याद में पड़ कर कमजोर हो जाए और अपना इरादा ना बदल दे, वह अपनी जगह
से उठा और तेज़ी से एक ओर बढ़ता गया था. आसिफ रात भर चलता रहा था, उसके पैरों में
बिजली सी तेज़ी थी मानो वह जल्द से जल्द अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहता हो. सुबह के
करीब 5 बजे वह भारत-पाक सीमा के हुसैनीवाला क्षेत्र फिरोजपुर बार्डर के पास पहुंचा
था. वह एक पल के लिए वहां रुका जैसे आसपास देख कर वहां का जायज़ा करना चाहता हो. फिर
दूर से उसने जब दो देशों की सीमा को विभाजन करने वाली तारों की बाड़ को देखा तो
उसकी आँखे चमक उठी थी.
किसी सम्मोहन वश वह लगभग
दौड़ता हुआ सीमा पर लगी बाड़ की ओर लपका. सीमा के दोनों ओर दोनों देशों के
सुरक्षाकर्मी अपने हाथों में आधुनिक हथियार लिए बड़ी मुस्तैदी से खड़े थे पर अभिनेता
सलमान खान अभिनीत बहुचर्चित फिल्म बजरंगी भाईजान की तरह आसिफ सुरक्षाकर्मियों की
नज़रों के सामने से बिना भयभीत हुए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ कहता हुआ सुरक्षा तारें पार करने लगा था. सीमा के दोनों ओर के जवान इस
आजूबे को हैरत की नज़रों से देख रहे थे और सोच रहे थे कि वह कौन है और क्या करना
चाहता है. किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. क्योंकि आसिफ पाकिस्तान की ओर से
सीमा पार कर भारत की सीमा में प्रवेश कर रहा था सो भारतीय रेंजरों को ही उसे रोकना
था. सीमा पर उस समय सीमा सुरक्षा बल 118वीं बटालियन के
जवानों की तैनाती थी सो उन्होंने आसिफ को चेतावनी देते हुए कहा था.
‘’ जहां हो वहीँ रुक जाओ और अपने सीमा
क्षेत्र में लौट जाओ वर्ना गोली मार डी जाएगी.’’
सीमा सुरक्षा बल के जवानों की चेतावनी का आसिफ पर कोई असर
नहीं हुआ था. वह अपनी धुन में तारों को पार करने की कोशिश करता रहा था, और थोड़े
प्रयास के बाद वह अपने इरादों में सफल हो कर भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया.
भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही सुरक्षा बालों ने अपने हथियारों की नोक पर उसे घेर
लिया था. एस.आई राजवीर सिंह, 118 बटालियन नम्बर-840050158 ने हवलदार अरविन्द कुमार,अशोक कुमार, सिपाही जुगल किशोर और पी.एच् डेविड
के साथ मिल कर आसिफ को गिरफ्तार कर अपनी हिरासत में ले लिया और इस की सूचना अपने
उच्च अधिकारीयों को दे दी. सीमा सुरक्षा बल के आला अधिकारिओं और अन्य सुरक्षा
एजंसियों ने आसिफ से जम कर पूछताछ की थी. किसी हारे हुए जुआरी की तरह आसिफ ने अपना
दिल खोलकर जब अपने नाकाम प्यार की दास्ताँ सुनाई तो सभी दंग रह गए थे. आसिफ ने
अपने बयानों में बताया कि उसे विश्वास था कि सीमा पर उस के दुवारा की गई इस हरकत
के बदले जवान उसे गोली से उड़ा देंगे और वह जहान से मुक्ति पा जाये गा. क्योंकि वह
आत्महत्या नहीं कर सकता है. और यदि वह आत्महत्या करना चाहे भी तो रमजान के पाक दिन
होने के कारण वह यह गुनाह नहीं कर सकता. इस लिए उसने जवानों की गोली से ही अपने
प्यार पर शहीद होने के लिए यह रास्ता बड़े सोच समझ कर चुना था. अपनी नाकाम मुहब्बत
के सदमे के कारण उसकी दुनिया में जीने की इच्छा ही खत्म हो गई है.
सुरक्षा एजंसियों के पूछताछ के बाद अपने अधिकारीयों के आदेश
पर एस.आई राजबीर सिंह ने आसिफ को जिला फिरोजपुर के थाना ममदोट पुलिस के हवाले कर
दिया.
थाना प्रमुख एस.एच.ओ. रछपाल
सिंह ने आसिफ से पूछताछ करने के बाद बताया था कि नौजवान मानसिक तौर पर परेशान लग
रहा है और उससे सभी पहलुओं से पूछताछ की गई है. युवक की तलाशी लेने पर उस की जेब
से 1200 रुपए
की पाकिस्तानी करंसी और 2 नींद की गोलियां बरामद हुई थी.
पूछताछ के बाद इं रछपाल सिंह ने आसिफ के खिलाफ अपराध संख्या
60 पर दिनांक-28-5-2018 के अंतर्गत इंडियन पासपोर्ट एक्ट- 1920 की धारा-3 और
फोरएंजर एक्ट- 1946 की धारा-14 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश कर
जिला जेल भेज दिया था.
( पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रूपान्तरण )
( कथा में शबनम और हमीद नाम काल्पनिक है.)
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-BOX-
पिछले महीने पंजाब अबोहर
में प्रेमी जोड़े का शव एक खेत में मिला था. प्रेमी युगल सुनील व् पार्वती एक ही
गाँव के रहने वाले थे. जब उनको लगा कि उनका प्रेम परवान नहीं चढ़ेगा तो उन्होंने
रात को जहरीला पर्दाथ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी. यह किस्सा कोई न्य या
पहला नहीं है बल्कि रोज की ही बात है.
कई बार अपरिपक्वता के कारण
भी इन्सान आत्महत्या को ही एक बेहतर विकल्प समझने लगता है. एक दुसरे से किये वादे
फ़िल्मी जीवन से इतने प्रेरित हो जाते है कि इस जन्म में नहीं अगले जन्म में
मिलेंगे अक्सर हिंदी फिल्मों में भी दिखाया जाता है कि प्रेमी युगल मरकर किस तरह
अगले जन्म में फिर मिल जाते है तो और यह कदम उठा लेते है. गलत आदत किसी भी समाज को यदि एक बार पड़ जाए, तो बाद में छूट जाने पर भी उसका खामियाजा कभी-कभी भुगतना पड़ सकता है.
आत्महत्याएँ कहीं भी, किसी उम्र में और किसी भी तरफ क्यों न
की जाएँ उनके कारणों में असंतोष, निराश एवं कुण्ठा ही रहती
है. पर प्रश्न यह है कि जिस जिन्दगी से हम इतना प्यार करते हैं, वह अचानक हमें बोझ क्यों लगने लगती हैं? इस सवाल ने
इन दिनों सबको उलझन में डाल रखा है. जिन्दगी का सामान्य परिचय देह से होता है.
साधारण तौर पर देह में एक छोटा-सा काँटा लगने पर हम सिसक उठते हैं. देह के रख-रखाव,
बनाव-शृंगार के लिए रोज न जाने कितने सामान जुटाए जाते हैं. कितना
रुपया देह को संवारने में पानी की तरह भय जाता है. जिस देह से इतना लगाव, उससे यकायक फिर इतनी विरक्ति क्यों जो उसे रस्सी से लटका दिया जाए, विष देकर प्राणहीन कर दिया जाए. आज युवाओं को सोचना होगा प्रेम और नफरत
स्थाई नहीं होते यदि रिश्ते में आज थोडा बहुत मनमुटाव है तो कल दूर भी हो सकता केवल
सब्र और संयम की जरूरत होती है. यह जीवन अनमोल है और जीवन दुबारा नहीं मिलता. जीवन
है तो प्रेम है. और यदि जीवन और प्रेम है तो यह संसार भी आपको कितना सुन्दर दिखाई
देगा.
–हरमिंदर कपूर


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